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सुब्रमण्यम स्वामी ने नई आर्थिक नीति पर उठाये सवाल 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ सुभ्रमण्यम स्वामी अपने बेबाक बयानों के चलते कई बार भाजपा नेतृत्व को असहज कर देते हैं। जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी देश की अर्थव्यवस्था को 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दवा  रहे हैं तो दूसरी तरफ डॉ स्वामी ने एक ट्विट कर  उनके दावे को पूरी तरा खारिज कर दिया हैं।

उन्होंने सरकार  की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए ट्विट किया है कि  “5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को अलविदा कहें”  यदि नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो भारत के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है।

संसद में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था तो उन्होंने देश के सामने पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा था। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यदि हम सब मिलकर काम करेंगे तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

इसी लक्ष्य पर स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, ‘यदि कोई नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को गुडबाय कहने के लिए तैयार हो जाइये। अकेले केवल साहस या केवल ज्ञान चरमराती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकते हैं। इसके लिए दोनों की जरूरत है। आज हमारे पास दोनों में से कुछ नहीं है।’

पिछले हफ्ते सीतारमण ने केंद्रीय बजट पेश करने के दो महीने से भी कम समय बाद अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि वह केंद्र को उसके लाभांश और अधिशेष भंडार के 1.76 लाख करोड़ रुपये देगा।

2019-20 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई है। सरकार लगातार कई कदम उठा रही है जिसमें आर्थिक मंदी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर बैंकों का विलय करना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार निवेश पर ध्यान नहीं देती है तो अर्थव्यस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। पिछले कुछ महीनों से कमजोर मांग और निवेश की कमी के कारण मुख्य उद्योगों की वृद्धि में मंदी दिखाई दे रही है।

मंदी का असर सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों पर पड़ा है उसमें ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और रीयल एस्टेट शामिल है। हालांकि, मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है।

हाल ही  में डॉ स्वामी पहले भी कई बार अपने ट्विट के चलते चर्चा का विषय बने रहते है जो भाजपा के लिए सिरदर्द साबित रहे हैं।

जुलाई 2011 में, स्वामी ने  ‘HOW TO WIPE OUT ISLAMIC TERROR ‘ नाम से एक लेख लिखा था। उन्होंने अपनी सोच को दर्शाते हुए कई बातें कही थी। उन्होंने कहा था कि “सामान्य नागरिक संहिता को लागू करना, संस्कृत सीखना और वंदे मातरम गाना अनिवार्य है, और भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित करें जिसमें गैर-हिंदू केवल तभी वोट कर सकते हैं जब वे गर्व से स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज हिंदू थे। भारत हिंदुस्तान को हिंदुओं के राष्ट्र के रूप में और जिनके पूर्वज हिंदू थे, उनका नाम बदला। इसके बाद, हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने उनके द्वारा पढ़ाए जाने वाले अर्थशास्त्र पर ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम को हटाने का फैसला किया।

इससे पहले उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, ‘वह बहुत अलोकप्रिय है, वह बहुत अधिक शराब पीती है और उसका नाम खराब है।’ जिससे अपने ही पिता की हत्या कर दी थी। इस बयान के बाद उसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा बहुत मजबूत विरोध सामना करना पड़ा।

स्वामी ने राहुल गांधी की डिग्री को लेकर भी सवाल उठाए थे। स्वामी ने कहा कि राहुल की दोनों डिग्री यानी ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी वास्तविक नहीं हैं। अर्नब गोस्वामी से यह सवाल तब पूछा गया जब वह ‘स्पीक फ्रेंकली स्पीकिंग इन अर्नब ’ में राहुल का साक्षात्कार कर रहे थे। उस समय राहुल ने कहा कि वह अपनी डिग्रियां दिखा सकता है और उसने शपथ पत्र देकर कहा है कि उन्हें ये डिग्रियां मिली हैं।

मई 2013 में, स्वामी के एक ट्वीट ने ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने एक ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “आपको अस्पताल जाने की जरूरत है। गे होना मानसिक विकार है। ” स्वामी के होमोफोबिक ट्वीट ने विभिन्न ट्विटर उपयोगकर्ताओं की आलोचना को तुरंत आकर्षित किया, जिनमें से कई ने राजनेता की असंवेदनशीलता पर अपना झटका व्यक्त किया।”

स्वामी ने भारतीय अर्थवयवस्था को लेकर  प्रधानमंत्री को भी पत्र में लिखा था कि,” जो RBI गवर्नर जानबूझकर भारतीय अर्थवव्यस्था को बर्बाद कर रहें हैं, वह मानसिक रूप से पूरी तरह से भारतीय नहीं हैं।” सार्वजिनिक  क्षेत्र के बैंकों के साथ बुरा लोन दो साल में बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। डॉ राजन की इन कार्रवाइयों से मुझे विश्वास हो गया कि वह भारतीय अर्थव्यवस्था में उस व्यक्ति की तुलना में अधिक काम कर रहे हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारना चाहते हैं।

उन्होंने सरकार  की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए ट्विट करा है की ” 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को अलविदा कहें उन्होंने शनिवार को कहा कि यदि नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो भारत के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने राम मंदिर को लेकर भी चेतावनी दी थी कि यदि केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने की कोशिश करती हैं, तो वह सरकार को गिरा देंगे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘यदि जनवरी में हमारा मामला (राम मंदिर) सूचीबद्ध है, तो हम इसे दो सप्ताह में जीतेंगे, क्योंकि मेरी दो विरोधी पार्टियां केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार हैं।

 

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