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भाजपा में आहत हैं सिंधिया और उनके समर्थक

नई दिल्ली। पूर्व कंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि कांग्रेस का हाथ छोड़कर उन्होंने जिस उत्साह से भाजपा का साथ पकड़ा था, वह उत्साह अब गायब हो चुका है। हालत यह है कि सिंधिया भाजपा में अपने को भारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यहां तक कि जो विधायक या नेता कांग्रेस छोड़कर उनके साथ भाजपा में गए वे उन्हें भी अपना भविष्य बीच मझधार में नजर आ रहा है।

सिंधिया की नाराजगी को लेकर चर्चा है कि इस बीच उन्होंने अपने ट्वीटर अकाउंट से ‘भाजपा’ हटा दिया है। उन्होंने खुद को जनता का सेवक और क्रिकेट प्रेमी लिखा है। 18 सालों तक कांग्रेस के साथ रहने के बाद सिंधिया ने होली के दिन भाजपा का हाथ थामा था। उनके समर्थकों को शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल करने और उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि उनके समर्थक पूर्व विधायकों को उपचुनाव का टिकट मिलने में भी परेशानी हो रही है।

शिवराज चैहान की कैबिनेट विस्तार को लेकर कई बार संभावित तारीखें आई है। प्रदेश संगठन के साथ मुख्यमंत्री ने संभावित मंत्रियों की लिस्ट तैयार की, लेकिन आज तक कैबिनेट विस्तार नहीं हो पाया। मोदी कैबिनेट में सिंधिया को शामिल करने की भी चर्चा अब कम ही सुनाई देती है। बहरहाल, पार्टी में उनकी एंट्री को ग्वालियर-चंबल संभाग में उनके सहयोगियों ने काफी जोर-शोर से प्रचारित किया था।

भाजपा ने उपचुनाव में सिंधिया समर्थक सभी 22 विधायकों को टिकट देने का वादा किया है, लेकिन इसमें परेशानी आ रही है। अन्य सीटों पर पार्टी को अपने पुराने नेताओं की बगावत देखने को मिल रही है। हाटपिपल्या में दीपक जोशी हों या ग्वालियर पूर्व में कांग्रेस में शामिल हो चुके बालेंदु शुक्ला, पार्टी के लिए अपने नेताओं को मनाना मुश्किल हो रहा है। कुछ सीटों पर सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों की जीत को लेकर संशय की बातें भी सामने आ रही हैं। हालांकि सिंधिया या उनके समर्थकों की तरफ से अभी तक किसी तरह के असंतोष की खबरें सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई हैं, लेकिन दबी जुबान में लोग सिंधिया को नजरअंदाज कर रहे हैं। ट्वीट र प्रोफाइल से भाजपा हटाने के दावे सच हैं तो इसे सिंधिया का राजनीतिक दबाव माना जा सकता है। खासतौर से इसलिए क्योंकि कांग्रेस छोड़ने से कांग्रेस पहले उन्होंने अपनी प्रोफाइल से पार्टी का नाम हटा लिया था। हालांकि अभी सिंधिया की ओर से इस बात को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है कि उन्होंने अपने ट्वीटर प्रोफाइल पर भाजपा जोड़ा भी ािा या नहीं। या जोड़ा था तो हटा क्यों लिया?

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