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बिक रहे हैं संगठन के पद !

अब तो कथित अनुशासित भाजपा में संगठन के पद भी बेचे जाने लगे हैं। यह धुंआ उठा है बांदा जनपद से। बांदा जनपद में भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल एक ऐसे व्यक्ति को ऐन वक्त पर शामिल कर दिया गया जिसकी कभी कहीं चर्चा तक नहीं थी। संगठन के कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि जिले के महामंत्री और जिलाध्यक्ष ने लाखों की रिश्वत लेकर एक ऐसे व्यक्ति का नाम सूची में शामिल कर दिया जिसे संगठन का कोई अनुभव नहीं।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सर्वाधिक सरगर्मी का माहौल यदि किसी पार्टी में है तो वह भाजपा में नजर आ रहा है। हालांकि लोकसभा चुनाव में लगभग आठ माह का समय शेष है लेकिन भाजपा की तैयारियों को देखकर ऐसा लगता है कि वह इस बार भी अपनी जीत को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। भाजपा के युवा मोर्चा को भी इसी वजह से सक्रिय कर दिया गया है। लेकिन ‘सिर मुंड़ाते ओले पड़ने लगे’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए जिले स्तर पर इस संगठन को सक्रिय अवस्था में लाने की जिम्मेदारी जिन्हें सौंपी गयी है उन पर आरोप लगने शुरु हो गए। आरोप यह है कि संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बिठाने के लिए ऐसे युवकों से लाखों की रिश्वत ली जा रही है जिनका संगठन अथवा पार्टी के प्रति कभी कोई योगदान नहीं रहा। मामला बांदा जनपद का है। हाल ही में बीती 4 अगस्त को भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद के लिए एक सूची जारी की गयी। सूची में आमतौर पर तो हमेशा से तीन ही नाम शामिल होते रहे हैं और उन्हीं नामों के आधार पर योग्यता और अनुभव के अनुसार अध्यक्ष भी चुना जाता रहा है। यह सूची भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह के लेटरपैड पर अंकित कर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के पास भेजी गयी थी। भाजपा में अब तक की रवायत रही है कि जब तक नामों की घोषणा न हो जाए सूची को गुप्त ही रखा जाता है ताकि जिले स्तर पर पार्टी में किसी प्रकार की बगावत की आशंका न रहे। इस बार भी ऐसा ही किया गया था लेकिन यह सूची भाजपा युवा मोर्चा पद के लिए अध्यक्ष चुने जाने से पूर्व ही लीक हो गयी। यह कैसे हुआ? किस स्तर से हुआ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि इस सूची के लीक हो जाने और इसका सोशल मीडिया पर प्रचार हो जाने के बाद से बांदा जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विरोध के स्वर उठने लगे हैं। विरोध इस बात का हो रहा है कि भाजपा युवा मोर्चा में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सुरेश कान्हा नाम के एक ऐसे व्यक्ति को दी जा रही है जिसका पार्टी के प्रति कभी कोई योगदान ही नहीं रहा है। सुरेश कान्हा के बारे में कहा जाता है कि ये इससे पूर्व सपा और बसपा के कार्यकाल में ठेकेदारी करते रहे हैं, ये एकाएक कब और कैसे पार्टी में शामिल हो गए और युवा मोर्चा के लिए तैयार की गयी सूची में इनका नाम पहले स्थान पर कैसे आ गया? इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सुरेश कान्हा के नाम की तो कहीं पर चर्चा तक नहीं थी। सूची के लिए तीन नाम रामप्रसाद सोनी, अनूप सिंह और अतुल मोहन द्विवेदी के नामों का चयन किया गया था। बाकायदा इन नामों पर जिलाध्यक्ष और महामंत्री की मुहर तक लग चुकी थी। माना जा रहा था कि इन्हीं तीन नामों में से योग्यता के आधार पर किसी एक को युवा मोर्चा का दायित्व सौंपा जायेगा। प्रदेश अध्यक्ष के पास सूची जाने से पहले ही जब सूची लीक हुई तो उसमें सुरेश कान्हा का नाम पहले नम्बर पर नजर आया। इस बात की जानकारी मिलते ही भाजपा (बांदा जनपद) कार्यकर्ताओं में उबाल भी स्वाभाविक था। सूची को लेकर जमकर विरोध हुआ। जानकारी प्रदेश अध्यक्ष तक भी पहुंचायी गयी।
आरोप है कि सुरेश कान्हा का नाम शामिल करने के लिए बांदा जनपद के एक वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी ने बकायदा रिश्वत ली है। पांच लाख की रिश्वत लेकर भाजपा युवा मोर्चा (बांदा) का अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर हो रही सरगर्मी में कितनी सच्चाई है इस पर तो फिलहाल दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि जिस तरह से बिना चर्चा के ही सुरेश कान्हा जैसे अनुभवहीन व्यक्ति को जिले की कमान सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरु हुई है उससे दाल में काला अवश्य नजर आता है। इस पद पर नामों के चयन के लिए कोर कमेटी की बैठक के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाता है। इस कमेटी में संगठन के जिम्मेदारी पदाधिकारी से लेकर सांसद और विधायक तक शामिल होते हैं। कमेटी की बैठक में लिया गया निर्णय तब तक गुप्त रखा जाता है जब तक प्रदेश स्तर से किसी एक नाम पर मुहर न लग जाए लेकिन इस बार ऐसा होने से पहले ही सूची लीक हो गयी। साफ जाहिर है कि संगठन में आपसी तालमेल की कमी है या फिर बगावत की खिचड़ी अन्दर ही अन्दर पक रही है।

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