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लोकसभा चुनाव 2019 की चुनावी रैलियों में पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा से सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। हिंसा के लिए भाजपा और तृणमूल एक-दूसरे को दोषी ठहराने में जुटे हैं। इस बीच, तमाम विपक्षी दल इस मसले पर ममता बनर्जी को समर्थन देते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर हो रहे हैं।

चुनाव आयोग की तरफ से पश्चिम बंगाल में प्रचार पर एक दिन पहले रोक लगाने और राज्य के गृह सचिव को हटाने के आदेश के बाद राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी भड़क उठीं हैं । उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए  जमकर हमला बोला है ।

तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने प. बंगाल में हिंसा और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। सत्तारूढ़ तृणमूल व माकपा ने अलग-अलग रैलियां निकालीं तो भाजपा ने तृणमूल समर्थकों के कथित हमलों के विरोध में हेलमेट रैली निकाली। भाजपा ने दिल्ली में जंतर-मंतर समेत कई शहरों में धरना दिया। कोलकाता में देर शाम तृणमूल ने ममता के नेतृत्व में रैली निकाली। और विद्यासागर कॉलेज के छात्रों ने अमित शाह के खिलाफ महानगर के आर्महर्स्ट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कल  यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा नेताओं की रैलियां देश के सभी राज्यों में हो रही हैं, लेकिन हिंसा सिर्फ पश्चिम बंगाल में क्यों हो रही है? शाह ने कहा कि पंचायत चुनाव में 60 राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या, लोकसभा चुनाव में गुंडगर्दी के जरिए टीएमसी मुखिया भाजपा को डराना चाहती हैं। हालांकि वह खून और हिंसा का जितना कीचड़ फैलाएंगी, कमल उतना ही बड़ा खिलेगा।
शाह ने हिंसा की तस्वीरें दिखाते हुए कहा, चुनाव आयोग ने पार्टी की सही शिकायतों का संज्ञान नहीं लिया। ईश्वरचंद्र की मूर्ति कैंपस के अंदर थी। भाजपा कार्यकर्ता दो गेट का ताला तोड़ते हुए मूर्ति तक कैसे पहुंच सकते थे? इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। ममता को जांच की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।

कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हिंसा के 25 घंटे बाद चुनाव आयोग ने कल  रात दो बड़े फैसले लिए। आयोग ने पश्चिम बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर तय समय से 19 घंटे पहले गुरुवार रात 10 बजे से ही चुनाव प्रचार बंद करने का आदेश दिया। चुनाव प्रचार समय से पहले रोकने का देश में यह पहला मामला है।

आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 में मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह कार्रवाई की है। दूसरी ओर, आयोग ने राज्य के एडीजी सीआईडी और गृह विभाग के प्रधान सचिव को भी हटा दिया है। आखिरी चरण में 19 मई को बंगाल समेत 59 सीटों पर मतदान होना है। अन्य 50 सीटों पर प्रचार शुक्रवार शाम 5 बजे बंद होगा।

चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने आयोग पर ही हमला बाेला। उन्होंने कहा कि- ‘मैंने आरएसएस के लोगों से भरा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। राज्य में कानून-व्यवस्था की ऐसी कोई समस्या नहीं है, जो यहां अनुच्छेद 324 लागू करना पड़े।’ दूसरी ओर, कांग्रेस नेता अहमद पटेल और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि अगर हिंसा को देखते हुए प्रचार रोकने की नौबत आ गई तो आयोग गुरुवार तक इंतजार क्यों कर रहा है? क्या इसलिए, क्योंकि गुरुवार शाम को वहां प्रधानमंत्री मोदी की दो रैलियां हैं?

कोलकाता की हिंसक घटनाओं के आरोप में पुलिस ने अमित शाह और भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं। 58 लोगों को गिरफ्तार किया। इससे पहले शाह ने कहा कि- ‘टीएमसी के गुंडों ने मुझ पर तीन हमले किए। सीआरपीएफ न होती तो मेरी जान नहीं बचती। विद्यासागर की मूर्ति भी टीएमसी के गुंडों ने ही तोड़ी है। जवाब में टीएमसी के डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि- ‘भाजपा के गुंडो ने विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ी। इसके 40 वीडियो मौजूद हैं। सभी चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं। देखते हैं आयोग क्या कार्रवाई करेगा।कल रात आयोग ने आदेश दिया कि गुरुवार रात 10 बजे से ही चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा । इससे पहले शाह ने आयोग पर आरोप लगाया था कि वह मूकदर्शक बना हुआ है।

 

‘टीएमसी के गुंडों ने मुझ पर तीन हमले किए। सीआरपीएफ न होती तो मेरी जान नहीं बचती।

अमित शाह  राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा

‘मैंने आरएसएस के लोगों से भरा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। राज्य में कानून-व्यवस्था की ऐसी कोई समस्या नहीं है, जो यहां अनुच्छेद 324 लागू करना पड़े।  

ममता बनर्जी मुखयमंत्री पश्चिम बंगाल

 

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