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बंगाल में अब BJP को अपने विधायकों की चिंता, 77 को मिलेगी केंद्रीय सुरक्षा

पश्चिमी बंगाल में गत 2 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक हिंसा का दौर शुरू हो गया था। जिसमें करीब 17 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हो गए हैं। भाजपा ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए थे कि वह उनके कार्यकर्ताओं की हत्या करा रही है। यही नहीं बल्कि कई जगह भाजपा के दफ्तर तक तोड़े गए और उनमें आग लगाई गई। कई दिनों तक चला हिंसा का यह दौर पूरे देश में चर्चित रहा। यहां तक कि राष्ट्रपति शासन लगाने की बात भी हुई ।

इसी दौरान बंगाल हाई कोर्ट भी हिंसा को लेकर चिंतित हुआ। बंगाल हाई कोर्ट ने नवनियुक्त टीएमसी सरकार को हिंसा को रोकने के सख्त आदेश दिए। जबकि दूसरी तरफ पहली बार पश्चिम बंगाल का प्रतिष्ठा पूर्व चुनाव लड़ी भाजपा अपने विधायकों को लेकर चिंतित हो उठी।

हालांकि भाजपा ने बंगाल के प्रतिपक्ष नेता शुभेंदु अधिकारी को पहले ही ‘जेड’ केटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। अधिकारी के अलावा कई विधायकों को पहले से ही सुरक्षा दी हुई है। लेकिन इसी दौरान करीब 61 विधायकों को ‘ वाई ‘ केटेगरी की केंद्रीय सुरक्षा दी गई है। गृह मंत्रालय के नए आदेशों के तहत अब भाजपा के सभी 77 विधायकों को सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा।

गौरतलब है कि इस मामले में गृह मंत्रालय की ओर से अधिकारियों की एक हाई लेवल टीम पश्चिम बंगाल में भेजी गई थी। वहां चल रही हिंसा को लेकर इस टीम और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट देखने के बाद गृह मंत्रालय ने विधायकों को सुरक्षा देने का फैसला किया है।

बंगाल में हिंसा मामले में भाजपा का आरोप था कि चुनाव में अप्रत्याशित जीत के बाद टीएमसी के समर्थकों ने जगह-जगह पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले शुरू कर दिए हैं।

दूसरी ओर टीएमसी ने इसे भाजपा की अंतर्कलह का नतीजा बताया है। ममता का दावा है कि ख़ासकर बंगाल के कूचबिहार समेत कई इलाक़ों में भाजपा हिंसा फैला रही है। उसके कार्यकर्ता चुनाव हारने की हताशा में टीएमसी के लोगों पर हमले कर रहे थे।

इस मुद्दे पर विवादास्पद ट्वीट की वजह से अभिनेत्री कंगना रनौत का ट्विटर अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया गया । सीपीएम ने भी इस हिंसा के ख़िलाफ आवाज़ उठाई ।

जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष और अबकी चुनाव लड़ने वाली आइशी घोष ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि टीएमसी को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उसे लोगों के हित में काम करने के लिए जनादेश मिला है, लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए नहीं।

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