Country Uttarakhand

पत्रकार बनाम सरकार

पत्रकार और राजनेता की लड़ाई का अंजाम क्या होगा, इसको लेकर अभी इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल लड़ाई में पत्रकार उमेश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर भारी पड़ रहे हैं। उमेश एक-एक कर त्रिवेंद्र के खिलाफ वीडियो जारी कर हलचल मचाए हुए हैं

 

याद कीजिए वर्ष 2016 में भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस काॅन्फ्रेंस को। इस प्रेस काॅन्फ्रेंस में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने एक स्टिंग पत्रकारों को दिखाया। स्टिंग उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का था। जिसमें वह एक पत्रकार से बात करते दिखाए गए थे। पत्रकार से बात करते समय हरीश रावत ने तब अपनी सरकार को बचाने के लिए कुछ विधायकों को पैसे देने की बात कही थी। इस स्टिंग को करने वाला पत्रकार कोई और नहीं, बल्कि उमेश कुमार शर्मा थे। चैंकाने वाली बात यह रही कि पत्रकार उमेश कुमार शर्मा का खुद का ‘एक समाचार प्लस’ नाम से चैनल है। उमेश कुमार के उस चैनल पर आए दिन एक्सक्लूसिव और ब्रेकिंग न्यूज दिखाकर सबसे पहले खबर दिखाने के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का वह एक्सक्लूसिव स्टिंग उनके चैनल समाचार प्लस पर न दिखाकर भाजपा के हेडक्र्वाटर दिल्ली से पत्रकार वार्ता में दिखाया गया। इससे यह समझा गया कि उमेश कुमार ने यह स्टिंग केवल और केवल भाजपा के इशारे पर मुख्यमंत्री हरीश रावत को टारगेट करते हुए किया और बाद में अपने चैनल पर दिखाने के बजाय भाजपा को ही हैंडओवर कर दिया। जिसको भाजपा ने एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उस स्टिंग को ही आधार बनाकर भाजपा हरीश रावत पर हमलावर हो गई थी। आज भी भाजपा इसी स्टिंग का डर दिखाकर हरीश रावत को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है। फिलहाल हरीश रावत उसी स्टिंग के चलते सीबीआई के निशाने पर हैं। सीबीआई का फंदा रावत पर दिनोंदिन कसता ही जा रहा है। मामला फिलहाल नैनीताल हाईकोर्ट में चल रहा है।

इस तरह ‘समाचार प्लस’ चैनल के सीईओ उमेश कुमार एक समय भाजपा की आंखों के तारे रहे हैं। 2016 में उत्तराखण्ड में आए सियासी तूफान में उमेश के स्टिंग ने भी अपना अहम रोल निभाया। सूबे में भाजपा सत्ता पर काबिज हुई तो भी उनका जलवा बरकरार रहा। दल-बदल के बाद मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्री बने दो काबीना मंत्रियों से उमेश के गहरे ताल्लुकात बने रहे। अब उसी भाजपा की सरकार ने उमेश कुमार पर शिकंजा कसा है, तो इसके सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान भी कभी एक ऐसा समय था जब उस वक्त के मुख्यमंत्री हरीश रावत से उमेश की नजदीकियां रहीं थी। लेकिन 2016 में हरीश सरकार का तख्ता पलट करने की भाजपाई कोशिश के वक्त उमेश का नया चेहरा ही सामने आया था। उसी सियासी संग्राम के दौरान तत्कालीन सीएम हरीश रावत, तत्कालीन मंत्री डाॅ हरक सिंह रावत और एक आईएएस अफसर मोहम्मद शाहिद के स्टिंग सामने आए तो पता चला कि सभी में उमेश का ही हाथ था।

माना जाता है कि इसी वजह से उस वक्त उमेश की नजदीकियां भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक हो गई थी। परिस्थितियां बदली और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद सूबे की सत्ता पर भाजपा काबिज हुई। उस वक्त भी उमेश की भाजपा से नजदीकियां बरकरार रहीं थी। भाजपा के तब नए-नए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की उमेश कुमार शर्मा के साथ खूब गलबहियां रही। यहां तक कि नई सरकार का गठन होने के चंद रोज बाद ही उमेश ने अपने बेटे का जन्मदिन एक होटल में मनाया तो उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत पूरी सरकार ने उस कार्यक्रम में शिरकत की थी और उमेश कुमार के साथ फोटो खिंचवाकर अपनी खुशियां प्रकट की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और पूर्व सीएम विजय बहुगुणा समेत भाजपा के अन्य दिग्गजों ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। उमेश की भाजपा में गहरी पैठ का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ समय बाद केंद्र सरकार ने कांग्रेस से दल-बदल कर भाजपा में आए नेताओं को दिया गया सीआईएसएफ का सुरक्षा कवच वापस ले लिया, लेकिन उमेश की सुरक्षा अब तक बरकरार रही थी। इसे भी उमेश की भाजपा नेताओं से नजदीकियों से जोड़कर ही देखा गया था।

मौजूदा सरकार के दो काबीना मंत्रियों डाॅ हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल की आज भी उमेश से नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। अहम बात यह भी है कि ये दोनों कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में आए हैं। यही नहीं, बल्कि कभी यही उमेश कुमार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के बहुत करीबी हुआ करते थे। हालांकि एक बार पूर्व में उमेश कुमार शर्मा उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के निशाने पर रह चुके हैं। तब निशंक ने उमेश कुमार शर्मा पर एक के बाद एक दर्जनों मामले दर्ज कराए थे। तब कोश्यारी का उमेश को अंदरखाने समर्थन रहा था।

बदले हालात में अब एक बार फिर उमेश कुमार शर्मा उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार पर हमलावर हैं। उमेश कुमार हर रोज त्रिवेंद्र सरकार पर छाती ठोक-ठोक कर नए-नए खुलासे कर रहे हैं। याद रहे कि भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने उमेश पर पूर्व में कानूनी शिकंजा कस दिया था। इसके चलते उमेश कुमार शर्मा को जेल की हवा तक खानी पड़ी थी। इसकी वजह सत्ता के शीर्ष स्तर पर स्टिंग करने को बताया गया था। हालांकि सरकार ने जिस तरह से बेहद गोपनीय अंदाज में उमेश कुमार को उनके गाजियाबाद आवास से गिरफ्तार किया था उससे साफ लगता था कि अगर उमेश के भाजपाई मित्रों को इसकी जरा सी भी भनक लग गई होती तो शायद उमेश को बचने का मौका मिल गया होता। उमेश से भाजपा की नजदीकियों के अचानक इतनी दूरी में तब्दील होने के सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। सूबे में नई सरकार का गठन होने के बाद उमेश की भाजपा नेताओं और मंत्रियों से तो खासी करीबी रही, लेकिन जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के दरबार में उमेश की गहरी पैठ नहीं बन सकी। बताया गया कि इस मामले में उमेश को भाजपा के अन्य नेताओं से भी कोई मदद नहीं मिल सकी थी। जिसके बाद उमेश कुमार शर्मा ने अपनी टीम के सदस्यों से त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के स्टिंग कर लिए थे। हालांकि बताया यह जा रहा है कि यह स्टिंग उस दौरान किए गए थे जब उमेश कुमार और त्रिवेंद्र सिंह रावत के मधुर संबंध थे। पहले मधुर संबंध बनाना और फिर बाद में उन्हीं लोगों के स्टिंग करने में महारथ हासिल किए उमेश कुमार शर्मा फिलहाल त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के खिलाफ फुल फाॅर्म में है।

कुछ दिन पहले उन्होंने जिस तरह से मुख्यमंत्री के शिकायत प्रकोष्ठ में वहां की महिला रिसेप्शनिष्ट से एक घोटाले से संबंधित मामला दर्ज कराने की बात की है और उसको सोशल मीडिया पर वायरल किया है उससे त्रिवेंद्र सिंह की खूब जग हंसाई हो रही है। उमेश कुमार ने त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ पूर्व में जो घोटाले और स्टिंग उजागर किए हैं उनकी रिपोर्ट दर्ज कराने के संबंध में उमेश कुमार ने रिसेप्शनिष्ट से सरकार के पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही तो रिसेप्शनिष्ट ने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऊपर से आॅर्डर है कि किसी भी अधिकारी और मुख्यमंत्री के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया जाएगा। इससे त्रिवेंद्र सिंह रावत के ‘जीरो टालरेंस’ अभियान पर सवालिया निशान लग रहे हंै।

इतना ही नहीं 17 सितंबर को उमेश कुमार ने एक नया वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पोल खोलकर रख दी है। इस वीडियो में उमेश कुमार शर्मा ने सबूतों और साक्ष्यों के आधार पर बड़े घूसकांड का पर्दाफाश किया है। इस घूसकांड में भाजपा नेता अम्रतेस सिंह चैहान को झारखंड गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने की बातें हुई थी। जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत पर आरोप है कि उन्होंने अपनी साली और साढू भाई के अलावा कई लोगों के बैंक एकाउंट में भारी रकम जमा कराई। यह रकम नोटबंदी के बाद झारखंड गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनने की एवज में कई किस्तों में दी गई थी। जिसमें चेक नंबर और बैंक रसीद के साथ ही आॅडियो क्लिपिंग भी सुनाई गई। उमेश कुमार ने इसके साथ ही त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुनौती दी है कि वह मुझे जेल पहंुचाकर दिखाए।

फिलहाल उत्तराखण्ड में एक हरीश रावत को छोड़कर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के लिए विपक्षी पार्टी कांग्रेस मित्र विपक्ष की भूमिका में है, वहीं उमेश कुमार शर्मा सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हंै। त्रिवेंद्र सिंह रावत को फिलहाल विपक्षी पार्टी से नहीं, बल्कि एक पत्रकार से चुनौती मिल रही है। बहरहाल उत्तराखण्ड में पत्रकार वर्सेज सरकार की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर जा चुकी है। जिसका अंजाम क्या होगा यह तो आने वाला कल ही बताएगा, लेकिन फिलहाल समाचार प्लस के सीईओ और उमेश कुमार सिंह भाजपा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर भारी पड़ते नजर आ रहे हंै।

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