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जारी है चमकी बुखार का कहर

 बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है।सरकार के वादे और दावे के बाद भी मौतों का सिलसिला जारी है।  इस बुखार से पिछले पंद्रह दिनों से अब तक 100 से ज्यादा  बच्चों  की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने एसकेएमसीएच का दौरा किया था और ये भरोसा दिलाया कि इस बीमारी से निपटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।ये बात अलग है कि अस्पताल में कई तरह की खामियों की भी खबर आई। मसलन एक डॉक्टर ने कहा  कि अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और दवाइयों की कमी है। लेकिन अस्पताल के सीएमएस ने इस तरह की खामियों से इनकार किया है ।

डॉ हर्षवर्धन जब अस्पताल का दौरा कर बाहर निकल रहे थे तो उन्हें काले झंडे भी दिखाए गए। जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने सरकार पर हमला करते हुए  कहा कि नीतीश  सरकार स्वास्थ्य सुविधा के बड़े- बड़े वादे और दावे करती हैं। लेकिन हकीकत ये है कि मुजफ्फरपुर में पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं। ये बात अलग  है कि नतीजा ढाक के तीन पात ही  हैं।

बिहार सरकार ने चमकी बुखार में मरने वाले बच्चों के परिजनों को चार -चार लाख रुपए की मुआवजे की घोषणा की है। सरकार का ये भी कहना है कि इस बुखार से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाये गए हैं।  सरकार के वादे और दावे के बाद भी मौतों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। जब केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन जब अस्पताल के दौरे पर थे ठीक उसी वक्त आईसीयू में उनके सामने एक बच्चे की मौत हुई थी।

केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद बीते पांच वर्षों में एसकेएमसीएच में सौ बेड का विशेष एईएस वार्ड नहीं बन सका है। इस वार्ड के निर्माण के लिए सरकार ने राशि भी उपलब्ध करा दी है। फिलहाल, ईएनटी वार्ड के ऊपरी मंजिल पर सौ बेड का पीआईसीयू वार्ड बनाना था। इस विशेष वार्ड के नहीं बनने से चार जगहों पर चमकी-बुखार से पीड़ित बच्चों को रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। इससे बच्चों के इलाज में डॉक्टरों व नर्स आदि को परेशानी हो रही है।

फिलहाल, एसकेएमसीएच में दूसरी व तीसरी मंजिल पर दो-दो पीआईसीयू बनाया गया है। चार जगहों पर बीमार बच्चों के होने पर इलाज के लिए डॉक्टरों को भी भाग-दौड़ करनी पड़ रही है। पीड़ितों की संख्या और बढ़ने पर उनको आईसीयू वार्ड में भी रखना पड़ सकता है।

इधर, एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए पांच साल पूर्व सौ बेड के पीआईसीयू बनाने का निर्देश केंद्र सरकार ने दिया था। इसके लिए जगह का भी चयन कर लिया गया था। बीएमईसीआई को वार्ड का निर्माण करना था। लेकिन, किसी कारण से अब तक वार्ड तैयार नहीं हो सकता है। जगह की कमी के कारण फिलहाल चार जगहों पर पीआईसीयू बनाया गया है। इससे मरीजों के इलाज में काफी कठिनाई हो रही है। विशेष वार्ड के बनने से एक साथ बच्चों को रखने व उनके इलाज में सुविधा होती।

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