लोकसभा चुनाव 2019 को अभी दस महीने शेष हैं। लेकिन पूरे देश में चुनावी माहौल है। यह माहौल दिन-दिन परवान चढ़ता जा रहा है। तमाम राजनीतिक दलों ने चुनावी बिसात पर अपनी चालें चलनी शुरू कर दी है। एक साथ बहुत सी चीजें चल रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। आगामी मई में लोकसभा चुनाव तय है। इसी बीच यह मुद्दा भी उछला है कि देश में लोकसभा- विधानसभा चुनाव एक साथ हों।
मुश्किल यह है कि राजनीतिक दल लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर बटे नजर आ रहे हैं। चार राजनीतिक दल जहां इस मुद्दे के समर्थन में हैं वहीं नौ इसके खिलाफ हैं। जहां तक सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का प्रश्न है, दोनों ही दल इस विषय पर विधि आयोग की ओर से आयोजित परामर्श प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन नेशनल ‘वन इलेक्शन’ का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद विधि आयोग और चुनाव आयोग ने इस बाबत पहल की। अभी यह मामला अधर में है। लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तर्क रखने शुरू कर दिए हैं। अधिकतर विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह संवैधानिक और अव्यवहारिक है। तृणमूल कांग्रेस, माकपा, ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। भाजपा के करीब माने जाने वाली अन्ना द्रमुक और गोवा फरवार्ड पार्टी भी इस प्रस्ताव के पक्ष नहीं है। अन्नाद्रमुक ने कहा है, ‘वह 2019 में एक साथ चुनाव कराने का विरोध करेंगे। लेकिन अगर इस मुद्दे पर राष्ट्रव्यापी सहमति बनी तो वह 2024 में एक साथ चुनाव करवाने पर विचार कर सकता है।’ तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी की दलील हैं- संविधान के बुनियादी खांचे की बदला नहीं जा सकता। हम एक साथ चुनाव कराने के विचार के खिलाफ हैं। क्योंकि यह संविधान खिलाफ है। यह अव्यवहारिक असंभव और संविधान के के प्रतिकूल है।’ माकपा के सचिव अतुल कुमार अंजान का भी मानना है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साथ चुनाव कराने की परिकल्पना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संविधान के किसी तरह की परिवर्तन के लिए संसद में चर्चा होनी चाहिए।’
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने एक साथ चुनाव! संवैधानिक और कानूनी परिप्रेक्ष नामक एक मसौदा तैयार किया है इसे अंतिम रूप देने और सरकार के पास भेजने से पहले इस पर राजनीतिक दलां,  संविधान विशेषज्ञ, शिक्षाविद, नौकरशाहों आगे से सुझाव मांगे हैं। जहां तक चुनाव आयोग की बात है तो वह एक साथ चुनाव कराने में खुद को सक्षम पाता है। इस प्रकरण में सबसे बड़ा मुद्दा जो है वह संविधान में बदलाव करने का है और इसका फैसला तो संसद ही कर सकती है।
ऐसा नहीं है कि एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का सिर्फ विरोध ही हो रहा है। देश के कई प्रमुख राजनीतिक दल इसके पक्ष में भी हैं। जनता दल (यू) के नीतीश कुमार इसके पक्ष में हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने विधि आयोग को लिखित जवाब में इस बात को रेखांकित किया है कि उनकी पार्टी देश में एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव कराए जाने का समर्थन करती है। पार्टी का मत है, यह विश्लेषण गलत है कि अगर एक साथ चुनाव हुए तो स्थानीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दे हावी हो जाएगी। सपा ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। लेकिन उसने साफ किया कि पहला एक साथ चुनाव 2019 में होने चाहिए। जब 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो खास बात यह कि सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्ष पार्टी कांग्रेस में इस विषय पर विधि आयोग की और से आयोजित परामर्श प्रक्रिया में शामिल नहीं हुई। इस बाबत कांग्रेस का कहना है कि वह शीघ्र ही आयोग के समक्ष अपना विचार रखेगी। पार्टी नेता आरपी एन सिंह के मुताबिक हम सभी विपक्षी पार्टियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। हम इस पर संयुक्त निर्णय लेंगे। हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव की तैयारियों और गहमा-गहमी के बीच एक साथ चुनाव के मुद्दे को उछालना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी कुछ जुनूनी, थोड़ा सनकी भी मालूम होते हैं। जिसकी बानगी हम उनके चार साल के शासन के दौरान नोटबंदी के मामले में देख चुके है। ऐसे उन्होंने कई बदलाव किये हैं। वह बदलाव के पक्ष में अक्सर ही दिखाई देते हैं। लेकिन कोई भी राजनीतिक पंडित इस पेंच को नहीं समझ पा रहा है कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले एक साथ चुनाव के मुद्दे को उछालने का राजनीतिक लाभ भाजपा को क्या और कैसे हासिल हो सकता है।
आजादी के बाद कुछ मौका पर लोकसभा- विधानसभा चुनाव  एक साथ हुए हैं मगर वह राष्ट्रीय स्तर पर नहीं। कुछ राज्यों में ही हुए और वह परिस्थितिजन्य थे। इतने बड़े देश में एक साथ चुनाव का मामला नामुमकिन तो कतई नहीं मगर मुश्किल जरूर है। बेशक इससे देश का धन बचेगा। मगर यह बहुत व्यवहारिक नहीं दिखता यह लाव समय तक चलने वाला भी नहीं लगता। छोटे राज्यों में अक्सर ही सरकारें गिरती रहती हैं। वहां यह थ्योरी फैल करने की पूरी मुंजाइश है।

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