fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 41 02-04-2017
 
rktk [kcj  
 
आवरण कथा
 
राहत पर डांका

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा आपदा पीड़ितों को राहत मिलने के कितने ही दावे क्यों न कर लें, पर हकीकत इसके एकदम उलट है। पुनर्निर्माण तो अभी एक सपना है। पीड़ितों के हिस्से की राहत सामग्री भी बीच रास्ते में ही लूट ली जा रही है। इतना ही नहीं, अधिकारियों की मिलीभगत से कांग्रेसी नेता ऐसे लोगों के नाम भी पीड़ितों की सूची में शामिल करवा रहे हैं जिनका आपदा से कोई वास्ता नहीं है। जनता का आरोप है कि फिफ्टी-फिफ्टी की शर्त पर मुआवजे के भुगतान की बात की जा रही है

 

उत्तराखण्ड में आपदा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए नमक छिड़कने का काम हो रहा है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जिस राहत राशि के बूते अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं, वह पीड़ितों के बजाए गलत हाथों में पहुंच रही है। जो लोग आपदा पीड़ित नहीं हैं उन्हें पीड़ित बनाकर राहत राशि के चेक सौंपे जा रहे हैं। इस गड़बड़ झाले के पीछे कोई और नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही नेता हैं। हद तो यह है कि राजधानी दिल्ली से कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथों भेजी गई राहत सामग्री भी कांग्रेस नेताओं ने ऐसी जगहों पर बांटी जहां आपदा का नामोनिशान भी नहीं है। माना जाता है कि ऐसा उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए किया। नैनीताल की विधायक सरिता आर्य की ओर से पहुंचाई गई राहत सामग्री तक को नहीं बख्शा गया। वे अपने साथ १० टैंपू राहत सामग्री लाई थी। जिस में से ४ टैंपू सामग्री उन्होंने खुद आपदा पीड़ितों के शिविरों में बांट दी थी। लेकिन रोड ब्लॉक होने के चलते जो छह टैंपू सामग्री बाद में बांटने के लिए वहीं छोड़ी, वह रहस्मय तरीके से गायब हो गई। राहत राशि में हुए घोटाले के विरोध में धारचूला स्थित तहसील मुख्यालय पर सोबला के पीड़ितों ने प्रदर्शन किया।

 

पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्रों में आपदा राहत की यह बंदरबांट कांग्रेस नेताओं की कथनी और करनी के अंतर की पोल खोलती है। प्रचारित तो यह किया जा रहा है कि कांग्रेस के ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक के सभी नेता आपदा पीड़ितों के लिए चिंतित हैं। राहत राशि जुटाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। लेकिन हकीकत में यह सब मिथ्या साबित हो रहा है। इसे धारचूला के सोबला और न्यू सोबला में बखूबी देखा जा सकता है। यहां आपदा राशि हड़पने के लिए उन लोगों को पीड़ित बनाने का खेल चल रहा है जो वास्तव में पीड़ित हैं ही नहीं। काली नदी पार न्यू सोबला के ३६ परिवार निवास करते थे। लेकिन सफेदपोशों और नौकरशाहों की मिलीभगत से इन ३६ परिवारों की संख्या बढ़ाकर ८० कर दी गई। इसी तरह मेन मार्केट सोबला में ९२ परिवार रहते हैं। लेकिन राहत राशि हड़पने  के चक्कर में चार कदम आगे जाते हुए इन ९२ परिवारों की संख्या २०० कर दी गई। इस तरह दोनों जगहों के कुल १२८ परिवारों की संख्या बढ़ाकर २८० हो गई। बताया जाता है कि यह सब कांग्रेस के एक जिला पंचायत सदस्य के इशारे पर किया गया। यह जिला पंचायत सदस्य कांग्रेस के ही एक विधायक का खासमखास है। 

 

सोबला निवासी प्रेम सिंह के अनुसार आपदा पीड़ितों के लिए गृह अनुदान राशि २ लाख ८ हजार रखी गई है। यह राशि उसी व्यक्ति को दी जा सकती है जिसे प्रशासन पूरी तरह सत्यापित कर चिह्नित कर ले। इस प्रक्रिया में सबसे पहले पटवारी स्थल पर जाता है। वह कानूनगो को रिपोर्ट देता है। कानूनगो भी स्थलीय निरीक्षण करने के बाद उपजिलाधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपते हैं। उपजिलाधिकारी इस पर संस्तुति करने के बाद आपदा पीड़ितों की सूची जिलाधिकारी को भेज देते हैं। इसके बाद जिलाधिकारी आरईएस (ग्रामीण अभियंत्रण सेवा) के जूनियर इंजीनियर (जेई) से तकनीकी रिपोर्ट लेते हैं। उसके आधार पर ही आपदा पीड़ितों को गृह अनुदान दिया जाता है। लेकिन सोबला और न्यू सोबला के मामले में ऐसा नहीं हुआ। सोबला निवासी दीवान सिंह बताते हैं कि प्रशासन ने विधायक के इशारे पर जिला पंचायत सदस्य के ही आदेशों को अंतिम जांच मान लिया। पटवारी को एक कमरे में बिठाकर उसे करीब ३०० लोगों के नाम नोट करा दिए गए। करीब डेढ़ सौ लोगों को फर्जी तरीके से आपदा राहत राशि पाने का हकदार बना दिया गया। 

 

जीआईसी (राजकीय इंटर कॉलेज) धारचूला में रह रहे सोबला के आपदा पीड़ित गोपाल सिंह, शंकर राम, राजेन्द्र राम, मान सिंह आदि ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य ने अपनी भतीजी विमला देवी पत्नी देवेन्द्र सिंह निवासी जयकोट के साथ ही अपने अन्य रिश्तेदारों के नाम भी फर्जी तरीके से आपदा पीड़ितों की सूची में जुड़वा दिए। नारायण देवी पत्नी मंगल सिंह निवासी कुरीला, मीरा देवी पत्नी भगवान सिंह निवासी झिमरी गांव, देव सिंह पुत्र, दलीप सिंह ग्राम भेती, गोपाल सिंह पुत्र दान सिंह निवासी झिमरी गांव, लाल सिंह पुत्र प्रेम सिंह निवासी दर सहित कई अन्य नाम ऐसे हैं जिन्हें फर्जी तरीके से आपदा पीड़िता बना दिया गया है। ऐसे करीब ३० लोगों की सूची जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को दी गई है। सोबला और न्यू सोबला के आपदा पीड़ित के नाम पर सैकड़ों अन्य लोगों को फर्जी ढंग से पीड़ितों की सूची में शामिल करा दिया गया।

 

धारचूला क्षेत्र में अकेले सोबला और न्यू सोबला ही ऐसे गांव या कस्बे नहीं हैं जहां वास्तविक आपदा पीड़ितों की जगह फर्जी नाम सूची में डाले गए हैं, बल्कि गोठी और नई बस्ती में भी दर्जनों लोगों को फर्जी तरीके से आपदा पीड़ितों की सूची में शामिल कर दिया गया है। धारचूला निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र कुटियाल कहते हैं कि फर्जी लोगों के नाम सूची में दर्ज करने के पीछे प्रशासनिक लोगों के साथ ही कांग्रेस नेताओं की भी मिलीभगत है। इसमें जमकर रिश्वतखोरी चल रही है। फर्जी नामों को सूची में शामिल करने से पहले बाकायदा मुआवजे की एक तयशुदा रकम लिए जाने की शर्त रखी जा रही है। जिसमें फिफ्टी-फिफ्टी हो रहा है। प्रशासन के कई लोग इस गोरखधंधे में शामिल हैं। जिनकी जांच कराई जानी चाहिए।  कुटियाल दावा करते हैं कि अगर जांच निष्पक्ष हुई तो इसमें कई अफसर नपेंगे।

 

धारचूला क्षेत्र के आपदा प्रभावितों की सूची में द्घाटी बगड़ नामक गांव का कहीं भी उल्लेख नहीं है। लेकिन इस गांव में भी लोगों को राहत सामग्री से भरा ट्रक बांट दिया गया। बताया जाता है कि इस कार्य को वहां के कांग्रेसी नेता एवं पूर्व ग्राम प्रधान दान सिंह ग्वाल ने अंजाम दिया है। यह राहत सामग्री बलुवाकोट गांव के लिए आई थी। लेकिन द्घाटी बगड़ के पूर्व ग्राम प्रधान ने इसे जबरन अपने गांव में बांट दिया। बलुवाकोट के ग्राम प्रधान हरीराम आर्य के अनुसार, 'राहत सामग्री से भरा ट्रक दिल्ली से कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय से भिजवाया गया था। जिसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह ट्रक बड़ी मुश्किल से बलुवाकोट गांव तक पहुंचा था। पिथौरागढ़ जिला कांग्रेस ने इसे बाकायदा मेरे नाम से भेजा था। लेकिन मैं उस समय गांव में नहीं था। इसका फायदा उठाकर द्घाटी बगड़ के प्रधान राहत सामग्री से भरे ट्रक को अपने यहां ले गए। मुझे इसका पता तब चला जब पिथौरागढ़ जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र लुंठी ने मुझसे फोन पर पूछा कि राहत सामग्री से भरा ट्रक मिल गया या नहीं? इस पर मैंने मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने बताया कि ट्रक प्रधान के सुपुर्द किया गया था। लेकिन वह प्रधान बलुवाकोट का नहीं तो फिर कौन है जो ट्रक ले उड़ा? इसके बाद पता चला कि ट्रक ले जाने वाला प्रधान बलुवाकोट का नहीं, बल्कि द्घाटी बगड़ का है। इसी का नतीजा है कि आज भी बलुवाकोट के ४५ लोगों को राशन-पानी मुहैया नहीं हो पाया है। शासन-प्रशासन के रजिस्टर के अनुसार दिल्ली से राहत सामग्री लेकर आया ट्रक बलुवाकोट के आपदा पीड़ितों को बांटा गया। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।'

 

धारचूला के आपदा पीड़ितों के बीच पहुंचने वाले कुमाऊं मंडल के कांग्रेस विधायकों में पहला नाम नैनीताल की विधायक सरिता आर्य का है। आर्य २० जून को १० टैंपू राहत सामग्री के साथ आपदा पीड़ितों के बीच पहुंची थीं। तब नई बस्ती तक ही वाहन इत्यादि जा सकते थे। इसलिए विधायक आर्य धारचूला से करीब १८ किलोमीटर पहले ही नई बस्ती तक पहुंची। वहां उन्होंने नई बस्ती के आपदा पीड़ितों के बीच ६ टैंपू राहत सामग्री बंटवाई। जबकि बाकी बची ४ टैम्पो राहत सामग्री को कुछ लोगों के इस आश्वासन पर वहां छोड़ दी गई कि वे सड़क खुलते ही इसे धारचूला पहुंचा देंगे। लेकिन करीब एक पखवाड़े बाद जब सड़क खुली तो जहां राहत सामग्री रखवाई गई थी, वहां से गायब थी। कहा गया कि राहत सामग्री धारचूला पहुंचा दी गई है। लेकिन असलियत यह है कि सामग्री की बंदरवाट हो गई। बकौल नगतड़ निवासी केआर भारती 'कुछ नेताओं ने यह कहकर नई बस्ती से सरिता आर्य की दी हुई राहत सामग्री उठवाई थी कि उसे धारचूला भिजवा रहे हैं। लेकिन धारचूला प्रशासन के पास जाने से पहले ही राहत सामग्री गलत हाथों में चली गई। आज भी इस राहत सामग्री को बाजारों में परचून की दुकानों पर बिकते हुए देखा जा सकता है। बलुवाकोट में ऐसे ही एक दुकानदार की आम चर्चा है।'

 

बागेश्वर में तो एक सहायक खंड विकास अधिकारी राहत सामग्री को अपनी निजी गाड़ी में भरकर ले गये। बागेश्वर के इस अधिकारी का नाम मोहन मेहरा है। इससे संबंधित समाचार 'दि संडे पोस्ट' ने २५ अगस्त को प्रकाशित समाचार 'कुमाऊं में कहर' शीर्षक से प्रकाशित किया था भराड़ी निवासी चामु सिंह देवली ने इस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कपकोट पुलिस ने अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। कपकोट के थानाध्यक्ष के एस रावत के अनुसार मेहरा को जांच में आपदा राहत सामग्री में अनियमितता बरतने का दोषी माना गया है। 

 

 

बात अपनी-अपनी

धारचूला में राहत के नाम पर कोई द्घोटाला नहीं हुआ है। मेरे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो उसकी जांच होगी। 

हरीश धामी, विधायक धारचूला

हमें सोबला और न्यू सोबला के आपदा पीड़ितों की तरफ से एक शिकायती पत्र मिला है। जिसमें कहा गया है कि आपदा राहत राशि ऐसे लोगों को दे दी गई जो उसके हकदार नहीं थे। हम इस मामले की जांच करा रहे हैं।

प्रमोद कुमार, उपजिलाधिकारी धारचूला

 

आकाश नागर साथ में सुरेन्द्र सिंह बिष्ट

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 61%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad
नई दिल्ली। बवाना से आम आदमी पार्टी (आप) के  विधायक वेद प्रकाश भाजपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मैंने
foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1572632
ckj