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vad 7 05-08-2017
 
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जनपद
 
खतरे में छात्र

कालाढूंगी नैनीताल। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद भी प्रदेश में शिक्षा खस्ताहाल है। स्कूल-कॉलेजों के भवनों हालत बदतर हो चली है जिस पर न तो सरकारी के नुमाइंदों का ध्यान है और न ही सरकार का कालाढूंगी तथा कोटाबाग के खस्ताहाल हो चुके राजकीय इंटर कॉलेज भवनों में अपनी जान जोखिम में डाल कर हजारों छात्र-छात्राएं तालीम रहे हैं। आपदाएं और तेज बारिश में स्कूल कॉलेजों की छतें गिर जाने से नौनिहालों की मौत से भी सरकार सबक नहीं ले रही है। जनपद नैनीताल के विधानसभा कालाढूंगी और कोटाबाग के इंटर कॉलेजों के भवन का हाल भी यही है। जल्द ही इन भवनों की मरम्मत नहीं कराई गई तो यहां कभी भी कोई घटना हो सकती है। इन दोनों कॉलेजों के खस्ताहाल भवनों से बरसात के दिनों में लगभग १२०० छात्र-छात्राएं और दर्जनों कॉलेज स्टाफ की जान पर खतरा मंडरा रहा है। राजकीय इंटर कॉलेजों शिक्षा विभाग शासन को कई बार रिपोर्ट भेज कर भवनों की मरम्मत की मांग की है। कई बार बरसात के समय यहां के जीर्ण-शीर्ण हो चुके कॉलेजों को पत्र भेज कर ऐसे भवनों में बच्चों को न पढ़ाए जाने के आदेश दे दिए जाते हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौजूद इन बच्चों को कहां पढ़ाया जाए इसका उल्लेख नहीं किया जाता। ज्ञात हो कि कालाढूंगी में राजकीय उच्चतम माध्यमिक विद्यालय के रूप में २७ जनवरी १९७९ के भवन में हुआ तबका शिलान्यास तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री सोबन सिंह जीना ने किया था। इस विद्यालय का उच्चीकरण राजकीय इंटर कॉलेज के रूप में २ अक्टूबर १९८० में हुआ तब इसका उद्द्घाटन तत्कालीन योजना मंत्री पण्डित नारायण दत्त तिवारी ने किया। इसके बाद दोनों कॉलेज का मरम्मत नहीं हुआ। धीरे-धीरे भवन पुरानी होता गया। आज हालात ऐसे हैं कि बादल गरजने या तेज वर्षा होने पर शिक्षक और छात्र सुरक्षित स्थानों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। इसके अलावा दोनों कॉलेजों के प्रांगण में बनी शिक्षक स्टॉफ आवास कॉलोनी के हालात भी कुछ अच्छे नहीं हैं। ये भवन भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। क्षेत्रीय विकास एवं सामाजिक उत्थान मंच के अध्यक्ष उभेद सिंह मेहरा कहते हैं कि यदि जल्द ही इन भवनों का मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो कालाढूंगी और कोटाबाग में आंदोलन चलाया जाएगा। गौरतलब है कि कालाढूंगी व कोटाबाग के इन कॉलेज भवनों की मरम्मत के लिए कई बार धनराशि स्वीकूत हुई। एक बार टेंडर भी जारी किया गया लेकिन आज तक न तो मरम्मत ही हो सकी और न ही उक्त धनराशि का कोई पता चल सका। इसके अलावा विकास खण्ड कोटाबाग की बात की जाये तो विभागी स्तर पर विकास खण्ड कोटाबाग क्षेत्र के ४७ स्कूलों की सूची भेजी है जिन स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की अति आवश्यकता बतायी गयी है जिसमें प्राथमिक स्तर के ३६ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ०६ और कोटाबाग कालाढूंगी के ४ इंटर कॉजेज शामिल है इनमें से दर्जनों स्कूल कॉलेज भवनों की स्थिति को खतरनाक बताया गया है। इस तरह की रिपोर्ट प्रतिवर्ष भेजी जाती है नगर पंचायत अध्यक्ष पुष्कर कत्यूरा जिला पंचायत सदस्य दीपा ढोंढियाल ने कहा कि सरकार को इन हजारों मासूमों और शिक्षकों ख्याल रखना चाहिए। इन जर-जर भवनों के प्लास्टर छज्जा गिरना पानी टपकना जैसी घटनाएं तो आम बात हो गयी हैं।

 


 
         
 
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