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आपदा पर विशेष
 
राहत के नाम पर मजाक

आपदा से जो गांव तबाह हो गए उनके निवासी जोशीमठ में अपने रिश्तेदारों और बेस कैंप में शरण लिये हुए हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें राहत सामग्री उनके गांवों में ही बांटी जाएगी

 

जोशीमठ (चमोली। अलकनंदा घाटी में १७ जून को आए जल प्रलय के कारण पांडुकेश्वर गांव का अस्तित्व खतरे में है। यहां तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद अलकनन्दा नदी ने अपना रास्ता बदल लिया है। गांव की दूसरी ओर बहने वाली नदी का रुख गांव की ओर मुड़ गया है। इस कारण कई मकान और खेत उसकी धारा में अलकनंदा में समा गए। बचे हुए मकान और खेत कभी भी समा सकते हैं। जिनके मकान ध्वस्त हो गए वे जोशीमठ में शरण लिये हुए हैं। उन्हें राहत सामग्री भी नहीं मिल पा रही है।

 

आपदा में पांडुकेश्वर के अरविन्द शर्मा का आवासीय मकान लॉज कृषि भूमि ध्वस्त हो गये हैं। इसी तरह हेमंत राणा का आवासीय भवन पूर्ण रूप से जमींदोज हो गया। जगजीत मेहता दिवान मेहता अवध भंडारी जगदीश लाल के द्घर पूर्ण रूप से ढह गये हैं। इनके अलावा राम नारायण भंडारी रजनीश भंडारी हरि भंडारी कमलेश कोठारी प्रीतम भंडारी की कृषि योग्य भूमि भी इस आपदा में मटियामेट हो चुकी है। ऐसे में उनके परिवार के सामने संकट के बादल छा गये हैं। 

 

पांडुकेश्वर के २५० परिवारों में से करीब २२ परिवार जोशीमठ में शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं। यहां शरणार्थी बने इन परिवारों के लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई भी सरकारी राहत सामग्री नहीं मिल पायी है। जो लोग गांवों में रह रहे हैं उन्हें भी मिल रही है या नहीं इस बारे में कुछ पता नहीं। हालांकि अभी भी बदरीनाथ के बामणी गांव में पांडुकेश्वर के ६० से ७० परिवार फंसे हैं। ऐसे में प्रशासन राहत सामग्री का वितरण कहां और किस प्रकार से कर रहा हैकिसी को भी नहीं पता। जोशीमठ में शरण लिये हुए पांडुकेश्वर के परिवार राहत सामाग्री के लिए उपजिलाधिकारी जोशीमठ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में इन परिवारों का दर्द छुपा है। इन लोगों ने उपजिलाधिरी को कहा कि यदि उनके रिश्तेदार उन्हें शरण नहीं देते तो वे भूख से मर गए होते। आखिर अपने रिश्तेदार पर कब तक बोझ बने रहेंगे। इसलिए हम पीड़ितों का जल्द से पुनर्वास किया जाए और जीने के अधिकार के लिए सरकार की ओर से तत्काल मदद दी जाए।

 

पाण्डुकेश्वर के अरविन्द शर्मा कहते हैं कि प्रशासन राहत सामग्री वितरण का दावा कर रहा है। जोशीमठ में राहत सामग्री का बेस कैंप है। कई पीड़ित जोशीमठ में ही रह रहे हैं। हम लोगों तकअभी राहत सामग्री नहीं पहुंची। जब बेस कैंप में रह रहे पीड़ितों को ही राहत सामग्री नहीं पहुंची है तो दूर बसे ग्रामीणों तक यह कैसे पहुंच रही होगी। राम नारायण भंडारी कहते हैं जब हम लोग राहत सामग्री की खातिर प्रशासन से मिले तो उनका कहना था कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। जब हम लोग यहां रह रहे हैं और गांव जाने का रास्ता बंद है तो राहत सामग्री लेने गांव कैसे जा सकते हैं। यह तो असंवेदनहीनता भरा निर्णय है।' 

 

यहां के पीड़ितों ने साफ कहा है कि जो प्रभावित लोग जोशीमठ में शरण लिए हैं उनको प्रशासन यहीं पर राहत सामग्री उपलब्ध कराए। गांव में जब लोग रह नहीं रहे हैं तो वहां राहत लेने कौन जायेगा। पीड़ितों की मांग पर प्रशासन ने उनके घाव पर मरहम लगाने के बजाए उस पर नमक ही छिड़का है। फौरी राहत के नाम पर इन १९ पीड़ित परिवारों को बिस्कुट दिया गया। यह पीड़ितों के साथ भद्दा मजाक नहीं तो और क्या है। यही नहीं इन्हें झूंठा भरोसा दिया गया कि जब राहत सामग्री गांव के नाम पर आयेगी तो उसे एसडीएम से वार्ता के बाद ही उपलब्ध कराई जायेगी।

 

तड़ागताल में तबाही

चौखुटिया (अल्मोड़ा। इस बार की आपदा में सरकार और मददगार लोगों ने तीर्थ यात्रियों अपनी मदद को प्रदेश के पीड़ित सर्व साधारण लोगों को भुला दिया। सरकार को भी दो हफ्ते बाद आम लोगों की याद आई। चौखुटिया के तड़ागताल में पीड़ित लोगों का किसी ने भी नोटिस नहीं लिया। तड़ागताल के पास खौला गांव में बादल फटने के कारण गांव के गोपाल सिंह पर भारी विपदा आ गयी। बादल फटने से समीप के गधेरे में भारी भूस्खलन हुआ। इस भूस्खलन के कारण गोपाल सिंह का बेटा अपने मवेसियों के साथ बह गया। अगले दिन उसकी लाश गाय भैंस और बकरी के साथ द्घर से कुछ दूर पर मिली। जवान बेटे और ४० बकरी मर जाने के कारण गोपाल सिंह सदमे में हैं। उन्हें इतना बड़ा सदमा लगा कि वह किसी से कुछ बोल भी नहीं पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार खौला गांव का गधेरा ने विकराल रूप धारण कर लिया। पानी का स्तर कई फुट ऊपर चढ़ गया था। चौखुटिया क्षेत्र के विधायक मदन बिष्ट ने बादल फटने से प्रभावित हुये खौला गांव के सभी लोग को मुआवजा दिये जाने को कहा। पर उन्हें मुआवजा तो दूर राहत तक नहीं पहुंचाई गई। खौला गांव के कई अन्य द्घर खतरे की जद में है। इन लोगों ने पड़ोस के द्घर में शरणागत हुए। इन सभी को राहत की तत्काल जरूरत है लेकिन सरकारी राहत कब तक इनके द्वार पहुंचेगी कहा नहीं जा सकता। एक अन्य व्यक्ति का शव चौखुटिया में चांदीखेत के पास रामगंगा में मिला। जिसकी शिनाख्त तड़ागताल के नौगांव निवासी नरेन्द्र सिंह के रूप में की गयी है। इस तरह इलाके के कितने लोग आपदा की भेंट चढ़ हैं किसी को नहीं पता।

 

ऊंट के मुहं में जीरा

चमोली। प्रशासन की ओर से सुध न लेने के बाद उर्गम घाटी के गांवों के आपदा पीड़ितों को गैर सरकारी संगठनों पर ही आसरा है। कुछ स्वैच्छिक संस्था राहत कार्य के लिए आगे आए हैं। स्वैच्छिक संस्था जनादेश ने राहत सामग्री बांटने का कार्य शुरू किया है। संस्था की ओर से उर्गम घाटी में अभी तक ४४८ परिवारों को आटा चावल और दाल वितरित की गई है। उर्गम घाटी के अलावा आपदा प्रभावित पांडुकेश्वर और लामबगड़ क्षेत्र में भी संस्था के कार्यकर्ताओं ने राहत वितरण का काम शुरू कर दिया है।

 

गौरतलब है कि भारी बारिश के बाद हेलंग उर्गम मोटर मार्ग कई स्थानों पर बह गया है। इसके अलावा उर्गम घाटी के ९ गांवों को मुख्य धारा से जोड़ने वाले तीन से अधिक पुल भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। उर्गम घाटी के गांवों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। पिछले १७ दिनों में यहां बचा हुआ राशन भी समाप्त हो गया है। हालांकि प्रशासन ने हैलीकॉप्टर के एकाध चक्कर लगाकर यहां राहत सामग्री भेजी है। लेकिन ६०० से अधिक जनसंख्या के लिए यह राहत 'ऊंट के मुंह में जीरे' के समान है। ग्रामीणों के सामने जब भुखमरी का संकट पैदा हुआ तो क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था जनादेश की ओर से प्रभावितों की सुध ली। संस्था की ओर से अभी तक उर्गम घाटी के पिलखी भर्की भेटा ग्वाणा-अरोसी सलना आदि गांवों में ४४८ परिवारों को प्रति परिवार १० किलो आटा १० किलो चावल और तीन किलो दाल बांटी गई है। 

 

जनादेश के सचिव लक्ष्मण सिंह नेगी ने बताया कि अन्य गांवों में भी राहत सामग्री बांटने का कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा पांडुकेश्वरलामबगड़ आदि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी संस्था द्वारा पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी जा रही है। जिले के प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह पंवार और जिलाधिकारी चमोली एसए मुरुगेशन ने भी संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण कर सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन भी आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री बांट रही है। प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता को तत्काल सड़क एवं पुल निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जब तक सड़क और पुल नहीं बन जाते तब तक अस्थाई पुल तथा पैदल मार्ग का निर्माण कर ग्रामीणों को राहत मुहैया कराएं।

 

जमाखोरी का जाल

रुड़की (हरिद्वार। प्रदेश की कांग्रेस सरकार में सहयोगी बसपा नेता की लक्सर स्थित खाद्यान्न की दुकान से आपूर्ति विभाग ने आपदा प्रभावितों के लिए आई राहत सामग्री बरामद की। आरोपी नेता को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया। फिर उसे बचाने के लिए प्रशासन पर राजनीतिक दबाव भी डाला गया।

 

लक्सर के आढ़त बाजार में बसपा नेता रविन्द्र चौधरी की दुकान है। उनके भाई बिजेन्द्र चौधरी की पत्नी कुसुम देवी जिला पंचायत सदस्य हैं। प्रशासन को मिली सूचना के आधार पर एसडीएम लक्सर मोहम्मद नासिर ने ५ जुलाई को उनकी दुकान शुभम्ट्रे डिंग कंपनी पर छापा मारा। यहां आपदा पीड़ितों के लिए विभिन्न राज्यों से आए खाद्यान्न रखा गया था। इनके गोदाम में गेहूं और चावल के कुल ११६४ बोरे थे। गोदाम को सील कर दिया गया। 

 

सूत्रों के मुताबिक देहरादून और हरिद्वार से कई फोन आए लेकिन पुलिस इन दबावों को दरकिनार करते हुए बसपा नेता रविन्द्र चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पांच जुलाई की रात को मिली सूचना के आधार पर सीओ मनोज कुमार कत्याल के साथ तहसीलदार सोहन सिंह सैनी ने लक्सर मार्ग पर स्थित शुभम्टे् रडिंग कम्पनी के गोदाम पर छापा मारा जहां भारी मात्रा में सरकारी गेहूं और चावल मिलने की सूचना पर एसडीएम मोहम्मद नासिर और वरिष्ठ आपूर्ति निरीक्षक केके अग्रवाल मौके पर पहुंचे। सूचनानुसार बोरों की सील तोड़कर उसे दूसरे बेंचते समय में पलटी की जा रही थी ताकि खुले बाजार में पकड़ में न आएं। आपदा प्रभावित लोगों को खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है और नेता उस अनाज पर द्घोटाला करने में अभी से लग गए हैं। चावल के बोरों पर पंजाब सरकार और गेहूं पर हरियाणा सरकार की मुहर लगी थी। बसपा नेता रविन्द्र चौधरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। हिस्ट्रीशीटर के रूप में चर्चित रवींद्र चौधरी पुलिस के दबाव के कारण लक्सर में आकर रहने लगा था। यहां पहले उसने किराए पर ट्रैक्टर चलाया बाद में आढ़तियों का सामान इधर-उधर ले जाने के काम में लग गया। धीरे-धीरे वह राजनीति में द्घुस गया। संपर्क बन जाने के बाद उसने खुद खाद्यान्न का लाईसेंस लेकर आढ़त की दुकान खोल ली। वर्तमान में बसपा के तीन विधायक हैं और तीनों हरिद्वार से है। तीनों विधायक मंत्री दर्जा प्राप्त मंत्री हैं। इसी कारण शासन स्तर पर रविन्द्र को गिरफ्तार न करने का दबाव बनाया गया।

 

 
         
 
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