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खास खबर 
 
वादों की मैली चादर

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। गद्दी संभालते ही मुस्लिम समाज का दिल जीतने वे पिरान कलियर दरगाह पर चादर चढ़ाने पहुंचे थे। इसे पर्यटन के विश्व मानचित्र पर लाने के लिए कार्ययोजना की घोषणा कर डाली। लेकिन साल भर से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद देश-विदेश से यहां पहुंचने वाले लाखों जायरिनों को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। बहुत से जायरीन अजमेर शरीफ जाने से पहले पिरान कलियर में मत्था टेकने पहुंचते हैं लेकिन यहां ठहरने की व्यवस्था न होने पर वे खुले आसमान तले ही रात बिताने को मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा दरगाह पर आने के लिए सोलानी नदी पर बना १६० साल पुराना जर्जर पुल लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है

 

मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिन बाद ही विजय बहुगुणा राज्य में मुस्लिम समुदाय के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पिरान कलियर में साबिर शाह की दरगाह पर चादर चढ़ाने पहुंचे थे। तब उन्होंने देश-विदेश से आने वाले जायरिनों (श्रद्धालुओं से वादा किया था कि कलियर को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाया जाएगा। यहां सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए सरकार जल्द ही एक ठोस कार्य योजना तैयार करेगी। उनकी इस घोषणा के साल से ज्यादा का समय बीत चुका हैलेकिन दरगाह के दर्शन करने और चादर चढ़ाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अभी तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पायी हैं। सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कार्य शुरू होना तो दूर अभी तक इसके लिए कोई कार्य योजना भी नहीं बनी है। देश-विदेश से आने वाले जायरिनों को आज भी ढेरों समस्याओं से जूझना पड़ता है। लोगों को पेयजल यातायात और ठहरने जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वे खुले आसमान या फिर कार पार्किंग में रहने को मजबूर हैं। वहीं गंगा नदी पर एक मात्र मोटर पुल होने के कारण हमेशा जाम लगा रहता है। जिससे जायरिनों को दिक्कतें होती हैं।

 

पिछले साल अप्रैल के पहले सप्ताह रुड़की में पिरान कलियर शरीफ के दर्शन के बाद आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इसके सौंदर्यीकरण के लिए ढ़ाई करोड़ रुपए की मदद दिए जाने की घोषणा की थी। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि पिरान कलियर में जायरिनों को हर सम्भव सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कलियर मेले के लिए केंद्र सरकार से भी आर्थिक सहायता स्वीकूत कराने का प्रयास किया जाएगा। सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान पर विचार चल रहा है। अल्पसंख्यक वर्ग का हित साधना ही राज्य सरकार की प्राथमिकता है। शीद्घ्र ही मुख्यमंत्री के अधीन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग गठित किया जाएगा। इन सब वादों के साथ विजय बहुगुणा ने अल्पसंख्यकों की खूब वाह-वाही लूटी। लेकिन एक साल बाद ही उनके वादों की हवा निकल गई। अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। आज भी यहां आने वाले जायरिनों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।

 

पिरान कलियर दरगाह में प्रत्येक गुरुवार को हजारों मुस्लिम जायरीन दर्शन और चादर चढ़ाने आते हैं। इसके अलावा प्रत्येक माह नौचंदी जुम्मे के दिन भी यहां मेला लगता है। इन मेलों के अलावा साल में छह अन्य बड़े मेलों का आयोजन होता है। इनमें लाखों की भीड़ जुटती है। फरवरी-मार्च में करीब एक माह तक उर्स मेला लगता है। इसके शुरुआती चार दिनों में २-३ लाख लोग यहां आते हैं। लेकिन इनके न तो ठहरने की कोई व्यवस्था होती है और न ही पीने का पानी उपलब्ध हो पाता है। ठहरने के लिए यहां करीब २० निजी गेस्ट हाउस हैं। इनमें एक पर्यटन विभाग और दो-तीन दरगाह कमेटी के हैं। दरगाह कमेटी के गेस्ट हाउस कहने को तो गेस्ट हाउस हैं लेकिन वह खुले आसमान तले हैं। कई लोग बिल्डिंग के नीचे बने बेसमेंट में ठहरने को मजबूर हैं। इसकी छत की ऊंचाई इतनी होती है कि कोई व्यक्ति सीधा खड़ा नहीं हो सकता। 

 

केरल से पिरान कलियर दर्शन के लिए पहुंचे मो ़ अशफाक ने बताया कि हमारे यहां से अजमेर शरीफ जाने वाले को पहले पिरान कलियर आकर माथा टेकना होता है। इसलिए हम लोग यहां आए हैं। हमारे जत्थे में ८० जायरीन हैं। इससे पहले हमलोग कभी यहां यात्रा पर नहीं आए थे। यहां आने में विलंब हुआ तो रात यही रुकने का कार्यक्रम बनाया। लेकिन रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। हमलोगों ने पार्किंगनुमा बेसमेंट में रात गुजारी। यहां दुनिया से लोग आते हैं। जायरिनों के लिए अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। करीब तीन साल पूर्व पिरान कलियर का सौंदर्यीकरण किया गया था। इस सौंदर्यीकरण में गंग नहर और दरगाह के नजदीक पार्क बनाया गया था। कहने को तो वह पार्क है लेकिन उसे कूड़े के ढेर में तब्दील कर दिया गया है। यहां लगने वाले मेले और क्षेत्र का कचरा भी इसमें डाल दिया जाता है। लेकिन इस पर न तो दरगाह प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही कार्यकारी संस्था। पार्कों की यह हालत देखकर जायरीन भी आहत हैं। सौंदर्यीकरण के नाम पर दरगाह के पैसे से बने पार्क में लगे पौधे गर्मी आते ही मुर्झाने लगे हैं। पार्क के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गएलेकिन इसके रख-रखाव को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।

 

वर्ष २०११ में नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दरगाह का वित्तीय अधिकार दरगाह कमेटी से लेकर जिलाधिकारी हरिद्वार और उपजिलाधिकारी रुड़की को दे दिये थे। तब से यहां छोटे से छोटे विकास के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती है। बिना जिलाधिकारी की अनुमति के एक पैसा भी खर्च नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कमेटी से वित्तीय अधिकार लेकर प्रशासन को इसलिए दिये थे कि दरगाह और उसके आस-पास के इलाके का समुचित विकास हो सके। लेकिन अभी तक शासन ने इस दिशा में एक कदम भी नहीं उठाया है। हां सालाना खर्चे के लिए एकमुश्त बजट जरूर जारी कर दिया जाता है।

 

भाजपा के शासनकाल में दरगाह के बजट से ५.८० करोड़ की धनराशि से पिरान कलियर में सिंचाई विभाग की भूमि पर दो पार्क दो कार पार्किंग एक पब्लिक टॉयलेट बनाया गया था। यह कार्य यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन संस्था ने सम्पन्न किया था। गौरतलब है कि तत्कालीन प्रशासन ने इस कार्य का भुगतान किया। इसे लेकर उस समय बड़ा हंगामा हुआ। डेढ़ वर्ष के बाद ही यह निर्माण बद से बदतर हालत में पहुंच गया। प्रवेश द्वारों की सीलिंग उखड़ गई पार्क में देखरेख के अभाव में पेड़-पौधे सूख गए। दरगाह की व्यवस्था देख रहे सीईओ सादिया राशिद आलम ने बताया कि पार्क लावारिस दशा में हैं। इन्हें अभी तक निर्माणदायी संस्था ने दरगाह को हैंडओवर नहीं किया है। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन एवं निर्माणकारी संस्थान को पत्र भी लिखा है। लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हुआ। 

 

कलियर के अधिकतर लोगों को दरगाह से रोजगार मिलता है। लेकिन आशंका है कि कहीं रोजगार का यह एक मात्र साधन अव्यवस्था के कारण खत्म न हो जाए। लोगों का यहां आना पहले की तुलना में कम हुआ है। फिर भी मेले के समय लाखों की भीड़ होती है। इसी वजह से आस-पास के लोग छोटी-मोटी दुकानों या अन्य माध्यमों से कमाई कर रहे हैं। यदि यहां की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो श्रद्धालुओं का आना कम हो जाएगा। ऐसे में यह ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं से दूर होता चला जाएगा। पिरान कलियर के पूर्व प्रधान कहते हैं कि साबिर शाह की यह दरगाह बहुत ही पाक स्थान है। दुनिया भर से जायरीन यहां आते हैं। यहां की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को अपनी यादों में ले जाते हैं। चारों तरफ गंदगी और अव्यवस्थाओं के कारण कोई भी जायरिन दोबारा नहीं आना चाहते। गांव के लोगों ने भी कई बार सरकार से यहां की अव्यवस्था के बारे में शिकायत की है। लेकिन कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। वर्षों से यह पूरा क्षेत्र ही विकास की बाट जोह रहा है।  

रुड़की में सोलानी नदी के ऊपर बना १६० साल पुराना ऐतिहासिक पुल आज इतना ज्यादा जर्जर हो चुका है कि किसी भी दिन यहां बड़ी दुर्द्घघटना घट सकती है। इस पुल की देख-रेख और मरम्मत का जिम्मा सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के उत्तरी खंड गंगनहर (एनडीजीसी रुड़की के पास है। विभाग पुल के मौजूदा हालत से बखूबी वाकिफ है। वे इस पुल को अपने विभाग की ऐतिहासिक धरोहर तो बताते हैं लेकिन इसकी मरम्मत और सुधार पर कोई ठोस जवाब नहीं देते हैं। पुल से सैकड़ों गांवों के हजारों लोग रोजाना आते-जाते हैं। वहीं पिरान कलियर की विश्व प्रसिद्ध दरगाह की जियारत के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अमूमन इसी पुल से होकर गुजरते हैं। कलियर में लगने वाले मेले के दौरान इस पुल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। उस वक्त कई किलोमीटर लंबा जाम लगता है। 

 

तकरीबन हर साल उर्स मेले में आने वाले नेता और मंत्री गंगनहर पर एक अन्य पुल बनाने का वादा करते हैं पर वह वादा कभी हकीकत नहीं बन पाया है। मेले के समय रुड़की से ही दरगाह तक जाम लग जाता है। लोगों को कभी रुड़की से दरगाह तक आने में पूरा एक दिन लग जाता है। 

 

हर साल कांवड़ मेले के दौरान लाखों कांवड़िए भी इसी पुल से गुजरते हैं लेकिन ये कुदरत का करिश्मा ही है कि पुल की मियाद खत्म हो जाने के बाद भी ये पुल जर्जर हालत में अभी भी खड़ा है। अब तो पुल पर जगह-जगह द्घास उग आई है। दरारें पड़ी हुई हैं और सड़क टूटी हुई है जिससे अब पुल पर जाने से यहां के स्थानीय लोग घबराने लगे हैं। ये पुल कोई आम पुल नहीं है बल्कि हिन्दुस्तान के पुलों के इतिहास में ये एक अजूबा है। इस पुल के नीचे से सोला नदी बह रही है और नदी के ऊपर गंगनहर बह रही है। इस गंगनहर पर ब्रिटिश अफसर काट्ले ने लगभग पौने दो सौ साल पहले इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण कराया था। 

 

यह बात सही है कि कलियर जैसे पाक स्थल पर समस्याओं का अंबार है। मैं इससे इनकार नहीं कर रहा हूं। पिछली सरकार में मेरी एक नहीं सुनी गई। भाजपा सरकार ने घोटालों के अलावा कुछ नहीं किया। हमारी किसी योजना को मंजूर नहीं किया गया। वर्तमान सरकार में हम सहयोगी हैं। सरकार अच्छा काम कर रही है। पिछले साल मुख्यमंत्री ने दो करोड़ से ज्यादा रुपए कलियर के विकास के लिए दिये थे। यह भी कहा था कि विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। हम इसे विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बनांएगे जिसमें सभी प्रकार की सुविधाएं होंगी।

फुरकान अहमद विधायक पिरान कलियर

 

दरगाह बेशक हमारे अधीन है लेकिन हमें कोई अधिकार नहीं दिया गया है। वित्तीय अधिकार तक हमारे पास नहीं हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि कमेटी घोटाले कर रही है। पहले तो यह बताना चाहिए कि घोटाला किसने किया और यदि घोटाला हुआ था तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन बदले में कमेटी को कमजोर कर प्रशासन के हाथ मजबूत कर दिए। अब छोटे से छोटे काम के लिए भी जिलाधिकारी से बजट पास कराना होता है।

सादिया राशिद आलम मुख्य कार्यपालक अधिकारी उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड

 

मैंने अभी कुछ दिनों पहले ही कार्यभार संभाला है। पिछले दिनों मैं पिरान कलियर गई थी। वहां के कई लोगों से बातचीत हुई। कुछ लोगों ने अपनी समस्याएं रखी हैं। उन सभी समस्याओं को जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

निधिमणि पाण्डे जिलाधिकारी हरिद्वार

 
         
 
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