fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 41 02-04-2017
 
rktk [kcj  
 
आवरण कथा
 
प्रकृति का प्रतिकार


नींद में सरकार

उत्तराखण्ड में कहने को तो आपदा मंत्रालय है। यहां के चुने हुए प्रतिनिधि और अधिरकारी आपदा प्रबंधन की जानकारियां हासिल करने के लिए विदेशों के दौरे कर लाखों फूंक देते हैं। लेकिन हर बार आपदा राज्य के आपदा प्रबंधन की पोल खोलकर रख देती है। आपदा के ३६ द्घंटे बाद तक रामबाड़ा और गौरीकुंड में पुलिस-प्रशासन पीड़ितों तक संपर्क नहीं कर पाया। सूचना के लिए पुलिस के पास जो आधुनिक वायरलेस सेट हैं वे किसी काम नहीं आए। ऐसे में सवाल उठ सकते हैं कि आपदा राहत के लिए जो लाखों-करोड़ों के उपकरण खरीदे जाते हैं वे इस वक्त कहां हैं? वे खरीदे भी गए या नहीं।

 

इससे भी सरकार की बड़ी लापरवाही यह है कि उत्तराखण्ड के मौसम का मिजाज बिगड़ने से दो दिन पहले ही १४ जून को मौसम विभाग ने इस बारे में राज्य सरकार को आगाह कर दिया था। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में मौसम विभाग ने इसकी पुष्टि भी कर दी लेकिन उत्तराखण्ड सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। ऊपर से उत्तराखण्ड के आपदा मंत्री यशपाल आर्य बड़े निर्भीक होकर कहते हैं कि 'ऐसी चेतावनियां तो जारी होती रहती हैं।' आपदा आने के बाद भी राज्य सरकार उदासीन रही। कहने को सरकार ने पीड़ितों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम बना दिए हैं लेकिन लोगों की शिकायत है कि वहां कोई सुनने वाला नहीं है। यही वजह है कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों में लोगों को आपदा मंत्री यशपाल आर्य और कूषि मंत्री हरक सिंह रावत को भगाना भी पड़ा। यह जनाक्रोश यूं ही नहीं फूटा। जब लोग आपदा से जूझ रहे थे तो तब जेपी कंपनी ने बड़ी निडरता से बिना किसी की परवाह किए लामबगड़ में अपने बैराज के सात गेट खोलकर उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। उनके लिए जान बचाने के लाले पड़ गए। लोग मरें या बचें इसकी बांध निर्माता कंपनियों और सरकार को कोई फिक्र नहीं रही। सरकार का पूरा आपदा प्रबंधन तंत्र इस आपदा में बहुत ही लचर साबित हुआ है।

 

 

हरिद्वार में फसल चौपट 

 

पहाड़ में आई आपदा का असर हरिद्वार में भी हुआ। तीन दिन की लगातार बारिश से हरिद्वार जनपद में बाढ़ जैसे हालात हो गए। जगह-जगह जलभराव ने जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लोगों के द्घरों मकानों दुकानों और कार्यालय तक में जलभराव हो गया है। उफनाई नदी से रुड़की-हरिद्वार मार्ग को १५ मीटर तक काट देने से दिल्ली-देहरादून हाईवे बंद रहा। मोहल्ला अहबाब नगर अंबेडकर नगर चौक बकरा मार्केट आदि क्षेत्रों में डेढ़ से दो फुट तक पानी भर गया। उपनगर कनखल के हनुमान गढ़ी लाटोवाली पंत कॉलोनी आदि में कई द्घरों में पानी भर गया है। रूड़की शहर और कस्बों में सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। नगर के बाहरी इलाके से होकर बहने वाली सोलानी नदी में आये तेज बहाव से सैकड़ों बीद्घा फसल पानी में डूब गई है। सोलानी नदी से सटे इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गये।  जहां लोगों को प्रशासन की मदद से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। एक तरह से इस बारिश ने रूड़की नगर निगम के पानी निकासी नालों की सफाई व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। उधर विश्व प्रसिद्ध (दरगाह पिरान कलियर जिसकी व्यवस्था कई वर्षों से प्रशासन अपने हाथ में लिये हुए है में भी पानी भर गया है। जिस कारण जायरीनों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

 

 

पिथौरागढ़ में कहर

जनपद में मानसून की पहली बरसात कहर ढा गई। आपदा के चलते १०५ गांवों के ६०० परिवार और हजारों की जनसंख्या प्रभावित हुई एवं १५ लोग मौत के आगोश में समा गए। कई लोग अब भी लापता हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों से निकलने वाली काली गौरी और धौली नदियां यहां के लिए जीवनदायिनी मानी जाती हैं लेकिन विगत दिनों यह नदियां मौत लेकर सामने आई। इन नदियों की लहरों ने ऐसा तांडव मचाया की तीन दिनों तक लोगों की सांसें अटकी रहीं।

 

तीन दिन हुई इस बरसात में जनपद के धारचूला और मुनस्यारी तहसीलें सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं। बलुवाकोट कालका घाटीबगड़ जौलजीबी बगड़ीहाटहंसेखवर तीतरी द्वालीसेरा पीपली डोडा आदि कई क्षेत्रों में जबर्दस्त भू कटाव हुआ है। नेपाल को जोड़ने वाले दोनों पुल बह गए। काली गौरी रामगंगा का उग्र रूप सामने आया। दारमा घाटी में ग्लेशियर खिसक गया। छिपला केदार में बादल फटने और ग्लेशियर दरकने से दस लोग मौत के मुंह में समा गए। तीजम का हैलीपैड ध्वस्त हो गया। गर्ब्यांग के पास पहाड़ टूटने से ५० भेड़ों की मौत हो गई। सोबला गांव के भीमराम के परिवार के पांच सदस्य मौत के आगोश में समा गए। सुमगढ़ गांव का आधा हिस्सा बह गया। धारचूला के गोठी में ३०० मीटर मार्ग बह गया। काली नदी के वेग के चलते एनएचपीसी की तपोवन स्थित कालोनी को खाली कर निंगालपानी पहुंचा दिया है। जौलजीवी स्थित मेला स्थल काली नदी में बह गया। छारछुम और गोठी में टनकपुर- तवाघाट राष्ट्रीय राज मार्ग बह चुका है। मुनस्यारी में ल्वा मर्तोली बूफॅ टोला के साथ लोहे के पुल एक साथ बह गए। जिससे उच्च हिमालीय क्षेत्र का संपर्क शेष भारत से टूट गया।

 

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे लोगों को बाहर निकालना भी एक बड़ी मुसीबत बनी हुई है। कहने को तो जनपद में आपदा से ६०० गांव प्रभावित हैं। जनपद में सड़क स्वास्थ्य विद्युत पेयजल सुविधाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। आपदा प्रबंधन तंत्र दम तोड़ रहा है। राहत के नाम पर लोगों को कुछ भी नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि वर्ष २०१० की आपदा के तहत संवेदनशील श्रेणी में जनपद के ७१ गांवों को विस्थापित होना था। लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते ये विस्थापित नहीं हो पाए। हर बरसात में संवेदनशील गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है। 

 

मुख्य सचिव सुभाष कुमार के मुताबिक केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच के रास्ते में आस- पास के क्षेत्र में करीब ८०० लोगों के फंसे होने का अनुमान है। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। कारण यह है कि गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की कोई गिनती नहीं होती। लिहाजा यह कहना मुश्किल हो रहा है कि इस बाढ़ की चपेट में कितने लोग आए होंगे। डीजीपी सत्यव्रत बंसल के मुताबिक पीएसी के करीब १५ जवान हैं जिनके बारे में कोई सूचना नहीं है। इसमें महिला कांस्टेबल भी शामिल हैं। 

 

साथ में संजय कुंवर संतोष सिंह जसपाल नेगी अली खान और दिनेश पंत

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 61%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शपथ लेते ही जिस तरह ऐक्शन में हैं उससे विरोधी भी हैरान हैं। उनको मुख्यमंत्री
foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1572646
ckj