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न्यूज़-एक्सरे 
 
ड्रीम प्रोजेक्ट पर ग्रहण

संपूर्णानंद केंद्रीय कारागार के प्रशासन ने सिडकुल फेस-२ के लिए जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के ड्रीम प्रोजेक्ट्स पर फिलहाल ग्रहण लग गया है। उद्योगों में रोजगार पाने के स्थानीय युवाओं के सपनों को भी झटका लगा है

 

पच्चीस अक्टूबर २०१२ को प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने जब अपने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में सिडकुल-टू की नींव रखी तो उस वक्त लोगों को लगा था कि शायद प्रदेश में उद्योग-धंधों की बाढ़ आने वाली है। लेकिन जितनी जल्दबाजी में इसका उदघाटन हुआ उतनी ही जल्दी इससे लोगों की उम्मीदें भी टूटने लगी हैं। हालत यह है कि आठ माह बाद भी उद्योग लगना तो दूर इसके लिए जमीन तक नहीं मिल सकी है। सिडकुल के लिए जमीन देने में जहां संपूर्णांनंद शिविर (खुली जेल ने रुकावट पैदा कर रखी है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स पर भी अभी तक ब्रेक लगा हुआ है।

 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने २५ अक्टूबर २०१२ को अपने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में औद्योगिक विकास क्षेत्र सिडकुल-टू की नींव रखी थी। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने अपने कई ड्रीम प्रोजेक्ट्स के लिए ४५ ़४७ करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया था। सिडकुल -टू के लिए १३ सौ एकड़ भूमि पर उद्योग-धंधों की स्थापना का भी दावा किया गया। शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि सिडकुल टू उद्योगों की अवस्थापना में ३ सौ करोड़ खर्च करेगा। इसमें ५ हजार करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा। जिसमें अकेले सितारगंज के सिडकुल-वन को ही लें तो यहां की १०९३ एकड़ जमीन में से १०० एकड़ भूमि खाली पड़ी है। इस भूमि पर ४५ प्लॉट अपने बिकने के इंतजार में हैं। सितारगंज के अलावा हरिद्वार और रुद्रपुर के सिडकुल की जमीनों का अगर आकलन किया जाए तो यहां अभी भी ६०० एकड़ जमीन उद्योगों के इंतजार में है।

 

उल्लेखनीय है कि पूर्व में सितारगंज स्थित सिडकुल के लिए संपूर्णांनंद शिविर की जमीन ली जा चुकी है। सबसे पहले ३ जून २००६ को सिडकुल के लिए २२२६ ़४७०६ एकड़ भूमि दी गई। इसके बाद एक बार फिर २३ फरवरी २००७ को सिडकुल के लिए जेल की जमीन ली गई। संपूर्णांनंद शिविर द्वारा दूसरी बार सिडकुल को हस्तांतरित की गई जमीन का क्षेत्रफल २४१४ ़१४ एकड़ था। पूर्व में दो बार सिडकुल को जमीन हस्तांतरित किए जाने के बाद संपूर्णांनंद शविर के अधिकारियों ने एक बार फिर जमीन देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि २७ फरवरी २०१२ को संपूर्णानंद शिविर में तत्कालीन राज्यपाल मार्गे्रट अल्वा ने भ्रमण किया था। तब उनके समक्ष जेल की उक्त जमीन को सिडकुल के लिए दे दिए जाने की बात कही गई थी। इस पर महामहिम ने शासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। जिसमें केन्द्रीय कारागार के कॉम्प्लेक्स एरिया की ओर की भूमि सिडकुल को हस्तांतरित नहीं किए जाने का स्पष्ट निर्णय लिया गया था। मार्ग्रेट अल्वा के समक्ष यह भी तथ्य उजागर किया गया था कि कॉम्प्लेक्स एरिया की ९०२ एकड़ भूमि में से करीब ८०० एकड़ भूमि बहुपयोगी है। इस कॉम्पलेक्स एरिया के ९७ एकड़ क्षेत्रफल में केंद्रीय कारागार निर्माणाधीन एवं आशिंक रूप से क्रियाशील है। भविष्य में इसी भूमि में ऊधमसिंह नगर की जिला जेल जेल टे्रनिंग स्कूल सेमी ओपन ब्लॉक ग्रेन स्टोर्स और महिला उन्मुक्त कारागार (ओपन जेल का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इसके चलते कारागार की भूमि को सिडकुल-टू के लिए दिए जाने में संपूर्णांनंद शिविर के अधिकारियों ने असमर्थता जाहिर कर दी।

 

जेल के तत्कालीन वरिष्ठ अधीक्षक संजीव कुमार शुक्ल ने इस बाबत शासन की प्रमुख सचिव (गृह विनीता कुमार को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि संपूर्णांनंद शिविर जेल ट्रेनिंग स्कूल महिला कारागार अति संवेदनशील केन्द्रीय कारागार एवं जिला जेल के अंतर्गत बफर जोन के रूप में भी जाना जरूरी है। इस बीच में सिडकुल बनाया जाना मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध भी होगा। शुक्ल ने इसे और भी स्पष्ट करते हुए लिखा कि उक्त तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में जेल की भूमि को औद्योगिक क्षेत्र या किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित किया जाना विभागीय हित में उचित नहीं होगा।

 

गत २४ जनवरी को इस बाबत विनीता कुमार ने औद्योगिक विकास विभाग को एक पत्र लिखा कि वरिष्ठ कारागार अधीक्षक संपूर्णांनंद शिविर के पत्र संख्या ९६ में उल्लेखित बिन्दुओं का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर और कारागार विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त स्थलीय निरीक्षण करे। इसके पश्चात ही भूमि हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव और खसरा नंबर आदि स्पष्ट करें। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की भी इस मामले में सहायता लें। इसके बाद जमीन हस्तांतरित करने वाली फाइल इधर से उधर चलती रही। इससे पहले कि संपूर्णांनंद शिविर के वरिष्ठ कारागार अधीक्षक संजीव कुमार शुक्ल इस मामले में कुछ कर पाते उनको वहां से हटाकर आईजी (कारागार देहरादून अटैच कर दिया गया। शुक्ल पर जेल परिसर में अवैध खनन कराने के आरोप तय किए जा चुके हैं। सितारगंज के उपजिलाधिकारी मनीष कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में माना है कि जेल के वरिष्ठ कारागार अधीक्षक साढ़े ९ करोड़ के अवैध खनन के आरोपी हैं।

 

 

बाढ़ सुरक्षा को लेकर चिंतित सितारगंजवासी

वर्ष २०१०-११ में सितारगंज के लोगों को बाढ़ ने इतना प्रभावित किया था कि वे बिना नाव के दस कदम भी नहीं चल पाते थे। तब इन क्षेत्रों की स्थिति तलाबनुमा हो गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया तो उन्हें भी नाव का सहारा लेना पड़ा था। इसी के मद्देजनर प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समक्ष स्थानीय लोगों ने उनके चुनावी अभियान के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से रखा था। इसके चलते बहुगुणा ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए ४ करोड़ ६६ लाख की धनराशि का ऐलान किया था लेकिन इसकी द्घोषणा हुए भी सात माह से ऊपर हो चुका है और अभी तक बाढ़ राहत कार्यों के लिए कुछ नहीं किया गया। भाजपा नेता सूब सिंह विकल के अनुसार सितागरंज उपचुनाव में लोगों की इस प्रमुख समस्या को मुख्यमंत्री ने अनदेखा नहीं किया था। तब उन्होंने जेसीबी मशीनों से कैलाश नदी और वेगुल नदी के किनारे बाढ़ नियंत्रण के लिए मिट्टी डलवा दी थी। लेकिन पिछली बरसात में ही वह मिट्टी बह निकली।

 

अक्टूबर २०१२ में इनका हुआ शुभारंभ

नाम                                       स्वीकृति राशि

  • १२५० वर्गमीटर में क्षेत्रीय कार्यालय                 ४ ़८६ लाख
  • (सिडकुल-फेस टू
  • ७५० वर्ग मीटर में विश्राम ग्रह                     ४ ़६६ लाख
  • हैलीपैड                                             ४ ़६० लाख
  • सामुदायिक भवन                                  ३ ़५७ लाख
  • लोनिवि की २१ सड़कें एवं ३ पुल                    १२.३३ लाख
  • बाढ़ सुरक्षा कार्य                                    ४.६६ लाख

 

बात अपनी अपनी

सरकार इस मामले में गंभीर है कई बार अधिकारियों को आदेश दिए जा चुके हैं कि वह सिडकुल के लिए जमीन की प्रक्रिया पूरी कर दे। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से लेट हो रहा है। यहां दो नई कंपनियों ने जमीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया है। इनके नाम सोन इंडस्ट्रीज और सीएचडी इंडस्ट्रीज हैं।

मंत्री प्रसाद नैथानी प्रभारी ऊधमसिंहनगर

 

मुख्यमंत्री सिडकुल-टू के लिए जो जमीन ले रहे हैं वह बहुत ही उपजाऊ है। इस जमीन पर खेती-बाड़ी हो रही है। जब उन्होंने इसका उद्द्घाटन किया था तब कहा था कि सिडकुल बंजर जमीन पर बनेगा। लेकिन बाद में खेती की जमीन पर ही कंक्रीट के जंगल खड़े करने की योजना बना दी गई। यह जमीन खुली जेल की है जिसे हस्तांतरित करना नियम विरुद्ध है।

प्रकाश पंत पूर्व कैबिनेट मंत्री

 

संपूर्णानंद शिविर केंद्रीय कारागार की जमीन सिडकुल को हस्तांतरित करने में परेशानी आ रही है। इस जमीन को हस्तांतरित करने से पहले सिडकुल को १५ करोड़ रुपए कारागार कोष में जमा कराने हैं। यह राशि अभी जमा नहीं हुई है।

वी.के. संत जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर

 

अभी जमीन जेल से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी जमीन को सिडकुल को देने में एक आदेश आड़े आ रहा है। यह आदेश पूर्व में राज्यपाल द्वारा दिया गया था।

भास्करानंद सचिव कारागार

 

सिडकुल के लिए जमीन दिए जाने की प्रक्रिया अभी चल रही है। इसके लिए जमीन का सर्वे कार्य किया जा रहा है। जल्द ही सिडकुल को जमीन हैंड ओवर कर दी जायेगी।

पीएस सजवाल रीजनल मैनेजर सिडकुल सितारगंज

 

आकाश नागर

 
         
 
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