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जनपदों से 
 
रंग लाई मेहनत

चमोली। कहा जाता है जहां चाह वहां राह। दृढ़ इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति के रास्ते में कोई भी बाधा रूकावट नहीं बनती। ऐसे ही दृढ़ इच्छा से परिपूर्ण नेपाली मूल के प्रकाश राणा ने ऐसा कर दिखाया है और प्रदेश के पर्वतीय इलाकों से पलायन कर रहे युवाओं के सामने एक उदाहरण पेश किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के साधन नहीं होने के कारण युवा गांव घर से दूर काम की तलाश में निकल पड़ते हैं। वह अब अपने घरों में रह कर अपनी मेहनत से परिवारगांव और समाज की तस्वीर बदल सकते हैं। प्रकाश राणा ने अपनी मेहनत से बंजर और बेकार पड़ी भूमि को हरा-भरा बना दिया वह भी मात्र तीन महीने में। अपनी मेहनत से वह खेती कर लाखों कमा रहे हैं। कल तक दूसरे के खेतों में काम करने वाला प्रकाश आज खेतों में काम कराने के लिए मजदूर रख रहा है।

 

दरअसल प्रकाश राणा नेपाल से रोजगार की तलाश में हिमाचल पहुंचे थे। वहां वे एक सब्जी के खेत में काम करना शुरू किया। वहीं उन्होंने सब्जी उत्पाद के गुर बारीकी से सीखे। सब्जी उत्पादन में अच्छा लाभ देख उन्होंने स्वयं खेती करने का मन बनाया। पहली बार पौड़ी में गडुवाद्घाट में २० नाली जमीन पर सब्जी का उत्पादन कार्य शुरू किया। जहां उन्हें अच्छा लाभ हुआ। इसके बाद राणा अपने काम को और बढ़ाने में जुट गए। जिसके लिए उन्हें अब अधिक भूमि की जरूरत थी। अधिक भूमि के लिए उन्होंने सीमांत चमोली जनपद की ओर रूख किया। यहां बदरीनाथ नेशनल हाइवे से सटा पीपलकोटी और मायापुर में स्थानीय काश्तकारों से लीज पर भूमि लिया। यहां वे पिछले दो सालों से सब्जी उत्पादन का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष उन्होंने ५० नाली भूमि में गोभी टमाटर शिमला मिर्च सरसों मूली बीन्स मिर्च कद्दू बैगन सहित दर्जनों सब्जियों का उत्पादन किया गया। इससे उनकी अच्छी कमाई हुई।

 

इस वर्ष राणा ने यहां सात मजदूरों को मजदूरी पर रखा है। चारधाम यात्रा मार्ग का मुख्य पड़ाव होने के चलते उन्हें सब्जियों अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उन्होंने २०० नाली भूमि पर सब्जियां उगाई हैं। इस बार दर्जन भर सब्जियों में सबसे ज्यादा गोभी का उत्पादन किया है। प्रकाश राणा बताते हैं कि सब्जी उत्पादन के लिए वे रासायनिक खाद का बहुत कम उपयोग करते हैं। सब्जी के हाईब्रीड बीज को हिमाचल से मंगाया है। उनका कहना है कि ५० हजार रुपए का वे बीज खरीद चुके हैं साथ ही १५ हजार से अधिक की खाद व कीटनाशक दवाइयों को भी वे खरीद चुके हैं। उनका कहना है कि इस वर्ष यदि उन्हें अच्छा लाभ मिला तो वे और अधिक कृषि भूमि पर सब्जी उत्पादन का काम करेंगे। प्रकाश राणा की मेहनत का ही नतीजा है कि चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों पर यात्रियों के लिए ताजी सब्जियां मिल रही हैं। वहीं प्रकाश राणा ने अपनी मेहनत के बल पर पहाड़ से हो रहे निरंतर युवाओं के पलायन को भी आईना दिखाने का काम किया है। उनका कहना है कि सब्जी उत्पादन से वे प्रतिवर्ष लाखों कमा लेते हैं। साथ ही यदि व्यक्ति लगन से मेहनत करे तो उसे लाभ अवश्य मिलता है। 

 

चमोली के मलासी कृषि विशेषज्ञ विजय प्रसाद का कहना है कि मायापुर में बंजर भूमि में नेपाली मूल के युवा ने जो सब्जी उत्पादन का कार्य किया है। यह कदम निःसंदेह सराहनीय है। जिसका लाभ चारधाम यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी मिल रहा है।  

 

अध्यक्ष बंड विकास संगठन पीपलकोटी अतुल साह कहते हैं कि सब्जी उत्पादन कर जहां नेपाली मूल के युवा पहाड़ों में लाखों रुपये कमा रहे हैं। साथ ही बेकार पड़ी भूमि का सदुपयोग किया जा रहा है। स्थानीय काश्तकारों को भी सीख लेनी चाहिए। 

संतोष सिंह

बंद हुई पशुबलि

पौडी। जनपद के कल्जीखाल विकास खंड में पशुबलि के नाम से प्रशिद्ध ऐतिहासिक मेला इस वर्ष बिना पशुबलि के संपन्न हो गया। हालांकि कई वर्षों से सामाजिक संस्थाएं पशुबलि का लगातार विरोध करते रहे थे। लेकिन वह सफल नहीं हो पा रहे थे। इस बार स्थानीय ग्रामीणों की आपसी जन जागरूकता के कारण पशुबलि पूरी तरह से बंद हो गई। 

 

वर्ष २००५ की बड़ी घटना से सबक लेते हुए हर वर्ष मेला क्षेत्र में धारा १४४ लगी रहती है। उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्र में अधिकांश मेले अठवाड़ के नाम से प्रचलित रहे हैं। मेलों में पांडव नृत्य और बकरों एवं नर भैंसों की बलि से शक्ति की उपासना की जाती है। अब इन अठवाडों के मेलों में पशुबलि की मान्यता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसके खिलाफ चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियानों और बदल रहे सामाजिक परिदृश्य के कारण मेलों की ये प्राचीन परंपराएं बदली हैं। इसी का परिणाम है कि गढ़वाल के मेलों में अब निरीह पशुओं का रक्त बहना लगभग बंद हो गया है। 

 

क्षेत्र के बुजुर्गों के मुताबिक शक्ति के उपासक पशुबलि के माध्यम से अपने अराध्य देव को खुश करने के लिए इसका सहारा लते हैं। यहां कालीमठ के तांत्रिक बलि देते थे। वहीं चंद्रबदनी में टिहरी के राजा नर भैंसों की बलि देते थे। जो अब नहीं होती है। अब सुमाड़ी में हर वर्ष गौरा देवी की उपासना होती है। जिसमें यज्ञ कथा वाचने से मेला संपन्न हो जाता है। इस उपासना में सुमाड़ी के सभी प्रवासी भाग लते हैं। पौड़ी जनपद में पशुबलि को लेकर जिन प्रशिद्ध मेले का आयोजन होता था उनमें कांडा कालिंका बीरोंखाल बूंखाल चोरीखाल मुंडेश्वर बड़कोट खोलाचोरी सबदरखाल आदि हैं। पशुबलि के विरोध में समाजसेवी मदन सिंह राणा को समर्थकों के कोपभाजन का शिकार भी होना पड़ा है। कल्जीखाल और बूंखाल कांलिंका में पशुबलि बंद कराने के लिए पशुप्रेमी मेनका गांधी तक आईं।

जसपाल नेगी


राजमार्ग पर नाजायज वसूली

सितारगंज (उधमसिंहनगर)। एक ओर सरकार भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करने का दावा करती है वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध वसूली किया जा रहा है। जिला पंचायत के एक टोल टैक्स ठेकेदार नियम-कानून को धता बताकर वसूली कर रहा है। इसमें खास बात है कि मुख्यमंत्री के दौरे के समय बैरिकेट को हटा दिया जाता है और उनके क्षेत्र से जाते ही वसूली फिर शुरू कर दिया जाता है। स्थानीय प्रशासन इससे अंजान बना हुआ है।  

 

जानकारी के मुताबिक बरेली (उत्तर प्रदेश) निवासी शशांक चाणक्य ने जिला पंचायत ऊधमसिंह नगर से टोल टैक्स वसूली का ठेका लिया। ठेके की रकम ४० लाख है। टोल टैक्स वसूली के लिए इन्हें सितारगंज का ग्रामीण इलाका दिया गया है। लेकिन वह ग्रामीण इलाके के साथ- साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी वसूली कर रहा है। अपना संबंध राजनेताओं अधिकारियों और मीडिया के साथ बताता हैं। और कर्मचारियों से जहां-तहां वाहन रोककर उनसे ३०४० एवं ५० रुपए प्रति वाहन के हिसाब से वसूली कर रहा है। इसमें मजेदार बात यह है कि ठेकेदार के आदमी उत्तराखण्ड से बाहर जाने वाले और वाहनों से भी वसूली कर रहे हैं।

 

इस मामले में पूछे जाने पर उपजिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि उन्हें इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं है जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि यह मामला संज्ञान में आने पर बैरियर हटवाकर वसूली पूर्णतः बंद करावा दी गयी थी। यदि फिर से कोई वसूली करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उधर इस मामले में ठेकेदार शशांक चाणक्य ने कहा कि उन्होंने वसूली के लिए जिला पंचायत से बाकायदा ठेका लिया है। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्थान चिन्हित कर टैक्स वसूलने का अधिकार दिया है। इसी के तहत उनके कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। उनसे जब यह पूछा गया कि ठेका तो ग्रामीण क्षेत्रों के मार्गों से गुजरने वाले वाहनों से वसूली का हुआ है फिर सितारगंज चीनी मिल और बरा के समीप हाईवे पर वसूली क्यों की जा रही है। तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारे कर्मचारी कहीं पर भी वाहन रोक कर उसकी तलाशी ले सकते हैं। यह अधिकार भी हमे जिला पंचायत ने ही दिया है। उन्होंने इस दौरान तमाम राजनेताओं अधिकारियों और पत्रकारों से अपने संबंध का हवाला दिया। उसने यह भी माना कि थोड़ी बहुत गड़बड़ तो कहीं न कहीं होती है। अपर जिला पंचायत राज अधिकारी के एस प्याल ने बताया कि शशांक चाणक्य को जिला पंचायत ने वसूली का ठेका दिया है। लेकिन हाईवे पर वसूली करना गलत है। ठेकेदार और उनके आदमी ग्रामीण क्षेत्रों के मार्गों पर वसूली कर सकते हैं। अलबत्ता वह वाहन कहीं भी रोक कर उनकी तलाशी ले सकते हैं।

रवि रस्तोगी

 
         
 
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