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खास खबर 
 
शराब माफिया को शह

देवभूमि उत्तराखण्ड में शराब माफिया फिर से सिर उठा रहा है। राजनेताओं और पुलिस-प्रशासन की शह के चलते चाय और परचून की दुकानों पर खुलेआम अवैशराब बिक रही है। विरोध करने पर लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। रानीखेत तहसील के सोनी गांव में तो इंतहा हो गई। यहां ग्रामीणों ने जब अवैध शराब पकड़वाई तो स्याल्दे के ब्लॉक प्रमुख उन्हें धमकाने के लिए पहुंच गए क्योंकि शराब का व्यापारी उनका रिश्तेदार था

 

देवभूमि उत्तराखण्ड में शराब माफिया का जाल फैलता जा रहा है। जनता के भारी विरोध के बावजूद राजस्व पुलिस पुलिस- प्रशासन और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि मौन हैं। इस पर लोग हैरान है। एक-दूसरे से सवाल कर रहे हैं कि कहीं इन सबने शराब माफिया से हाथ तो नहीं मिला लिये हैं। रानीखेत तहसील के सोनी गांव में ग्रामीणों और शराब की अवैध बिक्री करने वाले एक व्यापारी के बीच हुई तनातनी पर जनप्रतिनिधियों और पुलिस-प्रशासन का रवैया इस बात की पुष्टि करता है। जब गांव के युवा और महिला मंगलदल की महिलाएं वहां अवैध शराब बेचने वालों को जेल में डालने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे तो राजनीतिक दल और उनके नेता आंख मूंदे बैठे थे। इतना ही नहीं प्रदेश की पुलिस शराब माफिया का साथ देने के कानूनी रास्ते तलाश रही थी।

 

छह जून की रात को रानीखेत से करीब १५ किलोमीटर दूर स्थित सोनी गांव में महिला मंगल दल की सदस्यों को बोरे में लावारिस पड़ी शराब की बोतलें दिखाई दी। इसकी सूचना ग्राम प्रधान हरीश चंद्र उपाध्याय को दी गई। उपाध्याय ने इसकी जानकारी पुलिस और रानीखेत के संयुक्त मजिस्ट्रेट को दी। पुलिस मौके पर सूचना मिलने के दो घंटे के बाद पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इन दो घंटों में इस शराब पर मालिकाना हक रखने वाले सोनी गांव के ही निवासी ललित मोहन करगेती ने वहां जुटी महिला मंगल दल की सदस्यों से गाली-गलौज की। इसके बाद पहुंची पुलिस ने सबसे पहले मौके पर लगी भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास कियालेकिन महिला मंगल दल की सदस्य अपने सामने बोतलों की गिनती कराने के लिए वहीं अड़ी रहीं। इस दौरान मौके पर क्षेत्र के एसडीएम भी पहुंच गए। उनके हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने बोतलों की गिनती की जिसमें इनकी संख्या २९४ पाई गई। इसके बाद पुलिस ने शराब का अवैध धंधा कर रहे ललित मोहन करगेती को गिरफ्तार कर लिया। अवैध रूप से बिक रही इस शराब के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम में शामिल ग्राम प्रधान हरीश चंद्र उपाध्याय दिग्दर्शन रावत कमल नगरकोटि श्याम उपाध्याय और दिगम्बर आदि ने मौके की नजाकत को भांपते हुए एसडीएम को एक ज्ञापन दिया जिसमें शराब माफिया से उनकी जान को खतरा होने की बात कही गई थी। अगले ही दिन एसडीएम ने ज्ञापन को वरीयता देते हुए रानीखेत के कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को इस बाबत जांच करने और दोषी पाए जाने वालों को कानून सम्मत सजा देने की संस्तुति की। साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षा मुहैया कराने को निर्देश दिये। लेकिन रानीखेत के कोतवाली प्रभारी ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के निर्देशों का पालन करना तक उचित नहीं समझा। 

 

७ जून को ललित मोहन करगेती जमानत पर रिहा होकर वापस गांव आ गया। ग्रामीणों के अनुसार रिहा होकर आते ही उसने शराब का धंधा उसी पुराने ढर्रे पर शुरू कर दिया। इसी बीच स्याल्दे के ब्लॉक प्रमुख राधे रमण उप्रेती सोनी गांव पहुंचे। ब्लॉक प्रमुख और शराब का यह अवैध व्यापारी आपस में रिश्तेदार हैं। इसी कारण उप्रेती पूरी तरह करगेती के बचाव में उतर आए। हालांकि राधे रमण अभी अपने राजनीतिक जीवन में कुछ खास उपलब्धि हांसिल नहीं कर सके हैं लेकिन अपने छोटे से पद का गुरूर उन पर इतना सवार था कि वे करगेती के साथ वह ८ जून को सोनी के ग्राम प्रधान को धमकाने पहुंच गए। वहां उपस्थित लोगों के अनुसार ब्लॉक प्रमुख के साथ करगेती ने सहित गाली-गलौज करते हुए ग्राम प्रधान सहित पूरे गांव को जान से मारने की धमकी दी। 

पुलिस को इसकी सूचना दी गई तो वह इस बार फिर देर से पहुंची। मौका-ए-वारदात पर पहुंचते ही पुलिस ने से उप्रेती और करगेती को जाने दिया। पुलिस के व्यवहार से खफा ग्रामीणों ने दोनों को वहां वापस लाने और फिर उन पर उचित कार्रवाई करने की मांग को लेकर रानीखेत- रामनगर नेशनल हाइवे पर धरना दिया। जिससे घंटों लंबा जाम लग गया। इसके बाद पुलिस ने इस आश्वासन के साथ जाम खुलवाया कि वह उक्त दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। लेकिन वादे के उलट पुलिस ने ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ मामूली धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। रिहा होते ही ब्लॉक प्रमुख ने इस ग्राम प्रधान सहित उनकी पत्नी मां और भाई के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज करा दिया। 

 

जनता के खिलाफ पुलिस के उठाए गए कदम का कारण दरअसल स्याल्दे के ब्लॉक प्रमुख राधे रमण उप्रेती का राजनीतिक रसूख है। वह भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और ऐसा कहा जाता है कि विधानसभा में बैठे एक बड़े भाजपा नेता का उनके सिर पर हाथ है। जिसकी बदौलत वह शराब का अवैध कारोबार कर रहा है। स्याल्दे में राधे रमण उप्रेती की एक शराब की दुकान है। 

 

आबकारी विभाग से लाइसेंस प्राप्त यह दुकान वास्तव में एक बड़े क्षेत्र में शराब तस्करी का केंद्र बताई जाती है। इस दुकान से ही आज स्याल्दे और आस-पास के गांवों में शराब चाय और परचून की दुकानों में भी पहुंच चुकी है। ब्लॉक प्रमुख की शह पर ललित मोहन करगेती जैसे कई अन्य सीना चौड़ा करके शराब बेच रहे हैं। लेकिन स्थानीय पुलिस आंख कान और मुंह बंद करके बैठी रह जाती है। कहा जाता है कि उत्तराखण्ड के गांव-गांव में राजनेताओं की शह पर और पुलिस प्रशासन के सहयोग से बिक रही यह शराब हरियाणा से तस्करी के जरिए लाई जाती है। वहां इसकी कीमत ६० रुपए होती है जिसे यहां २५० से ३०० रुपए प्रति बोतल के हिसाब से बेचा जाता है। शराब के इस अवैध व्यापार की दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की में पुलिस और पटवारी व्यवस्था का भरपूर सहयोग है। इसके लिए उन्हें मोटी रकम चुकाई जाती है। 

 

रानीखेत पुलिस की लापरवाही का आलम यह है कि उसने शराब माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बजाय उन पर आबकारी अधिनियम की मामूली सी धारा लगाकर जमानत दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। जबकि लोग अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामले दर्ज करने की मांग करते रहे हैं। शराब माफिया पुलिस की इस कार्यशैली का जमकर फायदा उठाते रहे हैं। सोनी गांव के ही ललित मोहन कारगेती को लें बताया जाता है कि इससे पहले भी यह व्यक्ति अवैध शराब के कारोबार में कई बार जेल जा चुका है। लेकिन पुलिस से मिलीभगत के कारण वह छूटकर आते ही फिर से उसी काम में जुट जाता है। ग्रामीण पुलिस पर आरोप लगाते हैं कि उसे आंखें बंद करने के एवज में मोटी रकम पहुंचाई जाती है।

 

दि संडे पोस्ट ने इस मामले की गहराई से छानबीन की तो पता चला कि स्याल्दे के ब्लॉक प्रमुख राधे रमण उप्रेती ही वह शख्श हैं जिनके इशारे पर यह अवैध कार्य किया जा रहा था। गांव-गांव में ऐसे अड्डे बनाए हुए हैं जिन पर वह तस्करी के जरिए हरियाणा की शराब पहुंचाते हैं। 

 

सोनी गांव के इस मामले में भाजपा नेता के शामिल होने के कारण इसने राजनीतिक रंग भी लिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रानीखेत के गांधी चौक पर भाजपा के स्थानीय विधायक अजय भट्ट का पुतला जलाया और आरोप लगाया गया कि भाजपा शराब माफिया के साथ है इसलिए नेता प्रतिपक्ष के नेता फोन बंद करके बैठे हैं। लेकिन बकौल अजय भट्ट जब यह घंटना हो रही थी वह गोवा में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में थे जिस कारण उनका फोन बंद था। पिछले दो माह में अजय भट्ट का रानीखेत में विरोधियों द्वारा पुतला दहन का यह दूसरा मामला है। इससे पहले चरस की अवैध तस्करी में भी दो लोगों को पकड़ा गया था। जिसमें एक आरोपी भाजपा का नेता था। इस मामले में भी अजय भट्ट का गांधी चौराहे पर पुतला फूंककर यह प्रचारित किया गया कि चरस तस्कर उनके समर्थक थे।

 

 

बात अपनी अपनी

सोनी गांव के लोगों ने अवैध शराब का धंधा करने वालों को गिरफ्तार कराकर मिसाल पेश की है। मैं ग्रामीणों के साथ हूं। अवैध शराब का काम करने वाला कोई भी मेरा रिश्तेदार नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं खुद ऐसे लोगों को सजा दिलवाने के लिए धरने-प्रदर्शन करूंगा।

अजय भट्ट नेता प्रतिपक्ष 

हमने ७ जून को ही पुलिस की लिखित सूचना दे दी थी कि सोनी ग्राम के लोगों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। इसके लिए निर्देश भी दे दिए गए थे। लेकिन पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरती। 

डॉ. अहमद इकबाल संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत 

ग्रामीणों को कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने की जरूरत नहीं थी। बेवजह जाम लगाया गया और एक जनप्रतिनिधि के साथ मारपीट भी की गई। इसके चलते ही उन पर मामले दर्ज हुए। 

कमलराम आर्य कोतवाल रानीखेत 

सोनी गांव के लोगों की बजाए पुलिस एक ऐसे शराब माफिया का साथ दे रही है जो युवा पीढ़ी को नशे का आदी बना रहा है। हमारा हौसला-अफजाई करने के बजाए पुलिस- प्रशासन हम पर झूठे मुकदमे लगाकर शराब माफिया का साथ दे रहा है। मुझे मेरे परिवार और आंदोलन में शामिल सभी ग्रामीणों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहा है।

हरीश उपाध्याय ग्राम प्रधान सोनी

 

 

चाय से सस्ती शराब

देश के महानगरों में लोगों को कई जगहों पर १० रुपए में चाय तक नहीं मिल पाती लेकिन उत्तराखण्ड में ऐसा बस १० रुपए दीजिए और एक पैग शराब आपके लिए हाजिर हो जाती है। ललित मोहन करगेती की तथाकथित चाय की दुकान पर इस तरह से बिक रही शराब की पहुंच यहां के गरीबों और छोटे-छोटे बच्चों तक है। मात्र डेढ हजार की आबादी वाले सोनी गांव में कई युवाओं को इस शराब ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। शराब की लोगों तक इस आसान पहुंच के कारण कहीं न कहीं इसका कुप्रभाव पूरे समाज पर पड़ रहा है और पुलिस-प्रशासन पटवारी और दूसरे जिम्मेदार लोग आंखों में पट्टी बांध कर बैठे हैं। ऐसे में जब इस कुव्यस्था के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोला तो पुलिस ने कानूनी दांवपेंचों से उन्हें ही सलाखों के पीछे करने की योजना तैयार कर ली। कुछ ग्रामीण युवाओं के खिलाफ नेशनल हाइवे में जाम करने का केस दर्ज पुलिस के माफिया की कठपुतली होने की पुष्टि करता है। सभी जानते हैं कि जाम महिला मंगल दल ने लगाया था न कि ग्रामीण युवाओं ने।

 

आकाश नागर साथ में रवि जोशी

 
         
 
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