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जनपदों से 
 
बूंद बूंद को मोहताज

पिथौरागढ़। सरयू रामगंगा काली गौरी और धैली जैसी एक दर्जन से अधिक नदियों का उद्गम स्थल पिथौरागढ़ आज खुद बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। पांच लाख की आबादी वाले इस जनपद को अपनी जरूरत के हिसाब से सिर्फ आधा पानी ही मिल पा रहा है।  

 

 

पिथौरागढ़ नगर सहित आस-पास के गांवों की कुल आबादी लगभग एक लाख है। इस आबादी को पानी उपलब्ध कराने के लिए घाट ठुलीगाड़ और रई झील से तीन पेयजल योजनाएं संचालित हैं। लेकिन ये परियोजनाएं क्षेत्र की पानी की मांग के अनुरूप काफी साबित नहीं हो पा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन १३५ लीटर पानी की जरूरत होती है। लेकिन पिथौरागढ़ की हालत यह है कि यहां औसतन हर व्यक्ति को सिर्फ ४० लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। पिथौरागढ़ नगर के लिए कुल १०.१० मीलियन लीटर पर डे (एमएलडी) पानी की जरूरत है। लेकिन तीनों योजनाओं से सिर्फ ४ से ४.५ एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। वर्तमान में ठुलीगाड़ से १.५० से २.०० एमएलडी घाट से १.५० से २.०० एमएलडी रईगाड़ से ०.५० एमएलडी पानी उपलब्ध हो पा रहा है। नगर के ७ हजार से अधिक पेयजल कनेक्शनधारी पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। यही हाल जनपद के डीडीहाट और धारचूला नगरों में भी है। डीडीहाट के नगरीय क्षेत्र में आबादी के हिसाब से १.२८ एमएलडी पानी की जरूरत है। इसके सापेक्ष ०.७१ एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है। काली नदी के किनारे बसे धारचूला नगर की जनता को भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है। 

 

 

गौरतलब है कि पिथौरागढ़ नगर की प्यास बुझाने के लिए सर्वप्रथम वर्ष १९७८-७९ में ३ करोड़ ६६ लाख रुपए की लागत से घाट नामक स्थान पर रामगंगा नदी से २० किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर शहर में पानी पहुंचाने का काम किया गया था। इस योजना के रख-रखाव में ही हर वर्ष २० लाख से अधिक रुपए खर्च होते रहे हैं। लेकिन अब यह योजना दम तोड़ने लगी है।  पानी की किल्लत को देखते हुए वर्ष २००२ में ठूलीगाड़ पम्पिंग योजना बनाई गई। ४ करोड़ ९५ लाख रुपयों से बनी यह योजना एक हद तक पानी पहुंचा रही है लेकिन इसका पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। जिस जगह से योजना बनी है वहां पर पानी प्रदूषित हो चुका है। नगर की बड़ी आबादी हैंडपंप पर निर्भर है। लेकिन भू-जल स्तर गिरने के चलते अब अधिकांश हैंडपंप पानी नहीं उठा पा रहे हैं। अधिकांश हैंडपंपों का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। पेयजल संकट झेल रहे नगर के लिए राहत की बात यह है कि शासन द्वारा आंवलाघाट से २२ करोड़ रुपए नई लिफ्ट योजना के लिए स्वीकृत हुए हैं। लेकिन इस पर भी अभी तक काम नहीं शुरू हो पाया है। 

 

 

पेयजल के मामले में जनपद के बेरीनाग और गंगोलीहाट की स्थिति और भी दयनीय है। इन कस्बों में भी लोगों को जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पाता। गंगोलीहाट और बेरीनाग की जनता लंबे समय से पानी के लिए जद्दोजहद कर रही है। बेरीनाग के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि अब जाकर वहां लिफ्ट योजना के लिए धनराशि स्वीकृत हो गई है। गंगोलीहाट के १६ राजस्व गांवों की ८६ बस्तियों की प्यास बुझाने के लिए सालीखेत से बनी १२.७९ करोड़ रुपए लागत वाली पंपिंग योजना अभी भी पूरी नहीं हो पाई है। कई मोहल्लों तक पाइप लाइन न बिछाये जाने से लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बढ़ती गर्मी की वजह से पानी की कमी की समस्या और विकराल रूप धारण करती जा रही है। 

 

 

दरअसल पानी की बबार्दी भी कमी का एक बड़ा कारण है। पिछले वर्ष जून माह में जल संस्थान ने बर्बाद हो रहे पानी को लेकर एक सर्वेक्षण कराया था। जल संस्थान ने उन स्रोतों नौलों धारों को चिहिन्त किया जिसमें पानी बर्बाद होता है। पिथौरागढ़ में ७७ ऐसे स्रोत पाए गए जिनसे ३७२०००० लीटर पानी बर्बाद होता है। बर्बाद हो रहे इस पानी के प्रबंधन का प्रस्ताव किया गया था लेकिन उसमें आगे क्या हुआ किसी को नहीं पता। इस योजना में जनपद के ७१ गांव शामिल भी किए गए थे। लेकिन काम नहीं हुआ। दूसरी ओर सबसे महंगा पानी भी पिथौरागढ़ वाले ही पी रहे हैं। जल संस्थान के आंकड़ों पर गौर करें तो संस्थान पिथौरागढ़ शहर में ५.६ एमएलडी पानी की जलापूर्ति करता है जिसमें ६७८.२ लाख वार्षिक व्यय है जो ३३.१७ प्रति किलोलीटर का व्यय होता है। डीडीहाट में प्रतिदिन ०.६ एमएलडी जलापूर्ति होती है लेकिन यहां वार्षिक व्यय २१ लाख रुपए यानी प्रति किलोलीटर व्यय ५.९० रुपए व धारचूला नगरीय क्षेत्र में प्रतिदिन ०.६५ एमएलडी जलापूर्ति पर वार्षिक व्यय २२.५ लाख रुपये और प्रति किलो लीटर व्यय ५.९० रुपए पड़ रहा है। उत्तराखण्ड में पानी की सप्लाई में मानक से कम पानी देने वाले नगरों में पिथौरागढ़ भी शामिल है। पिथौरागढ़ जिले के पिथौरागढ़ और डीडीहाट डिवीजनों में ६४९ ग्रामीण तीन नगरीय पेयजल योजनाएं हैं। इनमें ५१३ चालू ३३ आशिंक रूप से चालू और तीन बंद हैं। जल संस्थान के ताजा सर्वे में जनपद के ९ मोहल्ले और ८ गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। लेकिन हकीकत में जल संकट से ग्रस्त गांवों और मोहल्लों की संख्या इससे कहीं अधिक है। विभाग लीकेज ठीक करने का दावा करता है लेकिन नगर के कई हिस्सों में पानी बर्बाद हो रहा है। क्षेत्रीय विधायक मयूख महर कहते हैं कि पिथौरागढ़ नगर के लिए एक वैकल्पिक योजना को देखते हुए हमने आंवला घाट से नई योजना के लिए धन स्वीकृत कराया है। आने वाले वर्षों में पानी की किल्लत से शहर के लोगों को राहत मिल जाएगी। विधायक निधि से २२ लाख खर्च कर २ टैंकर भी खरीदे गए हैं जिन्हें जल संस्थान को सौंप दिया गया है। दूसरी ओर पूर्व जिलाधिकारी सीएमएस बिष्ट कहते हैं कि लाइन लीकेज ठीक कराई जा रही हैं। पेयजल पंपों को दुरुस्त कर पेयजल व्यवस्था में सुधार लाया जा रहा है। अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई की जा रही है। उधर जल संस्थान के अधिसाशी अभियंता वीके मिश्रा बताते हैं कि घाट पम्पिंग योजना की खामियां पूरी कर ली गई हैं। अधिकांश लीकेज ठीक कराए जा चुके हैं। पेयजल वितरण की टाइमिंग बनाई जा रही है। टैंकरों के जरिए भी लोगों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इन सभी वादों के इतर सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार जोशी कहते हैं कि पेयजल एक बड़ी समस्या का रूप ले चुका है। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता पर गंभीरतापूर्वक नहीं सोचा जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो जल्द ही यहां की जनता पानी की समस्या को लेकर सड़कों पर भी उतरेगी।

दिनेश पंत

 

सुमाड़ी में ही एनआईटी

पौड़ी। लंबे समय से सुमाड़ी में एनआईटी के स्थायी परिसर को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति का संघर्ष आखिर रंग ला ही गया। अब सुमाड़ी में जल्द ही एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण होने की उम्मीद जगी है। पिछले दिनों प्रस्तावित भूमि को लेकर स्थलीय निरीक्षण को पहुंची मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पांच सदस्यीय टीम ने इसकी मौखिक स्वीकूति दे दी है। मंत्रालय के तकनीकी शिक्षा निदेशक राजू श्रीनिवासन समेत पांच सदस्यीय टीम ने सुमाड़ी और अन्य क्षेत्रों के गांवों की भूमि का निरीक्षण किया। १२५ हेक्टेयर भूमि के करीब ११९ हेक्टेयर राजस्व भूमि लगा ७.५९६ हेक्टेयर भूमि ग्रामीणों की ओर से दान की गई है। अभी एनआईटी का अस्थायी कैम्पस श्रीनगर पॉलीटेक्निक में चल रहा है।

 

 

एनआईटी के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए १० फरवरी २०१२ से शुरू हुए आंदोलन और धरना-प्रदर्शनों में जनप्रतिनिधि सामाजिक संगठनों एवं जनसमुदाय का पूरा सहयोग रहा जिसको लेकर १८ जुलाई २०१२ से संघर्ष समिति को क्रमिक अनशन तक करना पड़ा। पौड़ी डीएम चंद्रेश कुमार यादव ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम स्थलीय निरीक्षण किया और जगह को उपयुक्त पाया। वहीं एनआईटी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनिल स्वामी का कहना है कि निरीक्षण के लिए आई टीम ने निर्माण को लेकर सहमति जताई है इससे क्षेत्र के लोग खुश हैं।

  जसपाल नेगी

 

सड़क निर्माण में धांधली

चमोली। केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने जब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की तो देश भर के साथ-साथ पहाड़ की जनता में भी आशा जगी कि उनका गांव अब सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा। इसका पूरा पैसा केन्द्र से मिलता है लेकिन समय के साथ साथ इस योजना पर भी भ्रष्टाचार की बू साफ तौर पर महसूस की जाने लगी है क्योंकि विभाग के लिये यह योजना किसी कामधेनु गाय से कम नहीं हैं। आज अधिकारी और ठेकेदार इस जनोपयोगी योजना में पलीता लगाने में लगे हैं।

 

 

सीमांत जनपद चमोली में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़कों का निर्माण नियम कानूनों का ताक पर रखकर किया जा रहा है ऐसी ही एक सड़क है गडोर-चातोली- किरूली मोटर मार्ग जिसकी कुल लम्बाई १०.१७ किमी है। यह सड़क प्रधानमंत्री सड़क योजना फेज-७ के अंतर्गत स्वीकृत है। इसका निर्माण कार्य १५ जनवरी २०११ को शुरू हो गया था और अभी तक कार्य चल रहा है। जबकि विभाग ने एक बोर्ड भी लगा दिया है कि उक्त सड़क पर कार्य १४ जनवरी २०१२ को पूरा हो चुका है। वर्तमान में इस सड़क निर्माण में लापरवाही नजर आ रही है। क्योंकि निर्माणाधीन एजेंसी ने जो स्क्रबर बनाये जा रहे हैं उसमें रेत की जगह पीली मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं यहां मानकों को ताक पर रखा गया है। सड़क कटिंग में काफी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण कार्य के कारण लोगों के सम्पर्क मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गये हैं। जिससे ग्रामीणों को पनघट से लेकर गौचर तक की आवाजाही में परेशानियां हो रही है। इसकी शिकायत कई बार करने पर भी विभागीय अधिकारी और ठेकेदार पैदल रास्ता बनाने को तैयार नही हैं। पीएमजीएसवाई के उच्चाधिकारी जल्द ही मागर् बनाने की बात कर रही है। 

 

 

जनपद चमोली में पीएमजीएसवाई के घटिया निर्माण से गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज भी बिफर पड़े उन्होंने बीते दिनों जिला सभागार में जिला अनुश्र्रवण एवं सर्तकता समिति की बैठक में पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियन्ता को सड़क निर्माण में हो रही अनियमितताओं पर गहरी नाराजगी जतायी और कड़ी फटकार भी लगायी। उन्होंने जिलाधिकारी को सभी सड़कों की जांच करने निर्देश दिए। इससे अधिकारी खासे परेशान नजर आ रहे हैं।

 

 

जहां पर दीवार निर्माण किया जाना अति आवश्यक है वहां छोड़कर जहां पर दीवार नहीं बनायी जानी है वहां बनायी जा रही है। जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया है ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने पर भी सड़कों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई जगह दीवारें बनी भी हैं तो वे बनते ही टूटने लगी हैं। इससे कभी दुर्घटना हो सकता है। सड़क का निर्माण कार्य सही नहीं होने पर आरटीओ से पास नहीं हो पायेगी जिसका खामियाजा भी आम ग्रामीणों को उठाना पड़ेगा। पीएमजीएसवाई पोखरी के अधिशासी अभियंता नरेन्द्र कुमार कहते हैं कि सड़क निर्माण में घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी मुझसे शिकायत की थी। जिसका संज्ञान लेते हुए मेरे द्वारा तत्काल साइट पर जाकर घटिया निर्माण कार्य को तुड़वाकर दोबारा से बनाने के लिए ठेकेदार को कहा गया है। 

 

 

किरूली महिला मंगल दल की अध्यक्षा शकुंतला देवी ने बताया कि गडोरा-किरूली मोटर मार्ग पर जो स्क्रबर बनाये गये है वे किसी भी समय भरभरा कर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इनको बनाने पर भारी मात्रा में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। किरूली के ग्राम प्रधान सब्बल सिंह बिष्ट कहते हैं कि सड़क निर्माण का कार्य बेहद धीमी गति से किया जा रहा है और सड़क निर्माण का कार्य भी मानकानुसार नहीं हो रहा है।

 

संतोष सिंह

 
         
 
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