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खेल-सिनेमा
 
हॉकी वर्ल्ड कप क्वालीफायर

 

हॉलैंड के शहर रोटरडम में १३ जून से २३ जून के बीच हॉकी विश्वकप राउंड-३ के मैच यानी सेमीफाइनल खेले जाने हैं। इसके वास्ते ही भारतीय खिलाड़ियों के लिए अभ्यास शिविर का आयोजन किया जा रहा है और वे स्पेशल टूअर पर भी भेजे जा रहे हैं। इसी सिलसिले में पिछले दिनों उन्हें खेल वातावरण और माहौल समझने के लिए हॉलैंड भेजा गया था। फिर बेंगलुरु में भी अभ्यास मैच के माध्यम से तैयारियां जोरों पर करवाई जा रही हैं। ये सब तैयारियां लंदन ओलंपिक की तरह इस बार भी भारत की भद्द न पिट जाए इसके लिए की जा रही हैं। फिर भी सवाल यही उठता है कि क्या भारतीय टीम रणनीति के मुताबिक विपक्षी टीमों पर हावी हो पाएगी।

 

साल की सबसे बड़ी चुनौती से जूझने का वक्त जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है वैसे-वैसे भारतीय हॉकी टीम अपनी रणनीति को दोबारा धार देने की तैयारी में जुट गई है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदारा सिंह का कहना है कि हालिया नीदरलैंड दौरे में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में अभी कुछ खामियां हैं और अगले महीने होने वाली विश्व लीग के तीसरे दौर से पहले इनमें सुधार करना होगा। भारत ने नीदरलैंड दौरे पर मेजबान टीम को एक मैच में २-० से और दूसरे मैच में ४-० से पराजित किया था। सरदारा ने कहा कि यह दौरा बहुत अच्छा था और हॉकी इंडिया के हाई परफॉर्मेंस निदेशक रोलैंट ओल्टमेंस ने सुनिश्चित किया था कि हम मजबूत टीमों से खेलें। हमने बहुत अर्से बाद नीदरलैंड को हराया। हमने आक्रामक हॉकी बॉडी प्ले और उनके बराबर रफ्तार से खेलने का अभ्यास किया। यह दौरा विश्व लीग के अभ्यास जैसा था जो रोटरडम में खेला जाएगा।

 

जून महीने में रोटरडम टूर्नामेंट में भारत के अलावा नीदरलैंड ऑस्ट्रेलिया स्पेन न्यूजीलैंड और आयरलैंड हिस्सा लेंगे। अगर इन टीमों के बीच भारत शीर्ष टीम के रूप में उभरता है तो उसे लीग के फाइनल दौर का टिकट भी मिल जाएगा। साथ ही अगले साल हॉलैंड के ही हेग में होने जा रहे हॉकी विश्वकप के लिए भी भारत की एक सीट पक्की हो जाएगी। भारतीय कप्तान ने कहा कि इस टीम में कई युवा खिलाड़ी हैं जो अनुभव से सीख रहे हैं। अहम बात यह है कि रणनीति पर मैदान में अमल दिख रहा है लेकिन कई क्षेत्रों में और मेहनत करनी होगी। विश्व लीग में हमें मजबूत प्रतिद्वंद्वियों से भिड़ना है लिहाजा हमें अपने खेल में और पैनापन लाना होगा।

 

विश्व कप क्वालिफाइंग का सबसे महत्वपूर्ण स्टेज होने के कारण ही सेमीफाइनल दौरा इस साल की सबसे महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय टीम पूरी तरह तैयार रहे इसी कारण मई माह के शुरू में उसे रोटरडम शहर भेजा गया था। जहां उसे स्थानीय मौसम और माहौल को जानने का मौका मिला। साथ ही भारतीय हॉकी टीम के कोचिंग स्टाफ को भी टीम संयोजन और रणनीति में दोहराई जा रही गलतियों को जानने का मौका मिला। इतना ही नहीं इस दौरे पर गई भारतीय हॉकी टीम ने अच्छा प्रदर्शन भी किया था। भारत ने मेजबान टीम को दो मैचों में हराया और पांच शीर्ष क्लबों के खिलाफ भी खेला। मगर इन मैचों में भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ रणनीतिक गलतियां भी कीं। इस दौरे के बाद कोच माइकल नोब्स का मानना है कि भारतीय खिलाड़ी गेंद को स्टिक से रोकने के बाद पहले चारों तरफ देखते हैं और फिर आगे पास करते हैं। नोब्स के मुताबिक स्टिक से गेंद लगने और पास करने के बीच के समय का फायदा विपक्षी खिलाड़ी गेंद छीनने में उठा लेते हैं। जबकि अन्य टीमों के खिलाड़ी गेंद के स्टिक से लगने से पहले ही मानसिक रूप से उसे पास करने के लिए तैयार रहते हैं। इसके बाद इन्हीं गलतियों को दूर करने का काम बगंलुरु अभ्यास शिविर में तेजी से चल रहा है।

 

खिलाड़ियों से हो रही गलतियां

 

  • भारतीय टीम लगातार ७० मिनट तक आक्रामक हॉकी का प्रदर्शन नहीं कर पाती।
  • सबसे बड़ी कमी गेंद के हॉकी स्टिक से लगने के बाद उसे अपने पास रोके रखने की है।
  • यूरोपियन देशों के खिलाड़ी स्टिक से गेंद लगते ही उसे तय दिशा में पास कर देते हैं।
  • भारतीय खिलाड़ी गेंद को रोककर चारों तरफ देखने के बाद ही पास देने की दिशा तय करते हैं।
  • विदेशी रणनीति विपक्षी खिलाड़ियों की स्टिक से गेंद लगते ही उसे घेर लेने की होती है।

 

हरिनाथ कुमार

 

हॉट हॉट पोस्टर्स

किसी भी फिल्म की रिलीज से पहले उसका पोस्टर रिलीज किया जाता है। यह सिने प्रेमियों के दिमाग में फिल्म का पहला इम्प्रेशन होता है। पोस्टर शुरुआत से ही बनाए और लगाए जाते रहे हैं। सिनेमा के लंबे सफर में पोस्टर ने कई बार रूप रंग बदला है। कभी इन्हें हाथ से कलाकार बनाते थे तो अब इन्हें प्रिंट किया जाने लगा है। कागज से लेकर रंगों तक सब कुछ बदल जाने के बाद भी आज पोस्टर बनाए जाने का उद्देश्य पहले जैसा ही है जिसमें फिल्म के नाम के साथ कुछ ऐसा दिखाया जाए जो दर्शकों को आकर्षित कर सके। जब ७० के दशक में सिने प्रेमियों पर एंग्री यंग मैन का खुमार था तो सभी फिल्मों के पोस्टर मारधाड़ के सीन से पटे होते थे। राजकपूर के दौर में फिल्मों के पोस्टर समाज की स्थिति और नायक के संद्घर्ष को दिखाते थे। नए बॉलीवुड में पोस्टरों पर यह जगह बोल्ड और हॉट सीन ने ले ली है। इस तरह के पोस्टरों को सिनेमाद्घर में भीड़ खींचने की गारंटी माना जाने लगा है। पोस्टर अगर ज्यादा हॉट हुआ तो यह अभिनेत्री को चर्चा में लाने का काम भी करता है। इसी तरह के एक पोस्टर ने आजकल कमल हासन की बेटी श्रुति हासन को चर्चा में ला दिया है। श्रुति साउथ इंडस्ट्री से बॉलीवुड की ओर कदम बड़ा रही हैं और आने वाली फिल्म डी डे उनके हिन्दी सिनेमा में सफल और असफल होने की कहानी लिखेगी। 

 

फिल्मों के पोस्टरों पर हॉट सीन के सिलसिले को भट्ट कैंप बहुत खूबसूरती से निभा रहा है। शायद यही कारण है कि छोटे बैनर भी इसे सफलता का मूल मंत्र मान चुके हैं। भट्ट कैंप की पिछली कुछ फिल्मों के पोस्टर तो ऐसे रहे हैं कि फिल्मों से ज्यादा चर्चित और हिट हुए। सनी लियोन को बड़े पर्दे पर प्रोजेक्ट करने वाली फिल्म जिस्म-२ के पोस्टर अभी भी सबके दिमाग में ताजा है। पोस्टर रिलीज होने के बाद सबने ये कयास लगाए कि इसमें सफेद कपड़े में लिपटी युवती सनी लियोन है या कोई और। इनकी दूसरी फिल्में जिनमें राज सीरीज मर्डर सीरीज और जिस्म सीरीज शामिल हैं अधिकतर अपने बोल्ड और हॉट पोस्टरों के लिए याद की जाती हैं। महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म हेट स्टोरी याद हो न हो उसका पोस्टर जरूर सबको याद होगा जिसने पाउली डैम को रातों-रात चर्चा में ला दिया। हालांकि फिल्म और अभिनय दोनों में मात खाने के बाद आज पाउली सिर्फ उस पोस्टर के लिए ही याद की जाती हैं जिसमें वह सेमी न्यूड थीं। महेश भट्ट की एक और फिल्म ब्लैक मनी भी अपने पोस्टर के लिए चर्चित रही। इस पोस्टर में कुनाल खेमू सेमी न्यूड होकर एक बाथ टब में लेटे हैं और पैसों से भरे इस बाथ टब के बगल में कई सारी बिकनी बेबीज उनके साथ नहा रही हैं। 

 

भट्ट कैंप से बाहर आते हैं। मल्लिका शेहरावत की बॉलीवुड में जगह बनाने की आखिरी कोशिश हिस्स फिल्म थी। फिल्म का नाम लेते ही मल्लिका का वो पोस्टर याद आता है जिसमें वो एक ऐसी सर्प कन्या के रूप में थीं जो लगभग न्यूड सी दिखाई दे रही थी। हाल ही में सुधीर मिश्रा की फिल्म इंकार आयी थी। इस फिल्म के पोस्टर में अर्जुन रामपाल और चित्रांगना सेन एक ही बाथ टब में बैठे दिखाए गए। लेकिन ऐसा कोई भी सीन फिल्म में नहीं था। इस हॉट पोस्टर का सीधा सा मतलब दर्शकों की आंखों को पोस्टर पर टिकाना था। 

 

हाल में कुछ ऐसी अभिनेत्रियों की फिल्में आने वाली हैं जिन्होंने यहां जगह बनाने के लिए कपड़े उतारने की कोई सीमा नहीं छोड़ी। उनकी फिल्मों के पोस्टर भी अपने महत्व को साफ कहते हैं। कई महीने पहले पूनम पांडे अभिनीत नशा का पोस्टर रिलीज किया गया था। पोस्टर में नशा लिखने के लिए देह का बहुत खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा वीना मलिक की फिल्म जिंदगी ५०-५० का पोस्टर भी वीना के इरादों की कहानी कहता है। इसके पोस्टरों में वीना ने अलग-अलग एंगल से अपने जिस्म को दिखाने की कोशिश की है। 

 

खैर अब बारी श्रुति हासन की है। फिल्म डी डे एक मल्टी स्टारर फिल्म है जिसमें ऋषि कपूर और इरफान खान जैसे सशक्त अभिनेता हैं और फिल्म हिट होगी इसमें कोई संशय भी नहीं है। लेकिन श्रुति के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बॉलीवुड की ओर उठाया गया जरूरी कदम है। जिसमें वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहतीं। एक वैश्या के रोल में उन्हें भरपूर मौका दिया गया है कि वो बॉलीवुड में अपने पैर जमाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर सकें। हालांकि इससे पहले भी श्रुति हिन्दी फिल्में कर चुकी हैं लेकिन कहीं भी उनके पास न तो ऐसा मौका था और न ही ऐसी फिल्म। अब वह इस मौके को हर हाल में भुनाना चाहेंगी जो कि फिल्म के पोस्टरों से साफ है। 

रवि जोशी

 
         
 
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