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खास खबर 
 
भ्रष्टाचार के ट्रस्ट

हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद विश्व प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर क्षेत्र में न तो अवैध निर्माण रुके और न ही मंदिर का संचालन ठीक ढंग से हो पा रहा है। यहां नियम विरुद्ध बने ट्रस्टों के संचालकों ने पहले तो लीज की जमीन पर अवैध निर्माण करवाकर मोटी कमाई की और अब वे मंदिर पर अपना- अपना अधिकार जताने के लिए झगड़ रहे हैं। स्थानीय लोग खुलकर कहने लगे हैं कि यह झगड़ा मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले लाखों रुपए और आभूषणों के लिए हो रहा है

 

धर्मनगरी हरिद्वार में धर्म के नाम पर अंधेर हो रहा है। यहां विश्व प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर में तमाम कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर कुकुरमुत्तों की तरह ट्रस्ट पैदा हो गए हैं। लीज की जमीन पर नियम विरुद्ध बने इन ट्रस्टों के संचालकों ने यहां ७० से अधिक अवैध निर्माण करा लिये हैं। यही नहीं मंदिर पर अपना-अपना अधिकार जमाने के लिए ट्रस्टों के बीच जो होड़ मची उसके चलते गुटबाजी भी पनपी है। श्रद्धालु इससे बेहद आहत हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अवैध निर्माणों के खिलाफ हाईकोर्ट तक गये। लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद न तो अवैध निर्माण हटाये गए और न ही उन पर रोक लग पाई।

 

गौतरलब है कि चण्डी देवी मंदिर के लिए श्रीगंगापुरी और रघुनाथ गिरी के नाम वर्ष १९२७ में वन क्षेत्र की भूमि लीज पर आवंटित की गई थी। तब इसका लीज रेंट चार आना यानी पच्चीस पैसा सलाना था। लीज में स्पष्ट किया गया था कि मंदिर के अलावा यहां सिर्फ महंत का आवास बनाया जा सकेगा। लेकिन मंदिर के संचालकों ने तमाम नियम एवं कानूनों की परवाह न करते हुए लीज क्षेत्र में ७० से अधिक स्थाई और अस्थाई निर्माण करा दिए। यहां बनाए गए आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों के मालिकों से 'पगड़ी' के नाम पर मोटी रकम वसूली गई। जबकि उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश हैं कि लीज क्षेत्र में मंदिर के अलावा निर्माण नहीं हो सकते। १२ दिसंबर १९९६ के एक आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में वन संरक्षण अधिनियम १९८० के प्रावधानों के अधीन भारत सरकार की अनुमति के बिना गैर वानिकी कार्य नहीं किए जा सकते हैं। चण्डी देवी मंदिर परिसर में जब अवैध निर्माणों का सिलसिला बरकरार रहा तो २९ मई १९९७ को हरिद्वार के उप प्रभागीय वनाधिकारी किशन चंद ने अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के उद्देश्य से स्थानीय पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा। उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को १६ मई १९९७ को रेंज अधिकारी श्यामपुर द्वारा लिखे गये पत्र की भी याद दिलाई। इसके बाद भी अवैध निर्माण करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा नहीं कसा। फलस्वरूप अवैध निर्माणों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पर्यावरणविदों की मानें तो जिस पहाड़ी पर चण्डी देवी का मंदिर स्थित है उस पर अधिक निर्माण होना खतरे से खाली नहीं है। यह पहाड़ी अधिक बोझ सहन न करने की स्थिति में कभी भी दरक सकती है। सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बताते हैं कि चण्डी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। वे यहां दान देते हैं व चढ़ावा चढ़ाते हैं। दान व चढ़ावे की सामग्रियों पर अपना-अपना मालिकाना हक जमाने की होड़ लगी रहती है। इसके चलते ही यहां एक नहीं बल्कि तीन-तीन ट्रस्ट अस्तित्व में आ गए हैं। ये मां चण्डी देवी परामर्थ ट्रस्ट मां चण्डी देवी टैम्पल ट्रस्ट और मां अंजनी देवी मंदिर ट्रस्ट हैं। ये सभी ट्रस्ट अवैध रूप से बनाए गए हैं क्योंकि लीज की जमीन पर बने भवन आदि को ट्रस्ट के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। इस बाबत समाज सेवी जेपी बडोनी ने हरिद्वार स्थित उपनिबंधक फर्म सोसायटी एण्ड चिट्स कार्यालय से ट्रस्टों से संबंधित जानकारी ली जिसमें किसी भी ट्रस्ट को चंडी देवी मंदिर का अधिकूत ट्रस्टी नहीं बताया गया था। 

 

सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने इस मुद्दे को लेकर उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। जिसमें हाईकोर्ट ने अवैध ट्रस्टियों पर कार्रवाई करने के साथ ही मां चण्डी देवी मंदिर ट्रस्ट को सुचारू रूप से संचलित करने के लिए एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए। कमेटी में हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारियों को भी नामित करने के आदेश दिए गये थे। इसी के साथ हाईकोर्ट ने तय किया कि आगे से मंदिर प्रांगण में दान पात्र नहीं रखे जायेंगे बल्कि दानी श्रद्धालुओं की पर्ची कटवाई जायेगी। यह सब जिलाधिकारी की देखरेख में किए जाने और उन्हें वित्त नियंत्रक बनाए जाने के आदेश भी हाईकोर्ट ने दिए थे। तीन जनवरी २०१२ को दिए गए हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार ने एक चार सदसीय समिति का गठन कर दिया। जिससे अपर जिलाधिकारी (वित्त पुलिस क्षेत्राधिकारी ट्रेजरार और नगर पालिका (वर्तमान में निगम के लेखाधिकारी को सदस्य बनाया गया है। लेकिन जिलाधिकारी ने इस समिति से अपने आपको बचाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी इसमें शामिल नहीं कराया है। जिन चार लोगों की समिति बनाई गई है वे मां चंडी देवी मंदिर मामले में कभी गंभीर नहीं हुए हैं। यहां तक कि सदस्यों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि दान की रसीदें छपवानेकाटने और उनका रिकॉर्ड रखने का काम वे खुद करेंगे या यहां अस्तित्व में आए ट्रस्ट। बावजूद इसके दानदाताओं की रसीद काटी जा रही है और मां चंडी देवी मंदिर परमार्थ ट्रस्ट द्वारा ऑडिट पूर्ण किए जाने का दावा भी किया जा रहा है। इसके आधार पर बडोनी ने हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ट्रस्टिों के खिलाफ तहरीर दी। हरिद्वार पुलिस ने इस संबंध में थाना श्यामपुर में मुकदमा संख्या- १२/१३ के तहत राम पुरी संजय प्रकाश पुरी श्रीकांत पुरी दिनेश पुरीराम प्रकाश पुरी आदि के खिलाफ धारा ४१९ ४२० ४६६ ४६७ ४६८ ४७१ ४७४ ५०६ तथा १२०बी के तहत मामला दर्ज करा दिया। मजे की बात यह है कि हरिद्वार पुलिस ने सभी पांच लोगों को आरोपी बनाते हुए उन पर आधा दर्जन से अधिक धाराओं में मामला तो दर्ज करा दिया लेकिन कार्रवाई करना भूल गई। आज दो माह बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई।

 

 

बात अपनी अपनी

मैंने अभी ही चार्ज संभाला है। मुझे इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं इस बाबत अधिकारियों से बात करूंगी।

निधि पाण्डे जिलाधिकारी हरिद्वार

 

हमने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया है। दान पात्र हटा दिए गए हैं और दानदाताओं को चण्डी देवी मंदिर परमार्थ ट्रस्ट द्वारा रसीद दी जा रही है। जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी अवैध है। यह एक पब्लिक ट्रस्ट है। हम उसका संचालन कर रहे हैं। दिनेश गिरी पुत्र होशियार गिरी जबरन हमारा रिश्तेदार बन रहा है और मंदिर पर अपना अधिकार जता रहा है। कुछ श्रद्धालु ऐसे होते हैं जो नकली सोने-चांदी का चढ़ावा कर देते हैं। उनकी यही करतूत एडीएम के छापे में उजागर हुई है। 

रोहित गिरी संचालक चण्डी देवी मंदिर ट्रस्ट

 

नियम है कि लीज की संपत्ति पर कोई ट्रस्ट कायम नहीं हो सकता है फिर भी यहां तीन- तीन ट्रस्ट बना दिए गए। सभी फर्जी ट्रस्ट हैं जिनकी नजर चंडी देवी के लाखों रुपये के चढ़ावे पर है। पहले तो ये सभी मिल-बांट कर इसे खा रहे थे। लेकिन अब इनमें हिस्सेदारी को लेकर टकराव होने लगा तो हमें मजबूरन हस्तक्षेप करना पड़ा। चंडी देवी मंदिर एक सार्वजनिक धार्मिक स्थल है। यह सरकार के संरक्षण में चलना चाहिए। जिस दिन मंदिर निजी हाथों से निकल जायेगा यहां चढ़ावे की बंदरबांट भी बंद हो जायेगी। इसलिए हम चाहते हैं कि वैष्णो देवी मंदिर की तरह ही मां चंडी देवी मंदिर भी श्राइन बोर्ड के अंतर्गत सुचारू हो। 

जेपी बडोनी सामाजिक कार्यकर्ता

 

 

चढ़ावे में नकली आभूषण

क्या कोई यह कल्पना कर सकता है कि श्रद्धालु अपने ईष्ट देवी-देवताओं को नकली आभूषण चढ़ाते हों? लेकिन हरिद्वार स्थित चण्डी देवी मंदिर में ऐसा हो रहा है। जहां छापे के दौरान पाया गया कि देवी देवताओं की तस्वीरों पर चढ़ाए हुए सोने-चांदी के जेवरात नकली थे। समाजसेवी जेपी बडोनी के अनुसार दो माह पूर्व उन्होंने हरिद्वार के एडीएम (वित्त आलोक पाण्डे को इसकी सूचना दी। उन्होंने मंदिर परिसर में जाकर चढ़ावे के गहनों की जांच कराई तो पता चला कि उक्त आभूषण नकली हैं। बडोनी कहते हैं कि श्रद्धालु मां के मंदिर में सोना-चांदी तो असली ही चढ़ाते है। लेकिन असली को नकली में परिवर्तित कर श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। असली जेवरात को बेच कर नकली को चढ़ावे के तौर पर दर्शा कर लाखों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं।

आकाश नागर

 
         
 
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