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vad 23 25-11-2017
 
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खास खबर 
 
विधायक की चार सौ बीसी

 

 

  • आकाश नागर

 

 

कांग्रेसी विधायकों का कृष्ण पक्ष एक-एक कर सामने आ रहा है। पहले हरीश धामी की दबंगई का अआँयाय खुला और अब रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा का कारनामा सामने है। क्या इसे महज संयोग माना जाए कि दोनों ही विधायक हरीश रावत के चहेते रहे हैं। बत्रा पर आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से एलएलबी की परीक्षा दी

 

कांग्रेस के विधायक लगातार सुर्खियों में है। पहले धारचूला के विधायक हरीश धामी अपनी दबंगई के चलते गिरफ्तार हुए और अब रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा कटघरे में हैं। दोनों ही विधायक केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत को प्रिय रहे हैं। प्रदीप बत्रा ने अब पाला बदलते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का दामन थाम लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से एलएलबी की परीक्षा दी।

 

रुड़की डिग्री कॉलेज ऑफ लॉ धनोरी से फर्जी तरीके से एलएलबी करने वालों में विधायक ही नहीं बल्कि उनकी पत्नी एक पूर्व प्रोफेसर के बेटे की पत्नी और कॉलेज के प्रबंधक का बेटा भी शामिल है। इस मामले में विधायक और उनकी पत्नी सहित चार लोगों पर कोतवाली रुड़की पांच वर्ष पूर्व ही जालसाजी धोखाधड़ी फर्जीवाड़ा और द्घूसखोरी सहित आधा दर्जन धाराओं में मामला दर्ज कर चुकी है। यही नहीं बल्कि प्रदेश की सीबीसीआईडी विधायक तथा उनकी पत्नी सहित सभी आरोपियों की दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा ५६ के तहत गिरफ्तारी के आदेश भी जारी कर चुकी है। सीबीसीआईडी ने अपनी चार्जशीट न्यायालय को सौंप दी है। हालांकि सीबीसीआईडी भी इस मामले में पुलिस की तरह ही विधायक उनकी पत्नी और अन्य लोगों को अपरोक्ष रूप से बचाने में लगी है। सीबीसीआईडी को उसकी रिपोर्ट में देरी होने पर न्यायालय उसे फटकार भी लग चुकी है।

 

दरअसल प्रदीप बत्रा को बचाने का प्रयास तभी से चल रहा है जब वह रुड़की नगर पालिका के चेयरमैन थे। तब गिरफ्तारी के आदेशों की अवहेलना करते हुए बत्रा को पुलिस ने यह कहकर जीवनदान दिया कि फिलहाल वह नगर पालिका रुड़की के चेयरमैन हैं। उस समय समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन का बहाना बनाकर पुलिस ने कानून व्यवस्था के बिगड़ने का हवाला देकर बत्रा को गिरफ्तारी से राहत दे दी। इसके बाद रुड़की का विधायक बनकर बत्रा ने अपनी शक्ति में और इजाफा कर लिया। फिलहाल मुख्यमंत्री के चहेते विधायकों में से एक प्रदीप बत्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा के मामले को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। चर्चा है कि बहुगुणा सरकार ने विधायक और उसकी पत्नी को बचाने के लिए केस वापस करने की पूरी योजना का खाका बना लिया है।

 

विधायक के फर्जीवाड़े का पता भी नहीं चलता अगर रुड़की निवासी कैप्टन विनय भाटिया ने २३ जनवरी २००८ को रुड़की डिग्री कॉलेज ऑफ लॉ धनोरी के प्रबंधक ओम त्यागी बलजीत कौर एवं अन्य के खिलाफ कोतवाली रुड़की में मामला दर्ज नहीं कराया होता। भाटिया की शिकायत के आधार पर कॉलेज में प्रशासनिक अफसरों द्वारा छापा मारा गया। उस दौरान ये दस्तावेज सील किए गए जिनसे प्रदीप बत्रा और उनकी पत्नी सहित चार लोगों की एलएलबी की डिग्री का फर्जीवाड़ा सामने आया। छापे के दौरान रुड़की डिग्री कॉलेज ऑफ लॉ धनोरी से भारी मात्रा में अवांछनीय अभिलेख मोहरे आदि बरामद करते हुए ओम त्यागी को गिरफ्तार किया गया था। अभियुक्त ओम त्यागी के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर २७ जून २००८ को न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। मुकदमा संख्या ३२/०८ के तहत धारा ४२० ४६७ ४६८ ४७१ १७१ और ३४ आईपीसी में मामला दर्ज कर बत्रा उनकी पत्नी मनीषा पंत अन्नू चौधरी पत्नी अशोक चौधरी और ओम त्यागी के पुत्र विकास त्यागी को भी आरोपी बनाया गया।

 

पुलिस मुख्यालय देहरादून के आदेश ने डीजी ५(६९६) २००८ पर २८ जुलाई ००८ को यह मामला सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया। सबसे पहले सीबीसीआईडी ने अव्वल सिंह रावत को जांच सौंपी। उनकी संतोषजनक रिपोर्ट न होने पर उनका स्थानांतरण कर पुनः जांच सौंपी गई। २८ मई २०१० को सीबीसीआईडी के जांच अधिकारी विनोद चौहान बनाए गए। इससे पूर्व ही कॉलेज में छापे के दौरान मिली सामग्री दस्तोवजों और अभिलेखों को देहरादून स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हस्तलेख मिलान हेतु भेजा जा चुका था जहां विधि विज्ञान प्रयोगशाला में परीक्षण के उपरांत पाया कि एलएलबी के छात्र-छात्राओं प्रदीप और मनीषा बत्रा निवासी ३३ सिविल लाइंस रुड़की के साथ ही अन्नू चौधरी की विश्वविद्यालय में उपलब्ध उत्तर पुस्तिकाएं जिनके आधार पर परीक्षाफल द्घोषित किए गए थे उक्त चारों के हस्तलेख में नहीं पाई गई हैं। जिसमें रुड़की डिग्री कॉलेज ऑफ लॉ धनोरी के नकल किए जाने एवं वैध छात्रों के स्थान पर अन्य छात्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाएं लिखे जाने के स्पष्ट प्रमाण प्राप्त हुए। इसके बाद प्रदीप बत्रा मनीषा बत्रा अन्नू चौधरी और विकास त्यागी के खिलाफ पुख्ता सबूत न्यायालय के समक्ष्ा पेश किए गए। सभी चारों लोगों पर धोखाधड़ी जालसाजी द्घूसखोरी के साथ ही फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर डिग्री हासिल करने के आरोप तय किए गए।

 

इसी के साथ देहरादून स्थित अपराध अनुसंधान विभाग के विवेचनाधिकारी द्वारा कोतवाली रुड़की को धारा ५६ दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत एक अधिपत्र जारी किया गया। जिसमें सीबी संख्या ४४/०८ के तहत मुकदमे में प्रदीप बत्रा मनीषा बत्रा अन्नू चौधरी और विकास त्यागी को अभियुक्त करार देते हुए गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए। २८ जनवरी २०११ को कोतवाली रुड़की के निरीक्षक को दिए गए। आदेश में अपराध अनुसंधान विभाग के विवेचनाधिकारी ने कहा कि इस बाबत गिरफ्तारी की सूचना उन्हें भिजवाई जाय। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि चूंकि अभियोग काफी पुराना है इसलिए अगर आरोपियों द्वारा उक्त अभियोग में न्यायालय से जमानत करवा ली है तो भी कार्यालय को अवगत कराया जाए। लेकिन इन आदेशों के दो माह तक भी चारों आरोपियों को न तो पुलिस ने गिरफ्तार किया और न ही उन्होंने न्यायालय से जमानत कराई।

 

इस सब के बावजूद आरोपियों को कोतवाली रुड़की पुलिस ने गिरफ्तार करने की बजाय उनको जेल न भिजवाने में ज्यादा रुचि दिखाई। २३ मार्च २०११ को कोतवाली रुड़की के उपनिरीक्षक राजेन्द्र सिंह ने अपराध अनुसंधान विभाग देहरादून के निरीक्षक को रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया कि अभियुक्त प्रदीप बत्रामनीषा बत्रा अन्नू चौधरी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी गई। लेकिन वे मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने मामले को द्घुमाते हुए रिपोर्ट में लिखा कि अभियुक्त प्रदीप बत्रा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से नगर पालिका रुड़की से चेयरमैन हैं। उनके समर्थकों ने विरोध प्रकट किया है। रिपोर्ट में पुलिस ने कथित तौर पर अंदेशा प्रकट करते हुए कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया है तो निश्चित रूप से कानून व्यवस्था भंग होने की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। ऐसी स्थिति में अभियुक्तों की गिरफ्तारी संभव नहीं है। 

 

इसके बाद पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जबकि सीबीसीआईडी मामले को लटकाने में लगी हुई है। एक साल बाद ही प्रदीप बत्रा ने नगर पालिका चेयरमैन रहते रुड़की विधानसभा का चुनाव लड़ा। तब बत्रा को भाजपा से तोड़कर कांग्रेस में लाने और उन्हें पार्टी का टिकट दिलवाने के लिए स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने पूरी जान लगा दी। रावत की बदौलत न केवल बत्रा को कांग्रेस का टिकट मिला बल्कि उनकी जीत की राह भी सुनिश्चित हुई। १३ मार्च २०१२ को जब प्रदेश में कांग्रेस बहुमत में आई और हाईकमान ने उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री हरीश रावत की बजाय विजय बहुगुणा को बनाने का ऐलान किया तो रुड़की के विधायक प्रदीप पत्रा ने पाला बदलने में देर नहीं की। प्रदीप बत्रा पहले ऐसे विधायक थे जो हरीश रावत के संसदीय क्षेत्र का होने के बावजूद सबसे पहले बहुगुणा खेमे में जा पहुंचे। कभी हरीश रावत के बहुत करीबी माने जाने वाले बत्रा आज मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के चहेतों में गिने जाते हैं।

 

बात अपनी अपनी

मैंने रुड़की डिग्री कॉलेज ऑफ लॉ धनोरी में एडमिशन लिया था लेकिन उसके एक महीने बाद ही मैंने कॉलेज छोड़ दिया था। मेरे पास न एलएलबी की डिग्री है और न ही मैंने वहां कोई एग्जाम दिया है। यह सब कॉलेज वालों का मामला है। मुझे इस मामले में बेवजह फंसाया जा रहा है। मुझ पर कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं है और न ही कभी मुझे पुलिस गिरफ्तार करने आई।

प्रदीप बत्रा विधायक रुड़की

 

इस मामले में सीबीसीआईडी के पूर्व जांचकर्ता ने न्यायालय को बताया था कि अभी और कई लोगों की जांच होनी है। जिसके लिए उन्होंने समय मांगा था। लेकिन न्यायालय ने उनकी बातों को अनुसना कर दिया। दरअसल कोर्ट इस मामले को विदड्रा करना चाहता था। लेकिन हमने इसका पुरजोर विरोध किया। फलस्वरूप मामला आगे बढ़ा है। अभी भी यह मामला चल रहा है। इसमें आरोपियों की गिरफ्तारी करने में न तो सीबीसीआईडी ने और न ही रुड़की पुलिस ने गंभीरता दिखाई।

अमरीश कुमार पूर्व विशेष लोक अभियोजन सीबीसीआईडी

 

 

 
         
 
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