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vad 26 16-12-2017
 
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धर्म-ज्योतिष 
 
सुखी रहने की कला

 

धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार धर्मगुरुओं के बीच श्री रामकृपालजी रोशनी के ऐसे दिव्य पुंज हैं जिनके सान्निध्य मात्र से व्यक्ति के भीतर का अंधकार मिट जाता है। गहन ध्यान- साधना द्वारा प्राप्त ऊर्जा से ये कई चमत्कार भी करते हैं। मानव-जीवन के कष्टों को दूर कर उसके भीतर आनंद प्रवाहित करने का संकल्प लिए सद्गुरु रामकृपालजी के उदात्त विचार...

 

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सुबह-दोपहर-शाम व्यक्ति अपने बारे में सोचता रहता है उसको किसी अन्य के बारे में सोचने की फुरसत ही कहां है। तुम भी अपने में ही उलझे रहते हो। अपने ही बारे में सोचते रहते हो। जीवन जटिल है और अगर किसी को गलतफहमी हो कि सारी दुनिया मेरे पीछे मरती है तो इसमें कुछ नहीं किया जा सकता। कौन किस पर मरता है सोचिए कि जब कोई मरता है तो उसकी शव यात्रा में कितने लोग शामिल होते हैं गिने-चुने थोड़े से लोग वह भी लोक-लाजवश शामिल हो पाते हैं ताकि रिश्तेदार यह न कहें कि ऐसा समाचार को सुनकर भी नहीं आया।

 

मनोवैज्ञानिक स्तर पर लोगों का स्वभाव है कि वे अपने में ही रुचि रखते हैं। लेकिन एक सूत्र है कि यदि आप दूसरों में रुचि रखना शुरू कर देंगे तो दूसरे भी आप में रुचि रखने लगेंगे। जो व्यक्ति इस तरह का व्यवहार नहीं रखता उसका जीवन कठिनाइयों का महासागर बन जाता है। अपने परिवार जनों कारिश्तेदारों का मित्रों का जन्मदिन याद रखिये उनको उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दें। उनके जीवन में खुशी के छीटें डाल दें तो दूसरा व्यक्ति आपके लिए अपनी जान देने तक के लिए तैयार हो जायेगा। जब आपको यह कला आ जायेगी तो आपका कोई दुश्मन नहीं बचेगा धीरे-धीरे हर दुश्मन भी दोस्त में बदल जायेगा।

 

व्यापारिक समुदाय के लिए मनोवैज्ञानिकों का सुझाव है कि यदि उनको अपने शोरूम के लिए सेल्सगर्ल की आवश्यकता है तो लाखों पढ़ी-लिखी लड़कियों में से उन्हें ऐसी लड़की का चुनाव करना चाहिए जिसको मधुर मुस्कान की कला आती हो। ऐसी लड़की उनके बिजनेस के लिए उपयुक्त होगी।

 

चीन में बड़े-बडे़ कृषि-मनीषी हुए हैं। चायनीज विजडम कहती है कि जिनका मुखमण्डल मुस्कराता हुआ नहीं होता ऐसे लोगों को दुकान नहीं खोलनी चाहिए। ऐसे लोग व्यापार में कभी सफल नहीं हो सकते। यही नहीं जिन लोगों के मुखमण्डल पर मुस्कराहट नहीं आती ऐसे लोगों को विवाह भी नहीं करना चाहिएक्योंकि उनकी संतानें भी ऐसी ही पैदा होंगी और वह पृथ्वी पर भार स्वरूप होंगी धरती माता के लिए वे पीड़ा का विषय बन जाएंगे।

 

कितने लोग हैं जो १०-१५ साल से विवाहित जीवन जी रहे हैं पर वे पत्नी की तरफ देखकर कभी हृदय से निकलने वाली मुस्कराहट नहीं लाते हैं। जब तक द्घर में रहते हैं मुंह फुला-फुला रहता है दफ्तर में जाते ही चेहरे का रंग बदल जाता है। जिन पे्रमी मित्रों के द्घरों में ताण्डव नृत्य होता था इस मुस्कराने की कला से उनके द्घरों में आनंद बरसने लगता है। जैसा तुम सोचते हो वैसा ही बनते जाते हो। परमात्मा ने तुम्हें जो दिया उसको याद करो जो नहीं दिया उसको भूल जाओ जो कुछ भी दिया उसके लिए उसे रोज धन्यवाद दो। तुम इसके लिए परमात्मा को धन्यवाद दो कि तुम अपने आध्यात्मिक द्घर में अपने गुरु की वाणी को सुनने में समर्थ हो। कितनी बड़ी कृपा है उसकी। सोचिए कि जो व्यक्ति अस्पताल में पड़ा है जिसकी छाती पर प्लास्टर बंधा है जो गुरु की वाणी सुनने में समर्थ नहीं है कितनी बड़ी दुर्दशा है उसकी।

 

सांस-सांस में परमात्मा को धन्यवाद दो। यही धन्यवाद का भाव ही प्रार्थना बन जाती है। प्रार्थना करने के लिए मंदिर मस्जिद जाने की जरूरत नहीं है। एक स्थान पर दो लोग रहते हैं। दोनों के पास बराबर पैसा है बराबर अधिकार और पद हैं फिर भी एक व्यक्ति खुश रहता है मुस्कराता रहता है दूसरा दुःखी और मुरझाया रहता है। इसका कारण दोनों का मानसिक भाव समान नहीं है। एक का सोचने का तरीका सकारात्मक है तो दूसरे का नकारात्मक। एक सोचता है कि परमात्मा तुमने इतना धन दिया इतना बड़ा पद दिया इतना मान-सम्मान दिया आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। दूसरा सोचता है कि मुझे इससे बड़ा पद नहीं दिया इससे ज्यादा धन नहीं दिया प्रभु मुझे इससे ज्यादा धन पद दे देना यही सोच-सोच  कर उसका जीवन दुःखमय हो जाता है। आपने कभी देखा होगा कि हिन्दुस्तान में आपका सामान ढोने वाला कुली पसीने से तर रहता है लेकिन उसके चेहरे पर सुख की आभा उस व्यक्ति से ज्यादा होती है जो व्यक्ति करोड़ों की कोठी में रहता है। उसके चेहरे पर दुख की लकीरें छुपी रहती हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि तुम कितने सुखद ढंग से सोचते हो। शेक्सपीयर ने भी यही कहा कि सब कुछ तुम्हारी सोच पर निर्भर करता है दुनिया में कुछ भी अच्छा-बुरा नहीं है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि तुम सोचते क्या हो सोचते कैसे हो।

 

अब्राहम लिंकन जो एक मजदूर परिवार में पैदा हुए एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बने। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मनुष्य उतना ही सुखी रहता है जितना सुखी रहने का वह निश्चय करता है। तुम इतना निश्चय भर कर लो कि तुम सुखी हो और परमात्मा की अद्भुत कृपा तुम्हारे ऊपर है तुम्हें कोई दुखी नहीं कर सकता। जाड़ा गर्मी बरसात प्रकृति का नियम है हमेशा होते रहे हैं और हमेशा होते रहेंगे। परिर्वतन साइकिल के पहिये की तरह है द्घूमता रहता है-द्घूमता रहता है। सुख भी आते हैं दुःख भी आते हैं। दोनों आते है और चले जाते हैं। ये आते रहेंगे-जाते रहेंगे। लेकिन जिसे सुखी रहने की कला आती है उसके ऊपर चाहे दुख आयेंगे तो भी सुखी रहेगा उसके चेहरे पर मुस्कान रहेगी। 

 

आयुर्वेद शास्त्रियों का कहना है चेहरे का सौन्दर्य क्रीम पाउडर लोशन से नहीं बल्कि जीवंत मुस्कान से बढ़ता है। जीवंत मुस्कान वाला चेहरा देखकर सामने वाला माला-माल हो जाता है। दुनिया में आपकी भाषा में वह कौन-सा शब्द है जो आपको सबसे प्यारा लगता है-वह शब्द है आपका नाम। मनुष्य जितनी दिलचस्पी अपने नाम में रखता है उतनी दिलचस्पी किसी चीज में नहीं रखता है। सहज भाव से यदि मैं तुम्हें तुम्हारा नाम लेकर पुकारूं तो तुम्हारा हृदय गद्गद् हो जायेगा।

श्री सिद्ध सुदर्शन धाम

अवंतिका चिरंजीव विहार गाजियाबाद

मो. नं. : ०९९१०२२८५४५

 ०९८११८४७३७५

 

 
         
 
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  • आकाश नागर

प्रदेश में माफिया ही नहीं] बल्कि सरकारी निर्माण एजेंसियां तक अवैध खनन में पीछे नहीं रही हैं। शासन-प्रशासन तक माफिया की पकड़ बताती है कि प्रदेश

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