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जनपदों से 
 
कमजोर नींव पर ऊंचे सपने

 

पिथौरागढ़। जनपद में प्राथमिक माध्यमिक या फिर उच्च शिक्षण संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाने में विफल रहे हैं। इन संस्थानों के संचालन में आड़े आ रहा है आधारभूत ढांचा। उपर्युक्त ढांचा न होने के चलते इन केन्द्रों के संचालन में समस्याएं पैदा हो रही हैं जो क्वालिटी एजुकेशन में बाधक बन रही हैं। वित्तीय संसाधनों की कमी हो या फिर ढांचागत उपलब्धता की कमी जनपद में इन्हीं वजहों से शिक्षा बिखर रही है। यही हाल विकासखंड गंगोलीहाट मुख्यालय स्थित संजीव गांधी नवोदय विद्यालय का भी है। नौ साल का वक्त गुजर गया लेकिन यह विद्यालय भवन के अभाव में अभी भी जीआईसी के आवासीय परिसर से संचालित हो रहा है। 

 

समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए खुला यह विद्यालय पर्याप्त ढांचे की अभाव में खुद ही असहाय और लाचार बना हुआ है। अपना भवन न होने के चलते इसके संचालन में बाधाएं आ रही हैं। इस भवन को बनाने की जिम्मेदारी जिस कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम की थी वह नौ वर्षों बाद भी इस भवन को पूरा नहीं कर पाई। शासन द्वारा निर्माण एजेंसी को कई बार निर्देशित करने के बाद भी उसकी कान पर जूं नहीं रेंगी और बजट की कमी को वजह बनाकर निर्माण एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए। कक्षा ६ से लेकर कक्षा १२ तक की शिक्षा प्रदान करने वाले इस विद्यालय का भवन न बन पाने का कारण जहां एक ओर शासकीय इच्छा शक्ति की कमी रही वहीं निर्माण एजेंसी का ढुलमुल रवैया भी इसमें शामिल रहा। 

 

वर्ष २००४ में स्थापित इस विद्यालय में वर्तमान में २०७ बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में २६ पदों के सापेक्ष १६ शिक्षक कार्यरत हैं। १० पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें भी ७ पद संविदा शिक्षकों के हैं। पिछले नौ सालों से जीआईसी के भवन में कक्षाएं चल रही हैं। बच्चों के रहने की व्यवस्था ठीक-बदहाल एक कमरे में ८ से १० बच्चे रहते हैं। जीआईसी के पुराने आवासीय परिसर में चल रहे इस विद्यालय में पीने के पानी की भी बड़ी समस्या है। पानी टैंकर से मंगाना पड़ता है। गर्मियों और बरसात में पानी की किल्लत बढ़ जाती है। गंगोलीहाटवासी लंबे समय से भवन निर्माण की  मांग उठाते आए हैं। भवन न होने से यहां अध्ययनरत बच्चों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि शासन द्वारा इसके पुनर्निर्माण के लिए बीस करोड़ रुपए अवमुक्त हुए हैं। देखना यह होगा कि इस पैसे का उपयोग समय पर हो पाता है या नहीं।  

 

सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह रावल कहते हैं सालों बीत गए बिल्डिंग पूरी नहीं हो पाई है। हॉस्टल में एक छोटे कमरे में दस-दस बच्चे कसे रहते हैं। अगर व्यवस्था की बात की जाए तो यह विद्यालय अपने उद्देश्यों में पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया।

 

एक ओर बच्चे जैसे तैसे अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं वहीं संविदा शिक्षकों के मानदेय और स्थायीकरण जैसी मांगों का कोई हल नहीं निकल पाया है। यहां शिक्षा प्रदान कर रहे संविदा शिक्षक अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। पुराने संविदा शिक्षकों को हटाने और नए संविदा शिक्षकों की तैनाती को लेकर चल रही खबरों के बीच ये संविदा शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। संविदा शिक्षक श्याम सिंह बिष्ट कहते हैं रात-दिन एक कर बेहतर रिजल्ट हासिल करने के बाद भी संविदा शिक्षकों की सुध नहीं ली जा रही है। यहां पिछले छह से आठ सालों से कई संविदा शिक्षक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सरकार को इनके स्थायीकरण के बारे में सोचना चाहिए। आखिर इन संविदा शिक्षकों ने अपनी मेहनत से स्कूल का शत-प्रतिशत रिजल्ट देने में अपना योगदान दिया है।इन शिक्षकों का यह भी कहना है कि बढ़ती महंगाई में उनको मिलने वाला मानदेय भी पर्याप्त नहीं है। छुट्टी और अवकाश में तो वह खाली हाथ ही रह जाते हैं। आधारभूत सुविधाओं के अभाव में जवाहर नवोदय विद्यालय चल तो रहा है लेकिन इसके संचालन में काफी दिक्कतें आ रही हैं। 

 

गंगोलीहाट के विधायक नारायण राम आर्य कहते हैं कांगे्रस शासनकाल में शुरू हुई नवोदय विद्यालय के लिए मगाया गया लोहा और ईटें अब सड़ गल गई हैं। अब इसे सुधरने में तो वक्त लगेगा ही। भाजपा नेता व पूर्व ब्लॉक प्रमुख ललित पाठक कहते हैं कमीशनखोरी के लिए बगैर देखे समझे निर्माण एजेंसियों को काम नहीं देना चाहिए। निर्माण एजेंसियों के चयन के समय पूर्व में किए कामों का ब्यौरा और कार्यों की जिम्मेदारी को देखा जाना चाहिए। जिस यूपी निर्माण निगम को इस विद्यालय के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई वह अब काम में लेटलतीफी कर रही है। 

 

अपराध पर अंकुश

रुड़की। शहर में बढ़ रही लूट और चोरी की घटनाओं से पुलिस भी हतप्रभ है। तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अब पुलिस इस बात को मान रही है कि प्रदेश में औद्योगिकीकरण के कारण क्षेत्र में नवविकसित इंडस्ट्रियल एरिया में आये बाहरी लोगों के कारण क्षेत्र में अपराध बढ़ा है। फैक्ट्रियों में मजदूर के रूप में आपराधिक छवि के लोग इन घटनाओं को अंजाम देते हैं।

 

सिविल लाईंस कोतवाली क्षेत्र और शहर से बाहर की ओर बसी कॉलोनी आदर्शनगर में पिछले हफ्ते दिनदहाड़े महिला को बंधक बनाकर की गयी लाखों की लूट से लोग परेशान है। चुनाव निपटते ही अपराधियों की बाढ़ सी आ गयी। उसी दिन गंगनहर क्षेत्र में शेखपुरी निवासी युसुफ के घर का ताला तोड़कर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया। युसुफ उस समय जियारत करने के लिये पिरान कलियर गया था। अभी पुलिस इस घटना की जांच में जुटी थी अगले ही दिन दो युवकों ने एक महिला की चेन झपट ली। महिला ने बाईक सवार दूसरे युवक का हेलमेट पकड़ लिया तो बेखौफ युवक ने उस पर गोली चला दी। महिला के द्घायल होते ही युवक चेन लेकर फरार हो गया। 

 

घटना को लेकर एसपी देहात अजय सिंह का कहना है कि किरायेदारों की गतिविधियों का पता लगाया जाएगा और बदमाशों की शीद्घ्र गिरफ्तारी की जायेगी। क्षेत्र में शैक्षिक संस्थान खुलने तथा औद्योगिक स्थान बन जाने के कारण न ही अधिकांश कर्मचारी एजेंसियों के माध्यम से रखे जाते हैं। इन लोगों के बारे में कम्पनी भी बेपरवाह रहती है क्योंकि उसे पीएफ और अन्य सुविधाएं देनी  नहीं पड़ती है। इसी का लाभ उठाकर आपराधिक छवि के लोग इनमें काम करने के बहाने भर्ती हो जाते हैं तथा घटनाओं को अंजाम देते हैं। पूर्व में भी ऐसे लोग पकड़े गये हैं। इस मामले में पुलिस ने कई बार सत्यापन अभियान चलाया लेकिन वह औपचारिक ही बन गया। 

 

निर्माण में सीमेंट की जगह मिटटी

चमोली। एक हफ्ता बाद चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है। शासन से लेकर स्थानीय अधिकारी यात्रा मार्ग सुविधा संपन्न बनाने के दावे रोजाना कर रहे हैं। लेकिन बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) किस तरह से कार्य कर रहा है यह देखने के लिए हेलंग डेंजर जोन काफी है। यहां बीआरओ ने सड़क और पुश्ता निर्माण के लिए स्थानीय गदेरों की मिट्टी लगाई और सीमेंट को स्थानीय दलालों में बेच दिया गया। इस पर शासन-प्रशासन मौन है। इनकी चुप्पी भी कई सवालों को जन्म दे रही है।

 

हेलंग-जोशीमठ डेंजर जोन पर बीआरओ के कार्य की गुणवत्ता को इस आधार पर मापा जा सकता है कि यहां पूर्व में कई दुर्द्घघटनाएं हो चुकी हैं। ये दुर्द्घघटनाएं सड़क किनारे ठोस पुश्ता और सुरक्षा गार्ड नहीं होने के कारण हुईं। इस संवेदनशील जोन में बीआरओ ने पहले रेत की जगह स्थानीय गदेरों की मिट्टी लगाई। मिट्टी के कारण पुश्ता मजबूत नहीं बना। ऐसी स्थिति में कम रफ्तार गाड़ी को भी यह पुश्ता रोक नहीं पाया। जिस कारण दुर्द्घघटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती गई। इसके बाद बीआरओ ने डेंजर जोन पर पुश्ता आदि कार्यों के लिए लाए गए सीमेंट को ही बेच दिया। 

 

दरअसल कर्णप्रयाग से बदरीनाथ तक १८० किलोमीटर क्षेत्र में आपदा के बाद बीआरओ द्वारा कुछ खास कार्य नहीं किया गया। इसके पीछे हमेशा बीआरओ बजट का रोना रोती रही है। बीआरओ का कहना है कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को उन्होंने दस करोड़ का प्रस्ताव भेजा है लेकिन उन्हें इस वर्ष सड़क निर्माण कार्य के लिए एक ढेला भी नहीं मिला है। जिसके चलते कर्णप्रयाग से बदरीनाथ के मध्य एक दर्जन से अधिक डेंजर जोन पर कोई कार्य नहीं हो पाया है। सबसे अधिक डेंजर जोन नंदप्रयागचमोली में भीमतला छिनका बिरही कौड़िया पाखी टंगणी में पागलनाला पातालगंगा हेलंग अणीमठ बैंड पैनी बैंड विष्णुप्रयाग हनुमान चट्टी रडांग बैंड में हैं। छोटे डेंजर जोन हर वर्ष यात्रा सीजन में यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी के सबब बनते हैं। इनसे निपटने के लिए बीआरओ ऑफ सीजन में इन स्थानों पर युद्ध स्तर पर कार्य करती है। लेकिन इस वर्ष बजट के अभाव में इन पर कार्य नहीं हो सका है। इस वर्ष पुलिस और आपदा प्रबंधन को अधिक पसीना बहाना पड़ सकता है। लेकिन बीआरओ जहां सड़क सुधारीकरण के लिए बजट का रोना रो रही है वहीं जो कार्य बीआरओ कर रही है वह भी घटिया निर्माण के चलते लोगों की जान के साथ खिलवाड़ से कम नहीं है। ऐसा नहीं है कि जिला प्रशासन इससे बेखबर हो लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है। 

 

स्थानीय निवासी प्रकाश रावत के मुताबिक डेंजर जोनों पर बीआरओ द्वारा घटिया गुणवत्ता का कार्य किया जा रहा है। सीमेंट कार्यों पर लगाने के बजाय स्थानीय लोगों को बेचा जा रहा है। इससे डेंजर जोनों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ रही है।

 

सड़क सुधारीकरण के लिए दस करोड़ का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। परंतु अभी तक उन्हें कुछ भी धनराशि नहीं मिल पाई है। लिहाजा सड़क सुधारीकरण का कार्य नहीं हो पा रहा है। बीआरओ के सीमेंट बेचे जाने की बात गलत है। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता खराब है तो उसकी जांच की जाएगी।

राहुल श्रीवास्तव कमांडिंग 

ऑफिसर पीपलकोटी बीआरओ

 

 

 
         
 
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