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vad 15 30-09-2017
 
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आवरण कथा
 
सरकारी जमीन पर अवैध भवन

 

हरिद्वार जिले में जमीन की जैसे लूट मची है। साधु-संतों से लेकर पूंजीपति तक सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाते जा रहे हैं और सरकार मौन है। रुड़की में एक पूंजीपति ने तमाम कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना डाला। जमीन को हड़पने के लिए उसने न सिर्फ झूठा हलफनामा पेश किया, बल्कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण का नक्शा भी पास करवा लिया

 

हरिद्वार जिले के रुड़की शहर में एक स्थानीय बिल्डर ने लीज की जमीन पर एक चार मंजिले भव्य कॉम्प्लेक्स का अवैध निर्माण करा दिया है। जिस महिला को यह जमीन लीज पर दी गई थी उसका कई वर्ष पहले निधन हो गया और उसकी लीज अवधि भी बत्तीस साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार लीज की जमीन को बेचा नहीं जा सकता है। बावजूद उसके उसकी खरीद- फरोख्त का शपथ पत्र पेश कर नगर पालिका से निर्माण का नक्शा पास करा लिया गया। रुड़की के पूर्व उपजिलाधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में न सिर्फ इसे अवैध करार दिया है बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि अभी तक लीज मृतक के नाम ही चली आ रही है। आवंटी न तो मृतक के वारिस हैं और न ही रिश्तेदार। ऐसे में कपिल कुमार सिंद्घल के नाम संपत्ति को बेचना नियम विरुद्ध है।

 

नियम विरुद्ध बेची गई यह भूमि पूर्वी अम्बर तालाब रुड़की में नेहरू स्टेडियम के समाने स्थित है। प्लांट नंबर ४ की इस भूमि का क्षेत्रफल २२२ वर्गमीटर है। प्राइम लोकेशन की इस भूमि पर एक चार मंजिला इमारत हर्षित कॉम्प्लेक्स बनी हुई है। जिस पर ४० दुकानें बनाकर उनसे लाखों रुपये महीने की कमाई कर नगर पालिका (वर्तमान में नगर निगम) को राजस्व का भारी चूना लगाया जा रहा है। रुड़की नगर पालिका ने वर्ष १९४९ में इस जमीन को सतनाम कौर पत्नी स्वर्ग सिंह को ३० वर्ष की लीज पर दिया था। जिसकी अवधि ३ नंबर १९७९ को समाप्त हो गई। इसके बाद इस लीज का कोई नवीनीकरण या ट्रांसफर किसी भी व्यक्ति या संस्था के नाम पर आज तक नहीं हुआ है। 

 

इस मामले में अहम मोड़ तब आया जब १७ अक्टूबर २००३ को साकेत कॉलोनी रूड़की के निवासी अमित कुमार  एवं कपिल कुमार पुत्र कमलेश कुमार द्वारा नगर पालिका रुड़की के तत्कालीन अधिसाशी अधिकारी को एक शपथ पत्र दिया गया कि उन्होंने प्लाट नंबर ४ को जगदीश चन्द्र पुत्र हरबंश लाल से २९ मई २००३ को खरीदा है। शपथ पत्र में यह भी बताया गया कि उक्त प्लॉट मूल आवंटी सतनाम कौर पत्नी स्वर्ण सिंह की मृत्यु के पश्चात उनकी वारिस देवेन्द्र कौर से खरीदा था। इसके अलावा शपथ पत्र में कहा गया कि उन्होंने ३ जून २००३ को रुड़की के नगर पालिका अध्यक्ष को प्लाट नंबर ४ की लीज उनके नाम ट्रांसफर करने तथा लीज को ३० साल के लिए नवीनीकृत करने और लीज की जमीन का आवासीय से व्यावसायिक प्रयोग के लिए परिवर्तित करने के लिए एक पत्र लिखा था। इसके बाद २५ सितंबर २००३ को नगर पालिका परिषद रुड़की के आदेशों पर प्लॉट को उनके नाम दर्ज कर दिया गया। साथ ही अगले तीस वर्ष के लिए लीज का नवीनीकरण कर दिया गया। लीज की जमीन के व्यावसायिक उपयोग की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। एडवोकेट दीप सिंह के अनुसार उक्त शपथ पत्र में झूठा हलफनामा पेश किया गया। प्लॉट की मूल आवंटी सतनाम कौर का कोई वारिस नहीं थी और न ही लीज को खरीदा या बेचा गया था। २५ सितंबर २००३ को नगर पालिका परिषद के आदेशों पर जो प्लॉट अमित कुमार एवं कपिल कुमार के नाम दर्ज करने की बात शपथ पत्र में कही गई है वह झूठ है। यही नहीं बल्कि अगले तीस वर्ष के लिए लीज के नवीनीकरण की बात भी झूठी है। अगर ऐसा होता तो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी में नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी यह नहीं कहते कि प्लॉट सतनाम कौर पत्नी स्वर्ण सिंह को लीज पर दिया गया था। आज की तिथि में भी पालिका अभिलेखों में लीज श्रीमति सतनाम कौर के ही नाम है। नगर पालिका परिषद के पत्रांक संख्या ८/न ़पा ़प ़ रुड़की ०७-०८ दिनांक १८ अप्रैल २००७ में उक्त तथ्यो का उल्लेख किया गया है। नगर पालिका ने यह तथ्य साबिर टाइम्स के संपादक अहमद भारती को सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराए थे। एडवोकेट दीप सिंह बताते हैं कि खुद उन्होंने भी इस बाबत १९ दिसंबर २००८ को नगर पालिका से सूचना मांगी थी। जिसके उत्तर में पालिका के लोक सूचना अधिकारी ने जनवरी २००९ को स्पष्ट किया है कि नगर पालिका अभिलेखों में प्लाट नं ़ ४ का स्वामित्व नगर पालिका परिषद रुड़की का है। इसके मूल आवंटी सतनाम कौर के नाम लीज पर जमीन दर्ज है। यही नहीं बल्कि एडवोकेट अशोक कुमार ने भी इस मामले में २५ अप्रैल २०१३ को एक सूचना मांगी जिसके जवाब में फिर नगर निगम रुड़की के लोक सूचना अधिकारी ने इन्हीं बातों की पुनरावृत्ति की। 

 

करीब एक सप्ताह पूर्व ही इस मामले में कार्यालय नगर निगम रुड़की के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्रांक संख्या ११४ में कहा गया है कि प्लाट नं . ४ सतनाम कौर का नाम लीज की हैसियत से दर्ज है। लीज के नवीनीकरण संबंधी कोई धनराशि जमा नहीं की गई। लीज की भूमि का विक्रय नहीं किया जा सकता है। नगर पालिका अब निगम के अधिकारियों ने अहमद भारती, एडवोकेट दीप सिंह और एडवोकेट अशोक कुमार को जो अलग-अलग जानकारियां दी हैं उन सभी के मुताबिक प्लॉट को सतनाम कौर के नाम लीज पर दर्शाया गया है। बावजूद इसके अमित कुमार एवं कपिल कुमार खुद को लीज धारक साबित करने, पालिका द्वारा लीज उनके नाम ट्रांसफर करने और ३० साल के लिए नवीनीकरण का झूठा हलफनामा दिया। मजे की बात यह है कि शपथ पत्र और अवैध रजिस्ट्री के आधार पर १८ अक्टूबर २००३ को रूड़की के तत्कालीन निगम प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र) द्वारा यह कहते हुए नक्शा पास कर दिया कि उपलब्ध कराए गए मानचित्र के अनुसार कराए जाने वाले निर्माण कार्य पर पालिका की सड़क एवं नजूल भूमि पर कोई अतिक्रमण एवं हस्तक्षेप नहीं है। इसी आधार पर मानचित्र स्वीकृत करा दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि मानचित्र स्वीकृत करने वाली पत्रावली पर नगर पालिका परिषद रुड़की के तत्कालीन अधिशासी अभियंता एवं पालिका के ही अवर अभियंता की आख्या प्रस्तुत की गई थी। जिसमें कपिल एवं अमित को उक्त जमीन पर भवन निर्माण करने के लिए नक्शा पास कराने की संस्तुति की गई थी। इस संबंध में रुड़की के तत्कालीन उपजिलाधिकारी रविनाथ रामन ने २ जुलाई २००७ को अपनी ६ बिन्दुओं वाली जांच रिपोर्ट उत्तराखण्ड शासन के शहरी विकास विभाग के अपर सचिव को भेजी थी। जांच रिपोर्ट के पत्रांक संख्या १८९७/पीए में रामन ने स्पष्ट लिखा है कि इस संबंध में पत्रांक संख्या-५४/२००३-०४ का विनियमित क्षेत्र रुड़की कार्यालय में परीक्षण किया गया। पत्रावली की जांच में पाया गया कि पालिका के अधिशासी अधिकारी ने २१ जून २००३ को जारी अपने कार्यालय के नोटिस संख्या-१७८ में कपिल एवं अमित कुमार को प्लॉट नं ४ पालिका की स्वीकृति के बिना अवैध निर्माण का दोषी ठहराया। उन्होंने स्वयं अतिक्रमण को हटवाने के लिए नोटिस प्रेषित किया। इसी पत्रावली पर २० जून २००३ की आख्या उपलब्ध है जिसमें कहा गया है कि भवन मानचित्र नगर पालिका रुड़की की लीज पर निर्माण करने से संबंधित है। लीज प्रार्थी के नाम नहीं है। भवन मानचित्र स्वीकृत करने योग्य नहीं है। इसके बावजूद भी इसके ठीक चार माह बाद लीज भूमि पर निर्माण कार्य को वैध ठहराते हुए नक्शा पास करा दिया गया। क्या यह संभव है कि २१ जून २००३ को जिस व्यक्ति को नक्शा पास नहीं कराने और अतिक्रमणकारी करने पर नोटिस दिया गया उसी व्यक्ति को ठीक चार माह बाद मानचित्र स्वीकृति दे दी जाय। हरिद्वार जिलाधिकारी सचिन कुर्वे से दूरभाष पर बार-बार संपर्क करने के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया।

साथ में अली खान

 

बात अपनी-अपनी

मैं अभी हाल में नगर निगम का चेयरमैन बना हूं। अभी मुझे इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं इस संबंध में अधिकारियों से बात करूंगा।

यशपाल राणा अध्यक्ष नगर निगम रुड़की

 मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी जांच कराऊंगी।

सोनिका उपजिलाधिकारी रुड़की

वर्तमान में हरिद्वार के जिलाधिकारी सचिन कुर्वे पूर्व में रुड़की के एसडीएम थे। उनके कार्यकाल में ही हर्षित कॉम्पलेक्स का रास्ता साफ किया गया था। जबकि रुड़की के तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने इस मामले में नक्शा पास न कराने की पुष्टि की थी।

एडवोकेट दीप सिंह

 

 

 
         
 
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  • गुंजन कुमार

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