fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 14 23-09-2017
 
rktk [kcj  
 
फोकस
 
सिद्ध ने साधी सत्ता

 

कर्नाटक चुनाव में वही हुआ जिसकी उम्मीद की जा रही थी। भाजपा के लिए येदियुरप्पा प्रकरण उसकी पराजय का सबसे बड़ा सबब बना। या कहें भाजपा की अन्तर्कलह ने उसकी पराजय की पकटथा लिख दी। कांग्रेस की जीत के बाद जब बात ताजपोशी की आई तो भाजपा सरकार की चूलें हिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सिद्धरमैया के सरताज सजा। सत्ता के निकट अथवा उसमें शरीक रहने के अभ्यस्त रहे इस नए मुख्यमंत्री की असली मंजिल सिंहासन नहीं अलबत्ता उनकी राजनीतिक कौशल से शासन के चलाने में होगी।

 

पूरी तरह से नास्तिक सिद्धरमैया ने कर्नाटक के २२वें मुख्यमंत्री के रूप में १३ मई को शपथ ले ली। करीब तीन दशक तक समाजवादी आंदोलन और राजनीति से जुड़े रहे सिद्धरमैया ने करीब छह साल पहले ही कांग्रेस की टोपी पहनी है। इतने कम समय में अपने विचार और जनाधार से वे राज्य में पार्टी को बहुमत में लाए। यही कारण है कि वह कांग्रेस के पूर्ण बहुमत वाली सरकार में गैर कांग्रेसी मु्ख्यमंत्री बनने में कामयाब हो गये। 

 

सिद्धरमैया का मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव किसी लॉबिंग का नतीजा नहीं है बल्कि गुप्त मतदान का परिणाम है। उनका व्यक्तित्व और स्वभाव ही ऐसा है कि वे सर्वसम्मति से चुन लिए गए। गुप्त मतदान औपचारिकता मात्र थी। इसके बाद उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता घोषित किया गया। यह घोषणा रक्षा मंत्री एके एंटनी ने की। 

 

गौरतलब है कि ८ मई को आए चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने भारी जीत हासिल की थी। २२४ सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने १२१ सीटें जीती हैं। दूसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद करने वाली बीजेपी को ४० सीटों से ही संतोष करना पड़ा।

 

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में ६५ वर्षीय सिद्धरमैया शुरू से ही आगे थे। उनके खिलाफ एक ही बात की जा रही थी कि वह छह साल पहले ही कांग्रेस में आए हैें। उनका मुख्य मुकाबला केंद्रीय श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे से था। सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री बनने के बाद खड़गे के बारे में कहा जा रहा था कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रस्तावित फेरबदल में कोई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा जा सकता है। लेकिन हुआ नहीं सिद्धरमैया जिस वरुणा विधानसभा सीट से जीतकर आते हैं वही वरुणा उनका जन्म स्थान भी है जो कि मैसूर जिले में पड़ता है। कर्नाटक की करुबा कम्युनिटी से ताल्लुक रखने वाले सिद्धरमैया पेशे से वकील रहे हैं। उन्होंने १९७८ में मैसूर तालुक बोर्ड से अपना राजनीतिक कॅरियर शुरू किया था। १९८३ में वह भारतीय लोक दल के टिकट पर चामुंडेश्वरी सीट से सातवीं कर्नाटक विधानसभा में पहुंचे थे। बाद में वह सत्तारुढ़ जनता दल में शामिल हो गये। १९८५ में हुए मध्यावधि चुनाव में वह इसी सीट से दोबारा चुने गये और रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाये गये। लेकिन कभी कर्नाटक का पर्याय बन चुके रामकृष्ण हेगड़े का राजनीतिक अवसान भी जनता दल के साथ ही हो गया। इसके बाद सिद्धरमैया एचडी देवेगौड़ा के करीब आ गये।

 

भले ही धार्मिक मामलों में वे पूरी तरह से नास्तिक हों लेकिन राजनीति में वे पूरी तरह से पद प्रतिष्ठा के प्रति आस्थावान हैं। उनके राजनीतिक कॅरियर पर गौर करें तो वे वहीं रहे जहां सत्ता रही। वर्ष १९८५ में हेगड़े सरकार में मंत्री रहने के बाद वर्ष १९९४ में देवगौड़ा सरकार में भी मंत्री रहे। फिर वर्ष १९९६ में जब जेएच पटेल की सरकार बनी तो उसमें भी सिद्धरमैया ने उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाला। 

 

जब जनता दल का विभाजन हुआ तो सिद्धरमैया देवगौड़ा के साथ हो गए। एचडी देवेगौड़ा के बाद उनके बेटे देवगैड़ा कुमारस्वामी के नेतृत्व वाले जनता दल सेक्युलर से जुड़ गए और प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बने। इनकी राजनीतिक कुशलता ही थी कि वे जेडीएस और कांग्रेस की मिली जुली सरकार में वर्ष २००४ में फिर से उपमुख्यमंत्री बन गये। जनता दल सेक्युलर के साथ इनके जैसे भी समीकरण रहे हों इन्होंने राज्य में जेडीएस के भविष्य को भांप लिया था। इसके के चलते सिद्धरमैया वर्ष २००६ में कांग्रेस तरफ मुखातिब हुए। कांग्रेस ने भी इन्हें माकूल तवज्जो दिया। वर्ष २००८ में कांग्रेस की ओर से सिद्धरमैया सदन में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। कुरुबा-गौड़ समुदाय के धाकड़ नेता सिद्धरमैया राज्य में पिछडे़ वर्ग के ताकतवर नेता हैं। उनकी जाति कुरुबा कर्नाटक में प्रमुख वोट बैंक है। वे परंपरागत कांग्रेसी नहीं है और अपने स्वतंत्र जनाधार के लिए जाने जाते हैं।

 

भले ही सिद्ध रामैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री चुन लिये गये हों लेकिन लगता नहीं है कि उनका ताज निष्कंटक रहनेवाला है। दरअसल राज्य में सात खांटी कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल थे। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे एम वीरप्पा मोइली एसएम कृष्ण जी परमेश्वर डीके शिवकुमार मुनियप्पा जैसे नेता शामिल हैं। ये सातों सिद्धरमैया को सिर्फ इसलिए खारिज कर रहे थे क्योंकि वे गैर कांग्रेसी हैं। इसलिए उनके सामने भी कमोबेश वही परिस्थितियां हैं जो भाजपा के बीएस येदियुरप्पा (अब केजेपी के प्रमुख के सामने रहीं। इन सातों खाटियों पर गौर करें तो मल्लिकार्जुन खड़गे केन्द्र में बड़ा मंत्रालय पाकर शांत हो जाएंगे यह कहना मुश्किल है। क्योंकि वह अपने मुख्यमंत्री बनने के सपनों में पहले ही अपना मंत्रिमंडल बना चुके थे। उन्होंने साफ कहा था कि राज्य में चुनावी जीत के बाद यदि उनके नाम पर विचार होता है तो वह मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। फिर वर्तमान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जी परमेश्वर को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था लेकिन वे विधानसभा चुनाव हार गए। परमेश्वर सबसे अधिक पढ़े लिखे हैं और पीएचडी की डिग्री भी उनके पास है। परमेश्वर को १० जनपथ का करीबी माना जाता है। उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस का इतना बेहतर प्रदर्शन रहा है। प्रबल संभावना है कि परमेश्वर सिद्धरमैया के लिए संकट बन सकते हैं। 

 

एम वीरप्पा मोइली और एसएम कृष्णा कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से हैं। ये सरकार चलाने का बड़ा अनुभव भी रखते हैं। कृष्णा तो चुनावी अभियान से ही विरोधी तेवर रखे हैं। उन्होंने राज्य में टिकट बंटवारे को लेकर भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। आशंका है कि ये भी सिद्धरमैया का विरोध करें। फिर डीके शिवकुमार मुनियप्पा जैसे नेता तो पहले से ही मौजूद हैं जिनका राज्य का सीएम बनना एक सपना रहा जो कि अब खारिज हो गया। ये सारे नेता मिलकर सिद्धरमैया को सरकार चलाने में मदद करेंगे कम से कम कांग्रेस के भीतर यह कहना हंसी मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।

 

जन्मः मैसूर के वरूणा स्थिति सिद्धरमनहुण्डी गांव में 

शिक्षाः मैसूर विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी

पेशाः वकालत

राजनीतिक कॅरियरः शुरुआत वर्ष १९७८ से फिर भारतीय लोक दल के टिकट पर वर्ष १९८३ में ७वीं विधानसभा में प्रवेश। फिर जनता पार्टी से जुड़े। वर्ष १९८९ में कांग्रेस के राजशेखरमुर्ती से हार गए। इसके बाद जनता दल से जुड़े। जनता दल के बंटवारे के बाद सिद्धरमैया जेडीएस के साथ हो गए। देव गौड़ा से मनमुटाव के चलते वर्ष २००६ में कांग्रेस में शामिल हो गए।

पदभारः

 

  • दो बार राज्य के उपमुख्यमंत्री
  • वित्त मंत्रालय
  • पशुपालन और दुग्ध विकास मंत्रालय
  • परिवहन मंत्रालय
  • कन्नड़ वॉचडॉग कमेटी के अध्यक्ष
  • महासचिव जनता दल
  • जेडीएस प्रदेश इकाई के अध्यक्ष

 

 

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 68%
uk & 14%
 
 
fiNyk vad

  • दिकदर्शन रावत@सुमित जोशी

रामनगर नगर पालिका ने ३७ साल पहले Vªafpaxग्राउंड के लिए जो भूमि खरीदी वह अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। इस भूमि को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1827803
ckj