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देश-दुनिया 
 
संकट में मंत्री

 

  • अंकित फ्रांसिस

 

 

यूपीए-२ के रिपोर्ट कार्ड पर नजर डालें तो भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों की सरकार के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए सरकार की उम्मीदवारी दिन पर दिन मजबूत होती जा रही है। यह एक ऐसी सरकार है जिसके लगभग सभी महत्वपूर्ण मंत्री घोटालों का इल्जाम झेल रहे हैं। एक तरफ यह सिलसिला ए राजा दयानिधी मारन वीरभद्र सिंह शरद पवार पी चिदंबरम व्यालार रवि मुरली देवड़ा सलमान खुर्शीद वीरप्पा मोइली अश्विनी कुमार से होता हुआ पवन बंसल तक पंहुच चुका है। वहीं दूसरी तरफ सीबीआई के काम में हस्तक्षेप करने को लेकर भी सरकार की फजीहत हो रही है। 

 

संसद करोड़ों रुपए फूंकने के बाद फिर स्थगित है। हालांकि इस बार मौजूं पवन बंसल का रेल मंत्री के पद से इस्तीफा है। दरअसल २८ अक्टूबर को रेल मंत्री बने पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला ने रेल मंत्रालय में प्रमोशन के लिए महेश कुमार से २ करोड़ की घूस मांगी जिसकी पहली किश्त ९० लाख लेते हुए पकड़े गए। फिलहाल चार आरोपी सिंगला उसके दोस्त संदीप गोयल (संदीप ने ही महेश और विजय की डील कराई धमेर्ंद्र कुमार और विवेक कुमार (पैसा लेकर जा रहे लड़के की रिमांड सीबीआई ४ मई को ही ले चुकी है। इसके अलावा रिश्वत की पेशकश करने के आरोप में रेलवे बोर्ड के सस्पेंडेड मेंबर महेश कुमार को भी सीबीआई अरेस्ट कर चुकी है। इसके अलावा सीबीआई ६ मई तक मामले से संबंधित राहुल यादव सुशील डग्गा नारायण राव मंजूनाथ और समीर संधीर को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि मंजूनाथ अपनी कंपनी में रेलवे का ठेका पाने के लिए महेश कुमार को रेलवे बोर्ड में मेंबर इलेक्ट्रिकल बनवाना चाहते थे। आरोप है कि उसने ही सारे पैसे का इंतजाम किया था। लगभग १० करोड़ की डील के बाकी पैसे बाद में दिए जाने थे। लेकिन महेश वेस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी चाहता था। इस पर संदीप ने अलग से दो करोड़ रुपये मांगे व कुल सौदा १२ करोड़ तक पहुंच गया। महेश ने ही बंगलुरू के व्यावसायी मंजूनाथ को दो करोड़ रुपये का प्रबंध करने को कहा लेकिन वे ९० लाख रुपये का ही इंतजाम कर पाए। यह राशि संदीप को देने दो लोग दिल्ली से चंडीगढ़ कार से गए। वहां ९० लाख रुपये संदीप और सिंगला को दिए गए और तभी सीबीआई ने छापा मारकर उनके कार्यालय से ८९ लाख ६८ हजार रुपये नगद बरामद कर लिए।

 

गौरतलब है कि रिश्वत कांड में भांजे विजय सिंगला की गिरफ्तारी के बाद से ही पवन बंसल बार-बार सफाई दे रहे हैं कि उनके परिवार के सिंगला के साथ किसी भी तरह के कारोबारी रिश्ते नहीं हैं जबकि सेक्टर २८ स्थित रेल मंत्री के घर में ही आरोपी विजय सिंगला के पार्टनर रहते हैं। दरअसल पवन बंसल के भतीजे विक्रम बंसल जो उनके साथ ही घर में रहते हैं वे विजय सिंगला की कंपनी जेटीएल इंफ्रा में डायरेक्टर भी हैं। इस कंपनी की डायरेक्टर लिस्ट में विक्रम बंसल के घर का जो पता दिया गया है वह है कोठी नंबर ६४ सेक्टर-२८ ए यानी रेल मंत्री का निवास है। इतना ही नहीं भतीजे विक्रम और राजेश (पवन बंसल के बड़े भाई के पुत्र रेल मंत्री के बेटे अमित बंसल की कंपनी बंसी-रौनक एनर्जी ग्रुप में भी डायरेक्टर हैं। इस कंपनी के प्रोफाइल में भी इन तीनों ने रेलमंत्री के सेक्टर २८ ए स्थित निवास का ही पता दिया गया है। पवन बंसल के दावे के विपरीत सारे कारोबारी रिश्ते सेक्टर-२८ में एक ही छत के नीचे मौजूद हैं।

 

उधर कोयला घोटाला मामले में सीबीआई ने ६ मई को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया है और इस हलफनामे के बाद यूपीए की मुश्किलें बढ़ना तय है। सीबीआई ने रिपोर्ट में बदलाव पर ९ पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा गया है कि कोल ब्लॉक घोटाले की रिपोर्ट में कानून मंत्री अश्विनी कुमार अटॉर्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल के कहने पर बदलाव किया गया था। सीबीआई ने यह भी माना है कि कानून मंत्री के अलावा पीएमओ ने भी रिपोर्ट देखी थी। इससे पहले १२ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने रंजीत सिन्हा को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा था कि क्या कोयला घोटाले की रिपोर्ट किसी से साझा की गई थी या नहीं। इस पर २६ अप्रैल को रंजीत सिन्हा ने हलफनामे दाखिल कर यह माना था कि स्टेट्स रिपोर्ट कानून मंत्रालय पीएमओ ऑफिस और कोयला मंत्रालय को दिखाई गई थी। बहरहाल ५ मई को कांग्रेस की कोर बैठक में त्यागशील सोनिया गांधी ने अपनी अहिंसावादी बेशर्मी दिखाते हुए अश्विनी कुमार और पवन बंसल का इस्तीफा लेने से इंकार कर दिया है। लेकिन कई ऐसे सवाल हैं जिनसे पीछा छुड़ाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। सीबीआई के मुताबिक २००५ में शुरू हुई पवन की बीवी और बेटे की कंपनी थिऑन फार्मा ने २००७ की बैलेंसशीट में शून्य टर्न ओवर घोषित किया था जबकि २०१२-१३ में यह १५२ करोड़ रुपए तक कैसे पंहुच गया? इसके अलावा सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया है कि पीएमओ ने भी कोल ब्लॉक पर रिपोर्ट देखी थी और बदलाव के निर्देश दिए थे। ऐसे में अब सबसे बड़ा जवाब फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देना होगा कि ये निर्देश किसने और किस अधिकार से जारी किए।  

 

मलेशिया में फिर गठबंधन

 

  • हरिनाथ कुमार

 

मलेशिया में ६ मई को आम चुनाव के परिणामों की घोषणा हुई। २२२ सदस्यीय सदन के लिए हुए मतदान में सत्तारूढ़ गठबंधन को १२९ सीटें मिलीं। निर्वाचन आयोग के प्रमुख तान अब्दुल अजीज मोहम्मद यूसुफ ने नजीब रजाक के नेतृत्व वाले बारीसन नेशनल (राष्ट्रीय मोर्चा की जीत का एलान किया। कांटे की टक्कर वाले इस चुनाव में करीब ८० प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। प्रारंभिक परिणामों के जारी होने के बाद बारीसन नेशनल के अध्यक्ष मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने कहा कि बारीसन नेशनल गठबंधन की सरकार अपना वचन निभाएगी। साथ ही उन्होंने विपक्षी पार्टी से चुनाव के परिणाम स्वीकार करने का आग्रह किया।

 

चुनाव आयोग के मुताबिक बारीसन नेशनल को सारावाक में २५ जोहोर में तीन पहांग में तीन पेराक में दो फेडरल टेरीटरी ऑफ कुआलालंपुर में दो और पुत्रजया और लुबान सीटों पर जीत हासिल हुई है। विपक्षी डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (डीएपी को १० सीटों पर जीत मिली है। उसे सारावाक में पांचकुआलालंपुर में तीन पेनांग और पेराक में एक-एक सीटों पर जीत हासिल हुई है। तीसरी पार्टी पीकेआर को सारावाक में एक सीट पर जीत मिली है जबकि पीएएस को पेराक में एक सीट पर जीत हासिल हुई है। सत्तारूढ़ गठबंधन में कुल १३ दल शामिल हैं। इसमें संयुक्त मलेयस राष्ट्रीय संगठन मलेशियाई चीनी संगठन मलेशिया भारत कांग्रेस जैसे दल हैं। प्रधानमंत्री नजीब रजाक के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन में यूनाइटेड मलपेस नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (यूएमएनओ का प्रभुत्व है। इस चुनाव में बारीसन नेशनल को वर्ष २००८ की तुलना में कम सीटें मिलीं और मंत्रिमंडल के कई पूर्व मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी इस चुनाव में जीत हासिल नहीं की। 

 

बारीसन नेशनल दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली सरकारों में से एक है। मलेशिया में पिछले ५६ साल से बारीसन नेशनल (बीएन गठबंधन की सरकार सत्ता पर काबिज है। यह दुनिया में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकारों में से एक है। गौरतलब है कि प्रशासनिक राजधानी पुत्रजया पर कब्जा करने (सरकार बनाने के लिए २२२ सीटों में से कम से कम ११२ सीटों पर जीत हासिल करना जरूरी होता है। 

 

चुनावों में अगर विपक्ष जीतता तो यह अनवर के लिए उल्लेखनीय वापसी होती क्योंकि वर्ष १९९८ में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था और भ्रष्टाचार तथा अन्य आरोपों के चलते उन्हें जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने आरोपों को झूठा बताया था। वर्ष २००४ में जेल से रिहा होने के बाद से वह विपक्ष के अघोषित नेता रहे। वर्ष २००८ के आम चुनावों में उनकी पार्टी को एक तिहाई से अधिक सीटें मिली थीं।

 

विपक्षी नेता अनवर इब्राहिम को १९९८ में पद से हटा दिया गया था और उन्हें यौन अपराध के आरोप में जेल भेज दिया गया था। उनका कहना है कि राजनीतिक दुश्मनों ने उन्हें फंसाया। सत्ताधारी नेशनल फ्रंट पर आरोप हैं कि वह चीनी भारतीय और दूसरे अल्पसंख्यकों के साथ शिक्षा निवास व्यापार और धर्म की आजादी के मामले में भेदभाव करते हैं। मलेशिया की जनसंख्या में सात फीसदी हिस्सा भारतीयों का है।

 

करीब २.९ करोड़ लोगों की आबादी वाले इस देश में ६० प्रतिशत मलय हैं जिसमें से सभी मुस्लिम हैं। उनके अलावा २५ प्रतिशत चीनी मूल के लोग हैं जो अधिकतर ईसाई एवं बौद्ध हैं और आठ प्रतिशत भारतीय मूल के लोग हैं जिनमें से अधिकतर हिन्दू हैं। पिछले चुनावों में मूल निवासी भारतीयों ने बड़ी संख्या में विपक्षी गठबंधन का समर्थन किया था। मलेशिया की ५६ संसदीय सीटें साबाह और सारावाक में हैं और इन दो राज्यों के नतीजे पूरे देश के नतीजों को बदलने के लिए काफी रहे। देश की ३० फीसदी युवा आबादी ने भी इन नतीजों में अहम भूमिका निभाई।  

 

मलेशिया १३ राज्यों और तीन संघीय राज्यों में बंटा हुआ है। साथ ही यह दक्षिणी चीन सागर के कारण दो बराबर के हिस्सों में बंटा हुआ है- मलेशिया प्रायद्वीप और मलेशियाई बोर्नियो। देश की ज्यादातर जनसंख्या प्रायद्वीपीय इलाके में रहती है। चुनाव के पहले किए गए सर्वे के मुताबिक मलेशियाई जनता कई मुद्दों पर चिंतित रही है। ५१ फीसदी लोग भ्रष्टाचार से निबटने की कोशिशों के बारे में चिंतित रहे। २१ फीसदी बढ़ती महंगाई के बारे में चिंतित हैं तो १७ प्रतिशत लोगों के लिए गांवों में मूलभूत संरचना बढ़ा सकना एक मुद्दा रहा है। करीब १३ फीसदी जनता पुलिस और जन सुरक्षा बेहतर करना चाहती है और १३ प्रतिशत जनता सरकार की क्षमता बेहतर करना चाहती है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नजीब रजाक को जनता की उम्मीद पर खरा उतरना होगा वर्ना जो हाल अनवर इब्राहिम का वर्ष १९९८ में हुआ था वही रजाक का भी हो सकता है। 

 

 

 
         
 
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  • अपूर्व जोशी

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