fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 50 02-06-2018
 
rktk [kcj  
 
सृजन संसार
 
जीने की जगह

प्रभातजन्म % १९७२] रायसाना] करौली] राजस्थान।

कुछ प्रमुख d`fr;ka

अपनों में नहीं रह पाने का गीत ¼साहित्य अकादमी से प्रकाशित कविता संग्रह½ कालीबाई] पानी की गाड़ियों में] झूलता रहा जाता रहा] बंजारा नमक लाया ¼चार किताबें½ ये ऊंट के अंडे] मिट्टी की दीवार] सात भेडिये] नाच] नाव में गांव आदि कई' चित्र कहानियां प्रकाशित। गीत] कविताएं] कहानियां और बाल-नाटक लिखते हैं।

विविध % कविता समय युवा सम्मान ¼२०१२½] भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार ¼२०१०½] सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार ¼२०१०½।

 

जीने की जगह

मैं तुझे जीवित समझकर लिखता हूं तुझ पर कविता

ओ मेरी बहन तू आज भी है मुझसे दस बरस छोटी

मैं पैंतीस का हूं तो तू पच्चीस की है

मेरी शादी सत्ताईस की उम्र में हुई

तेरी सोलह की उम्र में हो गई थी

और एक बरस बाद तू फंदे से झूल गई थी

मैं उस त्रासदी को भूलकर लिखता हूं तुझ पर कविता

भाई भाई कहती आई है तू मुझसे मिलने और तूने

मेरे ?kj को अपने कब्जे में कर लिया है

बच्चों को और तेरी भाभी को और टीवी] कम्प्यूटर वगैरह सबको

चूंकि दो ही दिन ठहरेगी तू यहां इसलिए दो दिन तक भाई के ?kj को

ठीक से चलाके देख लेना चाहती है अपने हिसाब

तू देख लेना चाहती है चीजें ठीक-ठाक चल रही है या नहीं

भाभी और भाई के बीच कोई गड़बड़ तो नहीं

बच्चों के चेहरे पर उदासी की कोई लकीर तो नहीं

मकान-मालिक से हेलमेल है या खाली करने को बालते रहते हैं

हां तू ऐसी समझदारों की सी बातें करने लगी है

क्योंकि तू वही थोड़े रह गई है सतरह साल की अल्हड़ किशोरी

तू बड़ी हो गई है - युवती

और तेरे पास भी है तेरे से नाक नक्श वाली एक बेटी

तू जीवित है तो देख इसे अवसर मिला है दुनिया में आने और जीने का

और अब वे सब अतीत की बातें हो गई है

तू मरना चाहती थी और हर किसी के सामने डब-डब रोती थी

मगर किसी को बता नहीं पाती थी कि आखिर बात क्या है

तूने चाहा था पूरे जीवन रहना पिता के ?kj

तूने चाहा था मैं तेरे इस इरादे के लिए सिफारिश कर दूं पिता से

तूने चाहा था तुझे कभी वापस ससुराल न लौटना पड़े

तूने चाहा था तू किसी से कोई हिस्सा नहीं लेगी रहने को ठौर हो जाए बस

हल्ला मजूरी करके गुजारा कर लेगी

पिता के नाम पर कभी उंगली नहीं उठने देगी] बस जीने के लिए इजाजत मिल जाए

तूने बुआ मामा काका काकी बहन भाई कोई रिश्ता नहीं छोड़ा था जिसे परखा न हो जांचा न हो अपनी वेदना न बताई हो

मगर सबके भयभीत दिमागों पर पड़ा था ताला

किसी ने मदद नहीं की तेरी

तेरी मदद तूने खुद की तू उस काली ससुराल में कभी नहीं लौटी

कैसा विशाल दबाव तेरे सतरह बरस के जीवन पर छाया हुआ था

कितने महीने से तू विषाद में जीते हुए बहुत हंसती

और बहुत गीत गाती थी पति के खिलाफ

और कोई नहीं समझ पाया था तेरे जुनून को

और एक दिन तूने खाट पर अपनी कलाइयों को फोड़-फोड़ कर

चूड़ा फोड़कर बिखेर दिया और रो-रो कर कहा था -- यह ले गैबी] यह ले मेरी तरफ से देख यह तू मर गया और अब मैं किसी की सुहागिन नहीं हूं अब मैं खुद हूं जो मैं हूं

फिर ?kjवालों के मनाने पर तू चुप हो गई थी

 

कैसे बुरे दिन बीत जाते हैं और ठीक-ठाक दिन आ जाते हैं

अब तू मेरे बराबर की हो गई है

छोटे बड़े का रिश्ता खत्म हो चुका है हमारे बीच

अब देख बरसों से मैं तुझे छोटी समझ कर पीटता भी नहीं हूं

हाथ भी नहीं लगाता हूं कभी भूलकर भी

तुझ इतनी बड़ी पर कैसे हाथ छोड़ूं

और अगर तुझे उसी में समझ आता है भाई का प्यार

तो आ तेरी पीठ पर जमाऊं धौल ओ मेरी मृत बहन

मैं तुझे जीवित समझकर लिखता हूं तुझ पर कविता

मेरे बच्चे नहीं कह सके तुझसे बुआ

नहीं ला सकी तू इनके लिए गठरी में गुड़ की कांकरी

बंजारा नमक लाया

सांभर झील से भराया

भैंरु मारवाड़ी ने

बंजारा नमक लाया

ऊंटगाड़ी में

बर्फ जैसी चमक

चांद जैसी बनक

चांदी जैसी ठनक

अजी देसी नमक

देखो ऊंटगाड़ी में

बंजारा नमक लाया

ऊंटगाड़ी में

कोई रोटी करती भागी

कोई दाल चढ़ाती आई

कोई लीप रही थी आंगन

बोली हाथ धोकर आई

लायी नाज थाली में

बंजारा नमक लाया

ऊंटगाड़ी में

थोड़ा ?kj की खातिर लूंगी

थोड़ा बेटी को भेजूंगी

महीने भर से नमक नहीं था

जिनका लिया उधारी दूंगी

लेन-देन की मची है धूम

?kj गुवाली में

बंजारा नमक लाया

ऊंटगाड़ी में

कब हाट जाना होता

कब खुला हाथ होता

जानबूझ कर नमक

जब ना भूल आना होता

फीके दिनों में नमक डाला

मारवाड़ी ने

बंजारा नमक लाया

ऊंटगाड़ी में

दुख

दुख मेरे भीतर 

टहल रहा है 

संकट की तरह 

एकाएक नहीं आया है यह

बरसों चलने के बाद 

पहुंचा है मुझ तक 

इसके आने की आहट थी मुझे 

अब जब आ ही गया है 

बस ही गया है मुझमें 

मेरे साथ रहने के लिए 

एक ही जगह रहते हैं तो 

सजल आंखें चार भी होती हैं 

जीवन में मेरे हिस्से के 

आकाश की तरह 

हटा नहीं सकता इसे मैं 

बदल नहीं सकता इसकी शक्ल-सूरत 

कम अधिक नहीं कर सकता इसका ताप

निवेदन नहीं कर सकता इससे 

सहनीय होने के लिए

पानी की तरह कम तुम

मैं तुम्हें मेरे लिए पानी की तरह कम होते देख रहा हूं

मेरे गेहूं की जड़ों के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना

मेरी चिड़ियों के नहाने के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना

मेरे पानी मांगते राहगीर के लिए तुम्हारा गायब हो जाना

मेरे बैल का तुम्हारे पोखर पर आकर सूनी आंखों से इधर-उधर झांकना

मेरी आटा गूंधती स्त्री के द्घड़े में तुम्हारा नीचे सरक जाना

तुम्हारे व्यवहार में मैं यह सब होते देख रहा हूं

लगातार कम होते पानी की तरह

मैं तुम्हें मेरे लिए कम होते देख रहा हूं

पानी रहित हो रहे इलाकों की तरह

मैं पूछ भी नहीं पा रहा हूं

क्यों हो रहा है ऐसा\

पानी तुम क्यों कर रहे हो ऐसा\

पानी चला गया तो नदी किसके पास गई कुछ कहने

वैसी नदी की तरह लीन हूं मैं अपने में

नदी के बहाव की सूखी रेत में सुदूर तक फैले आक की तरह

अभी भी तुम्हारी याद का हरा बचा हुआ मुझ में

छोड़ा हुआ

उसके जन्म से पहले से ही थे ?kj में

गाय] भैंस] बैल और बछड़े

दस बीद्घा पक्के खेत थे हरे-भरे

हरे-भरे खेतों के बीच से जाती

पगडंडियां थीं टहलने के लिए

नीमों-बबूलों की टहनियां थीं दातुन के लिए

गाने के लिए थे इतने लोकगीत कि उसे

कई जिंदगियों तक के लिए पर्याप्त थे

पहले से ही था अन्न-धान से भरा खलिहान

पहले से ही था चांद-सितारों से भरा आसमान

वह इस पहले से मिले जीवन को अपने हिस्से में

बचा नहीं सका

इसमें कुछ जोड़ नहीं सका] बढ़ा नहीं सका

बड़ा अधिकारी बना जब वह आगे जीवन में

जिस कस्बे में उसकी नियुक्ति हुई

उसे अपने कार्य करने की जगह समझने के बजाय

अपने अधीन इलाका मानकर चलना पड़ा

सारी मेहनत] सारी ऊर्जा

सारी लगन] सारी रचना

उम्र-भर की सारी सेवा

पहले एक कस्बे और अब एक नगर को समर्पित की उसने

नगर ने एक महंगा कोट दिया उसे

लो इसे पहन लो और हम जैसे ही दिखो

ऐसी आभार भरी नींद सोया वह उस रात

कि बरसों उसने अपने गांव का फलसा तक जाकर नहीं देखा

एक दोपहर गांव से वृद्ध पिता के निधन की सूचना आई

जूतियां और शरीर से गंधाते संदेशवाहक से कहा उसने

कहना जल्दी ही मैं आ रहा हूं

पहुंचा] तब मातम का वातावरण था वहां

आंगन में बिछी जाजम पर पंच-पटैल बैठे थे

भाइयों के चेहरों पर पिता की मृत्यु के मौकघ्े पर

भोज के लिए कर्ज लेने का भाव

और बच्चों तथा पत्नियों की

उनसे परवरिश न हो पाने के तनाव

?kj के चूल्हे और परिंडे पर निगाह डालने पर उसे लगा

?kj जैसे उसके पीछे से नंगा ही नंगा हुआ है हर साल

उसने पाया कि भाइयों ने उससे कुछ नहीं कहा पूरे समय

कुछ नहीं कह कर सहते रहे जैसे वे

उसे लगा वे खुद से भी कुछ नहीं कहते शायद

वह मृत्युभोज का कार्यक्रम बीच में छोड़

शहर आ गया वापस

वह दोस्त के पास गया

उसे दोस्त से उम्मीद थी

दोस्त देख नहीं पाया कि वह आया है

उसे लगा कहीं कोई फर्क नहीं पड़ता

मैं जाऊं तो] नहीं जाऊं तो

मुझे देख कर किसी के मन में कुछ नहीं जगता

उसे लगा मैं ?kj में ?kj वालों का

बाहर बाहर वालों का छोड़ा हुआ हूं

अच्छा और बुरा लगने का छोड़ा हुआ हूं

सार्थकताओं और निर्रथकताओं का छोड़ा हुआ हूं

उसे लगा जीवन नहीं हूं मैं एक

मृत्यु का छोड़ा हुआ हूं महज


 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 1%
uk & 23%
 
 
fiNyk vad

  • जीवन सिंह टनवाल

आईपीएल के मौजूदा सीजन में ही महिला आईपीएल की भी भूमिका तैयार हो गई है। प्लेऑफ मुकाबलों से पहले ही महिला क्रिकटरों का जो प्रदर्शनी मुकाबला

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
2227517
ckj