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vad 50 02-06-2018
 
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दुनिया 
 
डिफेंस पर बढ़ता खर्च

  • गुुंजन कुमार

अभी भी दुनिया भर में एक बड़ी आबादी अशिक्षित है। आधे से ज्यादा लोगों को अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पाता। विश्व समुदाय के लोगों को शुद्ध पेयजल न मिलने से चिंतित है। प्रत्येक साल लाखों बच्चे दुनिया में कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। फिर भी दुनिया के देशों में शिक्षा] स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल को छोड़ रक्षा बजट में वृद्धि हो रही है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज विश्व के सामने आतंकवाद सबसे बड़ी समस्या है। जिससे निपटना जरूरी है] मगर किस कीमत पर। क्या बुनियादी सुविधाओं के बजट में कमी कर रक्षा बजट बढ़ाते रहना चाहिए। वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च वर्ष २०१७ में देढ़ हजार अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। इसमें दुनिया के पांच देशों में दो एशियाई हैं।

हथियारों की निगरानी करने वाली स्वीडिस संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ¼एसआईपीआरआई½ ने दुनिया के देशों में बढ़ रहे रक्षा बजट पर रिपोर्ट जारी की है। वैश्विक स्तर पर रक्षा बजट बढ़कर १]७३९ अरब डॉलर पर पहुंच गया है। भारत और चीन दुनिया में सैन्य खर्च वाले पांच अग्रणी देशों में शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च का ६० प्रतिशत इन पांच देशों द्वारा ही किया जा रहा है। एसआईपीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशक से सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है।

साल २०१७ में रक्षा खर्च में अग्रणी ०५ देशों में अमेरिका] चीन] सऊदी अरब] रूस और भारत शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि २०१७ में वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च २०१६ की तुलना में १ .१ प्रतिशत बढ़कर १]७३९ अरब डॉलर पर पहुंच गया। 

एसआईपीआरआई के संचालन बोर्ड के प्रमुख जैन इलियासन का कहना है कि दुनिया भर में रक्षा खर्च में लगातार हो रही बढ़ोतरी चिंता की बात है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का सैन्य खर्च २२८ अरब डॉलर अनुमानित है जो एशिया और ओशियाना क्षेत्र में कुल रक्षा खर्च का ४८ प्रतिशत बैठता है। यह खर्च दूसरे नंबर पर रहे भारत से ३ .६ गुना अधिक है। २०१७ में भारत का खर्च ६३  .९ अरब डॉलर रहा जो २०१६ की तुलना में ५ .५ प्रतिशत अधिक है। जबकि वर्ष २००८ से ४५ प्रतिशत ज्यादा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव की वजह से भारत सरकार अपने सैन्य बलों का विस्तार] आधुनिकीकरण और परिचालन क्षमता को बढ़ाना चाहती है। 

अमेरिका का सैन्य खर्च २०१७ में ६१० अरब डॉलर रहा है और इस मामले में वह सबसे आगे है। यह दुनिया के कुल सैन्य खर्च का एक&तिहाई से अधिक बैठता है। अमेरिका का सैन्य खर्च दूसरे नंबर पर रहे चीन की तुलना में २ .७ गुना अधिक है।

एसआईपीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार उभर रहे देश अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रहे हैं। वहीं अफ्रीका महाद्वीप में मिलिट्री के खर्चे में ५ फीसदी की कमी लाई गई है। तेजी से आगे बढ़ रहा चीन भी अत्यानुधिक हथियारों से लैस हो रहा है। 

अमेरिका के बाद रक्षा पर खर्च करने के मामले में चीन दूसरे नंबर पर है। अमीर देश सऊदी अरब यमन जैसे देशों में हवाई हमले कर रहा है। अन्य खतरों को देखते हुए सऊदी अरब ५ लाख करोड़ रुपए रक्षा बजट पर लगाता है। जो देश की जीडीपी का १३ प्रतिशत है और विश्व में सबसे ज्यादा है। दुनिया की महाशक्ति में से एक रुस भी रक्षा बजट पर काफी खर्च करता है। हालांकि वह अपने पुराने दुश्मन अमेरिका से काफी पीछे है। रुस आर्मी पर ४ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करता है जो देश की जीडीपी का ५ प्रतिशत है।

१९वीं शताब्दी में दुनिया पर राज करने वाला यूनाइटेड किंग्डम ¼ब्रिटेन½ अभी भी आर्मी पर काफी खर्च करता है। यूके रक्षा बजट पर ३ .७० लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। पड़ोसी खतरों को देखते हुए भारत लगातार अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करता आ रहा है। भारत ने पिछले साल ३ .४२ लाख करोड़ रुपए रक्षा जरूरतों पर खर्च किए थे। देश की जीडीपी का २ .३० प्रतिशत रक्षा बजट पर लगता है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने हथियारों के आयात में चीन को पीछे छोड़ दिया है। एसआईपीआरआई का कहना है कि २००६ से २०१० के बीच जितने हथियार सौदे हुए उसका नौ फीसदी भारत के खाते में गया। इसमें बड़ी संख्या रूस से आयात हथियारों की है। संस्थान का कहना है कि इस अवधि में संयुक्त अरब अमीरात] इसराइल] मिस्र और अल्जीरिया ने भी बड़ी संख्या में हथियारों का आयात किया। 

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सुशांत सरीन कहते हैं] ^सेना के उपप्रमुख ने संसद के सामने कहा है कि सेना के ६८ फीसदी साजो&सामान पुराने पड़ गए हैं। उन्होंने आर्मी की तैयारी और संसाधनों की किल्लत की बात रखी है। इसके साथ ही उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण में आने वाली समस्याओं की भी व्याख्या की है।^ भारत के रक्षा बजट में वृद्धि के पीछे सेना के आधुनिकीकरण का ही तर्क दिया जा रहा है। पिछले हफ्ते ही ग्लाेबल इंडेक्स २०१७ की रिपोर्ट आई थी। उसमें बताया गया कि कुल १३३ देशों की सूची में भारत सैन्य ताकत के मामले में चौथे नंबर पर है। इस लिस्ट में भारत से ऊपर केवल अमेरिका] चीन और रूस हैं। रूस के बाद भारत अमरीका से सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है। हथियार खरीद से अलग एक और तस्वीर है। यह तस्वीर ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दिखती है। उस रिपोर्ट के अनुसार भारत रक्षा बजट पर जितनी रकम आवंटित करता है] उसका ८० फीसदी से ज्यादा हिस्सा रक्षा कर्मियों के वेतन और अन्य भत्तों पर खर्च हो जाता है। ऐसे में आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम फंड बचता है। इसके बावजूद पिछले साल रक्षा बजट की ६]८८६ करोड़ रकम आर्मी इस्तेमाल नहीं कर पाई थी।

दुनिया के आधुनिक बलों और फौजी ताकत का विश्लेषण करने वाले शोध संस्थान ^ग्लोबल फायर पावर^ ने २०१७ में फौजी ताकत के हिसाब से १३३ देशों की जो सूची जारी की है] उसमें अमरीका पहले की तरह इस बार भी सबसे बड़ी फौजी ताकत है। फौज के लिए जिन सैन्य हथियारों का विश्लेषण किया गया है। चीन में सक्रिय सैनिकों की संख्या २२ लाख और रिजर्व सैनिकों की संख्या १४ लाख है। उसके पास तीन हजार लड़ाकू विमान और साढ़े छह हजार टैंक हैं। हालांकि चीन] अमरीका और रूस से पीछे है लेकिन वह बड़ी तेजी से ऊपर आ रहा है और वह दूसरे स्थान पर आ सकता है। इसका बजट भारत से तीन गुना से भी अधिक है।

ग्लोबल फायर पावर के मुताबिक अमरीका के पास १३ हजार से अधिक जहाज हैं जिनमें लड़ाकू] परिवहन और हेलिकॉप्टर शामिल हैं। चीन के पास तकरीबन तीन हजार लड़ाकू जहाज हैं। भारत के पास लड़ाकू जहाजों की संख्या दो हजार से अधिक है। सक्रिय सैनिकों की संख्या १३ लाख से अधिक है। इसके अलावा २८ लाख रिजर्व जवान भी हैं जो जरूरत पड़ने पर फौज की मदद कर सकते हैं। भारत में टैंकों की संख्या तकरीबन ४४०० है। युद्ध पोतों की संख्या तीन बताई गई है। हालांकि इसमें से कम से कम एक युद्ध पोत समुद्र से हटा लिया गया है। पाकिस्तान में सक्रिय सैनिकों की संख्या छह लाख ३७ हजार है। इसके अलावा 

तकरीबन तीन लाख रिजर्व सैनिक भी हैं। हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट जहाजों समेत लड़ाकू जहाजों की संख्या तकरीबन एक हजार और टैंकों की संख्या तीन हजार के करीब है। पाकिस्तान के पास युद्ध पोत नहीं हैं लेकिन दूसरे प्रकार के समुद्री जहाजों की तादाद तकरीबन २०० है। इस सूची के अनुसार ८१ लाख की आबादी वाला देश इजराइल नौवें नंबर पर है। उसके पास ६५० लड़ाकू विमान और ढाई हजार से अधिक टैंक हैं।

 

चीन

सक्रिय सैनिक& २२ लाख

रिजर्व सैनिक& १४ लाख

लड़ाकू विमान& ३०००

टैंक& ६५००

भारत

सक्रिय सैनिक& १३ लाख

रिजर्व सैनिक& २८ लाख

लड़ाकू विमान& २०००

टैंक& ४४००

पाकिस्तान

सक्रिय सैनिक& ०६ लाख ३७ हजार

रिजर्व सैनिक& ०३ लाख

लड़ाकू विमान& १०००

टैंक& ३०००

 

चिंतित यूएन महासचिव

अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ दिया है। दोनों देशों के बीच वर्ष २०१५ में इस समझौते पर संधि हुई थी। समझौते से बाहर निकलने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस बेहद चिंतित हैं। अपनी चिंता जाहिर करने के साथ ही उन्होंने समझौते को बचाए रखने के लिए अन्य राष्ट्रों से इसे समर्थन देने का आह्वान किया है। ट्रंप ने कल व्हाइट हाउस में समझौते से हटने की ?kks"k.kk की और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को फिर से बहाल करने के लिए एक ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किए। ?kks"k.kk के कुछ देर बाद जारी एक बयान में गुतारेस ने कहा कि वह ट्रंप की ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन ¼जेसीपीओए½ से अलग होने और ईरान पर प्रतिबंध फिर से बहाल करने की ?kks"k.kk से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा] ^मैंने लगातार यह दोहराया है कि जेसीपीओए परमाणु अप्रसार और कूटनीति में एक बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है और इसने क्षेत्रीय एवं 

अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान दिया है।^ यह समझौता २०१५ में ईरान] चीन] फ्रांस] जर्मनी] रूस] ब्रिटेन] अमेरिका और यूरोपीय la?k के बीच हुआ था जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करने के लिए सख्त प्रणाली की व्यवस्था करता है।

gunjan@thesundaypost.in

 

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • दिकदर्शन रावत

प्रिया शर्मा की कहानी में कई पेंच हैं] कई ऐसे मोड़ हैं] पूरे प्रकरण में कोहरे की इतनी गहरी परत है] जिसके चलते सच को तलाश पाना खासा मुश्किल काम

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