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vad 50 02-06-2018
 
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प्रदेश 
 
सुविधाओं का मोहताज i;ZVu

  • दिनेश पंत

सीमांत में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं के लिए इससे आजीविका के नए रास्ते खुल सकते हैं। लेकिन सुविधाओं का अभाव इसमें रोड़ा बना हुआ है

अपार संभावनाओं के बावजूद सीमांत पिथौरागढ़ जिला साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि जिले में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुनस्यारी में पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना भी की गई है] लेकिन इसके बावजूद राफ्टिंग] शिलारोहण] पैराग्लाइडिंग जैसे साहसिक खेल गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। जबकि पैराग्लाइडिंग का सफल आयोजन हो चुका है। लंबे समय से कुमाऊं मंडल विकास निगम भी राफ्टिंग के सफल आयोजन करता रहा है। इस जनपद ने लवराज सिंह धर्मशत्तू] मोहन सिंह गुंज्याल] कविता बूड़ाथोकी] चंद्रप्रभा ऐतवाल जैसे पर्वतारोही दिए हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियां फतह की हैं और अधिकतर ऊंची चोटियां इसी जनपद में स्थित हैं। जिले में पर्यटन संस्थान खोलने के पीछे का उद्देश्य भी यही था कि यहां पर्वतारोहण] रॉक क्लाइम्बिंग] ट्रैकिंग] स्नो स्कींइग] पेराग्लाइडिंग] परासेलिंग] रिवर राफ्टिंग आदि साहसिक खेल गति पकडेंगे और इसमें कैरियर बनाने वाले युवाओं के लिए यह आजीविका का साधन भी बनेगा। लेकिन साहसिक खेलों के मामले में जो आशा की गई थी वह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। 

जिले में साहसिक खेलों का ढांचा आधा- अधूरा है। मुनस्यारी के खलियाटॉप में रोपवे लगाने की बात थी। पूर्व जिलाधिकारी आर राजेश कुमार ने तब यहां के उपयुक्त स्थलों के विकास का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखने की बात भी कही थी। डांडाधर] मर्तोलीथौड़] पातलथौड़] खलियाटॉप में स्कीइंग की सुविधाएं जुटाने की बात हुई थी।  लेकिन इन नये स्कींइग स्थलों के विकास के नाम पर रत्ती भर भी काम नहीं हुआ। अकेले खलियाटॉप जिसे स्कीइंग के मामले में औली के बराबर का माना गया है 

बावजूद इसके शीतकालीन पर्यटन की दृष्टि से इसका विकास नहीं किया गया। जबकि मुनस्यारी में बेटुलीधर एवं खलियाटॉप स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है। दिसंबर माह से इन दोनों स्थानों पर बर्फ जमने लगती है जो अपै्रल प्रथम सप्ताह तक रहती है। खलियाटॉप तक पर्यटकों को ले जाने के लिए रोपवे की लंबे समय से जरूरत महसूस की जाती रही है। बकायदा इसके लिए प्रस्ताव भी बनाया गया लेकिन यह प्रस्ताव कई वर्षों से शासन की फाइलों में लटका पड़ा है। अभी हालत यह है कि खलियाटॉप तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को पांच किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। दूरी अधिक होने से पर्यटक यहां पहुंचने की मंशा कम ही दिखा पाते हैं। जिसके चलते जनपद में राफ्टिंग आजीविका का जरिया नहीं बन पा रहा है। कहने को तो बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट विकास निधि से साहसिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं] लेकिन यह नाकाफी हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम चरणबद्ध ढंग से युवाओं को सरयू एवं काली नदी में राफ्टिंग का प्रशिक्षण तो दे रहा है लेकिन इसके विस्तारीकरण के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हां] जनपद के साहसिक पर्यटन अधिकारी दिनेश गुरूरानी के साहसिक खेलों के प्रति जज्बे ने अवश्य साहसिक खेलों के मामले में जनपद को पहचान दिलाई है। 

उन्होंने जनपद के नदी किनारे लगने वाले मेलों के दौरान रीवर रॉफ्टिंग का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर साहसिक खेलों को बढ़ाने का प्रयास तो किया लेकिन जब तक सरकार आधारभूत ढांचे की तरफ कदम नहीं बढ़ाती इसे नाकाफी ही कहा जा सकता है। 

जिले में साहसिक खेलों का रुझान बढ़ रहा है] लेकिन संसाधनों की कमी है। कुमाऊं मंडल विकास निगम राफ्टिंग तो करा रहा है] लेकिन इसके लिए उसके पास सीमित संसाधन हैं। मात्र चार राफ्टों के सहारे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। राफ्ट विशेषज्ञ बताते हैं कि राफ्ट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है जिससे जल्दी से राफ्ट उपलब्ध नहीं हो पाते। जिले में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नदी किनारे विश्राम स्थलों की जरूरत है ताकि पर्यटक यहां आसानी से ठहर सकें और राफ्टिंग का लुफ्त भी उठा सकें। लेकिन इस तरफ भी काम नहीं हो पाया है। राम गंगा नदी में फल्यांटी से रिंगोनीया तक नया रूट खोजा गया था लेकिन इसे विकसित नहीं किया गया। धारचूला क्षेत्र में स्थित छिपलाकेदार ट्रेक विकसित करने की योजना भी अमल में नहीं आ पाई है। १५ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र पौराणिक महत्व का रहा है। यहां खूबसूरत बुग्याल हैं। जल कुंड हैं। मुलायम द्घास के मैदान हैं। विशाल गुफाएं हैं। इसे तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का निवास स्थल माना जाता है। मई- जून में यहां के मैदान बर्फ से ढके रहते हैं। इस समय यहां पर स्कीइंग की संभावनाएं बन जाती हैं। यहां पर्यटक आना चाहता है] लेकिन सुविधाओं के अभाव में यहां तक पहुंच नहीं पाता। छिपलाकेदार को टूरिस्ट ट्रैक के रूप में विकसित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। 

तवाद्घाट के खेला गांव से छिपलाकेदार कुंड एवं नाजुरी कोट होते हुए मुनस्यारी तक आसानी से पर्यटन ट्रैक विकसित किया जा सकता है। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण पिथौरागढ़ जनपद में स्नो-स्कीइंग की पर्याप्त संभावना है। मुनस्यारी के बेटुलीधर] खलियाटॉप] डाणाधर] मर्तोलीथौड़] स्कीइंग के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। शिलारोहण के लिए भी मुनस्यारी] धारचूला और डीडीहाट में पर्याप्त स्थल मौजूद है] जिन्हें चिन्हित करने और साहसिक पर्यटकों के लिए खोलने आवश्यकता है। ट्रेकिंग के लिए मिलम] रालम] नामिक] पंचाचूली] छिपलाकेदार ग्लेशियर अति उत्तम हैं तो पर्वतारोहण के लिए आदि कैलास यात्रा पथ में कई संभावनाएं मौजूद हैं। साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब ऋषिकेश में निजी कंपनियों द्वारा रिवर राफ्टिंग की जा रही है तो तमाम संभावनाओं के बावजूद जनपद की नदियों पर यह काम क्यों नहीं हो सकता? अगर नदियों के किनारे सड़कें बना दी जाएं तो यहां शीतकालीन पर्यटन को चार चांद लग सकते हैं। नदी किनारे सड़क बनने से गोरी नदी में मदकोट से जौलीजीवी तक १५ किमी व काली नदी में जौलजीवी से झूलाद्घाट तक ४५ किमी व रामगंगा नदी में नाचनी से थल तक १५ किमी तक आसानी से राफ्टिंग की जा सकती है। लेकिन तमाम संभावनाओं के बावजूद पर्यटन प्रदेश में साहसिक खेलों की अनदेखी ही होते आई है।

 

 

राफ्टिंग के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। अगर जनपद में बेहतर सड़कें बना दी जाएं तो पिथौरागढ़ राफ्टिंग में नंबर वन बन सकता है। जब तक सड़कों से नदियों को नहीं जोड़ा जाएगा और काठगोदाम रेल हैड एवं टनकपुर रेल हैड से पिथौरागढ़ तक डबल लेन सड़क नहीं बनेगी] तब तक यहां पर पर्यटक नहीं आ सकता है। जब पर्यटक ही नहीं आयेगा तो रोजगार भी नहीं मिल सकता। भले ही कितने प्रशिक्षण सरकारी मदद से करवा लें। इससे युवा राफ्टिंग तो कर लेंगे] रिवर गाइड भी बन जाएंगे] लेकिन यह आजीविका का साधन नहीं बन सकता। 

दिनेश गुरूरानी] साहसिक पर्यटन अधिकारी

 

नकली किताबों का बाजार

  • अली खान

बाजार में एनसीईआरटी किताबों की कमी को देखते हुए कुछ लोगों ने नकली किताबें पहुंचानी शुरू कर दी। इस धंधे में लिप्त लोगों के तार दिल्ली तक जुड़े हुए हैं

अच्छे दिनों की बात करती रही भाजपा के शासन में इतने बुरे दिन आ गए हैं कि अब बाजारों में नकली किताबें भी सरेआम बिक रही हैं। जिससे बच्चों को परेशानियां होनी स्वाभाविक हैं। दरअसल नकली किताबें बिकने के संबंध में किसी व्यक्ति ने हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपक रावत से शिकायत की। इस पर संज्ञान लेते हुए डीएम रावत ने रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ¼जेएम½ नरेंद्र भंडारी को मामले की जांच के आदेश दिए। ४ मई की दोपहर को शहर के बीटी गंज बाजार में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने छापा मारकर एनसीईआरटी की नकली किताबों का जखीरा पकड़ा। इस पर उन्होंने एक दुकान और दो गोदाम सील कर दिए। इनमें एक गोदाम छह मंजिला है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ग्राहक बनकर एनसीईआरटी की किताबें खरीदने के लिए पहुंचे थे। खंड शिक्षा अधिकारी श्रीकांत पुरोहित की तहरीर पर गंगनहर पुलिस ने ४ मई की रात 'आर्या पुस्तक डिपो' के संचालक रमनदीप सिंह और उनके भाई मनप्रीत सिंह के खिलाफ नकली किताबें छापकर बेचने और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया। 

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नरेंद्र भंडारी ग्राहक बनकर दुकान पर किताब खरीदने के लिए पहुंचे। दुकानदार ने जैसे ही उन्हें एनसीईआरटी की नकली किताब दी तो उन्होंने अपने पास मौजूद असली किताब से मिलान किया जिससे नकली किताब पकड़ में आ गई। उन्होंने तुरंत ही कार्रवाई करते हुए दुकान और गोदाम पर छापा मारा। इस बीच जिला शिक्षा अधिकारी ¼बेसिक½ ब्रह्मपाल सिंह सैनी भी मौके पर पहुंच गए। मजिस्ट्रेट ने जांच की तो दुकान और अंदर बने गोदाम से सैकड़ों एनसीईआरटी की नकली किताबें बरामद की। इसके बाद उन्होंने दुकान के पीछे बने गोदाम में भी छापे के दौरान एनसीईआरटी की नकली किताबें बरामद की। उन्होंने दुकान और दोनों गोदामों को सील कर दिया। साथ ही दुकान मालिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

प्रशासन द्वारा की गई अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि एनसीईआरटी की नकली किताबें दिल्ली की एक प्रिंटिंग प्रेस में छप रही हैं। इन नकली किताबों की सप्लाई प्रदेश में हो रही है। हल्द्वानी में कुछ अभिभावकों और शिक्षण कार्य से जुड़े लोगों ने नकली किताबों को ट्रेस किया था। यह मामला शासन के साथ ही हरिद्वार जिला प्रशासन तक भी पहुंचा। जिसके बाद हरिद्वार जिला प्रशासन ने रुड़की में छापे की कार्रवाई की। 

सूत्रों ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबों की छपाई के लिए सरकार की तरफ से एक प्रक्रिया के तहत अनुबंध दिया गया है। उत्तराखण्ड बोर्ड की एनसीईआरटी किताबें हल्द्वानी में छप रही हैं] जबकि सीबीएसई की एनसीईआरटी किताबें दिल्ली में। रुड़की में बड़े पैमाने पर नकली एनसीईआरटी किताबों का जखीरा मिलने से पूरे प्रदेश में हड़कंप है। नकली किताबें बेचना कॉपी राइट एक्ट का भी खुला उल्लंद्घन है। दुकानदार से पूछताछ और जांच पड़ताल में सामने आया कि यह नकली किताबें दिल्ली की एक प्रिंटिंग प्रेस में छप रही थीं। इस प्रिंटिंग प्रेस में अब तक लाखों की संख्या में नकली किताबें छापी गई हैं। रुड़की से इन नकली किताबों की सप्लाई हल्द्वानी समेत पूरे प्रदेश में हो रही थी। 

हल्द्वानी में नकली किताबों के पहुंचने की शिकायत के बाद शासन स्तर से भी इस पर कार्रवाई के निर्देश हुए थे। सूत्रों ने बताया कि दुकानदार को एक किताब पर दस रुपए से अधिक की बचत हो रही थी। सरकार की तरफ से दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में एनसीईआरटी की किताबें न पहुंचने का फायदा उठाकर नकली किताबें छापकर प्रदेश में सप्लाई का अवैध कारोबार शुरू किया गया। नकली किताबें देखने में हूबहू असली किताबों जैसी हैं] लेकिन इनके पेपर की गुणवत्ता और प्रिंटिंग हल्की है। इन किताबों के पहले पेपर का डिजाइन अलग है। साथ ही एनसीईआरटी की किताबों का लोगो भी गायब है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इसी आधार पर नकली किताबों की पहचान की है।

 

 

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • प्रेम भारद्वाज

कर्नाटक को लेकर चल रहे हाई वोल्टेज ड्रामे में जब देश की जनता मजा ले रही थी तब भी मीडिया चैनलों के तुगलकी एंकरों और पैनल में बैठे जानकारों

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