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जनपदों से 
 
सड़क को लेकर la?k
  • जसपाल नेगी

राजनेताओं के आश्वासनों से तंग आकर अब लोग सड़क निर्माण के लिए अनशन पर हैं

पौड़ी। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद राज्य में हजारों किलोमीटर सड़कें बनी हैं। मगर अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। इन गांवों के लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। फिर भी उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है। पौड़ी गढ़वाल जिले के कलजीखाल विकास खंड में ?kण्डियाल&पाली&डांगी मोटर मार्ग ऐसी ही एक सड़क है। जिसके लिए स्थानीय लोग १५ वर्षों से आंदोलित हैं। लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। 

सरकार के बहरे कानों में आवाज जाए इसके लिए एक बार फिर से ग्रामीणों ने आवाज बुलंद करने का निश्चय किया है। इसके लिए १ मई से मोटर मार्ग बनाओ समिति ने आंदोलन शुरू कर दिया है। ?kण्डियाल गांव से कुछ ही दूरी पर समिति के कार्यकर्ता क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। गौरतलब है कि इस मोटर मार्ग को बनाने की मांग वर्ष २००३ से की जा रही है। लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की बेरुखी के कारण अब तक यह नहीं बन सका है।

वर्ष २००७ में पहली बार श्रीनगर के तत्कालीन विधायक सुंदर लाल मंद्रवाल ने ३ किलोमीटर ¼?kण्डियाल से डांगी तक½ सड़क का प्रस्ताव शासन को भेजा था। मगर जानकारी के अनुसार अंतिम समय में इसकी स्वीकूति रोक दी गई। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी। पौड़ी के नए विधायक बीएम कोटवाल ने
?kण्डियाल& पाली&डांगी&तकलना&बाड़ीयूं तक ५ किलोमीटर सड़क बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। इस पर स्वयं लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय कुमार बिष्ट ने सर्वे किया। मगर वित्तीय स्वीकूति नहीं मिलने के कारण सड़क अभी तक नहीं बन सकी है। इससे क्षेत्रवासी नाराज हैं। वर्ष २०१२ में
?kण्डियाल में दस सूत्रीय मांगों को लेकर एक बड़ा आंदोलन हुआ था। इन दस सूत्रीय मांगों में सड़क की मांग भी थी। इस आंदोलन को पूरे क्षेत्र के लोगों का समर्थन मिला। 

लंबे आंदोलन को देखकर ही आखिरकार विधायक कोटवाल १० जून को क्षेत्र में आए और वहां पर मांगों पर कार्यवाही करने की बात कहकर आंदोलन को समाप्त करवा दिया। २०१२ में विधानसभा के चुनाव हुए। उस चुनाव में यह क्षेत्र श्रीनगर से काटकर पौड़ी विधानसभा क्षेत्र में मिला दिया गया। यहां के विधायक फिर से मंद्रवाल बने। लेकिन सड़क न बनी। २०१४ के लोकसभा चुनाव में जब ग्रामीणों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं करने का ऐलान किया तो विधायक मंद्रवाल ने लिखित आश्वासन दिया। उनके मुताबिक चुनाव बाद वे सड़क बनवाएंगे] इसलिए वोट जरूर डालें। चुनाव खत्म हो गए] मगर इसकी वित्तीय स्वीकूति फिर भी नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल २०१६ में देहरादून गया। वहां वे विधायक मंद्रवाल से मिले। विधायक के अलावा ग्रामीण तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी] तत्कालीन सीएम के ओएसडी हरपाल सिंह रावत से भी मिले। फिर भी इसके लिए टोकन मनी स्वीकूत नहीं हुई। इस पर आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने २०१७ के विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करने का ऐलान किया। 

चुनाव बहिष्कार की खबर जब जिला मुख्यालय तक पहुंची तो अंतिम क्षणों में तत्कालीन डीएम ने ग्रामीणों से मतदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने वित्तीय स्वीकूति का आश्वासन दे दिया। उसके बाद नई सरकार बनी। जिला पंचायत सदस्य मीना रावत के माध्यम से इस सड़क की वित्तीय स्वीकूति की मांग मुख्यमंत्री और विधायक तक पहुंचाई गई। २० जुलाई २०१७ को ?kण्डियाल में बहुउद्देशीय सहकारी साधन समिति के वार्षिक कार्यक्रम में पाली&डांगी सड़क की मांग एक बार फिर उठी। इस कर्याक्रम में विधायक भी मौजूद थे। इसके बाद सितंबर २०१७ को पौड़ी के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री को वित्तीय स्वीकूति की मांग के लिए ज्ञापन दिया गया। लेकिन सीएम कार्यालय से कोई जबाब नहीं आया। विधायक प्रतिनिधि को भी सड़क की वित्तीय स्वीकूति की मांग को पत्र दिए गए। इस बार भी नतीजा शिफर ही रहा। आखिरकार ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा।

अनशन स्थल पर हुए भाषणों में वक्ताओं ने विधायक पौड़ी मुकेश कोली पर आरोप लगाया कि यह मामला उनके संज्ञान में है] पर वे बोल रहे हैं कि उनके पास मामला अभी आया ही नहीं है। उनके कार्यकाल तक डांगी गांव  में सड़क जरूर पहुंचेगी। यह महज एक बहानेबाजी है। लेकिन वे ऐसी बहानेबाजी अब नहीं सहेंगे। जब तक इसके लिए वित्तीय स्वीकूति नहीं मिल जाती है तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। क्रामिक अनशन पर ग्राम प्रधान सैनार प्रेम सिंह नेगी] ग्राम प्रधान सरस्वती देवी चौहान] ग्राम प्रधान गढ़कोट सुमन प्रकाश] पूर्व प्रधान जगमोहन बिष्ट] जगमोहन डांगी कलीराम आदि बैठ रहे हैं। इनके अतिरिक्त रोजाना क्षेत्र के अनेक व्यक्ति आंदोलन स्थल पर मौजूद हो रहे हैं।

 

सूचना मांगने की सजा

 

  • दि संडे पोस्ट संवाददाता

 

बनबसा ¼चंपावत½। अगर आप भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना चाह रहे हैं तो सावधान भी रहें। कहीं ऐसा न हो कि इसके बदले आपको झूठे मुकदमों से जूझना पड़े। ऐसा ही एक मामला चंपावत जिले के बनबसा में सामने आया है जहां आरटीआई कार्यकर्ता को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के बदले दो&दो फर्जी मुकदमों से जूझना पड़ रहा है। क्षेत्र के भ्रष्टाचारियों ने बनबसा के आरटीआई कार्यकर्ता विनय शुक्ला पर दो फर्जी मुकदमे दाग कर उनका जीना मुश्किल कर दिया है। खास बात यह है कि पुलिस प्रशासन भी ऐसे मामलों में बड़ी ही तत्परता से मुकदमे दर्ज कर भ्रष्टाचारियों के हौसलों को बढ़ावा दे रहा है। 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक आरटीआई कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने २९ दिसंबर २०१६ को राज्य के पुलिस महानिदेशक को एक शिकायती पत्र भेजा। इसमें उन्होंने जनपद ऊधमसिंह नगर एवं चंपावत जिले के बनबसा में अवैध रूप से लॉटरी का संचालन कर करोड़ों रुपए का काला धन एकत्र किए जाने की जानकारी दी। मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस महानिदेशक ने चंपावत जिले के पुलिस कप्तान को इस प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो शिकायत सही पाई गई जिसके आधार पर शारदा वेलफेयर सोसायटी के महेंद्र सिंह बिष्ट और अन्य के विरुद्ध धारा ४२० के तहत मुकदमा संख्या ३१/२०१७ दर्ज किया गया। पुलिस की जांच में फागपुर निवासी अजय लाल जो प्राथमिक विद्यालय बिसौटा झनकट में शासकीय अध्यापक हैं] वह भी इस गोरखधंधे में शामिल पाए गए जो कि उत्तराखण्ड कर्मचारी आचरण नियमावली २००२ और भारतीय दंड संहिता की धारा १६८ के नियमों का खुला उल्लं?kन है। लेकिन इस मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही को लचर रूप दिया गया। 

इसके बाद २०अक्टूबर २०१७ को आरटीआई के तहत जो जानकारी मिली] उसके अनुसार बनबसा की ग्रामसभा फागपुर में स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लग रहा है। खुले में शौच को रोकने के लिए गांव&गांव बनाए जा रहे शौचालयों के निर्माण में लाखों रुपयों का ?kksVkyk और अनियमितताएं सामने आई। ग्रामप्रधान गीता देवी के कार्यकाल में स्वजल से प्राप्त २४३ शौचालयों में लाखों रुपयों का गोलमाल सामने आया। सूचना अधिकार अधिनियम में गांव के २४३ लोगों को शौचालय का लाभ देने की जानकारी दी गई] लेकिन मात्र ५२ लाभार्थियों को ही चेकों से भुगतान किया गया। इसके साथ ही इसमें तमाम द्घोटाले और अनियमितता सामने आई। लेकिन कार्यवाही होना तो दूर उल्टे ग्राम प्रधान ने आरटीआई कार्यकर्ता विनय शुक्ला के अलावा समाचार का प्रकाशन करने वाले एक पत्रकार तथा संपादक के खिलाफ पुलिस से सांठ&गांठ कर १९ दिसंबर २०१७ को बनबसा थाने में आईपीसी की धारा ३८४] ५००] ५०१] १२० बी और एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता विनय शुक्ला का कहना है कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के बदले उन्हें झूठे मुकदमों से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस मामले में माननीय न्यायालय से कुछ राहत मिलते ही एक महिला से और फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। शुक्ला ने कहा कि सारे भ्रष्टाचारी एक मंच पर आकर मेरे मनोबल को तोड़ने का काम कर रहे हैं। लेकिन मेरी ये जंग जारी रहेगी।

शुक्ला ने बताया कि शौचालय द्घोटाले में अपने ही परिजनों को लाभ देने की नीयत से शौचालय निर्माण में क्रय की गई सामग्री ग्रामप्रधान ने अपने पति की फर्म प्रिंस स्टील तथा अपने जेठ की फर्म जगदीश ट्रेडर्स से ही की है। हैरानी की बात है कि ग्रामप्रधान का पति अजय लाल शासकीय विद्यालय में सरकारी टीचर है और उसकी फर्म का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। 

शौचालय द्घोटाले की जांच को लगभग चार महीने से भी अधिक का समय हो गया है लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ पा रही है जिससे विभागीय संलिप्तता भी महसूस की जा रही है। सीडीओ] डीडीओ और बीडीओ इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं। इसके अलावा आरटीआई में कई बार जांच रिपोर्ट मांगी गई] लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसकी धज्जियां उड़ाते हुए कोई जवाब देने की जहमत तक नहीं उठाई।  

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • अपूर्व जोशी

मेरा स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि को नहीं किया जाना चाहिए फिर चाहे वह जुमे की नमाज हो या फिर नवरात्रों में

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