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vad 50 02-06-2018
 
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सरगोशियां
 
हाशिए में येदियुरप्पा

कर्नाटक में भाजपा के द्घोषित सीएम पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा इन दिनों पार्टी आलाकमान के रवैये से बेहद आहत बताए जा रहे हैं। पार्टी ने उन्हें प्रदेश में पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा तो लिंगायत वोट बैंक को साधने की नीयत से द्घोषित कर दिया लेकिन टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति बनाने तक में] उनकी राय को खास महत्व केंद्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया नहीं। यहां तक कि उनके बेटे को भी टिकट देने से पार्टी ने इंकार कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धुंआधार चुनावी रैलियों से येदियुरप्पा को दूर रखा गया है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी येदियुरप्पा के बगैर ही कर्नाटक में भ्रमण करते रहे हैं। चर्चा इस पर भी है कि यदि भाजपा कर्नाटक में सरकार बनाने लायक सीटें पा जाती है तो येदियुरप्पा के बजाए दलित लीडर श्रीरामालू अथवा संद्घ के निकट माने जाने वाले बीएल संतोष को सीएम बनाया जा सकता है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि हिमाचल के द्घोषित सीएम प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल की भांति येदियुरप्पा भी चुनाव हार जाएं। ऐसी अवस्था में बगैर किसी आंतरिक संद्घर्ष के भाजपा स्वच्छ छवि वाले किसी नेता को मुख्यमंत्री बना पाने में सफल रहेगी।


भाजपा में जाएंगे कुमार

दिल्ली के सत्ता गलियारों में इन दिनों आम आदमी पार्टी के बागी नेता कुमार विश्वास को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का दौर चल रहा है। अंग्रेजी दैनिक डैक्कन क्रानिकल की मानें तो कुमार जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि कुमार को भाजपा मनोनीत कोटे से राज्यसभा भेज सकती है। 

गौरतलब है कि इस कोटे की तीन सीटें खाली हैं। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर] सामाजिक कार्यकर्ता अनु आगा और फिल्म अभिनेत्री रेखा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। अगले महीने वरिष्ठ वकील पराशरण का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कुमार विश्वास को साहित्य-सिनेमा के कोटे से राज्यसभा लाया जा सकता है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो कुमार का नाम जुलाई माह में राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है। माना जा रहा है यदि कुमार भाजपा में जाते हैं तो उन्हें २०१९ में प्रधानमंत्री मोदी की ब्रांडिंग का काम सौंपा जाएगा। इस बीच कुमार विश्वास अरुण जेटली मानहानि मामले में भी माफी मांग सकते हैं। पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर सीधे आक्रमण कर अपने बचाव का रास्ता खोज लिया है। यदि वाकई विश्वास भाजपा में चले जाते हैं तो टीम केजरीवाल का आरोप सत्य साबित हो जाएगा कि कुमार लंबे समय अर्से से पार्टी के भीतर रह भाजपा के लिए काम कर रहे थे।

बड़े बदलाव की तैयारी

कांग्रेस संगठन में नए अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद से लगातार हो रहे बदलाव का दौर अभी जारी रहेगा। सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी शीद्घ्र ही कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रहे हैं। पिछले दिनों मध्य प्रदेश] ओडिशा और गोवा में नए अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। अब उत्तर प्रदेश] हरियाणा] बिहार और करेल का नंबर लग सकता है। उत्तर प्रदेश में राजबब्बर के स्थान पर किसी ब्राह्मण नेता को कमान सौंपने की तैयारी चल रही है। रेस में प्रमोद तिवारी] राजेशपति त्रिपाठी और राजेश मिश्रा बताए जा रहे हैं। खबर यह भी है कि दो या तीन कार्यकारी अध्यक्ष भी उत्तर प्रदेश में बनाए जा सकते हैं। हरियाणा में जाटों को साधने की नीयत से पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को अध्यक्ष तो गुर्जर नेता धर्म सिंह चोक्कर को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। बिहार और केरल में पूर्वकालिक अध्यक्षों की नियुक्ति भी लंबे अर्से से लटकी हुई है। जल्द ही इस बाबत भी फैसला लिए जाने की बात कही जा रही है। केरल में ओमन चांडी अथवा रमेश चेनिथला को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। चर्चाएं उत्तराखण्ड के पूर्व सीएम हरीश रावत को भी केंद्रीय कार्यकारणी में महत्वपूर्ण स्थान दिए जाने को लेकर बहुत चल रही हैं।

 

रावत की पैंतरेबाजी

उत्तराखण्ड कांग्रेस में दिग्गजों के आपसी संबंधों का बनना-बिगड़ना पिछले विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भी जारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह एक जमाने में पूर्व सीएम हरीश रावत के खासमखास हुआ करते थे। रावत के राजनीतिक अवसान के बाद वे अब नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश संग जुगलबंदी कर चुके हैं। दूसरी तरफ राज्यसभा सीट ना मिल पाने के बाद से हरीश रावत के खिलाफ खुली जंग छेड़ चुके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने एक बार फिर से रावत संग हाथ मिला लिए हैं। प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश के तालमेल से खिन्न हरीश रावत ने ही किशोर उपाध्याय को मनाने की पहल की। सूत्रों की मानें तो किशोर संग पिछले दिनों हरीश रावत ने लंबी वार्ता की और सारे गिले-शिकवों को दूर करने का प्रयास किया। इसके बाद रावत ने हृदयेश के गढ़ हल्द्वानी में काफल पार्टी का आयोजन किया। इस पार्टी में हृदयेश की अनुपस्थिति रही। जानकारों का कहना है कि रावत २०१९ में नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। इंदिरा हृदयेश भी यहां से चुनाव लड़ना चाहती हैं। दोनों के बीच नूरा-कुश्ती का नया दौर इसी मुद्दे को लेकर है।

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • अपूर्व जोशी

मेरा स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि को नहीं किया जाना चाहिए फिर चाहे वह जुमे की नमाज हो या फिर नवरात्रों में

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