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vad 50 02-06-2018
 
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सुर्खियां जो नहीं बनीं
 
एचआईवी बच्चों के लिए हॉस्टल

जागरूकता की कमी के कारण जिस बीमारी से लोग दूर भागते हैं] उसके संक्रमित लोगों से बिदकते हैं] वहीं झारखण्ड की एक महिला उस संक्रमण से ग्रसित सैकड़ों बच्चों को अपने साथ रखती है। सिस्टर ब्रिटो एचआईवी पॉजिीटिव बच्चों को अपने साथ रखती हैं। उनकी देखभाल करती हैं और सभी को पढ़ाती भी हैं। एचआईवी पॉजिटिव बच्चों के लिए उन्होंने एक हॉस्टल खोला है। जिसका नाम है] स्नेहदीप होली क्रॉस। सिर्फ एचआईवी पॉजिटिव पेरेंट्स और उनके बच्चों के लिए संचालित यह स्कूल हजारीबाग से कुछ किलोमीटर दूर स्थित बनहप्पा गांव में है। सिस्टर ब्रिटो केरल से आई हैं और अब झारखंड में रहकर एड्स पीड़ितों के बीच काम कर रही हैं। सिस्टर ब्रिटो ने बताया कि सितंबर २०१४ में ४० बच्चों के साथ उन्होंने यह स्कूल खोला था। तब यहां हजारीबाग के अलावा कोडरमा] चतरा] गिरिडीह] धनबाद आदि जिलों के एचआईवी पॉजिटिव बच्चों का दाखिला लिया गया था। वह कहती हैं कि अब यहां कई और जिलों के बच्चे पढ़ते हैं। यहां उनके रहने-खाने और पढ़ने की मुफ्त व्यवस्था है। उनका यह सफर कैसे शुरू हुआ इस सिस्टर कहती हैं] ^मैं साल २००५ से एड्स पीड़ित लोगों के लिए काम कर रही हूं। मैंने तरवा गांव में ऐसे लोगों को समर्पित एक अस्पताल खोला था। इस दौरान मुझे ऐसे लोगों के परिजनों को नजदीक से देखने-जानने का मौका मिला। मुझे लगा कि ऐसे लोगों के बच्चे पढ़-लिख नहीं पाते। जिंदगी से निराश हो जाते हैं। तब साल २००९ में एचआईवी पॉजिटिव बच्चों के लिए स्कूल खोलने का प्रस्ताव लेकर मैं हजारीबाग के तत्कालीन डीसी विनय चौबे से मिली। उनकी मदद से मैंने एक अनाथ स्कूल खोला। उसके संचालन के दौरान साल २०१४ की जनवरी में रामकूष्ण मिशन के स्वामी तपानंद ने मुझे स्थायी स्कूल खोलने का सुझाव दिया। जमीन खरीदने के लिए पैसे भी दिए। तब मैं बनाहप्पा आ गई और सितंबर २०१४ में मैंने इस स्कूल की शुरुआत की। अब स्कूल के बच्चे मुझे मां कहते हैं तो संतुष्टि मिलती है।^ यहां के बच्चों के इलाज का जिम्मा डॉ लाइका और डॉ अनिमा कुंडू संभालती हैं। डॉ अनिमा ने बताया कि अगर दवाइयां समय पर दी जाएं तो एचआईवी पॉजिटिव बच्चे भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। स्कूल में बच्चों की काउंसलिंग करने वाली शिक्षिका डेजी पुष्पा ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान बच्चों के स्वाभाविक गुस्से को शांत करना पड़ता है। बच्चों को ऐसा लगता है कि उनके मां-बाप की गलतियों के कारण वे एचआईवी पॉजिटिव हो गए हैं। वो कहती हैं] ^जब हम उन्हें समझाते हैं तो फिर बच्चे काफी उत्साहित हो जाते हैं।^ बच्चे न केवल पढ़ाई बल्कि डांस] खेल और पेंटिंग में भी अव्वल हैं।

 

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के सितारे गर्दिश की तरफ मुखातिब हैं। कुछ ही महीने में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। प्रदेश की आम जनता के साथ&साथ अब भाजपा आलाकमान

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