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vad 15 30-09-2017
 
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खेल-सिनेमा
 
धुआंधार शतकों के धुरंधर

 

  • हरिनाथ कुमार

 

 

आज का दौर फटाफट क्रिकेट का है जहां २० ओवर में ही टीम को अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी का दम दिखाना होता है। ऐसे में सिर्फ एक जोरदार प्रदर्शन ही पूरे खेल का रुख बदल देता हैं। २० ओवर का यह खेल टीम प्रदर्शन से ज्यादा अब व्यक्तिगत प्रदर्शन पर निर्भर हो गया है। इसे क्रिस गेल ने लगातार अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। कई बार उनकी आंधी में विपक्षी टीम तिनकों की तरह उड़ चुकी है। गेल से पहले भी सनत जयसूर्या हों या शाहिद आफरीदी ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपने अंदाज से बड़े से बड़े क्रिकेट मैदान को भी छोटा बना दिया। 

 

फिलहाल पुणे वॉरियर्स के खिलाफ एमए चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए आईपीएल-६ के ३१वें मुकाबले में क्रिस गेल ने टेस्ट एक दिवसीय और ट्वेंटी-२० का सबसे तेज शतक बनाने का रिकार्ड बनाया। गेल ने महज ३० गेंदों में शतक बनाया। रिकॉर्ड की बात की जाय तो ट्वेंटी-२० क्रिकेट में आस्ट्रेलिया के बल्लेबाज एंड्रयू सायमंड्स ने ३४ गेंदों में शतक लगाया था जबकि आइपीएल में इससे पहले यह रिकार्ड यूसुफ पठान (३७ गेंद) के नाम था। पठान ने मुम्बई इंडियंस के खिलाफ ३७ गेंदों पर शतक लगाकर रिकार्ड कायम किया था। पठान ने अपनी शतकीय पारी में नौ चौके और आठ छक्के जड़े थे।

 

गेल की व्यक्तिगत पारी के लिहाज से भी २३ अप्रैल का मैच बहुत महत्वपूर्ण रहा। गेल ने आईपीएल के इस मुकाबले में रिकार्ड २६६ .१५ की स्ट्राइक रेट से १७५ रनों की नाबाद पारी खेली। यह रिकॉर्ड इससे पहले ब्रैंडन मैक्लम (नाबाद १५८) के नाम था। मैक्लम ने आईपीएल के पहले संस्करण में यह रिकार्ड रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ बनाया था। गेल ने अपनी इस पारी के दौरान १७ छक्के लगाने का भी रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ग्राहम नेपियर के १६ छक्कों के रिकॉर्ड को तोड़ा। नेपियर ने वर्ष २००८ में ससेक्स के खिलाफ अपनी १५२ रनों की पारी के दौरान १६ छक्के जड़े थे। एक पारी में चौकों और छक्कों से सबसे ज्यादा रन बटोरने का भी कीर्तिमान स्थापित करने में गेल का नाम अब शीर्ष पर हो गया है। गेल ने चौकों और छक्कों से कुल १५४ रन जुटाते हुए ग्राहम नेपियर के १० चौकों और १६ छक्कों की मदद से जुटाए १३६ रनों के रिकार्ड को ध्वस्त किया।

 

ध्वस्त हुए कीर्तिमानों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। अब गेल आईपीएल में सबसे तेज (५३ गेंदों में) १५० रन बनाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं। इस मामले में भी गेल ने मैक्लम को पीछे छोड़ा। संपूर्ण क्रिकेट जगत गेल की मात्र ६६ गेंदों पर १३ चौकों और १७ शानदार छक्कों की बदौलत नाबाद १७५ रनों की इस अभूतपूर्व पारी से मंत्रमुग्ध है। गेल की इस सफलता में तीन अंकों का बड़ा योगदान है। गेल ३३३ नंबर की जर्सी पहनते हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी अब तक की सर्वश्रेष्ठ पारी ३३३ रनों की है। इसके अलावा उन्होंने क्रिकेट इतिहास के सबसे तेज शतक तक पहुंचने के लिए ३३३ के स्ट्राइक रेट से रन बनाए।

 

गेल के अलावा भी कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपनी करिश्माई बल्लेबाजी से क्रिकेट मैदान को छोटा बना दिया और आंधी की रफ्तार से शतक बनाए। वनडे इतिहास में पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज शाहिद आफरीदी का नाम बूम-बूम श्रीलंका के खिलाफ अक्टूबर १९९६ में ३७ गेंदों पर ही शतक ठोंकने के बाद ही पड़ा था। इस मैच में उन्होंने छह चौकों और ११ छक्कों की बरसात की थी। दक्षिण अफ्रीका के विकेटकीपर और बल्लेबाज मार्क बाउचर अपने विस्फोटक अंदाज के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। सितम्बर २००६ में जिम्बाब्वे के खिलाफ मार्क बाउचर ने ४४ गेंदों पर शतक पूरा कर दिया था। ब्रायन लारा दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं। अक्टूबर १९९९ में लारा ने बांग्लादेश के खिलाफ ४५ गेंदों पर शतक ठोंक कर अपनी बल्लेबाजी का जौहर दिखाया। 

 

मॉर्डन क्रिकेट में दनादन रन बटोरने की कला की शुरुआत करने का बहुत बड़ा श्रेय सनत जयसूर्या को जाता है। अप्रैल १९९६ के विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ ४८ गेंदों पर ही शतक ठोंक कर उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का नमूना दिखा दिया था। इसी तरह आयरलैण्ड के हरफनमौला क्रिकेटर केविन ओ ब्रायन ने इंग्लैण्ड के खिलाफ २०११ के विश्व कप में ऐसा कमाल दिखाया जिसे शायद ही क्रिकेट प्रशंसक कभी भूल पाएं। आयरलैण्ड के इस बल्लेबाज ने इंग्लैण्ड के गेंदबाजों की खबर लेते हुए ५० गेंदों में ही १०० रन बना डाले थे। फरवरी २०१० में अहमदाबाद में भारतीय गेंदबाजों पर एबी डिविलियर्स एक तूफान की तरह टूट पड़े थे। डिविलियर्स ने इस मैच में ५८ गेंदों पर ११ चौकों और तीन छक्कों की मदद से शतक बनाया था। विस्फोटक बल्लेबाजी करने के मामले में सहवाग का भी कोई सानी नहीं। अपनी तेज बल्लेबाजी से उन्होंने कई बार विरोधियों को दिन में तारे दिखलाएं हैं। साल २००९ में न्यूजीलैण्ड के खिलाफ सहवाग ने ६० गेंदों पर ही शतक ठोंक मैच का रुख पलट दिया था।

 

सबसे तेज शतक ठोंकने वाल क्रिस गेल को महामानव जैसे विशेषण से तो सुशोभित किया जा रहा है लेकिन क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने एक समय में सिर्फ २२ गेदों में ही शतक ठोंक डाला था। 

 

अंधविश्वास फैलाती फिल्में

 

  • रवि जोशी

 

एक समय पर्दे से लगभग गायब हो गईं भुतही यानी हॉरर फिल्में एक बार फिर लौट आयी हैं। इस बार उनकी वापसी अलग- अलग तरह की फिल्मों से हुई है। मार्च में रिलीज हुई आत्मा और ३जी के बाद १९ अप्रैल को एक थी डायन रिलीज हुई। निर्माता एकता कपूर के बालाजी बैनर तले आ रही फिल्म एक थी डायन की कहानी एक जादूगर बोबो (इमरान हाशमी के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

तकनीक हो या विज्ञान इसका वर्चस्व मानव जीवन में जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे ही अंधविश्वास और डर दूर होता गया। इस प्रक्रिया को हिन्दी सिनेमा ने समय-समय पर दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। लेकिन अब इसे क्या कहेंगे जब तकनीक के बढ़ते वर्चस्व में अंधविश्वास डर और रहस्य पर फिल्में बनना एक बार फिर शुरू हो गया। बॉलीवुड में डरावनी शक्तियां एक बार फिर से सक्रिय हो गई हैं। चुड़ैलों रहस्यमय ताकतों जैसी बातों पर आधारित एक थी डायन इस कड़ी में अगला नाम है।

 

इस चलन से हताश महिला समूहों का तर्क है कि डायन बताकर मारना (विच हंटिग) मनोरंजन नहीं बल्कि एक दुखद तथ्य है जो महिलाओं को निशाना बनाने को बढ़ावा देता है। ध्यान देने की बात है कि हाल ही में प्रदर्शित राज ३ और तलाश ने दर्शकों का मनोरंजन करने की आड़ में अंधविश्वासों को खूब प्रचारित किया है।

 

अभिनेता इमरान हाशमी कोंकणा सेन शर्मा और कल्कि कोचलिन अभिनीत एक थी डायन का फोकस चुडैल की चोटी पर है। एकता को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तरह की फिल्में विच हंटिग के नाम पर महिलाओं के शोषण को बढ़ावा देती है। अलबत्ता वह कहती हैं मैं नहीं जानती कि डायन की चोटीदिखाने में अंधविश्वास को बढ़ावा देने जैसा क्या है। सवाल यह है कि इस तरह की फिल्मों का विशेष रूप से सीधे-सादे श्रोताओं पर क्या प्रभाव होगा। ऐसी फिल्में जो डंके की चोट पर कहती हों कि चुडैलों का अस्तित्व होता है।

 

बीते १०० वर्षों से अधिक के सफर में भारतीय सिनेमा ने डरावनी फिल्मों दैवीय शक्तियों और कुछ प्रचलित बुराइयों की अवधारणा को मजबूती दी है। अभिनेता ऋषि कपूर और श्रीदेवी अभिनीत फिल्म नगीना को लीजिए। इस फिल्म में भेष बदलने में माहिर नागिन बदला लेती है। इसके पहले भी नागिन बीस साल बाद जानी दुश्मन गुमनाम और रामसे ब्रदर्स की बेतुकी फिल्मों का नाम लिया जा सकता है जो समाज में अंधविश्वास को खाद-पानी देने का काम करती रही है। अनेक दर्शकों के लिए यह मनोरंजन हो सकता है लेकिन देश के सुदूर अंचलों में रहने वाले अधिकांश लोग फिल्माए गए अंधविश्वासों पर भरोसा करने लगते हैं।

 

देश के पिछड़े हिस्सों से विच हंटिंग से जुड़ी दिल दहला देने वाली अनेक खबरें आई हैं। जिसके बारे में बाद में पता चलता है कि वह मिथ थी। फिर भी फिल्म राज ३ और आत्मा में काम कर चुकीं अभिनेत्री बिपाशा बसु मानती हैं कि फिल्मकारों के पास भारतीय संदर्भ अवश्य होना चाहिए या फिल्में आमजन का मनोरंजन करने वाली होनी चाहिए। बिपाशा मानती हैं कि भारत में यदि हम डरावनी फिल्मों के साथ प्रयोग कर रहे हैं तो हमें दर्शकों को एक अच्छी कहानीबेहतरीन परफॉर्मेंस और डर की छौंक देनी पड़ती है। तभी ये मनोरंजक होंगे।

 

लगता है कि बॉलीवुड में इन दिनों हॉरर फिल्मों का दौर चल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक ऐसी फिल्में किस्मत आजमा रही हैं और दर्शकों को डराने की कोशिश कर रही हैं। 

 

 

 
         
 
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