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संवाद 7
 
पूंजीवाद गरीबों के खिलाफ एक युद्ध है

लोहिया कॉमन सिविल कोड का समर्थन करते हैं तो क्या वह भाजपा के करीब थे\

भाजपा कॉमन सिविल कोड के पक्ष में न है और न होंगे। क्योंकि जिस दिन कॉमन सिविल कोड की बात आएगी] उस दिन हिंदू को भी बदलना पड़ेगा। भाजपा की सोच है] इस्लाम खराब है। इसको बदलो। उनकी परंपरा खराब है। हमारी ¼हिन्दू की½ परंपरा ठीक है। यदि ऐसा नहीं है तो भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने पद्मावत का समर्थन क्यों  नहीं किया।

अयोध्या आजकल चर्चा में है। क्या वहां राम मंदिर बनना चाहिए\

यह तो कोर्ट को फैसला करना है।

कोर्ट ने कहा है कि मैं मंदिर&मस्जिद नहीं] बल्कि जमीन का मालिकाना हक किसका है] इसको देखूंगा।

कोर्ट का यह कहना बहुत ही अच्छा है। अगर कोर्ट कहता कि मैं मंदिर पर फैसला सुना रहा हूं तो उससे एक पक्ष इस पर शक करता। इसलिए जमीन के मालिकाना हक पर सुनवाई करने का उनका  निर्णय समझदारी वाला है। जमीन जिसकी होगी मंदिर या मस्जिद उसकी बनेगी। इसलिए फैसला होने दीजिए।

कोर्ट ने यह भी बोला कि बाहर दोनों पक्ष इस पर आपसी सहमति बना लें\

ये कर लें तो बहुत ही श्रेष्ठ होगा। क्योंकि कोर्ट का फैसला स्वीकार होगा मगर उसमें लाचारी होगी। आपसी सहमति का लाभ यह होगा कि हिन्दू&मुस्लिम का मतभेद खत्म हो जाएगी। पूंजीवाद] वैश्वीकरण के खिलाफ हमारी लड़ाई में सबसे बड़ी बाधा धार्मिक वैमनस्ता है। हम लोग चुनाव में जाते हैं। तब मुस्लिम कहता है आपकी पार्टी बहुत अच्छी है लेकिन आप जीत नहीं रहे हैं] इसलिए हम वोट दूसरे को दे रहे हैं। हिंदू भी कहता है] आपकी पार्टी अच्छी है लेकिन यह हिन्दूवादी पार्टी है। धार्मिक मतभेद अमीरी] पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करता है। इसलिए यदि ये समझौता कर लेते हैं तो समाजवाद के लिए नया रास्ता खुलेगा।

आपको लगता है कि कोर्ट के बाहर समझौता हो पाएगा\

हमें देश की जनता के समझदारी पर विश्वास करना चाहिए।

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी बनाने की स्थिति क्यों आई\

मुलायम सिंह और हमने समाजवादी पार्टी बनाई थी। १९७७ में एक गड़बड़ फैसला हो गया। १९७७ में जेपी आपातकाल के खिलाफ सबको एकजुट कर रहे थे। उनका मानना था कि ये लोग सुधर जाएंगे। लेकिन मुझे शक था। हम लोगों ने गांधी जी के साथ काम करने वाले काशीनाथ तिवारी जी के माध्यम से पत्र उनको भेजा था। पत्र में मैंने कहा था कि मोर्च बनवाईए मगर विलय मत कराइए। मगर जेपी नेता थे। उनको जो अनुकूल लगा उन्होंने किया। उस विलय से समाजवादी पार्टी खत्म हो गई। उसके बाद लोकदल] जनता दल नाम से पार्टी बनी। मगर हम लोग चाहते थे समाजवादी नाम से पार्टी बने। क्योंकि डॉ ़ लोहिया कहते थे] ^समाजवाद नाम की पार्टी रहना चाहिए। इसे खत्म मत करना।^ इस सिलसिले में चर्चा होती थी। मुलायम सिंह के साथ सहमति बनी। मैंने उन्हें कहा था कि आपका आचरण ठीक नहीं रहा है। १९८९ में वे मुख्यमंत्री बने थे। तब उन्होंने गुनाह किया थी। उनके उस गुनाह को माफ करना आसान काम नहीं था। एक सीमेंट फैक्ट्री] जहां हमारे लोहिवादी मजदूर यूनियन थे] उसे कुछ करोड़ रूपये में डालमिया को बेच दिया। तब वहां आंदोलन हुआ। गोलियां चली। मजदूर मारे गए। इसलिए मैंने कहा था कि आपके हाथ मजदूरों के खून से रंगे हैं। हमें आप पर विश्वास नहीं है। इस पर उन्होंने सब के सामने माफी मांगी थी। दोबारा ऐसा नहीं करने का वादा किया था। तब हम लोगों ने पार्टी बना दी। पार्टी बनने के कुछ दिनों बाद यूपी में चुनाव हुआ। समाजवादी पार्टी चुनाव जीत गई। वे मुख्यमंत्री बन गए। मुख्यमंत्री बनने के दो&तीन महीने बाद ही वे अपने मूल रंग में आ गए। हमारे मतभेद शुरू हो गए। पार्टी की बैठक ताज होटल में करने से मतभेद शुरू हुआ। फिर जाति के आधार पर कांग्रेस पार्टी को उन्होंने तोड़ने का प्रयास किया। जिस वामपंथी पार्टी ने हमें समर्थन किया था] उनकी पार्टी को भी तोड़ने लगे। बसपा को तोड़ने लगे। हमने कहा आप पांच साल बेहतर सरकार चलाओ। सब लोग स्वयं अपने साथ आ जाएंगे। मगर वे नहीं माने। फिर वे उद्योगपतियों के साथ एक बार लंदन गए। वहां विदेशी निवेश का वादा करके आ गए। वह भी ऐसे क्षेत्र में जिस पर समाजवादी पार्टी ने एफडीआई नहीं लाने का वादा किया था। इस तरह उनसे मतभेद बढ़ता गया। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन पर भी उनसे मतभेद हुआ। उन्होंने आंदोलनकारियों पर गोली चला दी। जबकि हमारे कहने पर उन्होंने मेरे सामने संबंधित जिलाधिकारियों को आंदोलनकारियों के लिए खाना&ठहरने का निर्देश दिया था। फिर लोकसभा चुनाव के दौरान ग्वालियर में सिंधिया परिवार का उन्होंने समर्थन करने को कहा। जबकि लोहिया ने jkt?kjkus के खिलाफ मेस्तरनी को खड़ा किया था। इसका मध्य प्रदेश कार्यकारिणी ने विरोध किया तो मुलायम सिंह बोले कार्यकारिणी भंग कर दूंगा। कार्यकारिणी ने मुझसे पूछा। मैंने कहा यदि आप तैयार हैं तो हम अलग हो जाएंगे। इस तरह हम समाजवादी से अलग हुए और लोकतंत्रिक समाजवादी पार्टी बनाई।

 
         
 
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क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और और वित्त मंत्री प्रकाश पंत के बीच शीतयुद्ध चल रहा है?

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  • कंवल भारती

दलित चिंतक

यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत के कोने&कोने में दलित आंदोलन का विस्तार हुआ है] जिसने दलितों को अपने अधिकारों

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