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vad 14 23-09-2017
 
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खास खबर 
 
गंगा किनारे अवैध अट्टालिकाएं

 

  • कृष्ण कुमार

 

 

धर्मनगरी हरिद्वार-ऋषिकेश में गंगा तट और सरकारी भूमि पर अवैध अट्टालिकाएं खड़ी की जा रही हैं। यहां अखाड़ों मठों और आश्रमों से जुड़े साधु-संतों ने अवैध कब्जे कर लिये हैं। उन्होंने यहां न सिर्फ भव्य निर्माण किये बल्कि कॉलोनियां और नगर तक बसा लिये। राजनीतिक रसूख होने के कारण शासन-प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचता रहा है

 

हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी के तट और सरकारी भूमि पर धार्मिक संस्थाओं के अवैध कब्जे और निर्माण के मामले सदैव सामने आते रहे हैं। लेकिन शासन-प्रशासन इन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। हालात ये हैं कि जब-जब प्रशासन ऐसे अवैध निर्माणों को रोकने के लिए नोटिस जारी करता है तब-तब इनके निर्माण में और भी तेजी आ जाती है। देखा जाये तो ये नोटिस एक तरह से अवैध निर्माण की अनुमति देने जैसे ही साबित हो रहे हैं। 

हरिद्वार को देखें तो यहां सबसे अधिक सरकारी भूमि धार्मिक संस्थाओं के कब्जे और अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ चुकी हैं। आज कुंभमेला क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि पर सैकड़ों आश्रम और भवन खड़े हो चुके हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग और नगर निगम की भूमि पर अखाड़ों-मठों के अवैध कब्जे कर लिये हैं। इसी भूमि पर भव्य अपार्टमेंट्स के साथ-साथ अवैध वाहन पार्किंग का निर्माण तक हो चुका है।

 

कुंभ मेला क्षेत्र के बैरागी कैम्प के हालात सबसे बुरे हैं। यह कैम्प कुंभ मेले का अति महत्वपूर्ण क्षेत्र है। प्रत्येक कुंभ और अर्द्धकुंभ में प्रशासन इस क्षेत्र में कई धार्मिक संस्थाओं अखाड़ों को मेले के अवसर पर अस्थाई भूखंड आंवटित करता है। इस दौरान सभी संस्थाएं यहां अस्थाई निर्माण करती हैं। वर्ष २०१० के कुंभ मेले में भी प्रशासन ने कई धार्मिक संस्थाओं- मठों और अखाड़ों के संतों को अस्थाई भूखंड आवंटित किये थे लेकिन मेले के समाप्त होने के बाद कई संस्थाओं ने इस क्षेत्र में अपने पक्के निर्माण करवाकर वहां जबरन कब्जा जमा लिया। 

हरिद्वार प्रशासन ने कार्यवाही करके पक्के निर्माणों को ध्वस्त कर दिया लेकिन मंदिरों को छोड़ दिया। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी भी सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियां और मंदिर या अराधना स्थलों का निर्माण नहीं किया जा सकता। अगर कोई निर्माण किया गया है तो उसे ध्वस्त करने का भी आदेश है। लेकिन प्रशासन संतों के रसूख और धार्मिक भावनाओं के चलते कार्यवाही से बचता रहा है।

 

बैरागी कैम्प में कई अखाड़ों के संतों ने अपने बड़े और भव्य आश्रमों का निर्माण करवाया है। बताया जाता है कि एक कॉलोनी तक कुछ संतों ने बसा दी है। कई संतों पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी भूमि को पहले कब्जा किया। फिर लोगों को बेच दिया। जिससे इस क्षेत्र में एक छोटा सा नगर बस गया है।

 

जूना अखाड़े के संतों पर भी सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण के आरोप हैं। नगर निगम हरिद्वार की भूमि पर अवैध कब्जा करके पार्किंग का निर्माण किया गया है। साथ ही सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जा किये जाने के भी आरोप हैं। डामकोठी हरिद्वार से हरकी पौड़ी जाने वाले मार्ग पर सिंचाई विभाग की कई जमीनों पर आश्रमों के नाम पर कब्जाया गया है। इनमें सिंचाई विभाग की करोड़ों की भूमि पर निर्माण किये जाने का प्रयास चल रहा है। बताया जाता है कि उक्त भूमि पर पंचायती अखाड़े से जुड़े महामण्डलेश्वर की ओर से भव्य अपार्टमेंट का निर्माण किया जा रहा है जबकि यह भूमि सिंचाई विभाग की है। पंचायती अखाड़े ने इस पर कब्जा किया हुआ है। इसी तरह जूना भैरव अखाड़े के संतों ने भी गंगा तट पर मंदिर और आश्रम का निर्माण किया हुआ है। प्रशासन की लापरवाही के चलते आज द्घाट तक जाने का रास्ता भी पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

जयराम आश्रम के संचालक व कांग्रेसी नेता ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने तो अपने आश्रम के लिए गंगा नदी पर एक पुल का निर्माण तक किया हुआ है। प्रशासन इसे अवैध बता चुका है लेकिन इसके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है। राजनीतिक रसूख के चलते यह पुल ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के आश्रम की आन और शान का प्रतीक बना हुआ है।

 

ऋषिकेश में भी सरकारी भूमि पर रातों-रात कब्जा करने के कई मामले हैं। सरकारी भूमि को फर्जी रजिस्ट्री के जरिए अपने नाम कर उस पर कई भव्य आश्रमों का निर्माण किया जा रहा है। ताजा मामला शीशम झाड़ी का है जिसमें सरकारी भूमि पर आश्रम निर्माण मामले में आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संचालक श्रीश्री रविशंकर के तार जुड़े होने का अंदेशा है। शीशमझाड़ी गंगा से लगा हुआ है। विगत एक वर्ष से यहां वेद विज्ञान पीठ ट्रस्ट बहुमंजिले आश्रम का निर्माण करा रहा है। बताया जाता है कि यह रविशंकर के ट्रस्ट की ही संस्था है। इस भूमि को देहरादून के अग्रवाल परिवार से खरीदा गया और अग्रवाल परिवार ने ये किसी ब्रह्मानंद से खरीदी। इस प्रकरण में कई बातें बेहद दिलचस्प हैं। मसलन यह भूमि सरकारी है। जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी की जांच में ऐसा पाया जा चुका है। इस भूमि की रजिस्ट्री भी हो चुकी है। नगर पंचायत मुनि की रेती और गंगा प्रदूषण इकाई की ओर से इस आश्रम के निर्माण को लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र दिये गये हैं जो कि नियम के तहत कभी नहीं दिये जा सकते थे। इस आश्रम का हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने बकायदा नक्शा पास किया है। जबकि यह गंगा नदी से २०० मीटर दूर होने के नियम पर खरा नहीं उतरता है।

 

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय लोगों ने उपजिलाधिकारी नरेन्द्र नगर से इस निर्माण की शिकायत की। उपजिलाधिकारी ने मौके पर जाकर आश्रम के जमीनों के कागजातों की जांच की तो पता चला कि जमीन राजस्व विभाग की है। लेकिन आश्रम के संचालकों ने इस भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई हुई है। उपजिलाधिकारी ने अपनी जांच करके अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी टिहरी को दी। जिलाधिकारी (टिहरी रंजीत कुमार सिन्हा ने स्थलीय दौरा करके सभी कागजातों की गहन जांच करके आश्रम के निर्माण कार्य पर रोक लगाने का आदेश जारी किया लेकिन आश्रम के संचालकों के रसूख और दबाब के चलते आज भी आश्रम में गुपचुप तरीके से काम चल रहा है।

 

इस प्रकरण में जिलाधिकारी टिहरी ने सख्त रुख अपनाकर मामले का गहनता से अध्ययन करके कार्रवाई करने की बात कही है। लेकिन जिस तरह से आश्रम का निर्माण एक वर्ष से जारी है और सरकारी जमीन तक की रजिस्ट्री अपने नाम करवाने में आश्रम सफल रहा है उससे संचालकों के ऊंचे रसूख का पता चलता है। लगता नहीं कि इस आश्रम पर कभी कोई कार्रवाई हो पायेगी।

 

प्रशासन ने जो भी कार्रवाई की है वह माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत की है। वह भूमि सरकारी है। अन्य मामलों में हमने कार्रवाई की है। सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग को हटा दिया गया है और दूसरी पार्किंग की भूमि की जांच चल रही है। सरकारी जमीन पर कब्जों को बख्शा नहीं जायेगा। हरिद्वार और अन्य स्थानों पर जहां भी सरकारी भूमि पर कब्जे है उनको कानूनी कार्रवाई करके हटा दिया जायेगा।

सचिन कुर्वे जिलाधिकारी हरिद्वार

 

मैंने इस मामले की जांच की और पाया कि यह आश्रम वेद विज्ञान ट्रस्ट का है जो कि  रविशंकर के ट्रस्ट की ही एक संस्था है। इसी जमीन को देहरादून के किसी अग्रवाल परिवार ने ब्रह्मानंद स्वामी से खरीदा है। जमीन पूरी तरह राजस्व विभाग की है और मैं इस मामले की पूरी गहनता से जांच कर रहा हूं। दो-चार दिनों में कार्रवाई करने के आदेश दे दिये जायेंगे। इस मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ ही मुकदमा भी दर्ज किया जायेगा। 

रंजीत कुमार सिन्हा जिलाधिकारी टिहरी

 

हरिद्वार में कई संतों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा किया हुआ है। हरिगिरी ने कई स्थानों पर अवैध कब्जा किया है और सभी कब्जे सरकारी भूमि पर हैं। मैंने और नगर के कई लोगों ने ऐसे कब्जों की शिकायत जिलाधिकारी से की जिस पर उन्होंने कार्यवाही की है। सरकार और प्रशासन हरिगिरी और अन्य संतों के साथ मिला हुआ है इसलिए जिलाधिकारी पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बहुत जल्द ऐसे आश्रमों पर कार्रवाई होगी।

जे.पी. बडोनी संयोजक आम आदमी पार्टी हरिद्वार

 

मामला बहुत संदिग्ध है। आश्रम के मालिकों के नाम को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में पाया गया है कि जमीन राजस्व विभाग की है। मैंने सारे तथ्य जिलाधिकारी टिहरी को दे दिये हैं। वे ही इस पर जांच कर रहे हैं। जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जायेगी और जो भी विभाग इसमें संलिप्त होंगे उन पर कार्रवाई होगी।

एस.एन. सेमवाल उपजिलाधिकारी नरेन्द्र नगर

 

 
         
 
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