fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 1 25-06-2017
 
rktk [kcj  
 
खेल 
 
अखाड़े में उदासीनता की धूल

 

इस देश के पारंपरिक खेल कुश्ती को लेकर उदासीनता का माहौल गहराता जा रहा है। इसे एशियन कुश्ती चैंपियन से समझा जा सकता है। सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप दिल्ली में १८ अप्रैल से शुरू हो गया है। इसमें १९ देशों को २३६ पहलवान हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त के न खेलने से कई सवाल उठने लगे हैं। भले ही इन खिलाड़ियों के न खेलने का कारण चोट बताया जा रहा है। 

 

भारतीय कुश्ती महासंघ ने पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट में खेलने का न्यौता दिया। पाकिस्तान ने भी अपने किसी खिलाड़ी को नहीं भेजा। इसके अलावा कई ऐसे देश हैं जिन्होंने अपने खिलाड़ियों को नहीं भेजा। इन सब घटना क्रम को देखें तो एक बात निकल कर सामने आती है यह उदासीनता शायद इस वजह से आई क्योंकि आगामी वर्ष २०२० में होने वाले ओलंपिक में से कुश्ती को शामिल नहीं किया गया है। इसके उलट जब इसके इतिहास को देखते हैं तो पिछली बार २०१० में भारत ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप आयोजित की थी तो वह बहुत सफल कार्यक्रम रहा था। उस समय भारत में राष्ट्रमण्डल खेल भी होने जा रहे थे इसलिए सरकार व प्रायोजकों ने प्रतियोगिता में विशेष दिलचस्पी दिखाई थी। साथ ही पहलवानों में भी जोश था कि अच्छा प्रदर्शन करके राष्ट्रमण्डल खेलों और लंदन ओलंपिक के लिए चुने जाएं। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया। उत्साह और जोश में कमी के कई कारण हैं। 

 

सबसे पहली बात तो यह है कि २०२० के ओलंपिक खेलों से कुश्ती को बाहर कर दिया गया है। इसकी वजह से प्रायोजकों की इस प्रतियोगिता में कोई दिलचस्पी नहीं है। इससे बड़ा कारण यह है कि कुश्ती में भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाले सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं। योगेश्वर दत्त हाल ही में अपनी घुटने की चोट से उभरे हैं और सुशील कुमार के कंधे की चोट अब तक सही नहीं हुई है। चूंकि भारत में कुश्ती के यही दो चर्चित चेहरे हैं इसलिए आयोजकों को लगता है कि इनकी अनुपस्थिति के कारण भीड़ को आकर्षित करना कठिन हो जाएगा। इस सिलसिले में भारतीय कुश्ती फेडरेशन के महासचिव राजसिंह का कहना है 'दोनों योगेश्वर और सुशील चोटिल हैं। इनको जबरन प्रतियोगिता का हिस्सा बनाना बेवकूफी होगा। अगर इनकी चोट बढ़ गई तो लंबे समय तक यह अखाड़े से दूर हो सकते हैं।' महासचिव राज सिंह तो अपने स्थान पर सही कह रहे हैं लेकिन कुश्ती को लेकर पूरे विश्व में कोई नया सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा रहा है। नई तकनीक से इसका समायोजन नहीं हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने भी इसी कारण से इसे शामिल न किए जाने की बात कही है।

 

बहरहाल भारतीय कुश्ती महासंघ के महासचिव राज सिंह यह विश्वास दिलाते हैं कि ओलंपिक इतिहास के सबसे पुराने खेल कुश्ती का अस्तित्व ओलंपिक में बनाए रखने के लिए इसमें कुछ तकनीकी बदलाव किए जाएंगे ताकि यह दर्शकों के लिए आर्कषक बन सके। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के कार्यकारी बोर्ड ने भी  कुश्ती को २०२० के ओलंपिक के बाहर करने की सिफारिश कर रखी है और इस पर अगले महीने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में वोटिंग होनी है। अगले महीने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महांसघ (फीला) की आमसभा की विशेष बैठक होने जा रही है जिसमें कई निर्णय बदले जाएंगे। बैठक में फीला के नए अध्यक्ष का भी चुनाव होगा। कुछ नियम बदले जाएंगे और कुश्ती के ढांचे में भी बदलाव लाया जाएगा ताकि इस खेल को लेकर आईओसी के ऐतराज को दूर किया जा सके।

 

 

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 65%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad
  • गुंजन कुमार

कांग्रेस सरकार के दौरान अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया तो उस वक्त भाजपा ने कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया। अपने विजन डॉक्यूमेंट

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1690021
ckj