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जनपदों से 
 
व्यापारियों की दुकानों पर तलवार

 

ऊधमसिंह नगर। खटीमा नगर पालिका ने हमें भी अतिक्रमणकारियों में शामिल कर इसकी लिस्ट कोर्ट में पेश कर दी हैं जबकि जिस भूमि पर प्रतिष्ठान बने हैं वह लीज पर है। यह जमीन हमें राजस्व विभाग ने दी है। मेरी लीज की तिथि ३१ मार्च २०३१ है।

 

खटीमावासी और बाजार में परचून की दुकान चलाने वाले खैराती लाल इस दुकान से अपने आठ सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन कोर्ट के एक आदेश के बाद पालिका उनकी दुकान को अतिक्रमण की सूची में संलग्न कर ढहाने की तैयारी कर चुका है। खैराती लाल को राजस्व विभाग खटीमा में यह जमीन ३० साल की लीज पर दी हुई है। उनके साथ ही खटीमा के कई ऐसे व्यापारी हैं जिन्हें अपने प्रतिष्ठानों के असमय ढहाए जाने की चिंता सताए जा रही है। ऐसे दर्जनों लोग हैं जिनकी लीज अवधि समाप्त होने में अभी कई साल शेष हैं। बावजूद इसके उन्हें पालिका  ने इन सबको अतिक्रमणकारी दर्शा दिया।

 

नगर पालिका खटीमा के तथाकथित तौर पर बनाए गए ऐसे ही अतिक्रमणकारियों में एक श्याम सुन्दर बंसल भी हैं। श्याम सुंदर बंसल की भूमि की लीज अवधि ३० मार्च २०२८ तक है। इसी तरह रामप्यारी पत्नी चरणदास का नाम भी इसी सूची में शामिल किया गया है इनकी लीज अवधि भी ३१ मार्च २०२८ तक है जबकि रमेश चंद अग्रवाल को भी ३१ मार्च २०२५ तक दुकान बनाने के लिए राजस्व विभाग ने जमीन लीज पर दी गई थी। बकौल रमेश चंद अग्रवाल नगर पालिका प्रशासन ने हम पर चने के साथ द्घुन की तरह पिसने वाली कहावत को फिट कर दिया है। हमारा कोई कसूर नहीं है। हमको बकायादा राजस्व विभगा ने जमीन (३०-३०) साल की लीज पर अधिकूत की थी। उसी पर हमने अपनी दुकान बनाई है। हम नगर पालिका को इस बाबत बकायदा टैक्स भी देते हैं। इसके अलावा बिजली और पानी के बिल भी देते रहे हैं।

 

गौरतलब है कि १० दिसंबर २०१२ को खटीमा निवासी कविन्द्र सिंह कफलटिया की एक याचिका पर हाईकोर्ट नैनीताल ने खटीमा नगर पालिका को आदेश दिए थे कि शहर में जितने भी अतिक्रमणकारी है उन्हें चिह्नित कर हटाया जाए। इसके चलते नगर पालिका खटीमा ने अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर उनकी सूची हाईकोर्ट को भेज दी। जिसमें ८४ पक्के मकान वाले अतिक्रमणकारी चिह्नित किए गए जबकि ३४० कच्चे (खोखा-पटरी) वालो को चिह्नित किया है। पालिका ने आनन-फानन में उन लोगों को भी अतिक्रमणकारियों की लिस्ट में शामिल कर दिया जो वैध के दायरे में बताए जाते हैं। खुद प्रशासन की लीज अवधि उनको इस दायरे में लाती है। कच्चे अतिक्रमणकारियों में थारू राजकीय इंटर कॉलेज रोड से लेकर सब्जी मंडी तक के खोखे-पटरी वाले हैं। यहां ज्यादातर खोखे पटरी और फड़ लगाकर सब्जी बेचने वाले दुकानदार है। इसी तरह पक्के (भवन मकान दुकान) वाले अतिक्रमणकारी में सब्जी मंडी से लेकर टनकपुर रोड तक के व्यापारी शामिल हैं। कच्चे और पक्के मिलाकर कुल ४५० लोग इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।

 

बात अपनी-अपनी

अगर शहर के लोगों को लीज होने के बाद भी अतिक्रमणकारी दर्शाया गया है तो यह गलत है। ऐसे में उनके खिलाफ किए जाने वाले फैसला जनहित में नहीं होगा। लगता है नगर पालिका ने कोर्ट के समक्ष सही तथ्य नहीं रखे हैं।

पुष्कर सिंह धामी विधायक खटीमा


जिस जमीन पर अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किया गया है वे खंती की जमीन पर बसे है। राजस्व विभाग ने कुछ दुकानों को लीज दी है जबकि जिनको फड़ दिए गए थे उन्होंने कब्जा कर लिया। इन सभी को चिह्नित कर लिया गया है। यह सब अतिक्रमण के दायरे में आते हैं।

शेखर चंद जोशी अधिकारी नगर पालिका खटीमा


हमने हाईकोर्ट नैनीताल में इस बात को लेकर याचिका दायर की थी कि टनकपुर रोड पर दिन- रात जाम की स्थिति रहती है। क्योंकि पहले यह पीडब्ल्यूडी का रोड था लेकिन अब नेशनल हाइवे बन गया है। इसलिए अतिक्रमणकारियों को हटाना जरूरी हो गया था। सड़क चौड़ीकरण होगा तभी शहर को जाम से मुक्ति मिल सकेगी।

कविन्द्र सिंह कफलटिया याचिकाकर्ता

 

संकट में पौराणिक मंदिर

जोशीमठ (चमोली)। जोशीमठ तहसील स्थित तपोवन उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां का जिक्र पुराणो में भी है। आध्यातमिक नगरी तपोवन अब जल विधुत परियोजना की भेंट चढ़ने लगी है। तपोवन सीमांत क्षेत्र जोशीमठ से महज १४ किमी पर स्थित है। यहां पर गर्म पानी के स्रोत के साथ ही पौराणिक गौरी शंकर का मंदिर भी है। तपोवन जल विद्युत परियोजना के कारण इस पौराणिक मंदिर पर खतरा मंडरा रहा है। मंदिर का एक हिस्सा भूमि कटाव के लपेटे में आ गया है। स्थानीय लोगों ने कई बार इसको लेकर आवाज उठाई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। गौरी शंकर मंदिर के समीप ही परियोजना का क्रसर प्लाट लगा है। जो नियमों को तांक पर रख कर चलाया जा रहा है। इस पूरे मामले पर प्रशासन भी आखें मूंदे है। तपोवन के जन प्रतिनिधि विजय प्रसाद नाैटियाल का कहना है कि उनके साथ स्थानीय ग्रामीणो ने कई बार उप-जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है। लेकिन इस नगरी को बचाने के लिये कोई ठोस प्रयास सरकार नहीं किया। तपोवन स्थित क्षेत्र के प्रसिद्व संत गुदड़ी बाबा का आश्रम भी जल विद्युत परियोजना के भेंट चढ़ गया है। इसके बाद से इस पौराणिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में हैं।

 

 
         
 
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