fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 7 05-08-2017
 
rktk [kcj  
 
आवरण कथा
 
थारुओं की थाती पर डाका

थारु बाहुल्य क्षेत्रों यानी थारवाट में माफिया का दबदबा वर्षों से बरकरार है। इसकी एक बानगी बनबसा गढ़ी गोट गांव के आठ परिवार हैं। यह सभी परिवार पहले पचौरिया गांव में रहते थे। लेकिन वहां आये दिन इनकी जमीनों को लेकर मारपीट होने लगी। इन परिवारों की सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जा करने के लिए पंजाब से लोगों को भी बुलाया गया। सिमरो देवी कहती हैं कि बाद में अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने पचौरिया गांव को ही छोड़ दिया। आज बामुश्किल तीन-चार बीघा जमीन पर आठ परिवार अपने झाले (कच्चे घर बनाकर रह रहे हैं। सिमरो देवी पुराने दिनों को याद करके रूआंसी हो उठती हैं। वह कहती है कि जब हम दूसरे के खेतों में काम करने जाती हैं तो हमें अपने खेत याद आते हैं। यह पूछने पर कि वे पचौरिया गांव में स्थित जमीन को वापस क्यों नहीं ले लेती? वह कहती हैं कि अब मुझे जमीन नहीं अपना परिवार प्यारा है। हमारे सभी आठ परिवार पल रहे हैं। इसी में मैं खुश हूं। मैं एक बार फिर दबंगों के सामने जाकर अपने परिवार को खतरे में नहीं डाल सकती।

 

 

इसी तरह बनुसा निवासी दान सिंह राणा को दबंगों ने पुलिस से मिलीभगत करके डोडे रखने के आरोप में जेल भिजवा दिया। बाद में दबंगों ने उसकी १० एकड़ जमीन जोत ली। संजना निवासी शेर सिंह राणा के पास कभी १५० बीघा जमीन थी। लेकिन सूदखोरों ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा। शेर सिंह राणा को सूदखोरों के चंगुल से निकलने के लिए अपनी १५० में से करीब सवा सौ बीघा जमीन लुटानी पड़ी है। देपुरी गांव में जमीन को लेकर हुए विवाद में पूर्व प्रधान के माता-पिता को हंसिए से काट दिया गया। पहनिवा गांव में सितारगंज- टनकपुर नेशनल हाइवे पर दो परिवारों की १३२ बीघा जमीन आज विवाद के केंद्र में फंसकर रह गई है। भू-माफिया की दृष्टि इस जमीन पर इस कदर पड़ी कि दोनों परिवार आज सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे है। भू-माफिया ने राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी हुई ऐसी बेशकीमती जमीन पूर्व में हड़प ली थी। पहनिया गांव के ही भागपत पुत्र चेतराम की पांच बीघा जमीन पर भू-माफिया कब्जा जमाए हुए हैं। ८ अगस्त २०१२ को न्यायालय ने जमीन से माफिया का कब्जा हटाकर असली वारिसों को देने के आदेश दिए। लेकिन भागपत न्यायालय के इन आदेशों को लेकर कभी पुलिस तो कभी प्रशासन के द्वार पर भटक रहा है। दो मामले तो ऐसे सामने आए हैं जिनमें कब्जाधारक कोई और नहीं बल्कि प्रशासन ही है। कंजाबाग गांव में भजन सिंह की जमीन पर ही प्रशासन ने बिजली घर का निर्माण करा दिया है। इसी तरह बिचपुरी में ब्रजलाल की एक एकड़ जमीन पर कब्जा करके प्रशासन ने स्कूल निर्माण करा दिया। इस तरह थारू जनजाति की जमीनों पर कब्जा करने में सूदखारों दबंगों और भू-माफिया ने ही नहीं बल्कि शासन प्रशासन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस क्षेत्र में चारों तरफ जनजातियों की जमीन की लूट जारी है।


बात अपनी-अपनी

थारू और गैर थारू विवाद मेरे कार्यकाल में न के बराबर हो रहे हैं। अगर आप समीक्षा करेंगे तो पता चलेगा कि मुझसे पूर्व के जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में ही ये विवाद ज्यादा हुए। मैंने थारू और गैर थारू के बीच पैदा हुई खाई को कम करने का प्रयास किया है। जिसमें मुझे सफलता मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी विधायक खटीमा

हमने थारू और गैर थारू लोगों की जमीनों के विवादों को निपटाने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन इसके बावजूद मेरे कार्यकाल में भी कुछ विवाद ऐसे हो गए जो काला अध्याय बने। थारू और गैर थारुओं में विवाद की असली वजह जमीनों के कब्जे हैं।
गोपाल राणा पूर्व विधायक खटीमा

दरअसल थारू समाज के लोगों के पास जमीनें ही जीवन का आधार हैं। लेकिन जिस तरह से उनकी जमीनों को छीना जा रहा है वह उनके बुनियादी हक-हकूकों ेपर हमला है। हम ऐसे मामलों में सर्वसम्म्ति से वाद-विवाद निपटाने का काम कर रहे हैं।
डॉ. प्रेम सिंह राणा विधायक नानकमत्ता

यहां थारू लोगों की जमीनें बेचने पर पाबंदी है। इसके बावजूद कुछ लोग जमीन बेच देते हैं। बाद में जमीन क्रय और विक्रय करने वालों में विवाद हो जाता है। ऐसे मामले ज्यादातर प्रशासन के पास नहीं आते। स्टांप पेपर पर ही जमीनों के बिक्रीनामे कर दिए जाते हैं। 
वीके संत जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर

थारू जनजाति के लोगों को डरा धमकाकर जबरन उनकी जमीनें ले ली जाती हैं। आज उनकी अधिकतर जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। खेती की जमीन पर प्लॉट काटे जा रहे हैं। इसमें प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत रहती हैं। जिससे प्रॉपर्टी डीलर धड़ल्ले से यह काम कर रहे है। 
निर्मला राणा जिला पंचायत सदस्य

टनकपुर बनबसा से लेकर खटीमा सितारगंज तक ८५ हजार की आबादी वाला थारू समाज आज मुख्यधारा से अलग-थलग किया जा रहा है। खेतीबाड़ी इस समाज के पास जीवन यापन का एकमात्र जरिया था। लेकिन भू-माफिया इसे भी छीन रहे हैं। कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। शासन- प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
रमेश राणा अध्यक्ष थारू राणा परिषद

क्षेत्र में दबंगों के साथ ही सूदखोरों का आतंक इस कदर फैला है कि आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। जमीनों को हथियाने के लिए साम-दाम-दण्ड-भेद सभी तरह की नीति अपनाई जा रही है। हम ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और दबे-कुचले लोगों की आवाज बन रहे हैं।
डॉ  राजू महर अध्यक्ष अनुसूचित जाति एवं जनजाति संयुक्त संघर्ष मोर्चा



क्या था फुलेया हत्याकांड?

अट्ठारह नवंबर २०११ को ऊधमसिंहनगर की खटीमा तहसील के अंतर्गत फुलेया गांव में एक जमीनी विवाद में दो लोगों की जान चली गई। भू-माफिया ने इस हत्याकांड को जमीन पर कब्जा करने के लिए अंजाम दिया था। गांव की रकबा संख्या ४१ की २३२ बीघा जमीन पर यह विवाद ७४ बीघा जमीन को लेकर पनपा था। इस दिन भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के मद्देनजर जिले का पूरा पुलिस प्रशासन यात्रा को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के सिलसिले में जुटा हुआ था कि तभी भू-माफिया ने क्षेत्र में अशांति पैदा की। फुलेया गांव के विजय बहादुर (३५ पुत्र करण सिंह एवं भरत सिंह (२८ पुत्र मान सिंह को सरेआम गोलियों से भून दिया गया। इस कांड में दो लोगों की मौत के साथ ही भूपेन्द्र, ओमकार, गुलिमा देवी, मनिला देवी और सीता देवी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। भू-माफिया जमीन  पर जबरन कब्जा कर रहे थे। जिसके चलते यह हत्याकांड हुआ। इस हत्याकांड में भाजपा के उपाध्यक्ष राजू भंडारी का भी नाम आया था। लेकिन बाद में हुई सीबीसीआईडी जांच में उनका नाम निकाल दिया गया। इस हत्याकांड के आरोपी १२ लोगों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन अपने राजनीतिक रसूखों के चलते वे ५२ दिन बाद ही जमानत पर छूट गए।

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 66%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad

यदि पंचेश्वर परियोजना के निर्माण में जनसुनवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाएगी तो विस्थापितों के बेहतर पुनर्वास की उम्मीद करना बेकार है। सीमांत क्षेत्रों के जो लोग पड़ोसी

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1745183
ckj