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vad 45 28-04-2018
 
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  • हरीश रावत

हमारे प्रवासी उत्तराखण्डी सप्ताह में दो रोज अपने गांव का अन्न और हर माह एक उत्तराखण्डी शिल्प उत्पाद को खरीदना प्रारंभ कर दें तो उत्तराखण्ड की खेती एवं शिल्प को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। मैंने पिछले ३ वर्षों में इस विषय पर उत्तराखण्डी भाई-बहनों से संवाद बनाया है। लोगों का रिस्पॉन्स उत्साहजनक है। मैंने जब मडुवा] झोंगरे की खीर] मारसा] गहत] राजमा] फाफर] मिर्च की चर्चा प्रारंभ की तो बहुत सारे लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज इनका पैदावार क्षेत्र बढ़ गया है। कांग्रेस सरकार ने कई उत्तराखण्डी उत्पादों का समर्थन मूल्य निर्धारित किया और कल्सटर के आधार पर बोने पर बोनस प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की जिसका हजारों किसानों ने लाभ उठाया। मुझे खुशी है आज मडुवे का आटा पचास रुपया किलो और झोंगरे का चावल नब्बे रुपया किलो बिक रहा है 

 

कांग्रेस सरकार ने अपने ३ वर्षों के कार्यकाल में उत्तराखण्डी व्यंजनों] जैविक उत्पादों को आगे बढ़ाने के लिए दर्जनों पहलें प्रारंभ की हैं। अधिकांश पहलों के परिणाम उत्साहपूूर्ण हैं] परंतु कुछ पहलें शासकीय अवहेलना का दंश भोग रही हैं।

चुनाव हारने के बाद मैंने तय किया कि मैं इन पहलों को लेकर उत्तराखण्ड में एवं जहां-जहां उत्तराखण्डी हैं वहां जाकर चर्चा करूंगा। मैंने ऐसी पांच छोटी-बड़ी] उत्तराखण्डी फलों एवं व्यंजनों की दावतें देहरादून में आयोजित की। लोगों को आम-जामुन के साथ पहाड़ी भुट्टे-आड़ू-ककड़ी एवं हरे लहसुन का नमक बड़ा पंसद आया। हरेला बोने के मौके पर लोगों को पहाड़ी ककड़ी का रायता] भरवा रोटी] बड़े] अरसे एवं जौनसार का अस्का बड़ा पंसद आया। लोगों को मैंने कंडाली की चाय भी सर्व की। मेरे दोस्तों में विशेषतः पत्रकारों में मेरी काफल-बेड़ू-तिमला और नीबू की सन्नी पार्टी का भी बड़ा जिक्र रहा। कुछ दोस्तों ने अपनी कलम से तो कुछ ने फेसबुक में अपनी-अपनी टिप्पणियां दी] अच्छा लगा। उत्तराखण्डी व्यंजनों और उत्पादों पर चर्चा चल पड़ी है।

इधर मैं कुछ दिनों से मैं दिल्ली में हूं। मैंने अपने दिल्ली के दोस्तों विशेषतः प्रवासी भाइयों को विशुद्ध उत्तराखण्डी उत्पाद] कपकोट के नीबू की सन्नी] टिहरी के झोगरें की खीर] हरिद्वार का जैविक गुड़ और गन्ना] रूद्रपुर का अमरूद] गढ़वाल का अर्सा] अल्मोड़े की बाल मिठाई] पहाड़ी रायता] लाल मूली का टपकिया] पहाड़ी नमक] दैण की धूसी] पौड़ी के माल्टे] कपकोट व गुमदेश के संतरे] लौंबाज व सौराल की गडेरी] मोहनरी व पन्याली के लाल मडुवे का आटा] जोशीमठ के आलू व कौसानी की चाय परोसी और वादा लिया कि वे भी इन उत्पादों का उपयोग बढ़ाएंगे। लखनऊ की उतरैणी के समारोह में मैंने आयोजकों व देश के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी को बागेश्वर के द्घुद्घतों की माला पहनाई। मैं इस बार दर्जनों उत्तरायणी के कार्यक्रमों में गया। तराई] दिल्ली व लखनऊ में भी मैंने उत्तराखण्डी व्यंजनों का खूब ढोल बजाया है। देखें आगे क्या असर पड़ता है।

मेरा मानना है कि यदि हमारे प्रवासी उत्तराखण्डी सप्ताह में दो रोज अपने गांव का अन्न और हरमाह एक उत्तराखण्डी शिल्प उत्पाद को खरीदना प्रारंभ कर दें तो] उत्तराखण्ड की खेती एवं शिल्प को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। मैंने पिछले ३ वर्षों में इस विषय पर उत्तराखण्डी भाई-बहनों से संवाद बनाया है। लोगों का रिस्पॉन्स उत्साहजनक है। मैंने जब मडुवा] झोंगरे की खीर] मारसा] गहत] राजमा] फाफर] मिर्च की चर्चा प्रारंभ की तो बहुत सारे लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज इनका पैदावार क्षेत्र बढ़ गया है। कांग्रेस सरकार ने कई उत्तराखण्डी उत्पादों का सर्मथन मूल्य निर्धारित किया और कल्सटर के आधार पर बोने पर बोनस प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की जिस का हजारों किसानों ने लाभ उठाया। मुझे खुशी है आज मडुवे का आटा पचास रुपया किलो और झोंगरे का चावल नब्बे रुपया किलो बिक रहा है। 

इस समय उत्तराखण्ड में आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष २०१६ में तीन करोड़ सत्रह लाख है। आने वाले पर्यटकों का केवल दसवां हिस्सा स्थानीय सोविनियर खरीदता है और केवल एक प्रतिशत हिस्सा स्थानीय व्यंजनों का उपयोग करता है। हमारी अच्छी से अच्छी रैसेपी भी अभी आगुंतुकों का जायका नहीं बन पाई है। हमारे विपरीत राजस्थान व उत्तर पूर्व के राज्यों में ८० प्रतिशत पर्यटक स्थानीय उत्पाद सोविनियर के रूप में खरीदता है और राजस्थान में ७५ प्रतिशत पर्यटक स्थानीय भोजन का आनंद लेता है। हम बद्रीनाथ व केदारनाथ में भी छोला-भटूरा] ईडली-बड़ा आदि परोसते हैं। हम अपने स्थानीय व्यंजनों का जब तक स्वंय उपयोग नहीं करेंगे और उन्हें प्रोत्साहित नहीं करेंगे] होटल] ढाबे केवल पर्यटकों के बलबूते उन्हें लाभकर व्यवसाय नहीं बना सकते हैं। आवश्यकता है स्थानीय होटलों में पर्वतीय व्यंजनों की मांग बढ़ाने व इनकी पोष्टिकता को प्रचारित-प्रसारित करने की। इधर बहुत सारे ऐसे होटल खुल गये हैं] जहां उत्तराखण्डी व्यंजन बन रहे हैं। मुझे बेरीनाग से बागेश्वर आते वक्त यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि रास्ते में भट्ट की चुरकानी व डुबका भात परोसने वाले चार ढाबे चल रहे हैं] चारों अच्छे चल रहे हैं। इधर मैंने देहरादून व हल्द्वानी में शादी-व्याह में उत्तराखण्डी व्यंजनों को परोसे जाते हुये देखा है। मुनस्यारी के शरदोत्सव में मैंने जौहार की ज्या के साथ तिमूर की चटनी व फाफर की रोटी का लुफ्त उठाया] किसी भी पांच सितारा होटल की प्लेट जौहारी व्यंजन का परोसा जाना अपना सौभाग्य मानेगी। अद्भुत स्वादिष्ट व पोष्टिक होता है जौहारी व्यंजन। 

अस्का जौनसार का अनूठा सुस्वाद व्यंजन है] जिसे मैं बार-२ खाना चाहूंगा। अरसे] खजूर व चौलाय के लड्डू-झुंगरे की खीर किसी को भी बार-२ खाने के लिये लुभाने की क्षमता रखते हैं। कभी किसी ने पोष्टिक मेग्नेशियम वाली भांग- भंगीरे की चटनी या जम्बू-गंद्रेणी] जाखिया के तड़के वाला रस भात खाया है और यदि यह रस भात मॉ के हाथों का बना है तो] स्वर्ग के पकवान इनके आगे फीके हैं। गहत की दाल में गडेरी के टुकड़े व धनिये के हरे पत्तों का अच्छादन इसे गजब का स्वादिष्ट बना देता है और यदि इसमें मुनस्यारी] चोदांस व मलारी के सफेद लोबिया डाल दो तो आपको रोटी व भात खाने के लिए किसी और तरकारी की आवश्यकता नहीं है। गेठी चाहे जमीन के अंदर की हो या ऊपर की इसकी सब्जी व चन्द्रा के पत्तों का साग मधुमेह के बीमारों के लिये पथ्य युक्त भोज है। उत्तराखण्डी व्यंजनों में कई ऐसे अन्न व सब्जियां उपयोग में आती हैं जो शरीर को स्वस्थ रखती हैं व रोग प्रतिरोधक क्षमता युक्त हैं। लिखने को उत्तराखण्डी व्यंजनों पर एक ग्रंथ लिखा जा सकता है। मुझे इस विषय पर पारंगत मत समझ बैठना] मेरी जानकारी बहुत सीमित है। परंतु एक बात मैं व्यक्तिगत अनुभव से कह सकता हॅू कि] गर्दन में द्घातक चोट लगने के बाद मेरी शरीर की रिकवरी में मडुवे की रोटी व भट्ट के डुबके तथा मास की चैसवाणी की बड़ी भूमिका है। हमारे जंगली फलों] काफल व द्घिंद्घारू में अल्सर को ठीक करने की क्षमता है। हिसालू] किल्मोड़ा एवं मेहल में आयरन] मेग्नेशियम व प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसलिये मैंने मुख्यमंत्री रहते काफल व बुरांस पार्कों को बनाने की योजना पर काम किया और जंगली फलों को संरक्षण देने की नीति बनाई। उद्देश्य प्राकूतिक फलों का मानव व वन्यजीवों के लिए उपलब्धता बढ़ाना रहा है। बेड़ू व तिमले के फलों में कैंसर रोधक क्षमता ज्ञात हुई है। इसलिए मैंने इन वृक्षोंं के रोपण को मेरा वृक्ष-मेरा धन योजना में सम्मलित किया। मैं नहीं जानता कि अब इस योजना की स्थिति क्या है। 

मैंने नीबू व अखरोट के वृक्ष लगाने पर भी तीन सौ व चार सौ रुपया बानेस दिया। नींबू एक मजबूत फल है] बंदर भी इसे नहीं खाता है। तीन वर्ष में फल देता है। यदि सब उत्तराखण्डी नेता नींबू] अखरोट] तिमरू व तेज पत्ते] वाणिज्यिक भांग व कंडाली के प्रचार में लग जाय तो फिर हमें पलायन पर आयोग नहीं बनाना पड़ेगा। भांग का जिक्र आते ही मुझे विधानसभा द्वारा पारित उस कानून की याद आ रही है] जिसका उद्देश्य राज्य में भांग की वाणिज्यिक खेती को बढ़ावा देना है। मुझे याद आता है जब मैं भांग व कंडाली के वाणिज्यिक दोहन की बात कर रहा था तो विधानसभा में एक प्यारा सा नारा गूंजा था ''आप खावे मुर्ग मुसलम-हमें दें भांग धतूरा''। धन्य हो लोकतंत्र आज वही नारेबाज सत्ता पक्ष के तौर पर भांग की खेती की बात कर रहे हैं। है न दुनिया गोल। इस गोल दुनिया में हमें अपनी तरक्की का मार्ग तलाशना है। यह मार्ग हमें उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक धरोहरों] प्राकृतिक छटा व चुनौतियों का समन्वय अपनी सांस्कृतिक विविधता से जोड़कर बनाना पड़ेगा। मैंने मुख्यमंत्री के तौर पर ढेरों पहलें प्रारम्भ की और अब एक द्घुमन्तू उत्तराखण्डी के तौर पर उत्तराखण्डी व्यंजनों के आभूषणों] वस्त्रों] एपण] गंगा-दशहरा शुंमकर व अन्य शिल्पों का ढोल बजा रहा हूं। 

आ रही है] आप तक आवाज। जय झुगंरा-जय झुगंरे की खीर।

 
         
 
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