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दुनिया 
 
दो फैसलों का फंडा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मन मिजाज को समझना बहुत मुश्किल है। उनमें अंतर्विरोध है या उनके भीतर का अंतर्विरोध ही उनका सच है। उनके बारे में पहले से कुछ भी अनुमान करना कठिन है। उन्होंने एक साथ दो बातें की है। एक तरफ वे शरणार्थियों के मुद्दे पर थोड़ा नरम पड़े हैं। उन्होंने फिलहाल उन ग्यारह देशों से आने वाले शरणार्थियों को फिर से पनाह देने का फैसला किया है] जिन पर पिछले साल पाबंदी लगाई थी। सत्ता में आते ही डोनाल्ड ट्रंप ने शरणार्थियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। दूसरी बड़ी खबर यह है कि ट्रंप यातना सेंटर ग्वातानमो को फिर से खोलेंगे।

ट्रंप ने ३१ जनवरी को स्टेट ऑफ यूनियन को संबंधित करते हुए कहा कि आतंकवादी केवल अपराधी नहीं है] बल्कि वो गैरकानूनी शत्रु लड़ाके हैं और जब वो विदेशों में पकड़े जाते हैं तो उनके साथ आतंकवादियों की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए। हमने पहले भी सैकड़ों आतंकवादियों को मूर्खतापूर्ण रिहा कर दिया। लेकिन उनसे वापस युद्ध भूमि पर मुलाकात हुई। मैंने अभी-अभी सेक्रेट्री मैरिस से सेना के ग्वातानामो खाड़ी वाली डिटेशन सेंटर को दोबारा खोलने को कहा है। गौरतलब है कि २००९ में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस डिटेशन सेंटर को बंद कर दिया था।

सत्ता संभालते ही टं्रप ने शरणार्थियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि शरणार्थी अमेरिका के लिए समस्या बनते जा रहे हैं और देश में बढ़ते अपराध का बड़ा कारण भी वही हैं। तब उनके निशाने पर ज्यादातर मुस्लिम देशों से आने वाले शरणार्थी थे। मसलन मिस्र] ईरान] लीबिया] दक्षिण सूडान] सोमालिया] सीरिया] इराक आदि इन देशों को अमेरिका ने उच्च जोखिम में रखा है।

ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में जो बड़े मुद्दे रखे थे। उनमें शरणार्थी का मुद्दा भी सरीक था। उन्होंने अपने देश की जनता को भरोसा दिलाया था कि वे सत्ता में आते ही शरणार्थियों के द्घुसने पर पाबंदी लगाएंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने जनवरी २०१७ में शरणार्थी नीति द्घोषित की थी। इसके बाद ही चुनिंदा मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमेरिका प्रवेश पर प्रतिबंध था। बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल के आखिर में अमेरिका में शरणार्थियों के प्रवेश की सीमा एक लाख दस हजार तय की थी] जिसे ट्रंप ने द्घटाकर पहले ५३ हजार फिर ४५ हजार कर दिया। वर्ष १९९० के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका में शरणार्थी की संख्या इतना कम हुई है।

क्यूबा स्थित ग्वातनामो जेल को दुनिया का सबसे खतरनाक जेल माना जाता है। इसे २००१ में ११ सितंबर को अमेरिका में चरमपंथी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस यातनागृह के कारण दुनिया भर में अमेरिका की आलोचना होती रही है। इस जेल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के काफी कैदी हैं। यहां दी जाने वाली यातना रूह को थर्रा देने वाली होती है। वर्ष २००२ में क्यूबा के ग्वातनामो स्थित अमेरिकी सैनिक अड्डों से छूटे अफगानिस्तान के तीन लोगों ने जेल के भीतर के माहौल की सनसनीखेज दुनिया के सामने बयान की थी। वे पहले ऐसे लोग थे जिन्होंने जेल के भीतर के माहौल को जमाने के सामने रखा था।

बहरहाल ये दो बड़े फैसले जो एक दूसरे के विरोधी जान पड़ते हैं। यह एक ही व्यक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिए हैं और एक ही वक्त में लिए हैं। ट्रंप अपनी सनक के लिए लगातार कुख्यात होते जा रहे हैं। इस फैसले को भी उनकी सनक से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी जनतांत्रिक देश में कोई भी फैसला सोच समझकर लेने चाहिए। सनक भरा फैसला तानाशाही का लक्षण है जिधर अमेरिका भी बढ़ रहा है और दुर्भाग्य से भारत के कदम भी ऊपरी तरफ उठ रहे हैं। भारत में नोटबंदी का फैसला एक सनक भरा निर्णय ही था जिसका खामियाजा आम जनता को शारीरिक से होकर आर्थिक रूप से उठाना पड़ा।

बराक ओबामा ने जिस अमेरिकी छवि को काफी हद तक मानवीय और जनतांत्रिक दिया था धो-पोंछकर डोनाल्ड ट्रंप उसे एक क्रूर और तानाशही रूप दे रहे हैं। मुश्किल यह है कि टं्रप का लिया गया कोई भी फैसला सिर्फ उनके देश अमेरिका तक ही सीमित नहीं है। अलबत्ता वह पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। इसलिए टं्रप के फैसले पर पूरी दुनिया की नजर होती है और वह लगातार आशंका से भरती जा रही है। यह सोचकर कि चार साल में तो यह दुनिया को किस कदर बदल देंगे।

चीन को जवाब

एशिया में चीन के बढ़ते कदम को भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश ने करारा झटका दिया है। बांग्लादेश ने चीन की एक बड़ी कंपनी की सड़क निमार्ण परियोजना को रिश्वत देन के आरोप में निरस्त कर दिया है। वॉयस ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में बांग्लादेश सरकार ने चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। उसे अब भविष्य में बांग्लादेश की किसी भी निमार्ण परियोजना में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं होगी। रिपोर्ट में बांग्लादेश के वित्त मंत्री के हवाले से यह बात कही गई है। उन्होंने बांग्लादेशी मीडिया 'द डेली स्टार' को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था। यह कंपनी पूर्व में कई बड़ी परियोजनाओं का जिम्मा संभाल चुकी है। इसमें पािकस्तान का ग्वादर और श्रीलंका का हनबटोटा पोर्ट शािमल है। वित्त मंत्री के अनसुार] कंपनी ने बांग्लादेश हाईवे ट्रासंपोर्ट एंड ब्रिजेज डिपार्टमेंट के नवनिर्वाचित डायरेक्टर को करीब पांच मिलियन टका देने का प्रस्ताव दिया था। द्घूस की इस द्घटना के कारण  परियोजना को रद्द कर कंपनी को ब्लैकलिस्टेड किया गया।

 

समुद्री डाकू ने छोड़ा मर्चेंट शिप

गिनी की खाड़ी से एक फरवरी की शाम मचेर्ंट शिप एमटी मैरिन एक्सप्रेस समुद्री डाकुओं ने अगवा कर लिया था। पश्चिम अफ्रीकी देश बेनिन के तट के करीब गिनी की खाड़ी में अगवा हुए मचेर्ंट शिप में १३]५०० टन गैसोलीन था। साथ ही इस मचेर्ंट शिप में २२ भारतीय क्रू मेंबर भी थे। अब इस जहाज को समुद्री लुटेरों ने बिना फिरौती के छोड़ दिया है और सभी भारतीय क्रू मेंबर भी सुरक्षित हैं। छह फरवरी को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर ये जानकारी दी। जहाजरानी महानिदेशक मालिनी शंकर ने बताया की लुटेरों से छूटने के बाद जहाज फिर से अपने सफर पर निकल चुका है। इस मचेर्ंट शिप की मालिक कंपनी एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट है। उन्होंने बताया कि ३१ जनवरी को इस शिप से संपर्क टूट गया था। जिसके बाद अंदाजा हो गया था कि जहाज को समुद्री लुटेरों ने अगवा कर लिया है। मचेर्ंट शिप के मिल जाने पर कंपनी ने अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

 
         
 
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जलवा शब्द नीतीश कुमार जैसे गंभीर राजनेता के लिए ठीक नहीं है। लेकिन पत्रकारिता और राजनीति में यह शब्द चल गया है। इसका आशय अंग्रेजी के शब्द औरा या आभा मंडल से है। वैसे भी कहा जाता है कि

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