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प्रदेश से
 
अभावों में लहराया परचम

  • संजय चौहान

चमोली की मानसी और परमजीत ने वॉक रेस में सोने के तमगे हासिल कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया। हालांकि दिल्ली में आयोजित प्रथम ^खेलो इंडिया खेलो^ प्रतियोगिता की तैयारी के लिए इन दोनों को सुविधाएं न के बराबर मिलीं। सीमांत की इन प्रतिभाओं ने अभावों में जीते अपना लोहा मनवाया

 

राष्ट्रीय स्तर पर ^खेलो इंडिया खेलो^ प्रतियोगिता में चमोली जिला ही नहीं] बल्कि उत्तराखण्ड का नाम रोशन करने वाले परमजीत सिंह बिष्ट और मानसी नेगी अपनी हम उम्र की प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा हैं। सीमित संसाधनों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा से देश में नाम कमाने वाले ये युवा सीमांत चमोली जिले के गांवों से उभरकर आए हैं। इनकी सफलता पर साथी छात्र-छात्राओं] गुरुजनों सहित गांव और जिला जश्न में है।

तीन हजार मीटर वॉक रेस में गोल्ड मैडल लेने वाली मानसी नेगी ने तो चमोली की बालिकाओं को मानो कुछ अलग करने का हौसला दिया है। गोपेश्वर के नैग्वाड़ स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल में दसवीं की छात्रा मानसी नेगी चमोली के दशोली ब्लॉक के दूरस्थ गांव मजोठी की रहने वाली है। पेशे से मैकेनिक मानसी के पिता लखपत सिंह नेगी की २०१६ में मृत्यु हो चुकी है। मानसी की मां शकुंतला देवी गांव में ही खेती मजदूरी कर बेटी को आगे बढ़ने का हौसला देती रही। यही कारण है कि बेहद अभावों में भी उसके अंदर कुछ अलग करने का जज्बा हमेशा रहा। उसने तीन हजार मीटर वॉक रेस में प्रथम स्थान प्राप्त कर चमोली ही नहीं] बल्कि उत्तराखण्ड का भी नाम रोशन किया है। मानसी की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा तीन तक अलकनंदा पब्लिक स्कूल मजोठी में हुई। इस स्कूल के बंद हो जाने के कारण उसने आठवीं तक की पढ़ाई नेशनल पब्लिक स्कूल और नवीं कन्या हाईस्कूल नैग्वाड़ में की है। मानसी का कहना है कि अगर इसी तरह सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के लिए संसाधन मिले तो वह दुनिया में भी नाम रोशन कर सकती है। वह इस सफलता का श्रेय मां सहित गुरुजनों को देती है और कहती है कि सभी ने उसे हौसला दिया। 

नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में पांच हजार मीटर वॉक रेस में प्रथम पायदान पर आकर गोल्ड मैडल लेने वाले ग्राम खल्ला] मंडल निवासी परमजीत सिंह बिष्ट इंटर कॉलेज बैरागना में कक्षा ११ के छात्र हैं। परमजीत के पिता जगत सिंह बिष्ट खल्ला में ही गांव की छोटी सी दुकान चलाते हैं। मां हेमलता देवी गृहणी हैं। अभावों की जिंदगी जीने वाले परमजीत को दौड़ लगाने की आदत द्घर से बैरागना स्कूल तक तीन किमी जाने के दौरान ही पड़ी थी। प्रतिदिन द्घर का काम निपटाने के बाद विद्यालय पहुंचने के लिए उसे दौड़ लगानी पड़ती थी।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने अपने देहरादून आवास पर खेलो इंडिया स्कूल गेम्स २०१८ में जनपद चमोली से ३००० मीटर पैदल वॉक में स्वर्ण पदक विजेता मानसी नेगी और ५००० मीटर पैदल वॉक में स्वर्ण पदक विजेता परमजीत सिंह बिष्ट से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इन दोनों के अलावा शिक्षा मंत्री ने उनके प्रशिक्षक गोपाल बिष्ट को भी सम्मानित किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को गोपेश्वर स्टेडियम की स्थिति अच्छी नहीं होने की जानकारी दी गई। तब अरविंद पांडे ने तत्काल खेल सचिव से फोन कर गोपेश्वर स्टेडियम को अभ्यास के अनुकूल बनाने के आदेश दिए। शिक्षा मंत्री ने खिलाडियों को पूर्ण विश्वास दिलाया कि प्रदेश सरकार उनकी हरसंभव मदद की जाएगी।

प्रथम खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में परचम लहराने वाली इन दोनों गुदड़ी के लाल का क्षेत्रवासियों ने भव्य स्वागत किया। दिल्ली से देहरादून और वहां से अपने गृह जनपद लौटने पर मानसी नेगी और परमजीत बिष्ट को लोगों ने फूल-मालाओं से ढक दिया। चमोली पहुंचते ही गांव वालो और जनपदवासियों ने दोनों खिलाड़ियों को खुली गाड़ी पर पूरा शहर ?kqek;k। ढोल-नगाड़ों से इनका स्वागत किया। मानसी नेगी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने और मां के साथ-साथ साथियों को भी दिया। उन्होंने बताया कि पिता के निधन के बाद मैं टूटने लगी थी] लेकिन मेरी मां ने मुझे मजबूत बनाया। यदि मैं तब टूट गई होती तो शायद आज यह सफलता हासिल नहीं कर पाती।

परमजीत बिष्ट ने कहा] ^हमने शुरू से ही अपने गेम्स पर फोकस किया हुआ था। यहां प्रशिक्षण के लिए संसाधन की कमी है। फिर भी हमारे गुरू ने हमें कम सुविधाओं और संसाधनों में भी लड़ना सिखाया।^ इसमें कोई दोराय नहीं है कि प्रदेश में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं और संसाधन न के बराबर हैं। इसके बावजूद अलग-अलग खेलों में यहां के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश-दुनिया में नाम रौशन कर रहे हैं। जरूरत है] इन खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की।


कुलपति की नियुक्ति पर सवाल

  • जसपाल नेगी

प्रदेश में एक बार फिर से उच्चाधिकारी की नियुक्ति पर बवाल मच रहा है। इस बार मामला विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति का है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिक एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के पूर्व कुलपति डॉ मैथ्यू प्रसाद ने पिछले साल अगस्त में इस्तीफा दे दिया था। उनके स्थान पर प्रोफेसर सीएम शर्मा प्रभारी कुलपति नियुक्त हुए थे। कई लोग नियमों का हवाला देकर नियुक्ति को असंवैधानिक बता रहे हैं।

बताया जाता है कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के पूर्व कुलपति डॉ मैथ्यू प्रसाद ने अगस्त में अपना त्यागपत्र राजभवन को भेजा। त्यागपत्र में उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य को वजह बताया है। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि डॉ प्रसाद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जिस कारण उन्हें हटाया जाना था। शासन उन पर कार्यवाही करता उससे पहले ही उनसे इस्तीफा ले लिया गया। डॉ मैथ्यू का कार्यकाल एक जनवरी २०१८ तक था। यह उनका बतौर कुलपति दूसरा कार्यकाल था। पूर्व राज्यपाल डॉ अजीज कुरैशी ने दो जनवरी २०१५ को उन्हें पुनर्नियुक्ति दी थी। भ्रष्टाचार से जुदा कुछ अन्य सूत्रों के अनुसार डॉ मैथ्यू पर चहेतों को नियुक्ति देने और कुछ चहेते कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने का आरोप है। इससे नाराज कर्मचारियों ने राज्यपाल से शिकायत भी की थी।

आठ अगस्त २०१८ को राज्यपाल डॉ पॉल ने डॉ मैथ्यू का त्यागपत्र स्वीकार कर विश्वविद्यालय के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के डीन प्रो सीएम शर्मा को प्रभारी कुलपति का पदभार सौंपा दिया। इनकी नियुक्ति पर अब सवाल उठने लगे हैं। प्रोफेसर शर्मा रानीचौरी कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री में डीन के पद पर नियुक्त थे। वह गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर भरसार विश्वविद्यालय के अधीन इस कॉलेज में तैनात थे। वह भरसार विश्वविद्यालय के नियमित एवं स्थायी फैकल्टी नहीं थे। उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय के आर्डिनेंस-४¼३½ख ¼७½ के तहत दिखाई गयी है जबकि विश्वविद्यालय का यह आर्डिनेंस साफ तौर पर कहता है कि महामहिम कुलाधिपति विश्वविद्यालय के वरिष्ठम्‌ डीन या डायरेक्टर्स में से प्रभारी कुलपति की नियुक्ति छः माह के लिए कर सकते हैं ¼जिसको अगले छः माह तक बढ़ाया भी जा सकता है½। 

प्रो शर्मा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर होने कि वजह से न तो भरसार विश्वविद्यालय के नियमित फैकल्टी हैं और न ही यहां के वरिष्ठतम डीन] डायरेक्टर या फैकल्टी के सदस्य ही। ऐसे में कुलाधिपति के स्तर से वीरचंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार उत्तराखण्ड के आर्डिनेंस २०१४ और विश्वविद्यालय के अधिनियम एवं सेवा नियमावली को क्यों और कैसे नजरअंदाज कर दिया गया यह समझ से परे है। कुलपति की नियुक्ति का निर्णय कुलाधिपति यानी राज्यपाल सरकार के सुझाव के बाद अपने विवेक से लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल से इस तरह के असंवौधानिक कार्य कराने के पीछे प्रदेश सरकार का हाथ है। इस तरह के उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए एक लॉबी प्रदेश में हावी है। इस लॉबी को सरकार या मंत्री नजरअंदाज नहीं कर पाते हैं।

 

 
         
 
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दिकदर्शन रावत

आयुष प्रदेश के नाम पर उत्तराखण्ड में न सिर्फ भ्रष्टाचार होता आ रहा है] बल्कि यहां आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रति जनता का भरोसा भी टूटा है। आयुर्वेद

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