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vad 36 24-02-2018
 
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संवाद
 
^धीमी है सीएम की कार्यशैली^

 हरिद्वार का ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र जिले में सबसे ज्यादा पिछड़ा माना जाता है। इस क्षेत्र के विधायक सुरेश राठौर के सामने कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि वह अपने क्षेत्र से पिछड़ा होने का तमगा कैसे हटाएं। क्षेत्रफल की दृष्टि से भी यह क्षेत्र बहुत बड़ा है। पहली बार विधायक बने राठौर राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। ^दि संडे पोस्ट^ संवाददाता अरुण कश्यप से उनकी बातचीत के मुख्य अंश %

 

आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है\

मेरे विधानसभा क्षेत्र में करीब सत्तर प्रतिशत ?kkM क्षेत्र है। यहां विकास की बयार लाना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा एक बहुत बड़ा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। मुस्लिम समाज में शिक्षा का अभाव है। ऐसी विषम परिस्थितियों में मैं काम कर रहा हूं। पिछली विधानसभा के दौरान हमारे विधायक चंद्रशेखर भट्टेवाला इसलिए ज्यादा विकास नहीं कर पाए कि सरकार विरोधी दल की थी। उन्होंने सहयोग नहीं किया। इस बार अपनी सरकार है। हम सब मिलकर बेहतर काम करेंगे।

बेरोजगारी खत्म करने के लिए कोई प्लान बनाया है\

मेरे विधानसभा क्षेत्र में बहुत बड़ा भू भाग बंजर है। यहां उपजाऊ भूमि कम है। बंजर भूमि पर कारखाने और फैक्ट्री लगाई जा सकती हैं। ?kkM क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने के लिए बुग्गावाला क्षेत्र में कई औद्योगिक इकाइयां स्थापित कराये जाने का खाका तैयार किया जा चुका है। इस क्षेत्र का चौमुखी विकास भी जल्द होगा और क्षेत्र के बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

क्या आप क्षेत्र में शिक्षा के स्तर से संतुष्ट हैं\

मेरा विधानसभा क्षेत्र विषम परिस्थितियों का क्षेत्र रहा है। करीब आधा दर्जन से ज्यादा बरसाती नदियां हैं। छात्र&छात्राओं को इसे पार करना बहुत मुश्किल होता था। माननीय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी के अथक प्रयास से लगभग ६ पुलों का निर्माण कराया गया है। यह पुल ?kkM क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन का काम कर रहे हैं। पूरे इलाके मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। इसके अलावा कास्समपुर, बुड्डाहेडी, संद्घीपुर, सहदेवपुर, सुभाषगढ़ जैसे पिछड़े गांव में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए इंटर कॉलेज खुलवाने का मेरा लक्ष्य है। मैं खासकर बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दूंगा।

क्या आप मुख्यमंत्री की कार्यशैली से खुश हैं\

अगर कार्यशैली की बात की जाए तो सबकी अलग&अलग होती है। योगी, मोदी की कार्यशैली अलग है। उसी तरह हमारे मुख्यमंत्री की कार्यशैली भी अलग है। हां, हमारे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली को धीमा कह सकते हैं।

राज्य में दो मंत्री पद खाली हैं। चर्चा है इन्हें अगले सप्ताह तक भर दिया जाएगा। क्या आप भी मंत्री पद की रेस में हैं\

यदि पार्टी मुझे २८ सालों की कड़ी मेहनत का फल देगी तो मुझे मंत्री पद अवश्य मिलेगा। मैं अपनी ओर से मंत्री पद का प्रबल दावेदार हूं। मैं दावेदारी भी करूंगा ताकि क्षेत्र की जनता की सेवा समुचित रूप से कर सकूं।

आपको जनता कथावाचक के रूप में भी जानती है। विधायक बनने के बाद क्या आप कथावाचक के लिए समय दे पा रहे हैं\

विधायक बनने से पहले मैं सतगुरु रविदास की कथा का वाचन करता था। यह मेरा धार्मिक कार्य है। मैं कट्टरवादी हिंदू हूं। मैं हमेशा धर्म के क्षेत्र में लोगों को संदेश देने का कार्य करता रहूंगा। फरवरी&मार्च में मेरी कई कथाएं होनी हैं। मैं चाहता हूं कि भारत के जन&जन तक गुरु रविदास की कथा पहुंचाऊं। मैं विधायक पद छोड़ सकता हूं, लेकिन अपने कथावाचक रविदासाचार्य किरदार के साथ पूरा न्याय करूंगा।

क्षेत्र की जनता को कौन सा तोहफा अपने कार्यकाल में देंगे जो उन्हें अब तक नहीं मिला\

पतित पावनी मां गंगा हमारे पूरे ?kkM क्षेत्र को उपजाऊ बना सकती है। इस पर मैंने गहनता से विचार किया है। धनौरी पुल से होते हुए सिंचाई के लिए एक नहर निकाली जाएगी। जिससे ?kkM क्षेत्र में सिंचाई की समस्या समाप्त हो जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव भी पास हो चुका है।

आपको निशंक खेमे का मजबूत पिलर माना जाता है। इस पर आप क्या कहेंगे\

मैं पार्टी में किसी खेमे का नेता नहीं हूं। मुझे मदन कौशिक जी से भी उतना ही लगाव है और निशंक जी से भी। सभी से अनुरोध है कि मुझे किसी गुट से जोड़कर न देखें। मैं किसी गुट में नहीं हूं।


 
         
 
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क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

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  • संजय स्वार

जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली त्रिवेंद्र रावत सरकार पॉलिटिकल इंटॉलरेंस की तरफ बढ़ रही है। इस बीच सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिनमें राजनीतिक द्वेष

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