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vad 31 20-01-2018
 
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चिंतन
 
म्यर बाज्यूक&नेताज्यू
  • हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री]उत्तराखण्ड

 

हमारे बचपन के आदर्शों में एक नेताजी का नाम श्री राम सिंह नेगी था। दो बार जेल गए थे। पक्के कांग्रेसी एवं समाजसेवी थे। एक दिन नेताजी मेरे पिताजी के साथ लोहार ¼लोहे के बर्तन बनाने वाले½ की बाखली में सफाई करने पहुंच गए]दो&तीन ही लोग इनका साथ देने वहां पहुंचे। मुझे अब तक याद है]कलदा लोहार ने रोते&रोते पिताजी के पांव पकड़ लिए और एक शब्द बार&बार दोहराते थे ^ये कें करें हैं छा पधानज्यू^ ¼प्रधान जी यह क्या कर रहे हो½। परंतु नेताजी ने उनका रास्ता साफ करके छोड़ा। नेताजी हमारे धारे की भी सफाई करते थे]कुछ बड़ा होने पर मैंने एवं मेरे गांव के हरदा ने यह काम अपना लिया

 

एक दुबले से सफेद टोपी वाले व्यक्ति महीने में दो&तीन बार हमारे ?kj पर आते थे। उनके आते ही मैं मां से कहता था]नेताजी आ गए हैं। मैं तब इस शब्द का अर्थ नहीं समझता था। मैं तो उनके आने पर इस बात से खुश होता था कि अब मुझे भी गुड़ का टुकड़ा मिलेगा। नेताजी गुड़ के कटके के साथ चाय पीते थे। पिताजी गांव में आवाज लगाते थे]आओ रे राम सिंह नेताज्यू आए हैं। गहया ¼गांव का रास्ता½ साफ करेंगे। आठ&दस लोग पिताजी की आवाज पर आते थे]मां सबको चाय देती थी। फिर सब बैलचा&फावड़ा&कुदाली एवं भराट ¼बड़ी दराती½ लेकर रास्ते साफ करने चल पड़ते थे। 

हम बच्चे]कभी&कभी]बड़े भी रास्ते के किनारों पर टट्टी करते थे। रास्ता बड़ा गंदा बना डालते थे। हमारे गांव में हर हफ्ते सफाई होती थी। धीरे&धीरे बड़े होने के साथ मैं और मेरे भाई तथा गांव के कुछ बच्चे रास्ते के किनारे की टट्टी पर मिट्टी डालते और रास्ते के सिसौड़ को लाठियों से पीटते थे। देखा&देखी कुछ बच्चों ने अब खेतों में टट्टी&पेशाब जाना शुरू कर दिया था। यह सब हम अबोध बच्चों पर]नेताजी का असर था। 

पांचवीं&छठी में पढ़ने तक मैं नेताजी का महत्व समझ गया था। वे हमारे ही नहीं]बल्कि और गांवों में भी नियमित जाते थे एवं गांव की सफाई करवाते थे। हमारे स्कूल में कभी&कभी प्रार्थना के दौरान आकर दतौन करने]नाखून काटने आदि पर बच्चों को बताते थे। मुझे बचपन की प्यारी सी हल्की&हल्की याद है। एक दिन चौनलिया में नेहरू जी आए]पिताजी मुझे कंधे में बिठाकर ले गए। सारा इलाका उनके दर्शनों के लिए चौनलिया पहुंचा था। मेला सा लगा था। एक बड़ी काली गाड़ी में नेहरू जी आए]पिताजी ने और उनके साथ और सैकड़ों लोगों ने जमीन तक झुककर उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने एक बड़े से बर्तन ¼भोंपू½ से कुछ बातें कही। उनसे पहले हमारे गांव&?kj के नेताजी कुछ बोले]फिर एक और टोपी वाले बोले। तब मैंने मन&मन में सोचा इतनी जोर से यह आदमी कैसे बोल रहे हैं। लाउड स्पीकर से मेरा पहला साक्षात्कार था। 

जब कुछ समझ बढ़ी]तब पता चला कि हमारे ये नेताजी अंग्रेजों को भगाने वालों में से एक हैं। तब हम अंग्रेज को एक डरावना राक्षस समझते थे। जब और बड़े हुए वोट समझने लगे तब पता चला पंडित जवाहर लाल नेहरू कौन हैं और यह भी पता चला कि ये अपनी पार्टी कांग्रेस के लिए और पंडित हरगोविंद पंत के लिए वोट मांगने आए थे]उनके मुकाबले में हमारी पट्टी के बगल के एक बड़े ठेकेदार के बेटे श्री गोविंद सिंह माहरा चुनाव लड़े थे और थोड़े से शायद सौ&पचास वोटों से हार गए थे।

हमारे बचपन के आदर्शों में एक नेताजी का नाम श्री राम सिंह नेगी था। दो बार जेल गए थे। पक्के कांग्रेसी एवं समाजसेवी थे। एक दिन नेताजी मेरे पिताजी के साथ लोहार ¼लोहे के बर्तन बनाने वाले½ की बाखली में सफाई करने पहुंच गए]दो&तीन ही लोग इनका साथ देने वहां पहुंचे। मुझे अब तक याद है]कलदा लोहार ने रोते&रोते पिताजी के पांव पकड़ लिए और एक शब्द बार&बार दोहराते थे ^ये कें करें हैं छा पधानज्यू^ ¼प्रधान जी यह क्या कर रहे हो½। परंतु नेताजी ने उनका रास्ता साफ करके छोड़ा। नेताजी हमारे धारे की भी सफाई करते थे]कुछ बड़ा होने पर मैंने एवं मेरे गांव के हरदा ने यह काम अपना लिया।

एक दिन हमारे गांव में बड़ी हलचल थी]कुछ लोग जोर&जोर से बोल रहे थे। मेरे पिताजी उनको समझा रहे थे]लोग गुस्से में थे। नेताजी के साथ एक और नेताजी गांव आए। उन्होंने हमारे थड़े में गांव की शिल्पकार बाखली के सभी मर्द बुलाए]उन्हें वैसा ही धागा पहनाया]जैसा मेरे चाचा और पिताजी पहनते थे। गांव के अधिकांश लोग नाराज होकर चले गए। परंतु मेरे पिताजी अपने भाइयों सहित नेताजी के साथ बैठे रहे। फिर कुछ देर में कुछ लोग और आ गए। महात्मा गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। मैंने यह नारा पहली बार चौनलिया में सुना था]दूसरी बार अपने गांव में। मेरी छोटी चाची ने मुझे एक फोटो दिखाकर बताया कि ये गांधी जी हैं। मैं शायद उस धोती&लाठी वाले बुड्ढे को देखकर हंसा था और मेरी चाची ने मुझे झिड़का भी था। वर्षों बाद पता चला कि नेताजी के साथ आने वाले दूसरे नेता खुशी राम आर्य थे जो विधायक थे। उन्होंने शिल्पकारों को जनेऊ पहनाओ आंदोलन चलाया था। इस आंदोलन में मेरी चाची के पिता]चाचा एवं बड़े भाई भी शामिल थे। वे भी गांधी के आंदोलन में जेल गए थे। इसलिए मेरी चाची गांव इलाके की औरतों से कांग्रेस को वोट डलवाती थी और हमें भी कांग्रेस&कांग्रेस सिखाती थी। कांग्रेस ने जब जमीदारी खत्म की और सिरतवानों एवं खैकरों को भूमिधर बनाया तो हमारे ?kj गांव का वातावरण कांग्रेस विरोधी हो गया। हम बच्चे भी झोपड़ी&बरगद आदि का नारा लगाते थे। गली&गली में शोर है और चोर है का नारा लगाते थे। परंतु नेताजी अपनी फौज के साथ डटे रहते थे और चवन्नी लेकर कांग्रेस का मेंबर बनाते थे। मुझे एक बार पिताजी नेताजी के गांव लेकर गए]पानी को लेकर हमारे एवं पड़ोस के गांव का झगड़ा सुलझाने के लिए। नेताजी का ?kj एवं चौथरा बहुत छोटा था। मैं मन&मन में सोचता था कि नेताजी का ?kj बहुत बड़ा होगा। मैं थोड़ा निराश हुआ। 

नेताजी कई&कई बार हमारे गांव आते थे]उनके पास केवल दो जोड़े कपड़ा वास्कट एवं टोपी थी। खाली समय में तकुवा कातते रहते थे। उन्होंने हमारे गांव में भी कई लोगों को तकुवा सिखाकर उन्हें ऊन दी थी]जिसे कातकर वे कुछ पैसा कमाते थे। मुझे एक बार की याद है]जब मेरे पिताजी ने हमारे दर्जी कालू राम जी से नेताजी के कपड़े सिलने को कहा और नेताजी ने कहा वे केवल खादी के कपड़े पहनते हैं। तब हम खादीवादी कुछ नहीं जानते थे। मेरे पिताजी नेताजी को बहुत मानते थे]उनसे प्रेरणा लेकर मेरे पिताजी ने मेरे दो बड़े भाइयों ¼चचेरे½ को हाईस्कूल फिर आगे पढ़ने भेजा। मेरे पिताजी भी थोड़ा पढ़े& लिखे थे]शायद पांच पास]सड़क बनाने की ठेकेदारी करते थे। बाबड़ एवं बांस कटान का ठेका लेते थे। इन कामों से जितना समय बचता था]पिताजी गांव और नेताजी के साथ लगाते थे।

नेताजी कितने पढ़े&लिखे थे]मैं नहीं जानता]परंतु रचानात्मक कार्यों में उनकी बड़ी रुचि थी। खाली बैठना उनकी नीयति नहीं थी। इलाके में शादी&व्याह हो]नेताजी न पहुंचें हो नहीं सकता था। हमारे गांव और मेरे नैनीताल के गांवों में शादी&व्याह में शाल एवं तिमले के पत्तों के पत्तल बनाने से लेकर चौखिया रसोई जहां भात न पका हो]नेताजी पत्तल लगाने एवं जूठे पत्तल उठाने का काम अपने ऊपर ले लेते थे। कभी&कभी हम बच्चों को या किसी बड़े को अपनी मदद में जोड़ते थे। जूठे पत्तल नेताजी एक जगह इक्कठा करवाते थे और पंद्रह&बीस दिन बाद पत्तल सूखने पर उन्हें आग लगाते थे। नेताजी ने कब गांव में झाड़ू लगाने]गांव के रास्ते एवं धारे साफ करने के संस्कार मुझमें डाले]मुझे पता नहीं। परंतु सांसद बनने तक मैं इस काम को यदा&कदा करते रहता था। जब लखनऊ में पढ़ रहा था]तब भी जब ?kj आता था]पहला काम अपना आंगन फिर रास्ता साफ करने का काम था। दस&ग्यारह वर्ष का होते&होते पिताजी ने मुझे अड़ोस&पड़ोस में न्यौते निभाने भेजना प्रारंभ कर दिया था। मैंने कब पत्तल बिछाने]पानी बांटने]जूठे पत्तल उठाने का काम अपने कंधों पर ले लिया]मुझे स्मरण नहीं है। जिस न्यौते में]मैं जाता था]इस काम को मैं और मेरे कुछ दोस्त अपने ऊपर लेते थे। ऐसे दोस्तों में मोहन सिंह थोकदार]दुर्गा सिंह मनराल]पीतांबर पाण्डे]जीवन सिंह कड़ाकोटी]आनंद मास्टर साहब]कुंदन सिंह नेगी]हरीश चौधरी]जगदीश चौधरी आदि प्रमुख थे। धीरे&धीरे इलाके में ऐसा सामाजिक कार्य करने वालों की टुकड़ियां बन गई। दूसरे के ?kj के उत्सव में काम निभाने में हमें आत्मिक प्रसन्नता होती थी। कई बड़े लोग जिनमें श्री जीत राम चौधरी आदि प्रमुख थे] ऐसे सार्वजनिक कार्यों में हमें प्रोत्साहित करते थे। नेताजी ने जाने&अनजाने में हमें कुछ ऐसे संस्कार दिए कि हमें अल्हड़ बचपन से जिम्मेदार लड़कों में बदल दिया। ककड़ी]सेव]नारंगी]आड़ू चोरते&चोरते हम सामाजिक कार्यकर्ता बन गाए। तब मैं सामाजिक कार्यकर्ता या रचनात्मक कार्यों की पहचान नहीं जानता था]परंतु एक शांत से नेता जी ने धीरे&धीरे अपने स्वभाव एवं कार्यों से मुझे बदल दिया और मुझ जैसे न जाने कितनों को बदल दिया। आज पंचायती राज एवं पार्टीबाजी ने गांव&गांव में नेता पैदा कर दिए हैं। पर यदि गांव में किसी की लड़की की बारात आ जाती है तो काम करने के लिए मजदूर ढूंढ़ने पड़ते हैं। पहले यदि किसी का मकान बनता था तो दूर जंगल से लकड़ी के स्लिपर सब साझा कर लाते थे। एक गांव एक परिवार की भावना थी तब। अब गांव&गांव में टीवी है]मोबाइल है]टट्टी ?kj है]पानी है]बिजली है पर परस्पर सहयोग की भावना नहीं है]क्याेंकि अब मेरे इलाके में कई नेता हैं]परंतु राम सिंह नेताज्यू नहीं हैं। 

¼क्रमशः½ 

 
         
 
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  • संतोष सिंह

शिक्षक सते सिह भंडारी ने अपने प्रयास से स्कूल को मॉडर्न बनाया। शिक्षा के साथ ही पर्यावरण चेतना की अलख जगाई। वह अपनी पौधशाला से वन विभाग को पेड़ लगाने देते

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