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योगेश भट्ट % नब्ज पर ^^हाथ^ रखा तो ^वो^ बुरा मान गए 

राज्य सचिवालय के अनुभागों में बाहरी व्यक्तियों और पत्रकारों के प्रवेश पर रोक क्या लगी मानो किसी ^दुखती नब्ज^ पर हाथ रख दिया गया हो। मुख्यसचिव के इस आदेश के बाद हंगामा बरपा है। आश्चर्य यह है कि राजकाज की व्यवस्था से जुड़ा आदेश मूलतः सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए है] लेकिन प्रतिक्रिया मीडिया बिरदारी से आ रही है।

एनपी रतूड़ी% भट्ट जी आपकी बात का पूर्णतः समर्थन करता हूं। तथाकथित मीडिया जिस प्रकार विधवा विलाप कर रहा है उससे लगता है कि सचिवालय के अंदर के और बाहर के दलालों को कष्ट हो रहा है।

चंद्रमोहन कोटियाल% सही कहा दलालों को ही इसमें दिक्कत है। लेकिन इस मामले में पीछे नहीं हटना चाहिए। और न किसी को कोई सफाई देने की जरूरत होनी चाहिए] बल्कि मीडिया पर भी नजरें होनी चाहिए कि वहां कौन किस मकसद से जा रहा है। और जरूरत पड़े तो दलालों को धक्के देकर वहां से निकालना चाहिए।

योगेश भट्ट % दिदा याद करो जब बचपन के दिनों में हम गांव की होली मांगने जाते थे तो जो गांव का संम्पन परिवार होता था उसके आंगन में हम एक गीत गाया करते थे।

^खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर^ इस गीत को उनके आंगन में  कर गाने के बाद यदि एक रुपया भी मिल जाता था तो हम जोर-शोर से उनके हर्ष-हर्ष जय-जय के नारे लगाया करते थे। होली मांगने और सचिवालय के प्रवेश में कितना फर्क या अंतर हम निकाल सकते हैं भला।

 

वीना उपध्याल% आज के दौर में किसी अनुभाग में ^पत्रकारों^ के जाने पर ही गोपनीयता भंग होने का खतरा है\ कथित गोपनीयता भंग होनी है तो वह तो \kj बैठे भी भंग हो जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक के विषय तो छोड़िए] यहां तो वित्तमंत्री तक कई बार बजट खुद ^लीक^ करते रहे हैं] जब वे बजट पेश करने से पहले ही पत्रकारों को कहते हैं कि इस बार बिना कर का बजट पेश होगा। कुछ वस्तुओं पर ही कर लगाया जाएगा। उन मंत्रियों के खिलाफ सरकार की गोपनीयता भंग करने पर कार्यवाही क्यों नहीं होती\

राज गौरव नोटियाल% प्रासंगिक और तार्किक विश्लेषण! तांक- झांक कर बेहद संवेदनशील शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता भंग करना भी किसी भ्रष्टाचार से कम नहीं है। खोजी पत्रकारिता की आड़ में अनावश्यक तांक-झांक को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए

अजय अजेय रावत% नादां हैं वो जो कहते हैं बिजली] पाणी] सड़क नहीं इसलिए पहाड़ छोड़ रहे पहाड़ी] जबकि पिछले डेढ़ दशक से २४ञ्७ पहाड़ में रहते हुए मुझे जो तजुर्बा हुआ] वह इस परसेप्शन से पूरी तरह मेल नहीं खाता।

भाषकर थलेड़ी% भरण-पोषण की समस्या का क्या निदान है\ जंगली जानवरों से सुरक्षा मानव और ेंषि की] काश सरकार अगर १० -१५ हजार का रोजगार पहाड़ो में बेरोजगारों के लिए प्रतिमाह देने की योजनाएं बना देती तो वास्तव में पलायन १०० प्रतिशत रुक जाता ऐसा मेरा मानना है। 

महादेव प्रसाद बहुगुणा% सरकार को भी सख्त कदम उठाने होंगे खेती योग्य जमीन बंजर होती जा रही है जमीन अधिग्रहण कर कॉन्टेक्ट फॉर मिंग करवाए।

गणेश काला% सच कहें तो पहाड़ के लोग अब रंगीली पिंगली दुनिया के आकर्षण में कैद होकर महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। लाख सुविधाएं भी इस तिलिस्म को नहीं तोड़ पा रही हैं। नवधन्याड्य पहाड़ी तो बस पचास गज में कैद होकर बड़प्पन समझ रहा।

 

जनाब ने फरमाया + + +

मीडिया से किसी भी प्रकार की खबर छिपाना सरकार का उद्देश्य नहीं है। कभी-कभी ऐसी खबरें आती हैं जो बिना वजह सरकार और मीडिया की विश्वसनीयता को कम करती हैं। 

त्रिवेंद्र सिंह रावत] मुख्यमंत्री 

पार्टी ने आज तक छोटे से लेकर बड़े पद पर सम्मान दिया है। राहुल जी की टीम में िजम्मेदारी मिलेगी तो भी निभाऊंगा] लेकिन अब मुझे भी पार्टी को लौटाकर देना है।

हरीश रावत] पूर्व मुख्यमंत्री 

ये मात्र संयोग ही है कि मेरे और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यक्रम आगे-पीछे चल रहे हैं। इसे मतभेद के नजरिए से देखा जाना गलत है। प्रीतम सिंह]प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष 

उत्तराखण्ड को डबल इंजन की सरकार का फायदा मिलने लगा है। हम स्विट्जरलैंड से आगे निकलने में सक्षम हैं। राज्य में विकास की अपार संभावनाएं हैं।अजय टम्टा] केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री 

 
         
 
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क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

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हरीश रावत

  • पूर्व मुख्यमंत्री] उत्तराखण्ड

माननीय सोनिया गांधी जी का कांग्रेस पार्टी एवं भारतीय नारित्व की गरिमा को आलोकित करने में जो योगदान

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