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vad 50 04-06-2017
 
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आवरण कथा
 
धोखे के पट्टे

 

सितारगंज उपचुनाव में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बंगाली समाज के लोगों को उनकी जमीनों के पट्टे देने का जो वादा किया था उसे लोग अब महज उनका चुनावी हथकंडा करार दे रहे हैं। स्थानीय लोग इस बात से बेहद खफा हैं कि सरकार ने इसके लिए जो तरीका अपनाया है वह गलत है जिसके तहत हजारों रुपए का टैक्स जमा करने के बावजूद उन्हें कुछ नहीं मिल पाएगा। इससे स्थानीय जनता में रोष तो उभरा ही है साथ ही मुख्यमंत्री भी सवालों के द्घेरे में हैं

 

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हमें जमीनों के पट्टे देने के नाम पर धोखा दिया है। जब वे विधानसभा उपचुनाव लड़े थे तो उन्होंने हमें भूमिधरी अधिकार देने का वादा किया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वर्ग १ (क के तहत भूमिधरी अधिकार देने की बजाय हमें वर्ग ९ के तहत पट्टे थमाए जा रहे हैं। इन पट्टों को लेने के समय हमने हजारों रुपये का टैक्स दिया। लेकिन इसका फायदा कुछ नहीं हो रहा है। यहां तक कि बैंक अधिकारी इनको नहीं मान रहे हैं। कुछ दिन पूर्व जब मैं एक बैंक में लोन लेने गया तो अधिकारी ने जमीन के पट्टे को आधार बनाने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि नियमानुसार यह कच्ची जमीन है। इस पर लोन नहीं मिल सकता है। अब हमें पता चल रहा है कि हमें पट्टों के नाम पर ठगा गया है। सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के बंगाली बाहुल्य कस्बे शक्तिफार्म के निवासी डॉ कार्तिक राय ने बड़े ही भावुक होकर ये उद्गार व्यक्त किये। उनका कहना है कि उन जैसे कई लोग और भी हैं जो पट्टे लेकर पश्चाताप कर रहे हैं। अब शक्तिफार्म के लोग कांग्रेस सरकार के झांसे में नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि पट्टे लेने ही बंद कर दिए हैं। बंगाली समुदाय के लोगों का पट्टों से मोहभंग हो चुका है। इस बात को इससे बल मिलता है कि शक्तिफार्म के लोगों ने पिछले ९ माह के दौरान ३६०० में से सिर्फ ५९ पट्टे ही लिये हैं।

 

गौरतलब है कि सितारगंज विधानसभा क्षेत्र में बंगाली समाज के लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव में उन्हें उनकी जमीनों के मालिकाना हक के तौर पर पट्टे देने का वादा किया था। एक समय पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर यहां बसे इन लोगों को आज भी उनकी जमीनों का मालिकाना हक भूमिधरी अधिकार नहीं मिला है। इन लोगों की मांग थी कि उन्हें वर्ग १ (क) तहत उनकी जमीनों का पूरी तरह मालिकाना अधिकार दिया जाय।

 

ऊधमसिंहनगर के शक्तिफार्म में बसे बंगाली समाज की ६५ वर्षीय महिला पुतुल मंडल के पास पहले पांच एकड़ जमीन थी लेकिन गरीबी और बाढ़ ने आधी जमीन निगल ली और अब ढाई एकड़ जमीन ही उनके पास बची है। उसी से सास-बहू और नाती-पोतों की जिंदगी की गाड़ी चल रही है। उनका बेटा बेरोजगार है। ऐसे में नए पट्टा लेने के लिए टैक्स भरने का भी पैसा उनके पास नहीं है। वे कहती हैं गरीबों की कोई सुनता नहीं। पट्टे लेने के लिए पहले तो हमारे पास पैसे नहीं हैं और जिन्होंने पट्टे लिए भी हैं तो उनके भी किसी काम के नहीं। अखिल भारतीय किसान सभा शक्तिफार्म मंडल अध्यक्ष सुरेश मालाकार कहते हैं चुनाव हुए नौ माह बीत गए सरकार भी स्थिर हो गई लेकिन मुख्यमंत्री के वादे अभी तक पूरे नहीं हुए। सरकार जिस वर्ग-९ के तहत पट्टे दे रही है वह हमें अपनी जमीनों का पूरी तरह मालिकाना हक नहीं देता। अब भी मूल रूप से सरकार के पास ही जमीन का मालिकाना हक है। पट्टों के नाम पर लोगों को लॉलीपॉप दिया जा रहा है। वर्ग ९ के तहत सबसे पहले ११ अगस्त को मुख्यमंत्री के हाथ से पट्टा लेने वाले दो व्यक्तियों में से एक वैद्यनाथ ने पांच एकड़ जमीन के लिए ५० हजार रुपया टैक्स भरकर पट्टा लिया है। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले कुछ नेता पटवारी और सरकारी कर्मचारियों के कहने पर पट्टा तो करा लिया उल्टे ५० हजार रुपये का चूना और लग गया।

 

भाजपा नेता खूब सिंह विकल कहते हैं सितारगंज की बंगाली जनता नए शासनादेश से असमंजस में है। पहले लोगों के पास जो पट्टे थे उनमें और नए पट्टे में सिर्फ हस्तांतरण के अधिकार का ही फर्क है। वर्ग-९ में सरकार ने लोगों को फ्री होल्ड का अधिकार नहीं दिया है। ऐसे में लोग टैक्स भर कर पुराने पट्टे को वर्ग-९ में बदलवाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। ३६०० पट्टों में से महज ५९ पट्टों को वर्ग ९ में तब्दील करवाए जाने की खानापूर्ति से इसे बखूबी समझा जा सकता है। यह ५९ पट्टे भी कांग्रेसी नेताओं ने जबरन अपने करीबियों के करवाए हैं।

 

उल्लेखनीय है कि लोगों को सन् १९६० में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट १८९५ के अंतर्गत वर्ग आठ के तहत पट्टों का वितरण किया गया था। इसके अनुसार मिलने वाले पट्टों पर आखिरी अधिकार सरकार का ही होता है। इन्हें न तो बेचा जा सकता है और न ही खरीदा जा सकता है। इसके अलावा इन पट्टों की भूमि का इस्तेमाल आवासीय आवश्यकताओं के लिए करना भी वर्जित है। अब पट्टों का आवंटन वर्ग नौ के तहत किया जा रहा है। जिसके अनुसार इस भूमि का उपयोग आवासीय रूप में भी किया जा सकता है। बहुगुणा ने भूमिधरी अधिकार देने की द्घोषणा के बाद इसमें एक और क्लॉज शामिल किया है जिसके तहत सरकार से आज्ञा लेकर इसे खरीदा और बेचा भी जा सकता है। लेकिन मामले में पेंच अब भी फंसा हुआ है। दरअसल कानून के अनुसार वर्ग आठ के तहत आवंटित की गई जमीन का इस्तेमाल अगर ३० सालों तक सभी शर्तों के अनुसार किया जाता है तो जमीन रिन्युअल कराने पर खुद ब खुद वर्ग नौ के अंतर्गत आ जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि बहुगुणा ने भूमिधरी अधिकार दिलाने के नाम पर वर्ग नौ में सिर्फ एक क्लॉज जोड़ दिया है। बाकी ज्यों का त्यों ही है। 

 

दूसरी तरफ सरकार अभी तक बंगाली समाज को वर्ग आठ और वर्ग नौ के फेर में गुमराह करने में लगी है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उपचुनाव में बंगाली समाज से किये भूमिधरी के वायदे को अमलीजामा पहनाते हुए सबसे पहले दो परिवारों के छह लोगों को वर्ग नौ के अंतर्गत पट्टे दिए थे। जबकि कूषि प्रयोजन शर्तों के आधार पर तीन दशक बाद स्वतः ही पट्टों की भूमि वर्ग नौ में तब्दील हो जाती है। लोगों का आरोप है कि सरकार सर्किल रेट के रूप में बंगाली समाज से लाखों रुपये का राजस्व भी ले रही है। बावजूद इसके बंगाली समाज को एक बार फिर गुमराह किया जा रहा है।

 

दशकों से सितारगंज में शक्तिफार्म में बसे बंगाली विस्थापितों के वोट की खातिर मुख्यमंत्री बहुगुणा ने उपचुनाव में भूमिधरी अधिकार देने का कार्ड खेला था। जिसका असर उपचुनाव में कांग्रेस को बखूबी देखने को मिला। बंगाली बाहुल्य क्षेत्र होने से समाज के लोगों ने बहुगुणा को जिताकर उनकी गद्दी पर छाए संकट से उन्हें बचा लिया। भूमिधरी अधिकार के पट्टों को लेकर भाजपा ने पूर्व में ही सीएम पर गुमराह करने का आरोप लगाया था। विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से उम्मीदवारी कर चुके बंगाली समाज के डॉ विनय मंडल ने आरोप लगाया कि बहुगुणा ने भूमिधरी अधिकार के नाम पर क्षेत्रवासियों के साथ विश्वास घात किया है। पट्टों की भूमि को वर्ग ९ में तब्दील करने से भूमिधरी अधिकार की समस्या जस की तस बनी रहेगी। इससे बंगाली समाज में रोष पनप रहा है।

 

मार्च २०१३ तक शक्तिफार्म में दिए गए पट्टे

देवनगर         १०

रुदपुर         ११

सुरेन्द्र नगर

टैगोर नगर

बैकुंठपुर

निर्मल नगर

गुरु ग्राम

राज नगर १०

कुल         ५९

 

 

सबको मिलेगा भूमिधरी अधिकार

(कुमाऊं मंडल विकास निगम के अध्यक्ष किरण मंडल से बातचीत शक्तिफार्म के लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने उनसे धोखा किया है?

दरअसल अब वर्ग १ (क के तहत भूमिधरी अधिकार नहीं दिया जा सकता। यह केवल दिनेशपुर वालों को दिया गया था। वर्ग ९ और वर्ग १ (क दोनों के तहत दिया अधिकार एक सा है।

क्या यह पट्टे तभी बेचे जा सकेंगे जब सरकार से स्वीकृति प्राप्त होगी?

ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिन्हें पट्टे मिलेंगे। वे अपनी जमीन क्रय-विक्रय कर सकते हैं।

लेकिन कृषि प्रयोजन की जमीन पर ही वर्ग ९ लागू हो सकता है जबकि शक्तिफार्म में अधिकतर जमीन पर मकान बन गए हैं?

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जमीन पर चाहे खेती हो रही हो या उस पर भवन बने हुए हों। सभी को पट्टे मिलेंगे।

 

 

वर्ग ८ एनजेडए की श्रेणी में आता है। शक्तिफार्म के बंगालियों की जमीन इसी में दर्ज है। मुख्यमंत्री ने इसे वर्ग ९ में परिवर्तित करा कर शक्तिफार्म के लोगों को पट्टे दिए हैं। वर्ग ९ में पूर्ण भूमिधरी अधिकार नहीं मिलते हैं। इस पर केवल वारिसाना हक मिलता है। जमीन केवल उनके बच्चों के नाम हो सकती है। मुख्यमंत्री को चाहिए था कि वह शक्तिफार्म के लोगों को वर्ग १ (क के तहत भूमिधरी अधिकार देते तभी उनका वादा पूरा होता है। लेकिन उन्होंने अपना वादा पूरा न करके लोगों को लॉलीपॉप थमाया है। इसके लिए जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा १३१ (ख के आधार पर कार्रवाई होती है। लेकिन कानून में बिना संशोधन के यह संभव नहीं है।

प्रकाश पंत पूर्व कैबिनेट मंत्री


 

शक्तिफार्म के लोगों के साथ मुख्यमंत्री ने धोखा किया है। हमें वर्ग १ (क के तहत भूमिधरी अधिकार मिलने चाहिए थे। जिसमें हमें जमीन के क्रय-विक्रय का अधिकार मिल सकता था। लेकिन अब इसके लिए हमें सरकार की अनुमति लेनी पड़ेगी।

शिखा हलधर शाक्तिफार्म निवासी


 

पहले लोगों को वर्ग ८ के तहत जमीन दी गई थी जो अवैध कब्जेदारों में मानी जाती है। लेकिन अब यह जमीन वर्ग ९ में वैध के दायरे में आ गई है।

बृजेश कुमार संत जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर

 

 

 
         
 
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