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सिनेमा
 
पदमावती पर पंगा

  • गुंजन कुमार

^पद्मावती^ पर विवाद पिछले कुछ दिनों से लगातार चल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर राजपुताना खून उबलने को बेताब है। राजपुताना समाज और करणी सेना इस फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं जबकि निर्माता और निर्देशक इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं। इन विरोधों के बीच सेंसर बोर्ड ने तकनीकी खामियां बताते हुए सिनेमा को वापस भेज दिया है। इस कारण एक दिसंबर को इस फिल्म की रीलिज डेट को आगे बढ़ा दिया गया है। किसी फिल्म का विरोध कोई नया नहीं है। इसके पहले भी कई सिनेमा पर राजनीतिक कारणों या सामाजिक कारणों से विरोध होता रहा है। जिसे अभिव्यक्ति की आजादी या कला की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के रूप में देखा जाता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में इसे कहीं से अच्छा नहीं कहा जा सकता। इस फिल्म के विरोध का आगाज राजस्थान में शुटिंग शुरू होने के दिनों से ही हो गया था। पर तब मामले को किसी प्रकार शांत करा दिया गया था। फिल्म रीलिज होने का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है। वैसे-वैसे इसका विरोध तेज होने लगा। जिस राजद्घराने के पृष्ठभूमि पर ^पद्मावती^ फिल्म बनाई गई है] उस राजद्घराने के लोग भी इसका विरोध कर रहे हैं। पहले विरोध की बागडोर करणी सेना जैसी संस्था के हाथ में थी। जो धीरे-धीरे विस्तार पर है। करणी सेना के बाद देशभर के अन्य राजपुत राजद्घराने] राजपूत समाज के साथ अब राजनीतिक पार्टियां भी इसके विरोध में उतर गई हैं।

विरोध करने वाले लोगों का मानना है कि इस फिल्म में रानी पद्मावती की गलत जानकारी दी गई है। इनके मुताबिक रानी पद्मावती ने लाखों महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था लेकिन कभी क्रूर शासक अलाउद्दीन खिलजी के सामने सिर नहीं झुकाया। ऐसी बहादुर रानी को फिल्म में खिलजी की प्रेमिका दिखाया गया है। खिलजी और पद्मावती के साथ कई सीन पर भी इन्हें आपत्ति है। इनका विरोध इसलिए ज्यादा मुखर है क्योंकि उनके इतिहास को गलत ढंग से दिखाया जा रहा है। इनके विपरीत फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने स्पष्ट तौर पर कहा कि फिल्म में पद्मावती को खिलजी की प्रेमिका नहीं दिखया गया है न ही उनका कोई आपत्तिजनक सीन है। फिल्म को रीलिज होने दें] उसके बाद निर्णय लें।

भंसाली ही नहीं फिल्म के अभिनेता भी विरोध करने वाले लोगों से यही आग्रह कर रहे हैं कि फिल्म देखने के पहले कोई राय न बनाएं। भंसाली को पूरे बॉलीवुड जगत का साथ मिल रहा है। कई बड़े निर्माता-निर्देशक] गीतकार-संगतीकार और अभिनेताओं का समर्थन ^पद्मावती^ को मिला है। जावेद अख्तर] सबाना आजमी] सलमान खान] कमल हासन आदि बड़े नाम भंसाली के साथ खड़े हैं। सेंसर बोर्ड से फिल्म को वापस करने पर बोर्ड के अध्यक्ष प्रषूण जोशी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है] ^इस मामले में सभी को सर्व प्रथम शांति रखना होगा। अभी बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया है। बोर्ड के सामने फिल्मों को रखने की जो प्रक्रिया है] उसे फॉलो नहीं किया गया। इसलिए उसे वापस भेजा गया है। सभी शांति से रहेंगे तभी बोर्ड को निष्पक्ष फैसला लेने में आसानी होगी।^

^पद्मावती^ के विरोध ने धीरे-धीरे राजनीतिक पार्टियों में जगह बना ली है। बीजेपी शासित तीन प्रदेश की सरकार ने भी इस फिल्म का विरोध किया है। संगठन के लोगों ने तो विरोध की हदें पार कर गला] नाक और हाथ काटने तक पहुंचा दिया है। कांग्रेस के भी कई नेता फिल्म के विरोध में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उत्तर प्रदेश] हरियाणा और राजस्थान के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मैदान में कूद पड़े हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने राजपूतों को स्पष्ट आश्वासन दिया कि जब तक फिल्म से आपत्तिजनक दृश्य नहीं हटाए जाएंगे] मध्य प्रदेश में पद्मावती फिल्म का प्रदर्शन नहीं होगा। उत्तर प्रदेश सरकार] राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पद्मावती से आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने के बाद ही रिलीज किया जाए। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकार का ^पद्मावती^ फिल्म का विरोध अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो गया है। यह राजपूत वोटरों को बीजेपी के पक्ष में करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश बीजेपी में अभी कोई स्थापित राजपूत नेता नहीं है। जबकि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह इस वर्ग की नुमाइंदगी करते हैं। राज्य में अधिकांश राजपूत नेता गढ़ी अथवा किलेदार हैं। जागीरदार और जमींदार भी राजपूत समाज के ही हैं।

अनुमान यह लगाया जा रहा है कि कांग्रेस अगले विधानसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे कर सकती है। सिंधिया राजद्घराने परिवार से हैं। ऐसे में माना यह जा रहा है कि जमींदार] जागीरदार राजपूत नेता सिंधिया के पक्ष में मैदान संभाल सकते हैं। बीजेपी] पद्मावती के जरिए इस कोशिश को नाकाम करना चाहती है।

        gunjan@thesundaypost.in

 
         
 
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