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vad 26 16-12-2017
 
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दुनिया 
 
ब्रिटेन पर भारी भारत

  • सिराज माही

देश में भले ही इन दिनों निराशा छाई हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इन्हीं कीर्तिमानों में से एक है अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में दलवीर भंडारी का पहुंचना। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी एक बार फिर आईसीजे में भारत की नुमाइंदगी करेंगे। आईसीजे सयुंक्त राष्ट्र की प्रमुख कानूनी संस्था है जिसका काम दुनिया के तमाम देशों के बीच कानूनी विवाद की सुनवाई करना है। आईसीजे में पांचवें जज के पद पर दावेदारी के रूप में ब्रिटेन के जज सर क्रिस्टोफर ग्रीनवुड भारत के दलवीर भंडारी के कड़े प्रतिद्वंदी थे। लेकिन जीत भारत की हुई। भारत की जीत इसलिए संभव हुई क्योंकि ब्रिटेन ने चुनाव से अपनी दावेदारी वापस ले ली। ब्रिटेन की यह बड़ी हार है।

गौरतलब है आईसीजे चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को महासभा और सुरक्षा परिषद दोनों में बहुमत प्राप्त करने की जरूरत होती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भंडारी को १९३ में से १८३ वोट मिले जबकि सुरक्षा परिषद् में सभी १५ मत भारत के पक्ष में गए। इस चुनाव के लिए न्यूयॉर्क स्थित संगठन के मुख्यालय में अलग से मतदान करवाया गया था। इस दौर के मतदान से पहले ११ दौर का चुनाव हुआ लेकिन बारहवें दौर से पहले ब्रिटेन ने अपने प्रत्याशी का नाम वापस ले लिया। इसके बाद दलवीर भंडारी का पुनर्निर्वाचन हुआ। 

दरअसल] आईसीजे की १५ सदस्यीय पीठ का एक तिहाई हिस्सा नौ साल की अवधि के लिए हर तीन साल में चुना जाता है। इसी वर्ष नौ नवंबर को यूएनजीए और सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पांच सीटों में से चार के लिए जजों का चुनाव कर लिया था। भारत और ब्रिटेन के उम्मीदवारों में से चुनाव अब तक नहीं हुआ था। पहले के ११ दौर के चुनाव में भंडारी को महासभा के करीब दो तिहाई सदस्यों का समर्थन मिला] लेकिन सुरक्षा परिषद में वे ग्रीनवुड के मुकाबले तीन मतों से पीछे थे। १२वें दौर का चुनाव से पहले ही ब्रिटेन ने अपने कदम खींच लिए। आईसीजे में भारत की जीत इसलिए बड़ी कामयाबी क्योंकि उसने ब्रिटेन जैसे विकसित देश को अंतरराष्ट्रीय पटल पर हराया है। १९४६ के बाद यह पहला मौका है जब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के पंद्रह जजों में ब्रिटेन का कोई जज नहीं है। 

आईसीजे के जजों के चुनाव के लिए अमूमन पांच पदों के लिए पांच उम्मीदवार होते हैं। लेकिन इस बार यूएन में लेबनान के पूर्व राजदूत डॉ  नवाफ सलाम ने भी अपनी दावेदारी की। ऐसे में अब पांच पदों के लिए छह उम्मीदवार दावेदारी कर रहे थे। यूएन में लंबा समय बिताने वाले डॉ   सलाम ने अपने संबंधों के दम पर एशिया के लिए रिजर्व स्लॉट पर कब्जा जमा लिया। ऐसे में भारत के दलवीर भंडारी को उन सीटों पर अपनी दावेदारी करनी पड़ी जो सामान्यतः यूरोपीय जजों के लिए खाली रहती है। यह ब्रिटेन को एक तरह से चुनौती देना था। भारत के भंडारी को सयुंक्त राष्ट्र की आम सभा का समर्थन हासिल था तो ब्रिटेन के ग्रीनवुड को यूएन सुरक्षा समिति से समर्थन था। भारत सरकार ने दलवीर भंडारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए कई कोशिशें की। इसके लिए भारत लंबे समय से प्रयासरत था। इस साल जुलाई में ब्रिक्स देशों के सम्मेलन से ही भारतीय नेतृत्व इस अभियान में जुट गया था। सुरक्षा परिषद के सदस्यों और महासभा के सौ से ज्यादा सदस्य देशों को चिट्ठी लिख भारत ने इसके लिए समर्थन मांगा था। आखिरकार भारत अपने मंसूबे में कामयाब रहा। 

आईसीजे में किसी देश का जज होने से उस देश की मान्यता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इस कोर्ट का अधिकार क्षेत्र बहुत बड़ा है। इसका काम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कानूनी विवादों पर निर्णय लेना है] दो पक्षों के बीच विवाद पर फैसले सुनाना है। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के अनुरोध पर पर राय देना है। संयुक्त राष्ट्र के न्यायालय में १५ न्यायाधीश हैं] जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ साल के लिए चुने जाते हैं। आईसीजे की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच हैं।

आईसीजे में दलवीर भंडारी भारत के चौथे जज हैं। नागेंद्र सिंह को भारत की ओर से आईसीजे का पहला जज होने का गौरव हासिल है। भंडारी काफी अनुभवी जज हैं। वह वर्ष १९९१ में भंडारी दिल्ली आए और यहां वकालत करने लगे। अक्टूबर २००५ में वो मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। दलवीर भंडारी ने १९ जून २०१२ को पहली बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सदस्य की शपथ ली थी। वो सुप्रीम कोर्ट में भी वरिष्ठ न्यायमूर्ति रहे हैं। दलवीर भंडारी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जाने से पहले भारत में विभिन्न अदालतों में २० वर्ष से अधिक समय तक उच्च पदों पर रह चुके हैं। न्यायमूर्ति भंडारी अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हैं। वैश्विक विवादों की उन्हें गहरी समझ है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी दांव-पेंचों को वे बारीकी से समझते हैं। कुलभूषण जाधव के मामले में उन्होंने जिस तरह भारत का पक्ष रखा] उसी से पाकिस्तान सकते में आया था।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर आज जो स्थितियां हैं] वे भारत के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं हैं ऐसे में दलवीर भंडारी जैसी शख्सियत का आईसीजे में होना समय की मांग थी। बहरहाल भारत की इस कूटनीतिक जीत से दुनिया को संदेश गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भारत एक मजबूत हैसियत में है। इससे सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए उसकी दावेदारी को भी बल मिलेगा।


बच्चों का ड्रग्स

चीन की राजधानी बीजिंग के एक नर्सरी स्कूल में बच्चों को ड्रग्स दिए जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर चीन में काफी विरोध हो रहा है। ये मामला चीन की एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था आरवाईबी स्कूल से जुड़ा हुआ है। इस संस्था ने कहा है कि वह इस मामले के लिए माफी मांगते हैं जिससे इतना विरोध भड़का है। बीजिंग के अधिकारी चीनी राजधानी में चल रहे सारे नर्सरी स्कूलों में इसकी जांच कर रहे हैं। चीन के प्रमुख शहर शंद्घाई के चाइल्ड केयर सेंटर में नौनिहालों के शोषण किए जाने के बाद ये मामला सामने आया है। आरवाईबी एजुकेशन प्री-स्कूल में कम से कम आठ बच्चों को अज्ञात ड्रग का इंजेक्शन दिया गया है। इन बच्चों के माता-पिता ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि उन्होंने हालिया दिनों में अपने बच्चों के शरीर पर इंजेक्शन के निशान देखे हैं। बच्चों के द्घरवालों ने ये भी बताया है कि उनके बच्चों को सोने के समय से पहले गोलियां भी खिलाई गई थीं। एक बच्चे के पिता के मुताबिक उनके बच्चे को हर रोज दोपहर के खाने के बाद उन्हें दो सफेद गोलियां दी जाती थीं और इसके बाद वे सो जाते थे। कुछ पेरेंट्स ने उनके बच्चों के साथ यौन शोषण होने की बात कही है] उन्हें कपड़े उतारकर खड़ा किया जाता है। कई पेरेंट्स ने इस तरह की ?kVukvksa के प्रकाश में आने पर स्कूल के बाहर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया है। कुछ लोगों ने कैक्सिन ग्लोबल को बताया है कि उन्हें शक है कि टीचर्स ने अनुशासित बनाने के लिए इंजेक्शन लगाए होंगे। एक पेरेंट ने बताया कि अनुशासनहीन बच्चों को भी अंधेरे कमरों में नंगे खड़े किया जाता है। पुलिस ने नर्सरी स्कूल की सीसीटीवी फुटेज को अपने अधिकार में ले लिया है। इसके साथ ही तीन अध्यापकों को सस्पेंड कर दिया गया है।

फिर सीरिया पर हवाई हमला

सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले इलाकों में रूस ने फिर से हमला किया है। इस बार रूस ने पूर्वी सीरिया के एक गांव में हवाई हमला किया है। इस हमले में २१ बच्चों सहित ५३ लोगों की मौत हो गई। ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि फरात नदी के पूर्वी तट पर दीर एजोर प्रांत के अल-शफह गांव में हवाई हमले हुए। निगरानी समूह ने शुरुआत में मरने वालों की संख्या ३४ बताई थी लेकिन बाद में और शव भी मिले। हवाई हमले में कम से कम १८ लोग द्घायल हुए हैं। रूस सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का करीबी सहयोगी है। सितंबर २०१५ में रूस ने असद सरकार के समर्थन में सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया जिसके दमिश्क को विद्रोहियों के कब्जे वाले भूभाग को पुनरू अपने नियंत्रण में लेने में मदद मिली। पूर्वी सीरिया के डेर-अर-जौर प्रांत में रूस के छह लंबी दूरी के टीयू-२२एम३ बमवर्षक विमानों ने इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर हवाई हमले किए। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक रूसी क्षेत्र से उड़ान भरने वाले इन बमवर्षकों ने यूफ्रेटस द्घाटी में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक] पश्चिमी सीरिया के खेमेमिम सैन्यअड्डे में तैनात एसयू-३०एमएस और एसयू-३५एस ने भी इन बमवर्षकों ने भी रूसी बॉम्बर प्लेन के साथ इस मिशन में हिस्सा लिया। गौरतलब है कि रूसी सेना ने नवंबर की शुरुआत से ही सीरिया में आतंकवादियों को निशाना बनाकर दर्जनभर हमले किए हैं। रूसी संद्घ परिषद की रक्षा एवं सुरक्षा समिति के मुताबिक] सीरिया में आईएस के खिलाफ यह लड़ाई इस साल के अंत तक समाप्त हो जाएगी और इसके बाद रूस अपने वायुसेना की टुकड़ियों को वहां से वापस बुला लेगा।

 

 
         
 
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