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vad 26 16-12-2017
 
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देश
 
विकास नहीं कास्ट कार्ड

 

  • सिराज माही

 

गुजरात विधानसभा चुनाव के बस कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में आपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है तो देश में अपनी जमीन गवां चुकी कांग्रेस इस चुनाव से वापसी करना चाहती है। इसलिए दोनों ही पार्टियां चुनाव से पहले जमकर प्रचार और रैलियां कर रही हैं।  भाजपा&चुनाव से पहले प्रचार के लिए मोदी को मुख्य चेहरा बनाया है तो कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। दोनों पार्टियों ने गुजरात में जाति समीकरण देखते हुए उम्मीदवारों को टिकट बांटे हैं। कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि उसने प्रदेश के तीन प्रभावी युवाओं जिग्नेश]अल्पेश और हार्दिक को मना लिया है]जो उसकी जीत में अहम रोल अदा कर सकते हैं। भाजपा ने किसी भी समुदाय के नेता को नहीं बनाया है लेकिन उसने हर समुदाय के नेताओं को खुलकर टिकट दिया है। 

जैसे&जैसे गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है]सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपने हर बड़े नेता को चुनावी मैदान में उतार रही हैं। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह]अरुण जेटली]नितिन गडकरी]उमा भारती]राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे] मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को प्रचार के लिए उतारा है। उधर कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों में सोनिया गांधी]राहुल गांधी]मनमोहन सिंह]अशोक गहलोत]सांसद अहमद पटेल]भरत सिंह सोलंकी] नवजोत सिंह सिद्धू और राज बब्बर को शामिल किया है। अल्पेश ठाकोर भी कांग्रेस के लिए वोट मांग रहे हैं। जब तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब तक सब भाजपा के लिए ठीक था लेकिन जब से वह प्रधानमंत्री बने उसके बाद गुजरात में भाजपा की स्थिति बिगड़ी है। पार्टी को दो मुख्यमंत्री बदलने पड़े और कभी मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार रहे सौरभ पटेल को सरकार से बाहर होना पड़ा। इस बीच युवा हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पाटीदार आरक्षण आंदोलन ने भाजपा की रणनीति को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसी के चलते भाजपा ने गुजरात में सामाजिक समीकरणों को साधते हुए पिछड़ा व पाटीदार समुदाय को सबसे ज्यादा टिकट दिए हैं। भाजपा ने पाटीदार समुदाय को छोड़कर बाकी समुदायों के विधायकों के बड़ी संख्या में टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाया है। उसने राज्य की सभी १८२ सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की ?kks"k.kk कर दी है। भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल को टिकट नहीं दिया है। उन्होंने पहले ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। 

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सबसे ज्यादा लगभग ३५ फीसदी आबादी वाले पिछड़ा वर्ग से ६१ लोगों को उम्मीदवार बनाया है। पाटीदार आन्दोलन समिति के नेता कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं फिर भी भाजपा ने पाटीदार समुदाय से ५२ नेताओं को टिकट दिया है। अनुसूचित जनजाति से २८]अनुसूचित जाति से १२]क्षत्रिय १३ और नौ ब्राह्मणों को उम्मीदवार बनाया गया है। अन्य समुदायों से सात उम्मीदवार उतारे गए हैं। राज्य में दस फीसदी मुसलमान भी हैं]लेकिन भाजपा ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया है। हार्दिक पटेल के कांग्रेस को समर्थन से भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। पटेल समुदाय भाजपा का परंपरागत समर्थक रहा है। ऐसे में इस चुनाव में पटेलों की नाराजगी का भाजपा को नुकसान हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पाटीदार समुदाय के अधिकांश मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट दिया है। राज्य में पाटीदार आबादी १५ फीसदी है।

कांग्रेस की बात करें तो १८२ सीटों में से कांग्रेस १७६ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर शुरू से ही कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। दलित नेता जिग्नेश मेवाड़ी ने कांग्रेस का समर्थन करने को कहा लेकिन वह कांग्रेस से चुनाव नहीं लड़ेंगे। वह बनासकांठा की वडगाम सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। वडगाम सीट पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार न उतारकर जिग्नेश का समर्थन किया है। पाटीदार आन्दोलन समिति से उभरे नेता हार्दिक पटेल भी कांग्रेस के साथ हैं। कांग्रेस ने इस बार क्षत्रिय]हरिजन ¼दलित½ आदिवासी और पाटीदार ¼खाप½ के दम पर मोदी&शाह के किले को भेदने की योजना बनाई है। ओबीसी]दलित और पटेलों को मनाने के बाद कांग्रेस आदिवासियों को मनाने में कामयाब हो रही है। कांग्रेस ने मुसलमानों पर भी दांव खेला है। भाजपा ने राज्य में जहां एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है वहीं कांग्रेस ने छह मुस्लिमों को टिकट दिया है। गुजरात चुनाव में कांग्रेस ने पाटीदारों को सबसे अधिक ४१ टिकट दिए। ओबीसी समुदाय के ३५ उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इसके अतिरिक्त ने २१ कोली पटेल]२७ आदिवासी]१३ दलित ११ क्षत्रिय]तीन ब्राम्हण और सात महिलाओं को मैदान में उतारा है। पिछले विधानसभा चुनाव यानी २०१२ में कांग्रेस पार्टी ने कुल १८२ में से ५७ सीटों पर जीत हासिल की थी और बीजेपी ने ११९ सीटों के साथ बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि बाद में एक दर्जन से भी अधिक विधायकों के छोड़ जाने से कांग्रेस के पास केवल ४३ विधायक ही रह गए थे। इस बार अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि कांग्रेस मैदान मार ले जाएगी लेकिन तमाम सर्वे और जमीनी रिपोटिर्ंग बताती है कि बहुमत में भाजपा आएगी।

खराब जीवनशैली मौत का कारण

देशभर में सबसे ज्यादा मौतें जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से होती हैं। जीवनशैली से होने वाली मौतों की दर ६१ फीसद है। पर्यावरणीय प्रदूषण की इसमें अहम भूमिका है। प्रदूषकों का असर कई स्तर पर हो रहा है]जिसके बारे में अब पता चलना शुरू हो रहा है। यह जानकारी सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट ¼सीएसई½ की ओर से जारी बॉडी बर्डन नामक स्वास्थ्य रिपोर्ट में दी गई है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि यही हालात रहे तो साल २०२० तक कैंसर के सालाना १७.३० लाख से अधिक मामले आने लगेंगे। सुनीता नारायण ने कहा कि देश में मौत का सबसे बड़ा कारण जीवनशैली की बीमारियां हैं। इसके साथ ही प्रदूषण का भी सेहत से गहरा संबंध है]जिसके चलते कई अन्य बीमारियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कीटनाशक से कैंसर जैसी बामारी होती हैं]लेकिन अब पता चला है कि मधुमेह का भी इससे गहरा रिश्ता है। हर १२वां भारतीय मधुमेह रोगी है। इसी तरह से वायु प्रदूषण का मानसिक स्वास्थ्य से अंतर्संबंध है। ३० फीसद असामयिक मौतें वायु प्रदूषण के कारण ही होती हैं। सीएसई की रिपोर्ट से पता चलता है कि सात सबसे बड़ी बीमारियां जीवनशैली व प्रदूषण के कारण होती हैं। देश में हर साल हार्ट अटैक से २७ लाख लोगों की मौत होती है]जिसमें से ५२ फीसद लोग ७० साल से कम के होते हैं। राजधानी में हर तीसरे बच्चे के फेफड़े प्रभावित हैं। २०१६ तक देश में ३.५० करोड़ अस्थमा रोगी थे। प्रदूषण के अब तक के अध्ययन से पता चलता है कि दिल की बीमारी का वायु प्रदूषण से गहरा संबंध है।

सबसे कमजोर पीएम मोदी

^नरेंद्र मोदी ने सभी शक्तियों को अपने केंद्र में रखकर पीएमओ को सबसे कमजोर बना डाला है^। यह तीखे शब्द पूर्व पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी के हैं। उन्होंने एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में मौजूदा पीएमओ सबसे कमजोर साबित हुआ है। शौरी के मुताबिक ४० वर्षों के भारतीय राजनीति में उन्होंने कभी भी इस तरह के झूठेपन की अतिश्योक्ति वाली सरकार नहीं देखी। यह एक ऐसी सरकार है जो कभी भी अपने वादे पूरे नहीं करती है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे शौरी ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो शख्स खुद को सुरक्षित महसूस करता है वह किसी भी परिस्थिति में ?kcjkrk नहीं है लेकिन जो शख्स खुद सुरक्षित महसूस नहीं करता वह हमेशा डरा रहता है और किसी एक्सपर्ट को अपने पास आने नहीं देता। उन्होंने कहा कि मोदी अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। शौरी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी की ही तरह महाराष्ट्र]हरियाणा]उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी सत्ता को अपने केंद्र में रखा हुआ है। मोदी सरकार ने सिर्फ अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा नौकरियां पैदा करने का आंकड़ा दिया है। लेकिन]हमें इस पर आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए। झूठ सरकार की पहचान बन चुका है।

 
         
 
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आज कहां हैं ऐसे चिंताराम मास्टर साहब या भीम सिंह हेडमास्टर साहब। शिक्षा देना उनका आँार्म ही नहीं जीवन था। उस समय छोटी सी तनख्वा थी। बिजली] पानी] टेलीफोन] सड़क कोई सुविआँाा नहीं थी] एक

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