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vad 26 16-12-2017
 
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आवरण&कथा&1
 
सरकारी एजेंहिसयां भी पीछे नहीं

  • आकाश नागर

प्रदेश में माफिया ही नहीं] बल्कि सरकारी निर्माण एजेंसियां तक अवैध खनन में पीछे नहीं रही हैं। शासन-प्रशासन तक माफिया की पकड़ बताती है कि प्रदेश में सत्ता बदली मगर अवैध खनन में लिप्त चेहरे वही हैं। अवैध खनन पर दबदबे की जंग को लेकर कई बार खूनी गैंगवार तक हो जाती है

 

प्रदेश में जब हरीश रावत मुख्यमंत्री थे तो तब कहा जाता था कि गढ़वाल की अपेक्षा कुमाऊं में अवैध खनन ज्यादा होता है। रावत पर तब खनन माफियाओं को संरक्षण देने के भी आरोप लगते थे। अब पिछले सात माह से प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार है। लेकिन अभी भी अवैध खनन पर कोई लगाम नहीं है। सूबे के सिर्फ हुकुमरान बदले और अवैध खनन का कारोबार और उससे जुड़े लोग ज्यों के त्यों हैं। पहले  अवैध खनन के कारोबर पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हालात यह है कि कई जगह खनन बंद होने के बावजूद चीर नदियों का सीना चाीर कर लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं।

सीमांत क्षेत्र धारचूला- मुनस्यारी से नजर दौड़ाएं तो कहा जा रहा है प्रदेश में सत्त बदली तो अवैध खनन की बागडोर भाजपा के स्थानीय नेताओं के हाथों में आ गई है। जिनके निर्देशों पर एक तरफ धारचूला क्षेत्र की काली नदी तो दूसरी तरफ मुनस्यारी क्षेत्र की गोरी नदी पर रात में जेसीबी के जरिए अवैध खनन किया जा रहा है। बताते हैं कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आपदा क्षेत्र तक द्वारा अवैध खनन कराया जा रहा है। नेता ने अवैध रूप से पट्टे तक आवंटित किए हुए हैं। जिससे छिरकिला डैम तक खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। इसके अलावा स्थानीय विधायक हरीश धामी के गांव मदकोट में भी अवैध खनन जोरो पर है। अपने गांव में हो रहे अवैध खनन पर रोकथाम करने के लिए खुद स्थानीय विधायक हरीश धामी पहल कर चुके हैं। हालांकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खुद धारचूला के विधायक हरीश धामी पर भी अवैध खनन के आरोप लगे थे। तब जौलजीबी मेला स्थल में अवैध खनन करके भरान किया गया था। काली नदी में विधायक के एक खास ने अपनी जेसीबी उतार दी थी। अवैध खनन से काली नदी का रुख नेपाल के बजाए भारत की ओर हो गया था। 

जौलजीबी में अवैध खनन की कमान फिलहाल भाजपा से जुड़े एक ठेकेदार के हाथों में बताई जाती है। यह ठेकेदार पूर्व में कांग्रेस से जुड़े नेता के खास रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी के नेता ने कांग्रेस से भाजपा में पलटी मार दी थी। देवीबगड़ में गोरी नदी में खनन सामग्री की चोरी दिन दहाड़े हो रही है। जबकि यहां १०० मीटर दूर ही पुलिस चौकी स्थापित है। पुलिस की भी रेत चोरों से मिलीभगत बताई जा रही है। बलुवाकोट के पूर्व प्रधान हरिराम आर्य के अनुसार बलुवाकोट से पईयापोड़ी तक सड़क पर डामरीकरण कार्य चल रहा है। जहां ठेकेदार द्घटगाड़ नदी से पत्थर चोरी करके सड़क बननाने में प्रयोग कर रहा है। इसकी शिकायत कई बार प्रशासन से की गई। लेकिन इस चोरी पर लगाम नहीं लगी है। आर्य के अनुसार सड़क निर्माण कंपनियां नदी से ही नहीं बल्कि पहाड़ों को तोड़कर भी अवैध खनन कर प्रदेश को लाखों का राजस्व नुकसान कर रही हैं। उधर बंगापानी में भी अवैध खनन की शिकायत सामने आ रही है। यहां ग्रीफ के द्वारा सड़क निर्माण किया जा रहा है। ग्रीफ कंपनी ने गोरी नदी में कोई पट्टा भी नहीं कराया है। बावजूद इसके गाड़ियां दिन रात रेत और रोड़ी उठाकर सड़क निर्माण में जुटी हुई हैं। पिथौरागढ़ के थल में धोलड़ा और फ्लेटी में अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है तो यहीं के ?kkV और झूला?kkV में भी खनन माफिया बेखौफ है।

टनकपुर में खनन क्षेत्र ?kkV पर प्रतिबंद्ध होने के बावजूद दर्जनों डंपर अवैध रूप से संचलित हो रहे हैं। वह रात के अंधेरे में अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। इसके साथ ही चंपावत में खुद पीडब्ल्यूडी के द्वारा सड़क निर्माण में अवैध खनन की खबरें मिल रही हैं। करीब ७० किलोमीटर लंबे टनकपुर से चंपावत मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की अवैध कार्यवाही की शिकायत कई बार की जा चुकी है। पूर्व में जब चंपावत के विधायक हेमेश खर्कवाल थे तब भी पीडब्ल्यूडी द्वारा अवैध खनन किया जाता था। वर्तमान में भाजपा के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने शुरूआत में इस अवैध काम पर लगाम लगा दी थी। लेकिन सुनने में आ रहा है कि फिर से पीडब्ल्यूडी सड़क निर्माण सामग्री में पत्थरों को रोड कटिंग के बहाने से अवैध तरीके से अपने उपयोग में ला रहा है। पीडब्ल्यूडी पर यह भी आरोप है कि वह पत्थरों को टनकपुर चंपावत मार्ग निर्माण में तो प्रयोग कर ही रहा है लेकिन इसके अलावा अन्य कई संपर्क मार्ग पर भी यहीं से पत्थर लाया जा रहा है। स्थानीय पत्रकार नवीन देऊपा के अनुसार पूरे राज्य में पहाड़ों को तोड़कर आस-पास में ही सड़कों के निर्माण में लगा दिया जाता है। जब इसकी शिकायत की जाती है तो कह दिया जाता है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पहाड़ काटना जरूरी था। याद रहे कि पहाड़ काटने पर निकलने वाले पत्थर को सड़कों में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इसके लिए ज्यादातर सड़कों का टेंडर किए जाते समय हल्द्वानी की गोला नदी का पत्थर प्रयोग करने की शर्त का उल्लेखित होता है। देऊबा बताते हैं कि पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में कई सड़क निर्माण कंपनियों द्वारा सड़कों को काटकर उनका पत्थर नीचे खाई में लुढ़का दिया जाता है। जो नियम विरुद्ध है। इसके लिए बाकायदा एक डंपिंग जोन बनाया जाता है। लेकिन डंपिंग जोन तक जाने की जहमत कोई नहीं उठाता है। इसके अलावा रामगंगा नदी में भी अवैध खनन जारी है। बताया जा रहा है कि मासी में एक पूर्व विधायक के  संरक्षा में चल रहे स्टोन क्रशर के लिए पत्थर रामगंगा से चुराया जा रहा है। मासी से चौखुटिया तक सड़क निर्माण में जितनी भी रोड़ी डाली गई है वह रामगंगा से अवैध तरीके से निकाली गई है। इस बाबत सड़क निर्माण कंपनी पर कई बार जुर्माना भी लग चुका है।

अवैध खनन का खेल पहाड़ों पर ही नहीं] बल्कि मैदान में भी जोरों पर चल रहा है। गोला और कोसी नदी पर अवैध खनन के कारोबार में गैंगवार चलती रहती है। जिसमें अब तक दर्जनों लोग जान तक गंवा चुके हैं। फिलहाल कोसी नदी पर प्रदेश में मंत्री के एक खास का कब्जा बताया जा रहा है। पट्टी सुलतानपुर और बाजपुर में मंत्री के खासमखास एवं जिला पंचायत सदस्य कुलविंदर सिंह किंदा का एक छत्र राज है। कहा जाता है कि दबंगई के बलबूते कुल विंदर सिंह किंदा ने अपने सैड़कों डंपर नदी से अवैध खनन में उतार रखे हैं। किंदा पर अवैध खनन का ही नहीं बल्कि हरियाणा से चोरी हुए डंफरों को अपने संरक्षण में चलाने के भी आरोप लग रहे हैं। पिछले दिनों बाजपुर पुलिस ने ऐसे डंपर पकड़े हैं जो हरियाणा से चोरी किए गए थे। चोरी किए हुए डंपर वर्षों से रेत की ढुलाई में लगे थे। रामनगर में गत दो वर्ष पूर्व खनन माफियाओं द्वारा उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी और वरिष्ठ पत्रकार मुनीश कुमार पर कराए गए हमले को अभी कोई भूला नहीं है। इसके विरोध में लंबा आंदोलन चला था। रामनगर की जनता सड़कों पर उतर गई थी। तब कहा जाने लगा था अब अवैध खनन पर लगाम लगा जाएगी लेकिन कोसी पर खनन माफियाओं का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यहां के छोई में अवैध खनन का खुला खेल चल रहा है। कोसी में लगे दर्जनों डंपरों और वाहनों को देखकर एकबारगी लगता है कि इस नदी का जैसे माफियाओं द्वारा चीरहरण किया जा रहा है। तराई में कोसी ही नहीं बल्कि सितारगंज और शक्तिफार्म में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का काम हो रहा है। यहां की कैलाश नदी पर उकरोली में और साधुनगर में जबकि शक्ति फार्म में सुखी नदी के रेत को अवैध रूप से निकाल कर बाढ़ की आशंका को बलवती कर दिया जाता है। इसके अलावा बेगुल नदी में भी रेत चोरी का धंधा खूब फलफूल रहा है। यहां बिना पट्टे कराए ही रेत चोरी कराने में भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं की संलिप्तता बताई जा रही है।

akash@thesundaypost.in

 
         
 
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  • जसपाल नेगी

माफिया खूबसूरत सतपुली घाटी की तबाह कर रहा है। लेकिन स्थानीय प्रशासन dqyd.khZ नींद सोया हुआ है

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