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vad 26 16-12-2017
 
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सरगोशियां
 
la?k भरोसे भाजपा

गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भले ही डेढ़ सौ सीटें जीतने का दावा करे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भाजपा यदि वर्तमान ११५ सीटें फिर से जीत ले तो बड़ी बात होगी। कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत इन चुनावों के लिए झोंक दी है। उसे तीन ऐसे युवा नेताओं का साथ मिल गया है जो अपनी&अपनी जातियों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। अल्पेश ठाकोर] जीग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल का कांग्रेस के पक्ष में बोलना भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है। ऐसे में हमेशा पार्टी का संकटमोचक बन उभरने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k ने गुजरात में अपने प्रचारकों को पूरे दम&खम के साथ हिन्दुत्व कार्ड खेलने के निर्देश दे दिए हैं। खबर है कि स्वयं la?k प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को सामने रख भाजपा की गुजरात में राह आसान करने का निर्णय लिया है। भाजपा की तरफ से पचास केंद्रीय मंत्री चुनाव प्रचार में झौंके गए हैं। अन्य राज्यों के बड़े नेताओं और मुख्यमंत्रियों] पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी गुजरात भेजा जा रहा है। la?k के प्रचारकों के सक्रिय होने से निश्चित ही भाजपा को बड़ी राहत मिल सकती है। देखना यह है कि क्या वाकई हिन्दुत्व कार्ड कोई करिश्मा कर पाएगा या फिर विकास पागल हो गया उस पर भारी पड़ेगा।

पलटीमार पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार हवाओं का रुख भांप राजनीति करने वालों में हैं। कभी सोनिया गांधी के विदेशी मूल को मुद्दा बना कांग्रेस छोड़ने वाले पवार ने यूपीए की सरकार में मंत्री बनने से परहेज नहीं किया। बाद में वे मोदी लहर को भांपा भाजपा की तरफ झुक गए। एनसीपी के बाहरी समर्थन से महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस सरकार बनी। जिसका लाभ पवार के भतीजे अजीत पवार को मिला। उनके कथित भ्रष्टाचार पर फडनवीस सरकार खामोश है। अब एक बार फिर पवार हवा का बदलता रुख भांप कांग्रेस की तरफ झुकते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी से परहेज करने वाले पवार इन दिनों राहुल की तारीफे करते सुने गए हैं। बकौल पवार राहुल गांधी को अब देश भर में लोग सराह रहे हैं। जिससे पीएम मोदी तक को डर लगने लगा है। पवार ने बोफोर्स मामले में भी गांधी परिवार को बेकसूर बताया। पवार साहब के इन बयानों से राजनीतिक पंडित आकलन लगा रहे हैं कि भाजपा की हवा अब बिगड़ रही है जिसका असर पहले गुजरात फिर २०१९ के आम चुनावों में पड़ सकता है।

कांग्रेसियों का वाक्‌ युद्ध

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी भले ही केंद्र से लेकर राज्यों तक में लगातार हार का सामना कर अपने अस्तित्व का गंभीर संकट झेल रही हो] बड़े नेताओं का अहंकार द्घटने और आपसी लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही। पिछले दिनों कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और भूपिंदर हुड्डा के बीच ट्वीटर संदेशों से इन दोनों नेताओं के आपसी संबंधों की कड़वाहट देखने को मिली। हुआ यूं कि कांग्रेसम् के छात्र संगठन एनएसयूआई के सचिव सौरभ द्विवेदी ने एक ट्वीट किया। 'आज हुड्डा सर ने एक नया नारा दिया 'यूं एड आई&एनएसयूआई'। इस ट्वीट पर मनीष ितवारी ने लिख मारा'&'यह पूराना नारा है। १९८५ में जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष ने दिया था। अब यह व्यक्ति तेलगू देशम पार्टी में है और इनकी पत्नी देश की रक्षा मंत्री हैं।' तिवारी का इशारा निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर की तरफ था। बहरहाल उनके इस ट्वीट से दोनों नेताओं के संबंधों की पोल खुल गई।

मुख्यमंत्री से बढ़ती दूरी

कांग्रेस छोड़ भाजपा जाने वाले नेताओं में से एक सतपाल महाराज इन दिनों प्रदेश सरकार में मंत्री होने के बावजूद हाशिए में डाल दिए जाने का दर्द भोग रहे हैं। कारण है सीएम त्रिवेंद्र का उन पर भरोसा न करना। सीएम सरकारी कार्यक्रमों में पर्यटन मंत्री को न्यौता तक नहीं भेज रहे हैं तो महाराज ने पिछले दिनों सरकारी खर्चे पर विज्ञापन प्रकाशित कराए जिसमें सीएम की तस्वीर नहीं लगाई गई थी। सीएम ने इसका जवाब पीएम मोदी के केदारनाथ दौरे में सतपाल महाराज का बहिष्कार कर दिया। इतना ही नहीं सीएम सतपाल महाराज के भाई भोले  महारजा द्वारा निर्मित अस्पताल के mn`?kkVu कार्यक्रम में भी शामिल हुए। भोले महाराज और सतपाल महाराज के रिश्ते बेहद तल्ख हैं। सीएम के अतिरिक्त भाजपा के बड़े नेताओं ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया लेकिन महाराज को उनके भाई ने इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया। खबर है कि सरकार में मंत्री होते हुए भी सीएम द्वारा अपनी उपेक्षा से खिन्न महाराज जल्द ही कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठा सकते हैं।


 
         
 
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दिनेश पंत

न्यायालय के आदेश पर अवैध खनन निरोधक सतर्कता ईकाई का गठन तो हुआ] लेकिन नदियों] जंगलों और गाड-गधेरों को बेतरतीबी से उजाड़ने का सिलसिला कभी रुका नहीं। अकेले

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