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सुर्खियां जो नहीं बनीं
 
पुरानी कार से अनोखी बाइक

भारतीय जुगाड़ लगाने में आगे होते हैं। कई कई बार जुगाड़ इतने सफल हो जाते हैं कि मिसाल बन जाते हैं। ऐसा ही जुगाड़ से सुपर बाइक बनाने का अनोखा काम सूरत के रहने वाले रुज्बे गावमास्टर ने किया है। सबसे बड़ी बात तो यह कि इस जुगाड़ की बदौलत उन्हें गोवा में हुए इंडियन बाइक वीक में बेस्ट इनोवेटिव बाइक का अवॉर्ड मिला है। ऑटो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे रुज्बे के इस कारनामे से हर कोई हैरान है। उन्होंने महज १३ हजार रुपए में अपने पिता के दोस्त से पुरानी मारुति कार खरीदी फिर इसके इंजन का इस्तेमाल करके ८०० किमी सीसी की बाइक बना डाली। इस बाइक की स्पीड ६५० किमी प्रति द्घंटा है] जो किसी भी भारतीय ब्रांडेड बाइक से कहीं ज्यादा है। इस बाइक की खास बात यह है कि इसमें फ्रंट गेयर के अलावा बैक गेयर भी है। रुज्बे को इस शानदार बाइक बनाने के लिए दो साल का वक्त लगा और इसमें करीब एक लाख रुपए खर्चा आया। इस बाइक के डिजाइन से लेकर वेल्डिंग तक खुद रुज्बे ने ही की है। इसके पहले भी रुज्बे इस तरह के इनोवेशन करते रहे हैं। उन्हें बाइक्स का शौक बचपन से ही है। ऑटोमोबाइल डिजाइनिंग क्षेत्र में रुज्बे आगे अपना करियर बनाना चाहते हैं। इसके पहले भी इस तरह की बाइक्स बना चुके हैं और उनका नाम भी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

 

दस की उम्र में दसवीं की परीक्षा

आधुनिक सुख सुविधाओं से दूर रहकर अपनी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। हल्द्वानी की १० साल की बेटी ने इस कहावत को सही साबित कर दिया है। १० साल की ग्रेही आज १०वीं क्लास के सवाल हल कर रही हैं। वह बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहती हैं। खास बात ये है कि पढ़ाई के दौरान कोई दिक्कत होती है तो वो किसी की मदद नहीं लेती] बल्कि मेडिटेशन यानी साधना के जरिए उस परेशानी से बाहर निकल जाती हैं। वह चौथी क्लास तक सकूल गईं लेकिन अब द्घर पर ही सेल्फ स्टडी कर सीबीएसई बोर्ड की १०वीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। ग्रेही का मानना है कि जो कुछ उसे स्कूल में पढ़ाया जाता है] वो उसने पहले ही पढ़ लिया है। ग्रेही का भाई गार्थ भी दूसरी क्लास में पढ़ता है] जो भी बहुत मेद्घावी है। गार्थ भी अभी दूसरी क्लास में रहकर छ्ठी क्लास की मैथमेटिक्स बिना किसी हिचकिचाहट के हल कर देता है। गार्थ और ग्रेही कभी टीवी नहीं देखते] कभी खिलौनों से नहीं खेलते] बल्कि उन्हें आउटडोर गेम पसंद हैं। दोनों बच्चे नियमित रूप से मेडिटेशन यानी साधना करते हैं। ग्रेही के पिता बताते हैं कि उन्होंने ध्यान के लिए नौकरी छोड़ दी और बच्चो के होश संभालने के बाद उन्हें भी नियमित ध्यान कराया] जिसका परिणाम यह है कि दोनों बच्चो की प्रतिभा आम बच्चों से कई गुना आगे है। ग्रेही के पिता दिवस के मुताबिक अपनी इस प्रतिभा के जरिए ग्रेही को महज १० साल की उम्र में १०वीं की परीक्षा में बैठाने की तैयारी चल रही है] यदि सीबीएसई के नियम आड़े नहीं आए तो अगले साल ग्रेही १०वीं की परीक्षा में बैठेंगी।

 
         
 
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  • आकाश नागर

प्रदेश पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। लेकिन सरकार आय बढ़ाने के बजाए खर्च बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय आने वाले अतिथियों को रोजाना करीब २३ हजार

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